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22 अप्रैल 2013

Govt likely to convene all-party meet on Food Security Bill

New Delhi, Apr 22. Government is likely to convene an all-party meeting soon on the ambitious Food Security Bill before it is taken up in Parliament. "We are planning to convene an all-party meeting before taking up for further proceedings. It is likely to be held in a day or two," a Minister, who did not want to be identified, told. The National Food Security Bill gives the right to food to around 67 percent of India's 1.2 billion population. The Government's move to hold such a meeting came in the backdrop of opposition parties including the Left demanding that the legislation be sent to the standing committee or a joint select committee of Parliament as their several concerns are not addressed. The Government tried to bring the bill in the first half of Budget session of Parliament, but it did not materialise due to differences. The Cabinet had given its nod to the modified Food Security Bill last month. According to it, about 62 million tonne of foodgrains would be required to implement the bill, while the food subsidy is estimated at Rs 1,24,747 crore at 2013-14 costs, which is Rs 23,800 crore higher than the existing level. The beneficiaries would be decided by state governments, while the criteria to exclude 33 percent of the population would be provided by the Planning Commission. In the original Bill introduced in the Lok Sabha in December 2011, the Centre had proposed 7 kg of rice or wheat or millet a month for priority category at Rs 3, Rs 2 and Re 1 per kg respectively, while at least 3 kg per person per month for general households at 50 percent of the support price.

सोने की कीमतों में अगले साल ही थमेगी गिरावट!

22 मार्च के बाद से सोने की कीमतों में 15 फीसदी की गिरावट आ चुकी है और अब यह 1350 डॉलर रह गया है मैंने 24 मार्च को सोने की कीमतों में गिरावट की संभावना के बारे में लिखा था। तब सोना न्यू यॉर्क में करीब 1600 डॉलर प्रति औंस पर था। 22 मार्च के बाद से ही सोने की कीमतों में करीब 15 फीसदी की गिरावट आ चुकी है और अब यह 1350 डॉलर रह गया है। सोने की कीमतों में अगले साल ही थमेगी गिरावट! 22 मार्च के बाद से सोने की कीमतों में 15 फीसदी की गिरावट आ चुकी है और अब यह 1350 डॉलर रह गया है देवांग्शु दत्ता / मुंबई April 21, 2013 Ads by Google Commodity Market : Trade in Gold, Silver &Agricultural Products.Open Commodity A/C ! www.angelbroking.com/ मैंने 24 मार्च को सोने की कीमतों में गिरावट की संभावना के बारे में लिखा था। तब सोना न्यू यॉर्क में करीब 1600 डॉलर प्रति औंस पर था। 22 मार्च के बाद से ही सोने की कीमतों में करीब 15 फीसदी की गिरावट आ चुकी है और अब यह 1350 डॉलर रह गया है। संबंधित खबरें गोल्ड लोन कंपनियों की चमक घटी इस गिरावट के बाद भी भारतीयों के लिए सोना बेचना मनोवैज्ञानिक तौर पर मुश्किल है। दरअसल सोने से भारतीयों का परंपरागत जुड़ाव है। साथ ही पिछले 10 सालों से सोने में तेजी बरकरार है। सोने का भाव 2002 में 300 डॉलर प्रति औंस था जो 2012 में 1900 डॉलर पर पहुंच गया। तकनीकी तौर पर बात करें तो सोने की कीमत 1900 डॉलर से 1600 डॉलर पर आने से यह साफ संकेत नहीं मिलते हैं कि तेजी का दौर थम चुका है और सोने की कीमतें अब उलटी चल रही हैं। या फिर यह कि कीमतों में तेज बढ़ोतरी के बाद यह महज मुनाफवसूली का दौर है। मगर पिछले 15 सत्रों में सोने की कीमतें जिस तरह से लुढ़की हैं उससे संकेत मिलते हैं कि सोने में तेजी अब वास्तव में पूरी हो चुकी है। जब तक मांग और आपूर्ति में बड़ा असंतुलन न आए या फिर बुनियादी कारकों में कोई खास बदलाव न आए तब तक किसी जिंस में 25 फीसदी से अधिक की गिरावट नहीं आती है। महज इस आशंका से सोने में तेज गिरावट आ गई कि साइप्रस 14 टन सोना बेचेगा। यह काफी कम है। न्यू यॉर्क और लंदन दोनों मिलकर रोजाना 300 टन से ऊपर सोने का कारोबार करते हैं। यह तो तब है जब वे मध्य पूर्व और एशिया से किए गए कारोबार को इसमें शामिल न करें। आम दिनों में तो 14 टन की आपूर्ति पर किसी का ध्यान भी नहीं गया होता। डर की दूसरी वजह संस्थागत और हेज फंडों के रवैये में बदलाव है। जॉर्ज सोरोस ने सोने में अपना निवेश कम कर दिया है और ऐलानिया कह चुके हैं कि सोने से उनका विश्वास उठचुका है। कई संस्थागत कंपनियां सोने में गिरावट की आशंका जता चुकी हैं। ऐसी खबरें फैलाई जा रही हैं कि केंद्रीय बैंक भी सोने को बेचने की तैयारी कर रहे हैं। बुनियाद के बारे में सोना महंगाई और मुद्रा में कमजोरी से मुकाबले का एक जरिया है। अमेरिका में महंगाई और घट सकती है अगर फेडरल रिजर्व राहत पैकेज में कमी लाए। यूरोप में भी महंगाई कम है, चीन में महंगाई घट रही है जापान अपस्फीति से बाहर निकलने की कोशिश कर रहा है। भारत में भी थोक महंगाई में कमी आ रही है। महंगाई घटने का मतलब है कि सोने की कीमतों में गिरावट का दबाव, मगर मुद्रा की कमजोरी इसे संतुलित कर सकती है क्योंकि मुद्रा में कमजोरी साफ तौर पर नजर आ रही है। यूरोप अब भी संकट में है और साइप्रस इसका नया उदाहरण है। जापान ने केंद्रीय बैंक के बही खाते को दोगुना कर के बड़ा जुआ खेला है क्योंकि यह चाल पूरी तरह से उलटी भी पड़ सकती है क्योंकि जापान का कर्ज जीडीपी का 250 फीसदी है। अमेरिकी डॉलर मजबूत होने की सिर्फ एक ही वजह है कि बाकी सभी मुद्राओं में कमजोरी है। कीमतों में गिरावट की एक वजह सटोरियों का अपने नुकसान को कम करने की कवायद भी है। जो भी हो, मगर सोने की कीमतों में गिरावट अगले साल ही खत्म होने की संभावना नजर आती है। हालांकि अगर यहां से सोने के भाव चढ़ते हैं तो उनकी वजह इनमें से एक होगी: महंगाई में बढ़ोतरी, मुद्रा को लेकर और डर, युद्घ, भूकंप या आतंकवादी हमला जैसी कोई त्रासदी। सोने का गिरता भाव भारत के चालू खाते के घाटे के लिए अच्छा है। ऊर्जा के बाद सोने का ही सबसे अधिक आयात होता है। सोने में भारी गिरावट के कारण भारत में सोने के खरीदार भी डरे हुए हैं। सोना दशकों तक 240 से 400 डॉलर के बीच कारोबार करता रहा है। अगर वैश्विक अर्थव्यवस्था में पूर्ण बदलाव आता है तो अगले दो से तीन सालों में सोना गिरकर वापस इसी स्तर पर आ सकता है। खतरनाक बात यह है कि भारतीय घरों में 22,000 से 25,000 टन सोना है (रिजर्व बैंक के पास करीब 550 टन सोना)। अगर सोने के भाव में गिरावट आती है तो सोने में किया निवेश भी औंधे मुंह गिर जाएगा। इससे जिन लोगों ने सोना खरीद रखा है उनकी संपत्ति में अच्छी खासी गिरावट आ सकती है। अगर सोने की कीमतों में भारी गिरावट आती है तो बैंकों के लिए भी समस्या हो सकती है। आईसीआईसीआई बैंक और एसबीआई पर खासतौर पर इसका असर पड़ सकता है जो सोने के बदले अच्छा खासा कर्ज देते रहे हैं। जिन आभूषण निर्माताओं ने ऊंची कीमत पर सोना खरीद कर रखा है वे भी संकट में फंस सकते हैं।भारत में भौतिक सोना और गोल्ड फ्यूचर्स को लेकर भी खासी असमानता है। भौतिक सोना 5 से 6 फीसदी महंगा बिक रहा है जिससे पता चलता है कि भारतीय अब तक सोने में निवेश को लेकर सजग नहीं हुए हैं। (BS Hindi)

इस हफ्ते भी सोने में सुस्ती के आसार

मददगार फंडामेंटल न होने से इस सप्ताह सोना सीमित दायरे में कारोबार करेगा। डॉलर के मुकाबले रुपये के मजबूत होने की उम्मीदें इसमें तेजी थाम सकती हैं। पिछले सप्ताह सर्राफा में काफी उतार-चढ़ाव रहा। सप्ताह के पूर्वाद्ध में इसमें भारी गिरावट दर्ज की गई, लेकिन उतराद्र्ध में यह मामूली सुधरा है। बुधवार को हाजिर बाजार में सोना गिरकर 25,680 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। इसमें पहले तीन दिनों में 11 फीसदी से ज्यादा गिरावट रही। पिछले 12 वर्षों के दौरान इतनी कम अवधि में यह सबसे तेज गिरावट थी। लेकिन निचले स्तर पर धातु को हाजिर खरीदारों और स्टॉकिस्ट का भारी समर्थन मिला। इसके चलते शनिवार को मुबंई के जवेरी बाजार में सोना 26,260 रुपये पर पहुंच गया। पीली धातु पिछले साल 32,500 रुपये के अपने सर्वोच्च स्तर से 25 फीसदी गिर चुकी है। मुंबई की एक ब्रोकिंग कंपनी ऐंजल ब्रोकिंग के निदेशक (जिंस और मुद्रा) नवीन माथुर ने कहा, 'पिछले सप्ताह के अंत से मददगार तत्व गायब होने लगे थे और यह रुझान इस हफ्ते भी जारी रह सकता है। साइप्रस के 14 टन सोना बेचने की चिंता के बाद यूरो जोन अर्थव्यवस्थाओं पर ज्यादा असर नहीं पड़ा है। अपनी अर्थव्यवस्थाओं को दिवालिया होने से बचाने के लिए अन्य यूरो जोन देश भी यही रास्ता अपना सकते हैं। (BS Hindi)

निर्यातकों की मांग से हल्दी में फिर तेजी के आसार

विदेशी बाजार रमजान से पहले मई-जून में खाड़ी देशों की मांग निकलेगी इससे हल्दी की मौजूदा कीमतों में तेजी आने की संभावना अंतरराष्ट्रीय बाजार में हल्दी के दाम 3.86 डॉलर प्रति किलो पिछले साल इन दिनों हल्दी के भाव थे 3.53 डॉलर प्रति किलो पैदावार कम होने से स्टॉकिस्ट कम भाव पर बिक्री को तैयार नहीं चालू सीजन में हल्दी की पैदावार और स्टॉक में कमी रमजान के त्यौहार को देखते हुए हल्दी में निर्यातकों की मांग बढऩे की संभावना है, जिससे इसकी मौजूदा कीमतों में फिर तेजी आ सकती है। निवेशकों की मुनाफावसूली से वायदा बाजार में शनिवार को जून महीने के वायदा अनुबंध में हल्दी की कीमतों में 3.25 फीसदी की गिरावट आकर भाव 6,640 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुए। आदित्य ट्रेडिंग कंपनी के प्रबंधक एच पोद्दार ने बताया कि रमजान के त्यौहार के कारण मई-जून में खाड़ी देशों की निर्यात मांग में तेजी आयेगी, जिससे हल्दी की मौजूदा कीमतों में तेजी आने की संभावना है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में हल्दी के दाम 3.86 डॉलर प्रति किलो है, जो पिछले साल की समान अवधि के 3.53 डॉलर प्रति किलो से ज्यादा है। उन्होंने बताया कि चालू सीजन में हल्दी की पैदावार में कमी आई है तथा स्टॉकिस्ट नीचे भाव में बिकवाल नहीं हैं। ज्योति ट्रेडिंग कंपनी के प्रबंधक एस. सी. गुप्ता ने बताया कि जून-जुलाई में हल्दी की बुवाई शुरू हो जाती है, इसलिए चालू खरीफ में मानसून की सक्रियता पर हल्दी की तेजी निर्भर करेगी। उत्पादक मंडियों में इस समय दैनिक आवक करीब 40,000 बोरी (एक बोरी-70 किलो) की हो रही है तथा चालू सीजन में हल्दी की पैदावार घटकर 50 लाख बोरी ही होने का अनुमान है जो पिछले साल के 85 लाख बोरी से काफी कम है। हालांकि पिछले साल का करीब 20 से 25 लाख बोरी का हल्दी का बकाया स्टॉक भी बचा हुआ है। अत: चालू सीजन में कुल उपलब्धता करीब 60-65 लाख बोरी की बैठेगी जबकि सालाना खपत लगभग 60 लाख बोरी की होती है। मनसाराम योगेश कुमार के प्रबंधक पूनमचंद गुप्ता ने बताया कि उत्पादक मंडियों में हल्दी का भाव 7,000 से 9,000 रुपये प्रति क्विंटल चल रहा है। मई-जून में निर्यातकों की मांग तो बढ़ेगी ही, साथ में घरेलू मसाला निर्माताओं की मांग भी बढ़ेगी, जिससे घरेलू बाजार में हल्दी की कीमतों में 10 से 12 फीसदी की तेजी आने की संभावना है। चालू सीजन में इरोड मंडी में हल्दी का करीब 25 लाख बोरी का स्टॉक हो चुका है। एनसीडीईएक्स पर जून महीने के वायदा अनुबंध में शनिवार को हल्दी का भाव 6,900 रुपये प्रति क्विंटल पर खुला तथा निवेशकों की बिकवाली आने से 3.25 फीसदी की गिरावट आकर भाव 6,660 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ। (Business bhaskar)

बेस प्राइस पर गेहूं निर्यात संभव : एफसीआई

प्राइवेट निर्यातकों ने उठाई है बेस प्राइस घटाने की मांग निर्यात के लिए सरकारी गेहूं के मूल्य में कमी करने की व्यापारियों की मांग पर सरकारी नोडल एजेंसी भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) ने कहा कि वैश्विक स्तर पर गेहूं के दाम फिर से सुधरने लगे हैं। इस वजह से मौजूदा रिजर्व प्राइस पर ही गेहूं निर्यात की संभावना है। पिछले माह सरकार ने गोदामों से पिछले फसल वर्ष 2011-12 का 50 लाख टन गेहूं प्राइवेट व्यापारियों के जरिये निर्यात करने की अनुमति दी थी। निर्यातकों को गेहूं का आवंटन ऑक्शन के जरिये किया जाना है। सरकार ने इसके लिए 274 डॉलर (14840 रुपये) प्रति टन बेस प्राइस तय किया है। निर्यातकों को 12.5 फीसदी स्थानीय टैक्स भी वहन करने होंगे। एफसीआई के अध्यक्ष व प्रबंध निदेशक अमर सिंह ने बताया कि व्यापारी बेस प्राइस घटाने की मांग कर रहे हैं। लेकिन इस समय गेहूं 304-306 डॉलर प्रति टन के भाव पर निर्यात हो रहा है। ऑस्ट्रेलिया का गेहूं 260 डॉलर और अमेरिका का गेहूं 270 डॉलर प्रति टन के भाव पर निर्यात हो रहा है। हमारा गेहूं 300 डॉलर प्रति टन के भाव पर निर्यात हो रहा है। ऐसे में मूल्य घटाने की कोई वजह नहीं है। मौजूदा मूल्य पर ही गेहूं निर्यात होने की पूरी संभाव्यता है। उन्होंने कहा कि पिछले माह गेहूं के मूल्य में वैश्विक स्तर पर भारी गिरावट आई थी। (Business Bhaskar)

अगले मार्च तक 197 लाख टन अतिरिक्त भंडारण क्षमता

आर एस राणा नई दिल्ली | Apr 22, 2013, 01:45AM IST स्कीम - गोदाम निर्माण के लिए निजी उद्यमी गारंटी योजना 67 लाख टन की भंडारण क्षमता तैयार, एफसीआई को 40 लाख टन के गोदाम मिले खाद्यान्न भंडारण की समस्या को दूर करने के लिए सरकार निजी उद्यमी गारंटी योजना (पीईजी) स्कीम के तहत मार्च 2014 तक 197 लाख टन की अतिरिक्त खाद्यान्न भंडारण क्षमता तैयार करेगी। इसमें से 67 लाख टन की भंडारण क्षमता तैयार हो चुकी है, जिसमें से 40 लाख टन की भंडारण क्षमता भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) को सौंपी जा चुकी है जिसका चालू रबी विपणन सीजन में उपयोग किया जाएगा। खाद्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बिजनेस भास्कर को बताया कि देशभर में पीईजी स्कीम के तहत 197 लाख टन की अतिरिक्त खाद्यान्न भंडारण क्षमता तैयार करने की योजना है। 31 मार्च 2013 तक इसमें से 140 लाख टन की निविदा को अंतिम रूप दिया जा चुका है। इसमें से 67 लाख टन की भंडारण क्षमता तैयार हो चुकी है तथा 40 लाख टन की क्षमता एफसीआई को सौंपी जा चुकी है। उन्होंने बताया कि 197 लाख टन में 20 लाख टन की अतिरिक्त भंडारण क्षमता साइलो सिस्टम के तहत बनाई जाएगी। उन्होंने बताया कि पीईजी स्कीम के तहत पंजाब में 49.99 लाख टन की अतिरिक्त भंडारण क्षमता तैयार की जानी है, जिसमें से 31 मार्च 2013 तक 33 लाख टन तैयार हो चुकी है। इसी तरह से हरियाणा में 40.06 लाख टन की अतिरिक्त भंडारण क्षमता तैयार की जानी है, जिसमें से 13 लाख टन तैयार हो चुकी है। इसके तहत मध्य प्रदेश में 23.87 लाख टन की अतिरिक्त भंडारण क्षमता तैयार की जाएगी, जिसमें से 31 मार्च 2013 तक 1.42 टन की भंडारण क्षमता तैयार हो चुकी है। राजस्थान में पीईजी स्कीम के तहत 2.50 लाख टन की अतिरिक्त भंडारण क्षमता तैयार करने की योजना है, इसमें से 53,000 टन की भंडारण क्षमता तैयार की जा चुकी है। छत्तीसगढ़ में इस स्कीम के तहत 5.42 लाख टन की अतिरिक्त भंडारण क्षमता तैयार की जानी है, जिसमें से 2.22 लाख टन की भंडारण क्षमता तैयार हो चुकी है। अन्य राज्यों कर्नाटक में 1.51 लाख टन और आंध्र प्रदेश में 1.34 लाख टन की भंडारण क्षमता तैयार हो चुकी है। उन्होंने बताया कि 197 लाख टन की अतिरिक्त खाद्यान्न भंडारण क्षमता को मार्च 2014 तक तैयार करने का लक्ष्य तय किया गया है। इस समय केंद्र सरकार और राज्यों को मिलाकर कुल 717 लाख टन खाद्यान्न की भंडारण क्षमता है। अतिरिक्त भंडारण क्षमता तैयार हो जाने के बाद खाद्यान्न भंडारण की समस्या काफी हद तक दूर हो जायेगी (Business Bhaskar....R S Rana)

19 अप्रैल 2013

Ambitious plan drawn up to increase area under rubber in N-E

Guwahati, Apr 19. The Rubber Board has drawn up an ambitious project to increase area under rubber cultivation in the North East by at least 50,000 hectares in the 12th Five Year Plan period. The board is also promoting use of high-yielding crop varieties in the region. Speaking to reporters after the 171th board meeting of the Rubber Board held here today, its Chairman Sheela Thomas said a special project has been prepared and submitted to the Ministry of Commerce and Industry. "The special project report is intended to promote rubber cultivation and increase yield of rubber crop in the North East. The project is intended to undertake action above what is envisaged in the Plan document," Thomas said. She said the Commerce Ministry is currently in discussion with the Ministry for Development of North Eastern Region (DoNER) and other concerned ministries with regard to the special project report. "As per the special project, the target is to expand rubber cultivation to another 50,000 hectares in the North East. Besides, it also provides for use of high-yield crops, recruitment of some specialists and training for farmers to undertake better agriculture practises," Thomas said. Currently, rubber is planted in 1.28 lakh hectares of land in the North East, including 64,480 hectares in Tripura and 38,090 hectares in Assam. However, the productivity of rubber in the region is only 1,200 kg per hectare as compared to 1,841 kg per hectare nationally. The total rubber production in North East was 50,040 metric tonne in 2011-12. Thomas said while Rs 163 crore was spent by the Board during the 11th Plan (2007-12) for rubber in North East, the Rubber Board is looking for a major jump in the 12th Plan.