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12 अप्रैल 2012

एमसीएक्स-एसएक्स मामले में सेबी को मिली मोहलत

पूंजी बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) और एमसीएक्स-एसएक्स के बीच चल रहे विवाद को फिलहाल के लिए उच्चतम न्यायालय ने निपटा दिया है। दरअसल सेबी ने नियमों में संशोधन के लिए अदालत से समय मांगा है। इसके साथ ही सेबी ने एमसीएक्स-एसएक्स को स्टॉक एक्सचेंज का दर्जा देेने के आवेदन पर तीन महीने के भीतर फैसला करने का आश्वासन दिया है।
सेबी की ओर से अटॉर्नी जनरल जी ई वाहनवती ने बताया कि पिछले महीने आए बंबई उच्च न्यायालय के आदेश के बाद बोर्ड बैठक कर नियमों में संशोधन के कुछ फैसले कर चुका है। एमसीएक्स-एसएक्स की याचिका पर सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय ने सेबी को आवेदन पर दोबारा विचार करने के लिए एक महीने का समय दिया था। सेबी ने बंबई उच्च न्यायालय के इस फैसले को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी थी।
न्यायमूर्ति आफताब आलम की अध्यक्षता वाले पीठ के समक्ष वाहनवती ने कहा कि सेबी के अधिनियम 2006 (मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंज में हिस्सेदारी बढ़ाने और सार्वजनिक होल्डिंग बरकरार) यानी एमआईएमपीएस रखने के नियम में संशोधन के लिए एक महीना काफी नहीं है। इसके लिए नियामक को कम से कम तीन महीने का समय चाहिए। इस पर सभी पक्षों ने सहमति जता दी।
सेबी के अनुसार उच्च न्यायालय के फैसले से स्टॉक एक्सचेंज को मान्यता देने से जुड़े दो मसले सामने आए। पहला, प्रतिभूति करार नियमन अधिनियम के तहत पुनर्खरीद करारों की अवैधता और अधिसूचना को उच्च न्यायालय ने अनदेखा कर दिया। इस मामले में मुश्किल भरा दूसरा पहलू यह था कि एमआईएमपीएस के नियम 8 के मुताबिक जिस व्यक्ति को किसी उद्देश्य के लिए एक साथ काम करने वाले समूह का हिस्सा माना जा रहा है क्या उसे यह साबित करना होगा कि उसका और समूह का उद्देश्य एक ही है। सेबी ने कहा कि इन दोनों मसलों पर उच्च न्यायालय का फैसला 'पूरी तरह त्रुटिपूर्ण' है।
वाहनवती ने कहा, 'सेबी जल्द ही नीतिगत फैसलों के अनुसार नियमों में जरूरी संशोधन करना शुरू कर देगा।' एमसीएक्स-एसएक्स की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे ने कहा कि एक्सचेंज नियामक के साथ किसी तरह का विवाद नहीं चाहता है। उन्होंने कहा कि एमसीएक्स-एसएक्स नए नियमों के लागू होने के लिए तीन महीने इंतजार करने के लिए तैयार है और वह इनका पालन करेगा। उच्चतम न्यायालय के आदेश पर एमसीएक्स-एसएक्स ने कहा, 'हमें हमेशा ही नियामकीय और न्यायिक तंत्र पर पूरा भरोसा रहा है। हम भारतीय पूंजी बाजार के विकास के लिए प्रतिबद्घ हैं।' (BS Hindi)

एमसीएक्स-एसएक्स को सुप्रीम कोर्ट ने दी राहत

घटनाक्रम
एमसीएक्स-एसएक्स ने सेबी से बीएसई व एनएसई की तर्ज पर एक इक्विटी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म की शुरुआत करने की इजाजत मांगी
सेबी ने एमसीएक्स-एसएक्स में प्रवर्तकों की हिस्सेदारी पर एतराज जताते हुए उसे यह इजाजत नहीं दी
सेबी के इस फैसले के खिलाफ एमसीएक्स-एसएक्स ने बांबे हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी
हाई कोर्ट ने एमसीएक्स-एसएक्स के हक में फैसला दिया, जिसे सेबी ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी

सुप्रीम कोर्ट ने कमोडिटी एक्सचेंज एमसीएक्स-एसएक्स को राहत देते हुए सेबी की अर्जी को खारिज कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस आफताब आलम व जस्टिस सी. के. प्रसाद की खंडपीठ ने सेबी से कहा है कि वह एमसीएक्स-एसएक्स के आवेदन पर तीन महीनों के भीतर दोबारा विचार करे।हालांकि कोर्ट ने सेबी से कहा है कि बांबे हाई कोर्ट द्वारा फैसला सुनाते वक्त किए गए आकलन से उसे प्रभावित होने की जरूरत नहीं है।

यह पूरा मामला इस तरह है कि एमसीएक्स-एसएक्स ने पूंजी बाजार नियामक सेबी से बांबे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) व नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) की तर्ज पर एक इक्विटी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म की शुरुआत करने की इजाजत मांगी थी।लेकिन सेबी ने एमसीएक्स-एसएक्स में प्रवर्तकों की हिस्सेदारी पर एतराज जताते हुए उसे यह इजाजत नहीं दी।

सेबी के इस फैसले के खिलाफ एमसीएक्स-एसएक्स ने बांबे हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी।वहां फैसला सेबी के खिलाफ आने पर सेबी ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी।

एमसीएक्स-एसएक्स के अधिकृत प्रवक्ता ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि हमें अपने नियामक एवं न्यायिक संस्थान और कानून में पूरा भरोसा है। हम भारतीय पूंजी बाजार के विकास और प्रगति के लिए प्रतिबद्ध हैं क्योंकि इसका अर्थव्यवस्था के संपूर्ण विकास में उल्लेखनीय योगदान रहता है। (Business bhaskar)

11 अप्रैल 2012

मोबाइल पर भी अनिवार्य होगा आईएसआई मार्क

बिजनेस भास्कर नई दिल्ली
मोबाइल फोन हैंडसेट के साथ-साथ अन्य आईटी उत्पादों के लिए भी आईएसआई मार्क अनिवार्य करने जा रही है। भारत में निर्मित आईटी उत्पादों के साथ ही आयातित उत्पादों पर भी आईएसआई मार्क अनिवार्य किए जाने की योजना है। भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) अधिनियम, 1986 में संशोधन कर आईटी उत्पादों के लिए आईएसआई मार्क अनिवार्य बनाने का प्रस्ताव किया गया है। इसमें कंपनियां अपने उत्पादों का स्वयं मूल्यांकन कर सकेंगी। इससे ग्राहकों को बेहतर क्वालिटी के आईटी उत्पाद मिल सकेंगे। उपभोक्ता मामले मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि मोबाइल हैंडसेट और अन्य आईटी उत्पाद जैसे कंप्यूटर, लैपटॉप, प्रिंटर आदि की बिक्री के लिए अभी तक कोई मानक तय नहीं किए गए हैं। ऐसे में कंपनियां आपसी होड़ में सस्ता मोबाइल और अन्य उत्पाद बनाने के लिए सस्ती सामग्री का इस्तेमाल कर लेती है जिससे कई बार उपभोक्ताओं को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। इसीलिए सरकार ने आम उपभोक्ताओं के हितों के लिए मोबाइल और अन्य आईटी उत्पादों पर आईएसआई मार्क अनिवार्य करने की योजना बनाई है। उन्होंने बताया कि भारतीय मानक ब्यूरो अधिनियम, 1986 में संशोधन कर आईटी उत्पादों के लिए आईएसआई मार्क अनिवार्य बनाने का प्रस्ताव किया गया है तथा संसद के चालू बजट सत्र में ही बीआईएस अधिनियम, 1986 संशोधन को पेश किए जाने की संभावना है। घरेलू आईटी कंपनियों के साथ ही आयातकों को भी बीआईएस के पास कंपनी का रजिस्ट्रेशन कराना होगा तथा अपने उत्पादों का स्वयं मूल्यांकन करके आईएसआई मार्क लगाना होगा। कानून बनने के बाद अगर कोई कंपनी इन नियमों का पालन नहीं करेगी तो उसके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसके तहत सजा और दंड का भी प्रावधान होगा। (Business Bhaskar....R S Rana)

फसली बीमा का सबसे ज्यादा लाभ एमपी को

आर.एस. राणा

मौसम आधारित फसल बीमा योजना के तहत वर्ष 2010-11 के दौरान देश में मौसम के कारण खराब हुई फसलों के लिए किसानों को 465 करोड़ रुपये मुआवजे का भुगतान किया जा चुका है। देशभर में करीब 10.6 लाख किसानों को उनकी फसलों के बीमा का लाभ मिला। फसली बीमा के मुआवजे का लाभ सबसे ज्यादा मध्य प्रदेश के किसानों को मिला। इसके अलावा खरीफ 2011 में मध्य प्रदेश के 1.36 लाख किसानों को 247 करोड़ रुपये के बीमा मुआवजे का भुगतान किया गया।

एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कम्पनी ऑफ इंडिया लिमिटेड (एआईसी) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि वर्ष 2010-11 के दौरान मौसम आधारित फसल बीमा योजना के दौरान 577 करोड़ रुपये के क्लेम मंजूर किए गए, जिनमें से 465 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। इनमें सबसे ज्यादा भुगतान मध्य प्रदेश के 5.3 लाख किसानों को 270 करोड़ रुपये और तमिलनाडु के 2.6 लाख किसानों को 226 करोड़ रुपये का मुआवजा मिला।

उन्होंने बताया कि खरीफ 2011 की फसलों को हुए नुकसान और उसके लिए दिए गए मुआवजे की रिपोर्ट मिलने लगी हैं। मध्य प्रदेश के 1.36 लाख किसानों को खरीफ 2011 में करीब 247 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है।

अन्य राज्यों से रिपोर्ट आनी शुरू हो गई है। उसी आधार पर कंपनी ने भुगतान भी शुरू कर दिया है। राज्य सरकारें केंद्र को फसल की कटाई के बाद रिपोर्ट भेजती हैं, उसके आधार पर केंद्र सरकार एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी को आंकड़े उपलब्ध कराती है। जिसके आधार पर नुकसान की गणना कर किसानों को बैंकों के माध्यम से मुआवजा दिया जाता है। योजना में अनाज, दलहन, तिलहन जैसी फसलों के अलावा व्यावसायिक और हॉर्टीकल्चर फसलें भी शामिल हैं।

बीमा के लिए प्रीमियम फसल के अनुमानित मूल्य का 1.5 से 3.5 फीसदी होता है। लघु एवं सीमांत (एक हैक्टेयर या दो हैक्टेयर जोत वाले) किसानों को सरकार की तरफ से प्रीमियम में 10 फीसदी सब्सिडी दी जाती है। जिसका वहन राज्य और केंद्र मिलकर 50-50 फीसदी के आधार पर करती हैं। बैंकों से कर्ज लेने वाले किसानों के लिए फसल बीमा लेना अनिवार्य है, जबकि दूसरे किसानों के लिए यह उनकी मर्जी पर निर्भर करता है।

उन्होंने बताया कि किसानों को रबी फसलों का बीमा बुवाई के एक महीना बाद या 31 दिसंबर, जो भी पहले हो, तक कराना अनिवार्य होता है। इसके अलावा खरीफ फसलों के लिए 31 जुलाई तक बीमा कराना अनिवार्य है। नुकसान का आकलन राज्य स्तर पर होता है। (Business Bhaskar...R S Rana)

पाक को भायी भारत की चाय, निर्यात होगा दोगुना

भारत और पाकिस्तान के बीच समझौतों में सुधार की एक कड़ी और जोड़ते हुए दोनों देशों के चाय संगठनों ने मंगलवार को एक करार पर दस्तखत किए। इसके तहत अगले तीन वर्षों में पाकिस्तान को भारतीय चाय का निर्यात दोगुना किया जाएगा।
सहमति पत्र के मुताबिक पाकिस्तान को भारत की चाय का निर्यात वर्ष 2015 तक बढ़कर 5 करोड़ किलोग्राम हो जाएगा। इस समय निर्यात 2.4 करोड़ किलोग्राम है यानी इसमें 108 फीसदी बढ़ोतरी होगी।
पीटीए के चेयरमैन मोहम्मद हनीफ जानू ने कहा, 'भारत में यह पाकिस्तान टी एसोसिएशन (पीटीए) का चौथा प्रतिनिधिमंडल आया है। हालांकि इसका आगाज 1997 में शुरू हुआ था। इससे पिछला प्रतिनिधिमंडल 2007 में आया था। उस समय हमने चालू वर्ष तक पाकिस्तान को करीब 2.5 करोड़ किलोग्राम चाय के आयात पर सहमति जताई थी और इस आंकड़े को हासिल कर लिया गया है। अब हमें पूरा विश्वास है कि अगले तीन वर्षों में हम 5 करोड़ किलोग्राम चाय का आयात करने में सक्षम होंगे।' जानू 13 सदस्यीय उस चाय प्रतिनिधिमंडल में शामिल थे जो पाकिस्तानी राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी की यात्रा के दौरान आया था। इंडियन टी एसोसिएशन (आईटीए) के चेयरमैन सी एस बेदी ने कहा, 'हम पाकिस्तानी बाजार में डुआर्स और असम सीटीसी चाय भेजना पसंद करेंगे। फिलहाल पाकिस्तान दक्षिण भारतीय चाय का बड़ा उपभोक्ता है।' पाकिस्तान में चाय की कुल खपत करीब 22.5 करोड़ किलोग्राम है, जिसमें से 12 करोड़ किलोग्राम का वैध आयात होता है, जबकि शेष अवैध मार्ग से। पाकिस्तान विश्व का दूसरा सबसे बड़ा चाय आयातक है।
जानू ने कहा, 'कुल आयात में केन्या का योगदान करीब 13.5 करोड़ किलोग्राम और भारत का 2.4 करोड़ किलोग्राम होता है। हम सरकार से चाय पर आयात शुल्क वर्तमान 10 फीसदी से नीचे लाने की मांग कर रहे हैं।' स्रोतों ने कहा कि हालांकि पाकिस्तान में समग्र आयात शुल्क 37 फीसदी है। (BS Hindi)

खाद्य तेल आयात का आघात

रिफाइंड खाद्य तेल के आयात में भारी बढ़ोतरी ने देसी रिफाइनरों ने पिछले कुछ महीनों में अपनी परिचालन क्षमता आधी करने को मजबूर कर दिया है। इससे लाखों दिहाड़ी मजदूरों की रोजी छिन गई है। स्थायी कर्मचारियों को भी इस कारण दिक्कत होने लगी है।
फरवरी 2012 में रिफाइंड खाद्य तेल का आयात करीब-करीब तिगुना होकर 3.04 लाख टन पर पहुंच गया जबकि पिछले साल नवंबर में यह 1.10 लाख टन था। इस तरहं खाद्य तेल के कुल आयात में रिफाइंड तेल की हिस्सेदारी फरवरी में बढ़कर 35 फीसदी हो गई जबकि नवंबर में यह 13 फीसदी थी। रिफाइंड तेल का आयात भारतीय कंपनियों के लिए बेहतर है क्योंकि इंडोनेशियाई सरकार ने इस पर 9 फीसदी आयात शुल्क लगाया है जबकि कच्चे पाम तेल पर 18 फीसदी। भारत में कच्चे पाम तेल पर आयात शुल्क नहीं लगता जबकि रिफाइंड पर 7.5 फीसदी शुल्क लगता है, लेकिन इस शुल्क की वसूली टैरिफ वैल्यू पर होती है जो काफी कम है। ऐसे में रिफाइंड तेल पर प्रभावी शुल्क महज 2.5 फीसदी बैठता है। टैरिफ वैल्यू 7 साल पहले तय की गई थी, जो आज की कीमतों के मुकाबले महज एक तिहाई है। सेंट्रल ऑर्गनाइजेशन फॉर ऑयल इंडस्ट्री ऐंड ट्रेड (सीओओआईटी) के अध्यक्ष सत्यनारायण अग्रवाल ने कहा कि देसी बाजार में प्रसंस्करण और रिफाइनिंग के लिए कच्चे पाम तेल के आयात पर 1000 रुपये प्रति टन का नुकसान हो रहा है। इस कारण देसी रिफाइनर कच्चे तेल का आयात नहीं करना चाहते। वे रिफाइंड तेल का आयात करते हैं और छोटी इकाइयों में इसकी पैकिंग कर देसी बाजार में बेच देते हैं।
चूंकि रिफाइंड खाद्य तेल के प्रसंस्करण की दरकार नहीं होती, लिहाजा यह जिंस थोक व खुदरा बिक्री के लिए सीधे पैक हो जाती है। इसलिए रिफाइंड तेल के बढ़ते आयात से सीधे-सीधे देसी रिफाइनरों की परिचालन क्षमता घट रही है, जिसे भारतीय कॉरपोरेट जगत ने पिछले कई सालों में बड़े निवेश के जरिए स्थापित किया था।
करगिल इंडिया के मुख्य कार्याधिकारी सिराज चौधरी ने कहा कि रिफाइनरी के कामकाज को झटका लगा है क्योंकि रिफाइंड तेल का आयात बढ़ गया है। लेकिन आयातित तेल की पैकिंग के लिए भी उद्योग को बड़ी संख्या में कामगारों की दरकार होती है।
भारतीय आयातकों के लिए रिफाइंड खाद्य तेल की खरीद लाभकारी है क्योंकि कच्चे व रिफाइंड तेल की कीमत का अंतर इंडोनेशिया में घटकर महज 30 डॉलर रह गया है जबकि पहले यह 70-80 डॉलर प्रति टन था।
गोदरेज इंटरनैशनल के निदेशक दोराब मिस्त्री ने कुछ समय पहले अनुमान जताया था कि भारत में घटते उत्पादन और बढ़ती खपत की खाई पाटने के लिए खाद्य तेल का आयात इस साल 94 लाख के नए रिकॉर्ड पर पहुंच जाएगा। भारत में 165 लाख टन खाद्य तेल की मांग का अनुमान है।
सीओओआईटी के चेयरमैन ने इसकेहल के दो रास्ते सुझाए हैं। पहला, सरकार टैरिफ वैल्यू में संशोधन करे, जो सात साल पहले कच्चे पाम तेल के लिए 484 डॉलर प्रति टन तय किया गया था। आज के दौर में कच्चे पाम तेल का भाव करीब 1250 डॉलर प्रति टन है। इससे खाद्य तेल की कीमतों में थोड़ा इजाफा तो होगा, लेकिन देसी रिफाइनरों के हित में यह जरूरी है। (BS Hindi)

जिंस एक्सचेंज में सुगम होगा विदेशी निवेश

काफी ऊहापोह के बाद सरकार ने आखिरकार संशोधित एकीकृत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) नीति को आज जारी कर ही दिया। इसके तहत जिंस एक्सचेंजों में विदेशी संस्थागत निवेश (एफआईआई) नियमों में थोड़ी ढील दी गई है। अब विदेशी संस्थागत निवेशकों को जिंस एक्सचेंजों में निवेश के लिए सरकार से पूर्व अनुमति लेने की जरूरत नहीं होगी। हालांकि एफआईआई निवेश की सीमा को मौजूदा 23 फीसदी पर बरकरार रखा गया है।
औद्योगकि नीति एवं संवद्र्धन विभाग (डीआईपीपी) ने कहा कि एफआईआई निवेश में ढील दी गई है लेकिन जिंस एक्सचेंजों में 26 फीसदी तक एफडीआई के लिए सरकार की मंजूरी लेनी होगी। डीआईपीपी ने कहा, 'नियम में बदलाव के तहत जिंस एक्सचेंजों में विदेशी निवेश नीति को प्रतिभूति बाजार की अन्य इन्फ्रास्ट्रक्चर कंपनियों के समकक्ष लाने का प्रयास किया गया है।' पूर्व प्रावधान के बारे में विशेषज्ञों का मानना था कि विदेशी निवेश संवद्र्धन बोर्ड (एफआईपीबी) से एफआईआई की पूर्व अनुमति लेने का नियम अनावश्यक था।
प्राइसवाटरहाउसकूपर्स के कार्यकारी निदेशक आकाश गुप्ता ने कहा कि पहले के प्रावधान से उन लोगों को बेवजह परेशानी होती थी जो शेयर बेचना चाहते थे। दूसरी ओर, एकल ब्रांड रिटेल में एफडीआई नीति में किसी तरह का बदलाव नहीं किया गया है। और इस बारे में कैबिनेट से पारित प्रस्ताव को ही एकीकृत एफडीआई नीति में शामिल किया गया है। वैश्विक ब्रांडों की ओर से दबाव के बावजूद छोटे मझोले उद्योगों से 30 फीसदी अनिवार्य आपूर्ति के नियम में भी किसी तरह का फेरबदल नहीं किया गया है।
डीआईपीपी ने घटिया मशीनरी के आयात को हतोत्साहित करने के लिए पुराने (सेकंड हैंड) उपकरणों के आयात के बदले में इक्विटी की सुविधा को वापस ले लिया है। केपीएमजी के कार्यकारी निदेशक कृष्ण मल्होत्रा ने कहा, 'यह अच्छी पहल है, क्योंकि पहले पुरानी मशीनरी के आयात को लेकर गुणवत्ता का कोई मानदंड नहीं था।'
डीआईपीपी ने कहा कि एकीकृत एफडीआई परिपत्र को मौजूदा 6 माह की जगह अब सालाना आधार पर जारी किया जाएगा। (BS Hindi)