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10 जून 2026

केंद्र सरकार ने 30 अक्टूबर 26 तक कॉटन पर आयात शुल्क में दी छूट, कीमतों पर दबाव

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने 1 जून 2026 से 31 अक्टूबर, 2026 तक कॉटन के ड्यूटी फ्री आयात की इजाजत दी है। इससे आयातित कॉटन सस्ती हो जाएगी, जिससे घरेलू बाजार में इसकी कीमतों पर दबाव बनेगा।


केंद्र सरकार ने घरेलू टेक्सटाइल उद्योग के लिए कच्चे माल की उपलब्धता को बेहतर बनाने के लिए 1 जून, 2026 से आगामी पांच महीनों के लिए कॉटन आयात पर से सभी कस्टम ड्यूटी में छूट दे दी।

फाइनेंस मिनिस्ट्री ने एक अधिसूचना जारी की, जिसमें आयातित कॉटन पर बेसिक कस्टम ड्यूटी के साथ-साथ एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपमेंट सेस (एआईडीसी) से पूरी छूट दी गई है। यह छूट 30 अक्टूबर, 2026 तक लागू रहेगी।

अधिसूचना में कहा गया है कि केंद्र सरकार, यह मानते हुए कि यह पब्लिक इंटरेस्ट में जरूरी है, देश में आयात होने पर कॉटन को कस्टम टैरिफ एक्ट के तहत उस पर लगने वाली पूरी कस्टम ड्यूटी और पूरे एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपमेंट सेस से छूट देती है।

इस फैसले का मकसद देश के टेक्सटाइल उद्योग के लिए कॉटन की उपलब्धता बढ़ाना है, जो सही सप्लाई और कम इनपुट लागत पक्का करने के उपाय ढूंढ रहा है।

इस कदम से आयातित कॉटन की कीमत कम होने और आने वाले उत्पादन सीजन के दौरान जरूरी कच्चे माल की लगातार सप्लाई पक्की होने की उम्मीद है। यह अस्थायी उपाय सीधे तौर पर स्पिनिंग मिलों और गारमेंट मैन्युफैक्चरिंग को मदद करेगा, जो बढ़ती घरेलू कीमतों का सामना कर रहे हैं।

हाल ही में घरेलू बाजार में कॉटन की कीमतों में मंदा आया है। कॉटन कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (सीसीआई) ने चालू सप्ताह के अंत में फिर से कॉटन की बिक्री शुरू की तथा हाल ही में ग्लोबल मार्केट में आई गिरावट को देखते हुए, सीसीआई ने शुक्रवार को इसकी बिक्री कीमतों में 2,300 रुपये प्रति कैंडी, एक कैंडी-356 किलो की भारी कटौती की थी, इसलिए घरेलू बाजार में इसकी कीमतों पर दबाव देखा गया।

सीसीआई ने चालू सीजन में न्यूनतम समर्थन मूल्य, एमएसपी पर 105 लाख गांठ की खरीद की थी, जिसमें निगम अभी तक 70.34 लाख गांठ की बिक्री कर चुकी है। व्यापारियों के अनुसार मौजूदा भाव में सूती धागे में स्थानीय एवं निर्यात मांग सामान्य की तुलना में कमजोर है, जिस कारण स्पिनिंग मिल इन्वेंट्री नहीं बढ़ाना चाहती।

हरियाणा में 10 टन प्रतिदिन क्षमता का बायोगैस प्लांट लगाएगी मारुति सुजुकी, कार्बन उत्सर्जन में होगी बड़ी कमी

 नई दिल्ली : देश की प्रमुख वाहन निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड ने हरियाणा के खरखौदा स्थित अपने प्लांट में 10 टन प्रतिदिन (टीपीडी) क्षमता का बायोगैस प्लांट स्थापित करने की घोषणा की है। कंपनी के अनुसार, यह परियोजना वित्तीय वर्ष 2026-27 में शुरू होगी और इसके माध्यम से प्रतिवर्ष लगभग 9,490 टन कार्बन उत्सर्जन में कमी लाई जा सकेगी। कंपनी ने बताया कि, यह बायोगैस प्लांट खरखौदा इकाई की कुल गैस आवश्यकता का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा पूरा करेगा। यह कदम स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देने और विनिर्माण प्रक्रियाओं को अधिक टिकाऊ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

इसके साथ ही मारुति सुजुकी ने अपने मानेसर स्थित बायोगैस प्लांट की क्षमता भी बढ़ा दी है।पहले यह प्लांट 0.2 टन प्रतिदिन क्षमता का था, जिसे बढ़ाकर 0.7 टन प्रतिदिन कर दिया गया है। उन्नत प्लांट से प्रतिवर्ष लगभग 3.6 लाख मानक घन मीटर बायोगैस उत्पादन होने की उम्मीद है। मानेसर प्लांट में खाद्य अपशिष्ट, नेपियर घास और धान के भूसे को अवायवीय अपघटन (एनारोबिक डाइजेशन) तकनीक के माध्यम से बायोगैस में परिवर्तित किया जाता है। यह तकनीक कृषि अवशेषों और जैविक कचरे के बेहतर उपयोग के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

कंपनी इन दोनों परियोजनाओं पर कुल 150 करोड़ रुपये का निवेश करेगी। इस निवेश का उद्देश्य नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देना और उत्पादन इकाइयों की ऊर्जा दक्षता को मजबूत करना है। गौरतलब है कि अगस्त 2025 में भारत के प्रधानमंत्री ने मारुति सुजुकी की पहली भारत में निर्मित बैटरी चालित इलेक्ट्रिक वाहन ई-विटारा का उद्घाटन और शुभारंभ किया था। कंपनी द्वारा भारत में निर्मित इन इलेक्ट्रिक वाहनों का निर्यात दुनिया के 100 देशों में किया जाएगा। मारुति सुजुकी की यह पहल स्वच्छ ऊर्जा, कार्बन उत्सर्जन में कमी और हरित विनिर्माण को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।