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09 नवंबर 2019

गेहूं और दलहन की बुआई शुरूआती दौर में पिछड़ी, सरसों की बढ़ी

आर एस राणा
नई दिल्ली। देश के कई राज्यों में बाढ़ और बेमौसम बारिश का असर फसलों की बुआई पर पड़ रहा है। रबी की प्रमुख फसल गेहूं के साथ ही दलहन की बुआई शुरूआती दौर में पिछे चल रही है, हालांकि तिलहन की प्रमुख फसल सरसों की बुआई बढ़ी है। कृषि मंत्रालय के दौरान अभी तक रबी फसलों की कुल बुआई 95.35 लाख हेक्टयेर में ही हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक 112.24 लाख हेक्टेयर में बुआई हो चुकी थी।
मंत्रालय के अनुसार रबी की प्रमुख फसल गेहूं की बुआई अभी तक केवल 9.69 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई है जबकि पिछले साल इस समय तक 15.35 लाख हेक्टेयर में इसकी बुआई हो चुकी थी। इसी तरह से दालों की बुआई घटकर अभी तक 27.85 लाख हेक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक 39.93 लाख हेक्टेयर में दालों की बुआई हो चुकी थी। रबी दलहन की प्रमुख फसल चना की बुआई चालू रबी में 19.82 लाख हेक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल इस सयम तक 26.63 लाख हेक्टेयर में बुआई हो चुकी थी। रबी फसलों की बुआई अभी शुरूआती चरण में है तथा आगे बुआई में तेजी आयेगी।
मध्य प्रदेश में गेहूं के साथ ही दालों की बुआई पिछड़ी
मंत्रालय के अनुसार गेहूं की बुआई मध्य प्रदेश में पिछे चल रही है, राज्य में सितंबर में हुई भारी बारिश से कई जिलों में बाढ़ जैसे हालात बन गए थे, जबकि अक्टूबर मेें भी सामान्य से ज्यादा बारिश हुई है। चालू रबी में राज्य में अभी तक केवल 74 हजार हेक्टेयर में ही गेहूं की बुआई हो पाई है जबकि पिछले साल इस समय तक 6 लाख हेक्टेयर में बुआई हो चुकी थी। दालों की बुआई भी मध्य प्रदेश में पिछे चल रही है। राज्य में अभी तक केवल 1.58 लाख हेक्टेयर में दालों की बुआई हो पाई है जबकि पिछले साल इस समय तक 12.26 लाख हेक्टेयर में इनकी बुआई हो चुकी थी। कर्नाटक के साथ ही राजस्थान में दालों की बुआई पिछले साल के मुकाबले आगे चल रही है।
मोटे अनाजों की बुआई पिछे, तिलहन की आगे
मोटे अनाजों की बुवाई चालू रबी में अभी तक 12.39 लाख हेक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक 13.54 लाख हेक्टेयर में बुआई हो चुकी थी। ज्वार की बुआई चालू सीजन में 10.14 लाख हेक्टेयर में हुई है जबकि पिछले साल की समान अवधि में 10.27 लाख हेक्टेयर में बुआई हो चुकी थी। रबी में तिलहनी फसलों की बुआई में जरुर बढ़कर 39.65 लाख हेक्टेयर में बुआई हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक इनकी बुआई 37.66 लाख हेक्टेयर में बुआई हो पाई थी। रबी तिलहन की प्रमुख फसल सरसों की बुआई बढ़कर 37.42 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, पिछले साल इस समय तक सरसों की बुआई केवल 35.38 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी।.............   आर एस राणा

कपास का उत्पादन अनुमान 13.62 फीसदी ज्यादा, किसान बेच रहे हैं समर्थन मूल्य से नीचे

आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू सीजन में कपास का उत्पादन 13.62 फीसदी बढ़कर 354.50 लाख गांठ (एक गांठ-170 किलो) होने का अनुमान है। मांग कम होने के कारण मंडियों में किसान न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से नीचे दाम पर फसल बेचने को मजबूर हैं। पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश की मंडियों में कपास 5,050 से 5,300 रुपये प्रति क्विंटल बिक रही है जबकि केंद्र सरकार ने चालू खरीफ विपणन सीजन 2019-20 के लिए कपास मीडियम स्टेपल कपास का समर्थन मूल्य 5,255 रुपये और लॉन्ग स्टेपल का 5,550 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है।
कॉटन एसोसिएशन आफ इंडिया (सीएआई) के अनुसार चालू फसल सीजन 2019-20 में कपास का उत्पादन 13.62 फीसदी बढ़कर 354.50 लाख गांठ (एक गांठ-170 किलो) होने का अनुमान है जबकि पिछले साल 312 लाख गांठ का ही उत्पादन हुआ था। सीएआई के आरंभिक अनुसान के अनुसार चालू सीजन में कपास का आयात घटकर 25 लाख गांठ और निर्यात 42 लाख गांठ होने का अनुमान है। पिछले सीजन में 32 लाख गांठ कपास का आयात हुआ था, जबकि निर्यात 42 लाख गांठ का ही हुआ। देश में कपास की सालाना खपत 315 लाख गांठ होने का अनुमान है जोकि पिछले साल की तुलना में 3.5 लाख गांठ ज्यादा है। अक्टूबर में उत्पादक मंडियों में कपास की आवक 13.40 लाख गांठ की हो चुकी है।
सीसीआई ने एमएसपी पर खरीदी है केवल 19,000 गांठ
कॉटन कारपोरेशन आफ इंडिया (सीसीआई) के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार चालू सीजन में अभी तक एमएसपी पर केवल 19,000 गांठ कपास की खरीद ही हुई है। उन्होनें बताया कि मंडियों में आ रही कपास में नमी की मात्रा 20 फीसदी से ज्यादा की आ रही है जबकि निगम 12 फीसदी नमी युक्त कपास की खरीद कर रही है। उन्होंने बताया कि उत्तर भारत के राज्यों के बाद तेलंगाना से भी खरीद शुरू हो गई है। आगामी दिनों में दैनिक आवक बढ़ने पर कपास की खरीद में भी तेजी आने का अनुमान है। पिछले फसल सीजन में निगम ने एमएसपी पर 10.70 लाख गांठ कपास की खरीद की थी, जिसमें से 1.70 लाख गांठ बेची गई है।
विश्व बाजार में दाम कम होने से निर्यात पड़ते कम
नार्थ इंडिया एसोसिएशन आफ इंडिया के अध्यक्ष राकेश राठी ने बताया कि उत्पादक मंडियों में कपास के भाव 5,050 से 5,300 रुपये प्रति क्विंटल क्वालिटीनुसार चल रहे हैं। उन्होंने बताया कि  न्यूयार्क कॉटन के दिसंबर वायदा में कपास के भाव 7 नवंबर को 64.44 सेंट प्रति पाउंड हैं जबकि 18 अक्टूबर को इसके भाव 64.99 सेंट प्रति पाउंड थे। विश्व बाजार में कीमत कम होने के कारण निर्यात पड़ते भी सीमित मात्रा में ही लग रहे हैं। उन्होंने बताया कि बेमौसम बारिश से महाराष्ट्र और गुजरात में कपास की फसल को नुकसान हुआ है, साथ ही क्वालिटी भी प्रभावित हुई है।
बुआई में हुई थी बढ़ोतरी
कृषि मंत्रालय के पहले आरंभिक अनुमान के अनुसार फसल सीजन 2019-20 में कपास का उत्पादन 322.67 लाख गांठ होने का अनुमान है जबकि पिछले साल 287.08 लाख गांठ का उत्पादन हुआ था। कपास की बुआई चालू खरीफ में 127.67 लाख हेक्टेयर में हुई थी, जोकि इसके पिछले साल के 121.05 लाख हेक्टेयर से ज्यादा थी।..........  आर एस राणा

चीनी मिलों को राहत देने की तैयारी, निर्यात की समय सीमा दो महीने बढ़ा सकती है सरकार

आर एस राणा
नई दिल्ली। केंद्र सरकार चीनी मिलों को राहत देने के लिए निर्यात की समय सीमा को दो महीने बढ़ा सकती है। चीनी मिलों को पेराई सीजन 2018-19 (अक्टूबर से सितंबर) में 50 लाख टन का निर्यात अक्टूबर 2019 तक करना था, लेकिन अभी तक तय लक्ष्य में से केवल 38 लाख टन चीनी का ही निर्यात ही हो पाया है। इसलिए सरकार तय समय सीमा 31 अक्टूबर 2019 को बढ़ाकर 31 दिसंबर 2019 कर सकती है।
खाद्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार चीनी निर्यात की समय सीमा को 31 अक्टूबर 2019 से बढ़ाकर 31 दिसंबर 2019 करने का प्रस्ताव है। उन्होंने बताया कि पिछले पेराई सीजन में चीनी मिलों को 50 लाख टन चीनी के निर्यात का कोटा दिया था, जिसमें से अभी तक मिलों ने केवल 38 लाख टन चीनी का ही निर्यात किया है। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश की चीनी मिलों ने निर्यात की समय सीमा को बढ़ाने की मांग की थी। विश्व बाजार में व्हाईट चीनी के दाम 345.50 डॉलर प्रति टन और रॉ-शुगर चीनी के दाम 12.82 सेंट प्रति बुशल रहे।
केंद्र सरकार चीनी के निर्यात पर 10.50 रुपये किलो की दे रही है सब्सिडी
केंद्र सरकार चीनी के निर्यात पर मिलों को 10.50 रुपये प्रति किलो की सब्सिडी दे रही है। उन्होंने बताया कि पहली अक्टूबर 2019 से शुरू हुए चालू पेराई सीजन के लिए चीनी के निर्यात का कोटा बढ़ाकर 60 लाख टन का कर दिया है। उद्योग के अनुसार चालू पेराई सीजन 2019-20 (अक्टूबर से सितंबर) में चीनी का उत्पादन 22 फीसदी घटकर 260 लाख टन ही होने का अनुमान है जबकि पेराई पिछले सीजन में चीनी का रिकार्ड 331.61 लाख टन का उत्पादन हुआ था। पहली अक्टूबर 2019 से शुरू हुए चालू पेराई सीजन के समय चीनी का बकाया स्टॉक 145.81 लाख टन बचा हुआ है जबकि पिछले साल पेराई सीजन के आरंभ में बकाया केवल 107 लाख टन का था।
पहली अक्टूबर से अभी तक 8 से 9 लाख टन चीनी के हो चुके हैं निर्यात सौदे
दिल्ली में चीनी के थोक कारोबारी सुधीर भालोठिया ने बताया कि दिल्ली में चीनी की कीमतें  3,550 रुपये प्रति क्विंटल और उत्तर प्रदेश में चीनी के एक्स फैक्ट्री भाव 3,200 से 3,300 रुपये प्रति क्विंटल हैं। महाराष्ट्र में चीनी के दाम 3,125 से 3,175 रुपये प्रति क्विंटल हैं। उन्होंने बताया कि पहली अक्टूबर से अभी तक करीब 8 से 9 लाख टन चीनी के निर्यात सौदे हो चुकी है, हालांकि इसमें से शिपमेंट केवल 2 से 3 लाख टन की ही हुई है। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश की करीब 25 से 30 चीनी मिलों में पेराई आरंभ हो चुकी है। ......... आर एस राणा

केंद्र ने अरहर आयात की अविध 15 नवंबर तक बढ़ाई, दिसंबर में आयेगी नई फसल

आर एस राणा
नई दिल्ली। अरहर की नई फसल की आवक घरेलू उत्पादक मंडियों में दिसंबर में बनेगी उससे पहले ही केंद्र सरकार ने अरहर के आयात की अवधि को बढ़ाकर 15 नवंबर 2019 कर दिया है जिससे अरहर की कीमतों में 300 रुपये की गिरावट आकर उत्पादक मंडियों मेंं भाव 5,800 से 5,900 रुपये प्रति क्विंटल रह गए।
विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार अरहर का आयात अब 15 नवंबर 2019 तक किया जा सकेगा। सरकार ने अरहर, उड़द और मूंग के आयात की अनुमति 31 अक्टूबर 2019 तक दे रखी थी। डीजीएफटी के अनुसार उड़द और मूंग का आयात तो नहीं किया जा सकेगा, लेकिन अरहर के आयात की अवधि को 15 नवंबर तक बढ़ा दिया गया है। ऑल इंडिया दाल मिल एसोसिएशन ने हाल ही में अरहर के आयात की अवधि को बढ़ाकर 30 नवंबर 2019 करने की मांग की थी, साथ ही उड़द के आयात की मात्रा को भी डेढ़ लाख टन से बढ़ाकर 2.5 लाख टन करने के लिए वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल को पत्र लिखा था।
दिसंबर में उत्पादक मंडियों में आयेगी अरहर की नई फसल
जानकारों के अनुसार अगले महीने अरहर की नई फसल की आवक उत्पादक मंडियों में बनेगी, अत: सरकार द्वारा आयात की अवधि बढ़ा देने से अरहर की कीमतों में आगे और मंदा आने का अनुमान है, जिससे अरहर उगाने वाले किसानों को नुकसान हो सकता है। केंद्र सरकार ने खरीफ विपणन सीजन 2019-20 के लिए अरहर का न्यूनतम समर्थन मूल्य 5,800 रुपये प्रति क्विंटल तय किया हुआ है जबकि मंडियों में 5,800 से 5,900 रुपये प्रति क्विंटल रह गए हैं। केंद्रीय पूल में भी अरहर का बकाया स्टॉक बचा हुआ है।
अरहर का पौने छह लाख टन आयात की अनुमति
केंद्र सरकार ने चालू वित्त वर्ष 2019-20 के लिए अरहर के आयात के लिए 4 लाख टन की मात्रा तय की थी, जबकि उड़द और मूंग के आयात के लिए डेढ़-डेढ़ लाख टन का कोटा तय किया हुआ है। इसके अलावा पौने दो लाख टन अरहर का आयात मौजाम्बिक से सरकारी स्तर पर भी होगा। कर्नाटक के एक दाल मिलर्स ने बताया कि सरकार ने आयात की समय सीमा 15 नवंबर तक बढ़ाई है, अत: अगले 9 से 10 दिनों में कैसे विदेशों से सौदे, लोडिंग और अनलोडिंग हो जायेगी। उन्होंने बताया कि इससे वहीं कंनेटर पहुंच पायेंगे, जोकि पहले से लोड हो चुके हैं।
अरहर की बुआई पिछले साल से ज्यादा
कृषि मंत्रालय के पहले आरंभिक अनुमान के अनुसार फसल सीजन 2019-20 में 35.4 लाख टन अरहर के उत्पादन का अनुमान है जबकि पिछले फसल सीजन में इसका उत्पादन 35.9 लाख टन का हुआ था। जानकारों के अनुसार उत्पादक राज्यों में अक्टूबर में हुई अच्छी बारिश से अरहर का उत्पादन तय अनुमान से ज्यादा ही होने का अनुमान है। मंत्रालय के अनुसार खरीफ में अरहर की बुआई बढ़कर 45.82 लाख हेक्टेयर में हुई है जबकि इसके पिछले साल इसकी बुआई 45.75 लाख हेक्टेयर में हुई थी। ..............  आर एस राणा

केंद्र सरकार ने यूरोपियन यूनियन के लिए चावल निर्यात नियम किए सख्त

आर एस राणा
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने यूरोपियन यूनियन के देशों को किए जा रहे चावल के निर्यात नियमों को सख्त कर दिया है। इन देशों को चावल निर्यात करने के लिए अब निर्यातकों को निर्यात निरीक्षण एजेंसी या फिर निर्यात निरीक्षण परिषद से निरीक्षण का प्रमाण-पत्र लेना अनिवार्य होगा। इसका असर चावल के निर्यात सौदों पर पड़ने की आशंका है।
विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार यूरोपियन यूनियन के देशों को बासमती चावल के साथ ही गैर बासमती चावल के निर्यात करने के लिए निर्यातकों को निर्यात निरीक्षण एजेंसी या फिर निर्यात निरीक्षण परिषद से निरीक्षण का प्रमाण-पत्र लेना अनिवार्य होगा, जोकि तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है। सूत्रों के अनुसार चावल में पेस्टीसाइड होने की वजह से सरकार ने निरीक्षण का प्रमाण-पत्र को अनिवार्य किया है।
इससे चावल के निर्यात पर असर पड़ने की आशंका
हरियाणा के करनाल स्थित बासमती चावल की निर्यात फर्म के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सरकार के इस फैसले से बासमती के साथ ही गैर-बासमती चावल के निर्यात सौदों पर असर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि यूरोप के एक-दो देश इस तरह की मांग कर रहे थे, लेकिन सरकार ने सभी यूरोपीयन यूनियन देशों के लिए इसे अनिवार्य कर दिया है। इसको देखते हुए अन्य आयातक देश जो भारत से बड़ी मात्रा में बासमती और गैर-बासमती चावल का आयात करते हैं, इस तरह की मांग कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि यूरोपीयन यूनियन के देशों को बासमती चावल का कुल निर्यात तीन लाख से भी कम होता है, जबकि गैर-बासमती का निर्यात तो सीमित मात्रा में ही होता है। वैसे भी चालू वित्त वर्ष 2019-20 की पहली छमाही अप्रैल से सितंबर के दौरान बासमती चावल के साथ ही गैर-बासमती चावल के निर्यात में कमी आई है। ईरान को बासमती चावल के निर्यात सौदे नहीं हो रहे हैं, जबकि सऊदी अरब को भी निर्यात सौदे सीमित मात्रा में ही हो रहे हैं। ऐसे में अन्य देशों ने भी निर्यात निरीक्षण की मांग की तो इसका सीधा असर चावल के कुल निर्यात पर पड़ेगा।
पहली छमाही में बासमती और गैर बासमती चावल का निर्यात घटा
चालू वित्त 2019-20 की पहली छमाही अप्रैल से सितंबर के दौरान बासमती चावल के निर्यात में 11.33 फीसदी की कमी आकर कुल निर्यात 18.70 लाख टन का ही हुआ है जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में इसका निर्यात 20.82 लाख टन का हुआ था। गैर-बासमती चावल का निर्यात चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में घटकर 25.17 लाख टन का ही हुआ है जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में इसका निर्यात 38.68 लाख टन का हुआ था। वित्त वर्ष 2018-19 में देश से बासमती चावल का कुल निर्यात 44.14 लाख टन का और गैर-बासमती चावल का निर्यात 75.99 लाख टन का हुआ था।.........   आर एस राणा

चीनी का उत्पादन 22 फीसदी घटने का अनुमान, महाराष्ट्र और कर्नाटक में सूखे और बाढ़ का असर

आर एस राणा
नई दिल्ली। महाराष्ट्र और कर्नाटक में सूखे और बाढ़ से गन्ने की फसल को हुए भारी नुकसान से चालू पेराई सीजन 2019-20 में चीनी के उत्पादन में करीब 22 फीसदी की कमी आकर कुल उत्पादन 260 लाख टन ही होने का अनुमान है जबकि पिछले पेराई सीजन में 331.61 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ था।
इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (इस्मा) द्वारा जारी दूसरे अग्रिम अनुमान के अनुसार पहली अक्टूबर 2019 से शुरू हुए चालू पेराई सीजन में चीनी का उत्पादन घटकर 260 लाख टन ही होने का अनुमान है जबकि पहले अनुमान में 282 लाख टन के उत्पादन का अनुमान लगाया था। प्रमुख उत्पादक राज्य महाराष्ट्र में चीनी के उत्पादन में 40 फीसदी की गिरावट आकर कुल उत्पादन 62 लाख टन ही होने का अनुमान है जबकि पिछले पेराई सीजन में राज्य में 107.20 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ था। उधर कर्नाटक में चीनी का उत्पादन चालू पेराई सीजन में घटकर 32 लाख टन ही होने का अनुमान है जबकि पिछले पेराई सीजन में राज्य में 44.30 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ था।
उत्तर प्रदेश में उत्पादन बढ़ने का अनुमान
महाराष्ट्र के मराठवाड़ा और सोलापूर में पहले सूखे का असर गन्ने की फसल पर पड़ा, उसके बाद राज्य के कोल्हापुर, सांगली, सतारा और पुणे में बाढ़ से गन्ने की फसल को भारी नुकसान हुआ। कर्नाटक में भी चालू सीजन में गन्ने की बुआई में पिछले साल की तुलना में कमी आई थी, उसके बाद राज्य के बेलगाम और बीजापुर में बाढ़ से गन्ने की फसल प्रभावित हुई थी। उत्तर प्रदेश में चालू पेराई सीजन 2019-20 में चीनी का उत्पादन जरुर बढ़कर 120 लाख टन होने का अनुमान है जबकि पिछले पेराई सीजन में राज्य में 118.21 लाख टन का उत्पादन हुआ था।
अन्य राज्यों में पिछले साल के बराबर ही उत्पादन का अनुमान
अन्य प्रमुख उत्पादक राज्यों में चालू पेराई सीजन में चीनी का उत्पादन 54.50 लाख टन होने का अनुमान है जोकि पिछले साल के लगभग बराबर ही है। पहली अक्टूबर 2019 से शुरू हुए चालू पेराई सीजन के समय चीनी का बकाया स्टॉक बंपर 145.81 लाख टन बचा हुआ है जबकि पिछले साल पेराई सीजन के आरंभ में बकाया केवल 107 लाख का ही था।  
एथेनॉल के लिए तेल कंपनियों की निविदा जल्द आने की उम्मीद
इस्मा के अनुसार चालू पेराई सीजन के लिए तेल कंपनियों द्वारा एथेनॉल की खरीद के लिए जल्द ही निविदा जारी करने की उम्मीद है। केंद्र सरकार द्वारा चीनी मिलों को एथेनॉल उत्पादन बढ़ाने के लिए दी जा रही सहातया से कंपनियों की उत्पादन क्षमता बढ़ी है। माना जा रहा है कि चालू पेराई सीजन 2019-20 में मिलों द्वारा करीब 8.5 लाख टन चीनी उत्पादन के बराबर गन्ने से सीधे एथेनॉल बनने की उम्मीद है।
चालू वित्त वर्ष के चार महीनों में बढ़ा चीनी का निर्यात
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अनुसार चालू वित्त वर्ष 2019-20 के पहले चार महीने अप्रैल से जुलाई के दौरान चीनी का निर्यात बढ़कर 18.59 लाख टन का हुआ है, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में इसका निर्यात केवल 9.67 लाख टन का ही हुआ था। विश्व बाजार में व्हाईट चीनी के भाव 380 से 385 डॉलर प्रति टन है। केंद्र सरकार चीनी के निर्यात पर 10.50 रुपये प्रति किलो की सब्सिडी दे रही है। विश्व बाजार में चीनी की कुल उपलब्धता कम मानी जा रही है जिससे आगे निर्यात सौदों में तेजी आने का अनुमान है। ........ आर एस राणा

चालू वित्त वर्ष में बासमती चावल का निर्यात 15 फीसदी तक घटने की आशंका

आर एस राणा
नई दिल्ली। ईरान की आयात मांग नहीं होने के कारण चालू वित्त वर्ष में बासमती चावल के निर्यात में 12 से 15 फीसदी तक कमी आने की आशंका है। इसका सीधा असर बासमती धान के किसानों पर पड़ रहा है। उत्पादक मंडियों में पूसा बासमती धान 1,121 की कीमत घटकर शनिवार को 2,750 से 2,800 रुपये प्रति क्विंटल रह गई, जबकि पिछले साल इसके दाम 3,150 से 3,200 रुपये प्रति क्विंटल थे।
एपीडा के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि भारतीय बासमती चावल का ईरान सबसे बड़ा आयातक देश है तथा ईरान में भारतीय निर्यातकों के पहले करीब 1,500 करोड़ रुपये फंसे हुए हैं इसलिए निर्यातक भी नए निर्यात सौदे नहीं कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि चालू वित्त 2019-20 की पहली छमाही अप्रैल से सितंबर के दौरान बासमती चावल के निर्यात में 11.33 फीसदी की कमी आकर कुल निर्यात 18.70 लाख टन का ही हुआ है जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में इसका निर्यात 20.82 लाख टन का हुआ था। गैर-बासमती चावल का निर्यात चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में घटकर 25.17 लाख टन का ही हुआ है जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में इसका निर्यात 38.68 लाख टन का हुआ था।
ईरान ने पिछले वर्ष में 14.83 लाख टन बासमती चावल का किया था आयात
एपीडा के अनुसार वित्त वर्ष 2018—19 में ईरान ने भारत से 14.83 लाख टन बासमती चावल का आयात किया था, जबकि पिछले वित्त वर्ष 2017—18 में 8.77 लाख टन का ही आयात किया था। उन्होंने बताया कि सितंबर में बासमती चावल का निर्यात घटकर 2.05 लाख टन का ही हुआ है जबकि पिछले साल सितंबर में इसका निर्यात 2.28 लाख टन का हुआ था। गैर बासमती चावल का निर्यात सितंबर में घटकर 3.52 लाख टन का ही हुआ है जबकि पिछले साल सितंबर में गैर बासमती चावल का निर्यात 5.39 लाख टन का हुआ था।
धान की कीमतें पिछले साल की तुलना में कम
कैथल के धान कारोबारी रामनिवाश खुरानियां ने बताया कि मंडियों में पूसा बासमती 1,121 और डीपी धान की दैनिक आवक बढ़ रही है जबकि पूसा 1,509 धान की आवक कम होने लगी है। चावल मिलों की मांग कम होने के कारण मंडी में पूसा 1,121 धान के भाव घटकर 2,750-2,800 रुपये प्रति क्विंटल रह गए, जबकि पिछले साल इसके दाम 3,150 से 3,200 रुपये प्रति क्विंटल थे। इसी तरह से डीपी धान के भाव अच्छी क्वालिटी के 2,500 रुपये और पूसा बासमती 1,509 धान के भाव 2,400 से 2,600 रुपये प्रति क्विंटल रह गए। पूसा 1,121 बासमती चावल सेला का भाव 5,300 से 5,400 रुपये और पूसा बासमती 1,509 चावल सेला का भाव 4,700 रुपये प्रति क्विंटल रहा।.............  आर एस राणा