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14 अगस्त 2020

जुलाई में खाद्य एवं अखाद्य तेलों का आयात 13 फीसदी बढ़ा

आर एस राणा
दिल्ली। कोरोना वायरस के कारण अप्रैल, मई में खाद्य एवं अखाद्य तेलों के आयात में कमी आई थी, लेकिन जुलाई में इनके आयात में 13 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई। सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एसईए) के अनुसार जुलाई में खाद्य एवं अखाद्य तेलों का आयात बढ़कर 15,17,350 टन का हुआ है जबकि पिछले साल जुलाई में 13,47,882 टन का आयायत हुआ था।
एसईए के अनुसार चालू तेल वर्ष 2019-20 (जुलाई-19 से अक्टूबर-20) के पहले 9 महीनों नवंबर से जुलाई के दौरान खाद्य एवं अखाद्य तेलों के आयात में 11 फीसदी की कमी आकर कुल आयात 95,69,336 टन का हुआ है जबकि पिछले तेल वर्ष की समान अवधि में 108,03,777 टन का आयात हुआ था।
लॉकडाउन में छूट मिलने और होटल तथा रेस्त्रां में गतिविधियां सुधरने से खाने के तेलों की मांग सुधरी है। जिसका असर देश में खाद्य तेलों के आयात पर दिखा है। जुलाई के दौरान 8,24,078 टन पाम तेल की आयात हुआ है। सोया तेल के आयात में जुलाई में 52 फीसदी की बढ़ोतरी होकर 4,84,525 टन का आयात हुआ है। वहीं सूरजमुखी तेल का आयात पिछले साल जुलाई के मुकाबले 4 फीसदी बढ़कर 2,08,747 टन पर पहुंच गया। जून के मुकाबले जुलाई में आयातित खाद्य तेलों की कीमतों में तेजी भी आई है। भारतीय बंदरगाह पर जुलाई में आरबीडी पॉमोलीन का भाव बढ़कर 675 डॉलर प्रति टन हो गया जबकि जून में इसका भाव 639 डॉलर प्रति था। इसी तरह से पॉम तेल का भाव 629 डॉलर से बढ़कर 660 डॉलर और क्रुड सोया तेल का भाव 730 डॉलर से बढ़कर 771 डॉलर प्रति टन हो गया।.................. आर एस राणा

13 अगस्त 2020

अप्रैल, मई में ग्वार गम उत्पादों का निर्यात 66 फीसदी घटा, उत्पादक राज्यों में बारिश का अनुमान

आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू वित्त वर्ष 2020-21 के पहले दो महीनों अप्रैल, मई में ग्वार गम उत्पादों का निर्यात 66 फीसदी घटकर केवल 28,586 टन का ही हुआ है जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में 83,828 टन का निर्यात हुआ था। प्रमुख उत्पादक राज्य राजस्थान में हालांकि बुआई कम हुई है, लेकिन गुजरात में आगे चल रही है तथा उत्पादक राज्यों में बारिश अच्छी हो रही है जिससे फसल को फायदा ही होगा, इसलिए ग्वार गम उतपादों में अभी बड़ी तेजी की संभावना नहीं है।
वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार अप्रैल में 14,291.36 टन ग्वार गम उत्पादों का निर्यात हुआ है, जबकि मई के दौरान लगभग बराबर ही 14,294.64 टन ग्वार गम का निर्यात हो पाया। मूल्य के हिसाब से अप्रैल-मई के दौरान लगभग 239.67 करोड़ रुपये का ग्वार गम उत्पादों का निर्यात हुआ है। हालांकि जानकारों का मानना है कि कई राज्यों में लाकडॉउन खुलने के कारण जुलाई में ग्वार गम उत्पादों के निर्यात में बढ़ोतरी हुई है तथा जुलाई में करीब 20 से 22 हजार टन ग्वार गम उत्पादों का निर्यात हुआ है। ऐसे में चालू वित्त वर्ष 2020-21 की पहली तिमाही में लगभग 50 हजार टन ग्वार गम उत्पादों का ​ही निर्यात हो पाया है जोकि पिछले वित्त वर्ष 2019-20 की पहली तिमाही 1.16 लाख टन से आधे से भी कम है।
प्रमुख उत्पादक राज्य राजस्थान में चालू सीजन में ग्वार सीड की बुआई 23.46 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई है जबकि पिछले साल इस समय तक 25.11 लाख हेक्टेयर में बुआई हो चुकी थी। सामान्यत: राजस्थान में ग्वार सीड की बुआई 30 लाख हेक्टेयर में होती है। उधर गुजरात में चालू खरीफ में ग्वार सीड की बुआई बढ़कर 1.07 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जोकि पिछले साल की समान अवधि के 96,000 हेक्टेयर से ज्यादा है। गुजरात में ग्वार सीड की बुआई 1.60 लाख हेक्टेयर में होती है। जानकारों के अनुसार हरियाणा में भी ग्वार सीड की बुआई पिछले साल के लगभग बराबर ही हुई है।
भारतीय मौसम​ विभाग (आईएमडी) के अनुसार पिछले 48 घंटों में ग्वार सीड के उत्पादक क्षेत्रों में बारिश अच्छी हुई है तथा अगले दो-तीन दिनों तक और बारिश का अनुमान है, जिससे फसल को फायदा ही होगा।...........  आर एस राणा

12 अगस्त 2020

गुजरात, राजस्थान और मध्य प्रदेश में बढ़ेगी मानसून की सक्रियता, कई जगह तेज बारिश का अनुमान

आर एस राणा
नई दिल्ली। मानसून की अक्षीय रेखा गंगानगर, हिसार, बरेली, गोरखपुर, गया, जमशेदपुर और दिघा होते हुए बंगाल की खाड़ी के उत्तर-पूर्वी भागों तक बनी हुई है। उत्तर पूर्वी राजस्थान के ऊपर हवाओं में एक चक्रवाती क्षेत्र बना हुआ है। इसके अलावा दक्षिण-पश्चिमी राजस्थान और इससे सटे गुजरात पर भी एक चक्रवाती सिस्टम बना हुआ है। एक अन्य मौसमी सिस्टम पूर्वी असम के ऊपर है। इसकी क्षमता भी चक्रवाती क्षेत्र की है।
आगामी 24 घंटों के दौरान कहां-कहां होगी बारिश
मौसम की जानकारी देने वाली निजी एजेंसी स्काईमेट के अनुसार अगले 24 घंटों के दौरान मानसून का व्यापक प्रदर्शन गुजरात, पूर्वी राजस्थान, कोंकण गोवा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल, सिक्किम, असम, मेघालय, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना पर दिखेगा। इन भागों में कुछ हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश के साथ कुछ स्थानों पर भारी बारिश होने के आसार हैं। मानसून की सक्रियता पश्चिमी हिमालयी राज्यों, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, विदर्भ, मराठवाड़ा, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, ओडिशा के कुछ हिस्सों, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, पूर्वोत्तर भारत के बाकी हिस्सों, केरल और तमिलनाडु पर भी रहेगी। इन भागों में कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश संभव है।
पिछले 24 घंटों में कैसा रहा मानसून का प्रदर्शन
बीते 24 घंटों के दौरान उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल, सिक्किम, असम, मेघालय और उत्तर प्रदेश के पूर्वी तथा मध्य हिस्सों पर मॉनसून व्यापक रूप में सक्रिय रहा और मध्यम से भारी बारिश हुई। बिहार, पूर्वी मध्य प्रदेश, गुजरात के साथ-साथ उत्तरी कोंकण व गोवा, केरल के कुछ हिस्सों और हरियाणा में भी हल्की से मध्यम बारिश के साथ एक-दो स्थानों पर भारी बारिश हुई। पश्चिमी हिमालयी राज्यों, दिल्ली के कुछ हिस्सों, शेष उत्तर प्रदेश, पूर्वी राजस्थान, मध्य प्रदेश के शेष हिस्सों, तटीय कर्नाटक, आंतरिक और उत्तरी तटीय तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, झारखंड, अंडमान व निकोबार द्वीपसमूह और पूर्वोत्तर भारत के शेष हिस्सों में कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश हुई।.............  आर एस राणा

सोयाबीन के उत्पादक राज्यों में बारिश की कमी, अगेती फसल में सफेद मक्खी का प्रकोप

आर एस राणा
नई दिल्ली। सोयाबीन के प्रमुख उत्पादक राज्यों के करीब 45 जिलों में चालू खरीफ में पहली जून से 12 अगस्त तक सामान्य से कम हुई है, तथा प्रमुख उत्पादक राज्यों मध्य प्रदेश और राजस्थान के कुछ इलाकों में अगेती फसल पर सफेद मक्खी रोग लगने की शिकायत मिली ​है जिसकी रोकथाम के लिए इंदौर स्थित भारतीय सोयाबीन शोध संस्थान ने किसानों के लिए एडवायजरी जारी की है।
सूत्रों के अनुसार मध्य प्रदेश के रतलाम, रायसेन, होशंगाबाद और अलीराजपुर के अलावा राजस्थान के कुछ इलाकों में सोयाबीन की अगैती फसल पर सफेद मक्खी के प्रकोप कि शिकायतें प्रशासन को मिली हैं। जिले लेकर इलाके के किसानों को कीटनाशकों के इस्तेमाल के लिए जागरुक किया जा रहा है। यह समय सोयाबीन की अगैती फसल में फूल आने का है। कृषि वैज्ञानिकों के मुताबिक इस समय सोयाबीन के खेतों में पर्याप्त नमी की जरूरत होती है लेकिन कई जिलों में बारिश सामान्य से कम हुई है, जिस कारण फसल पर सफेद मक्की के अलावा पौधों पर फंगस का भी असर असर देखने को मिला है, जिसका असर फसल पर पड़ने की आशंका है।
कम बारिश वाले इलाकों में फसल को तत्काल सिंचाई की जरुरत
इंदौर स्थित भारतीय सोयाबीन शोध संस्थान के मुताबिक कम बारिश वाले इलाकों में किसानों को तत्काल सिंचाई की व्यवस्था करनी चाहिए। वहीं जिन इलाकों में सोयाबीन की फसल पर फंफूदजनित एन्थ्रेकनोज नाम की बीमारी के प्रकोप की सूचना मिली है। वहां के किसानों को जागरुक किया जा रहा है और उन्हे इन बीमारियों और कीटों की रोकथाम के लिए जरुरी कीटनाशकों के रोकथाम के लिए जानकारी दी जा रही है। फंफूदजनित एन्थ्रेकनोज के लिए टेबुकोनाझोल और सल्फर के घोल का छिड़काव करना होता है। जबकि सफेद मक्खी की रोकथाम के लिए थायमिथोक्सम, इमिडाक्लोप्रिड और बीटासायफ्लूथ्रीन नाम के कीटनाशकाों का इस्तेमाल फायदेमंद होता है।
सोयाबीन की बुआई चालू खरीफ में 7.50 फीसदी ज्यादा
मध्यप्रदेश, राजस्थान और महाराष्ट्र तथा छत्तीसगढ़ के करीब 45 जिलों में चालू मानसूनी सीजन में अभी तक बारिश सामान्य से कम हुई है। उधर गुजरात में भी सोयाबीन की खेती पिछले साल से करीब 52 फीसदी बढ़कर 1,48,604 हेक्टेयर में हुई है जबकि राज्य के करीब 20 जिलों में बारिश सामान्य से काफी कम हुई है। कृषि मंत्रालय के मुताबिक चालू खरीफ में सोयाबीन की बुआई 7.50 फीसदी बढ़कर अभी तक 118.07 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है।
मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में बनेगी मानसून की सक्रियता
सोयाबीन में प्लांटों की मांग तो कमजोर है लेकिन बारिश की कमी के कारण स्टॉकिस्ट भाव तेज कर सकते हैं, अत​: भाव में तेजी आने पर बिकवाली ही करनी चाहिए। भारतीय मौसम विभाग के अनुसार अगले 24 घंटों के दौरान देश के अधिकांश हिस्सों पर मानसून की हलचल बढ़ गई है। मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के पूर्वी हिस्सों के साथ ही गुजरात में मानसून की सक्रियता कई दिनों तक बनी रहेगी और इस दौरान कई स्थानों पर भारी वर्षा होने का अनुमान है। ................ आर एस राणा

सोने-चांदी की कीमतों में लगातार दूसरे दिन भारी गिरावट

आर एस राणा
नई दिल्ली। सोने-चांदी में लगातार दूसरे दिन भारी गिरावट देखने को मिल रही है। दो दिन में ही सोने की कीमतों में करीब 5 हजार रुपये की गिरावट आई है, वहीं चांदी 2 दिन में करीब 14 हजार रुपये टूटी है। रूस के कोरोना वैक्सीन डेवलप करने से लंबे बुल रन के बाद भारी मुनाफावसूली आई है। यूएस-चीन में ट्रेड वार्ता फिर शुरू होने की उम्मीद और अच्छे आर्थिक आंकड़ों से भी कीमतों पर दबाव पड़ा है। रिकॉर्ड स्तर से सोना करीब 10 फीसदी फिसला है। कॉमेक्स पर सोना 1,900 डॉलर के नीचे फिसल गया है।
लगातार दूसरे दिन चांदी में भी भारी गिरावट देखने को मिली है। कल 12 फीसदी टूटने के बाद आज फिर 8 फीसदी नीचे है। रिकॉर्ड स्तर से चांदी में करीब 20 फीसदी की गिरावट आ चुकी है। डॉलर इंडेक्स में मजबूती से चांदी पर दबाव बढ़ा है। लंबे बुल रन के बाद भारी मुनाफावसूली आई है। ऊपरी स्तर पर इसके फिजिकल डिमांड में भी कमजोरी आई है। सिल्वर ईटीएफ होल्डिंग में 110 टन की कमी आई है। ................ आर एस राणा

गन्ना माफियाओं पर उत्तर प्रदेश सरकार की सख्ती

आर एस राणा
नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश सरकार ने गन्ना माफियाओं पर नकेल कसने का फरमान जारी किया है। इसके तहत फर्जी गन्ना किसानों की पहचान कर उनकी सदस्यता रद्द की जाएगी।
उत्तर प्रदेश के गन्ना एवं चीनी आयुक्त संजय आर भूसरेड्डी ने कहा कि सरकार ने पेराई सीजन 2020-21 के लिए नए किसानों के रजिस्ट्रेशन का सत्यापन कराने का निर्णय लिया है। नए रजिस्ट्रेशन में 100 फीसदी सत्यापन के बाद ही सट्टे संचालित किए जाएंगे। इसके बारे में विभागीय अधिकारियों को पहले ही निर्देश दिया जा चुका है।
फैसले के बारे में विस्तृत जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि पिछले सत्र में बने नए गन्ना किसान सदस्यों में करीब 10 फीसदी के सत्यापन के बाद पता चला कि सहारनपुर मेरठ, मुरादाबाद, लखनऊ और अयोध्या में गन्ना समितियों में सदस्यता देने में भारी अनियमितताएं हुई हैं। इसी वजह से चालू सत्र के साथ ही आगामी पेराई सत्र में भी नए सदस्यों की पूरी तरह से सत्यापन कराने का फैसला लिया गया है।
उन्होने कहा कि गलत तथ्यों और कागजातों के आधार पर सदस्यता हासिल किए किसानों के विरुद्ध कार्रवाई के तहत उनकी सदस्यता रद्द कर दी जाएगी। साथ ही जिन अधिकारियों के जरिए इसे अंजाम दिया गया है, उनके खिलाफ भी कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। जांच में ये बात सामने आई है कि कई किसानों ने लाभ कमाने के मकसद से फर्जी कागज और कर्मचारियों की मिलीभगत के सहारे गन्ने का ज्यादा रकबा दिखाया है। गन्ने की कम खेती के बावजूद इन लोगों मे भारी मात्रा में अनुचित लाभ कमाया है।............  आर एस राणा

केरल में 1,000 हेक्टेयर से ज्यादा क्षेत्र में इलायची की फसल को नुकसान

आर एस राणा
नई दिल्ली। भारी बारिश और कई इलाकों में चट्टान खिसकने से केरल में करीब 1,040 हेक्टेयर में इलायची की फसल को नुकसान पहुंचा है, जिससे इलायची के उत्पादन में गिरावट आ सकती है। देश में इलायची के कुल उत्पादन में केरल की हिस्सेदारी 70 फीसदी से अधिक है जबकि अन्य राज्यों कर्नाटक की हिस्सेदारी 20 फीसदी एवं तमिलनाडु की 10 फीसदी है।
केरल के कृषि विभाग के मुताबिक प्रारंभिक आंकलन के मुताबिक पूरे राज्य में भारी बारिश और बाढ़ से फसलों को नुकसान हुआ है। सबसे ज्यादा नुकसान एर्नाकुलम, तिरुअनंतपुरम, इडुक्की, कोझिकोड और अलाप्पुझा जिलों को हुआ है जहां करीब 1,039.9 हेक्टेयर में इलायची की फसल बर्बाद हो गई है।
देश में इस साल करीब 23,000 टन इलायची के उत्पादन का अनुमान था, लेकिन फसल के बर्बाद होने से अब इसमें कमी आ सकती है। जानकारों का कहना है कि उत्पादन में करीब 15-20 फीसदी की कमी आने का अनुमान है, वहीं इलायची की क्वालिटी पर भी असर पड़ने की आशंका है।....... आर एस राणा