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30 दिसंबर 2018

त्रिपुरा में एफसीआई पहली बार किसानों से समर्थन मूल्य पर धान खरीदेगी

प्रधानमंत्री ने वाराणसी में देश को समर्पित किया चावल अनुसंधान केंद्र

आर एस राणा
नई दिल्ली। शनिवार को अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी में चांदपुर स्थित अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान केन्द्र का उद्घाटन कर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने किसानों को बड़ा तोहफा दिया। इसके साथ ही दक्षिण एशिया क्षेत्रीय केन्द्र परिषद को भी राष्ट्र को समर्पित किया।
प्रधानमंत्री ने अनुसंधान केन्द्र के उद्घाटन के पूर्व इसकी प्रयोगशाला, पुस्तकालय आदि का निरीक्षण भी किया। इसके बाद उन्होंने कृषि विशेषज्ञों और केन्द्र के अफसरों से यहां होने वाले क्रिया-कलापों की जानकारी ली। प्रधानमंत्री गाजीपुर से सीधे यहा पहुंचे। 
चावल की बेहतर गुणत्तवा पर होगा शोध
केन्द्र में चावल की पैदावार और उसकी गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए शोध किया जायेगा। इस केन्द्र का फायदा पूर्वांचल ही नहीं बल्कि पूरे पूर्वोत्तर भारत से जुड़े राज्यों को भी मिलेगा। बिहार, असम, पश्चिम बंगाल, झारखंड आदि राज्यों में धान की खेती बड़ी मात्रा में होती है। इस अनुसंधान केन्द्र में काला नमक, राजरानी, बादशाह पसंद और ब्लैक चावल जैसी उत्कृष्ट प्रजातियों की उत्पादकता पर भी शोध किया जायेगा।
नई किस्म विकसित करने में मिलेगी मदद
पूर्वांचल के जलवायु एवं मिट्टी में उपजाऊ होने वाली सुगंधा, बासमती और मंसूरी समेत अन्य हाईब्रिड प्रजातियों की गुणवत्ता, पैदावार, स्वादिष्टता, खुशबूदार, पौष्टिकता आदि को बढ़ाने का काम इस केंद्र में किया जायेगा।। केन्द्र में विभिन्न किस्म के अच्छे जीन लेकर नई किस्म विकसित करने पर जोर दिया जायेगा। मधुमेह की बीमारी को ध्यान में रखते हुए यहां धान की गुणवत्ता में सुधार के लिए कार्य किया जाएगा। करीब 93 करोड़ रुपये की लागत से बना यह अनुसंधान केन्द्र पूर्वी भारत का सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय संस्थान है।......  आर एस राणा

28 दिसंबर 2018

गेहूं के साथ सरसों की बुवाई बढ़ी, दलहन और मोटे अनाजों की घटी

आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू रबी सीजन में जहां गेहूं और सरसों की बुवाई में बढ़ोतरी हुई है, वहीं दलहन और मोटे अनाजों की बुवाई में कमी आई है। देशभर में रबी फसलों की कुल बुवाई 3.51 फीसदी घटकर अभी तक 546.22 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई है जबकि पिछले साल इस समय तक 566.11 लाख हेक्टेयर में बुवाई हो चुकी थी।
कृषि मंत्रालय के अनुसार रबी की प्रमुख फसल गेहूं की बुवाई चालू सीजन में 28 दिसंबर तक 277.37 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक इसकी बुवाई केवल 274.16 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी।
रबी दलहन की बुवाई कम
रबी दलहन की बुवाई चालू सीजन में 6.36 फीसदी घटकर 140.67 लाख हैक्टेयर में ही हो पाई है जबकि पिछले साल इस समय तक 150.19 लाख हेक्टेयर में इनकी बुवाई हो चुकी थी। रबी दलहन की प्रमुख फसल चना की बुवाई 10.63 फीसदी घटकर अभी तक केवल 91.64 लाख हेक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक 102.54 लाख हेक्टेचर में बुवाई हो चुकी थी। अन्य दालों में मसूर की बुवाई 16.40 लाख हेक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल की समान अवधि में इसकी बुवाई 16.89 लाख हेक्टेयर में बुवाई हो चुकी थी। मटर की बुवाई जरुर पिछले साल के 9.13 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 9.97 लाख हेक्टेयर में हुई है। उड़द और मूंग की बुवाई चालू रबी में क्रमश: 5.87 और 3.08 लाख हेक्टेयर में हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक इनकी बुवाई क्रमश: 6.45 और 2.92 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी।
मोटे अनाजों की बुवाई में आई कमी
मोटे अनाजों की बुवाई चालू रबी में 17.07 फीसदी घटकर 42.22 लाख हेक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक 50.91 लाख हेक्टेयर में इनकी बुवाई हो चुकी थी। मोटे अनाजों में ज्वार की बुवाई चालू रबी में 22.46 लाख हेक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक 29.19 लाख हेक्टेयर में ज्वार की बुवाई हो चुकी थी। मक्का और जौ की बुवाई चालू रबी में क्रमश: 12.13 और 7.02 लाख हेक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक इनकी बुवाई क्रमश: 13.64 और 7.25 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी।
तिलहन में सरसों की बुवाई ज्यादा
तिलहन की बुवाई चालू रबी में 0.34 फीसदी घटकर 74.15 लाख हेक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक 74.40 लाख हेक्टेयर में बुवाई हो चुकी थी। रबी तिलहन की प्रमुख फसल सरसों की बुवाई पिछले साल के 63.82 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 65.79 लाख हेक्टेयर में हुई है। मूंगफली और असली की बुवाई चालू रबी में घटकर क्रमश: 3.29 और 3.10 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई है जबकि पिछले साल इस समय तक इनकी बुवाई क्रमश: 4.26 और 3.63 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी।
धान की रोपाई 28.18 फीसदी पिछड़ी
धान की रोपाई चालू रबी 11.81 लाख हेक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक 16.45 लाख हेक्टेयर में इसकी रोपाई हो चुकी थी।............   आर एस राणाा

भावांतर, कर्जमाफी समेत पट्टे पर खेती करने वालों पर केंद्र सरकार कर सकती है मेहरबानी

आर एस राणा
नई दिल्ली। पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को मिली शिकस्त के बाद अब मोदी सरकार किसानों को लुभाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती है। इसी के लिए प्रधानमंत्री ने 26 दिसंबर को अहम बैठक बुलाई थी। इस बैठक में भावांतर योजना और कर्ज माफी समेत पट्टे पर खेती करने वाले किसानों को भी लोन/बीमा का लाभ देने का ऐलान कर सकती है।
सूत्रों के अनुसार अब सरकार उन किसानों को भी फसल बीमा और कर्ज माफी का फायदा पहुंचाना चाहती है जिनके पास अपनी जमीन नहीं है यानि कि बटाईदार और छोटे किसानों को राहत देना है। पट्टे पर खेती करने वाले किसानों को भी लोन/बीमा का लाभ देने के लिए फसल बीमा योजना और किसान कर्ज देने वाली स्कीम में बदलाव कर सकती है।
कर्ज नहीं लेने वाले किसानों को भी लाभ देने की तैयारी
नए नियमों के तहत मंडी रजिस्ट्रेशन के आधार पर कर्ज देने की योजना है। कर्ज ना लेने वाले किसानों को भी ये लाभ देने की योजना है। हर ब्लॉक में क्रॉप कलेक्शन सेन्टर खोले जा सकते हैं जहां किसान तय एमएसपी पर अपनी पैदावार बेच सकेंगे। पीएमओ ने कृषि मंत्रालय, नीति आयोग से इस पर जानकारी मांगी है।
बटाईदार किसानों को भी मिलें लाभ
सरकारी आंकड़े के मुताबिक देश में बटाईदार किसान करीब 15 फीसदी हैं। हालांकि जानकारों का मानना है कि देश में बंटाईदार या टेनेंट किसानों की संख्या 30 फीसदी से ज्यादा है। आंध्रप्रदेश में करीब 50 फीसदी जबकि पंजाब में 25 फीसदी खेती बटाई पर होती है।
फसलों की खरीद के लिए कई मॉडलों पर विचार
केंद्र सरकार फसलों की खरीद के लिए भावांतर के तर्ज पर किसानों के खाते में पैसा जमा करा सकती है। इसमें एमएसपी और बाजार भाव का अंतर किसान को सीधे खाते में मिलेगा। इसके अलावा एक विकल्प ये है कि तेलंगाना मॉडल के तहत फसलों की बुवाई से पहले प्रति एकड़ तय राशि किसान को मिले। सूत्रों के अनुसार देशभर में इस योजना पर सालाना करीब 1 लाख करोड़ रुपये का खर्च आने का अनुमान है। इसके अलावा एक विकल्प यह है कि 1 लाख तक के फसल लोन माफ कर दिए जाए। इस पर करीब 3.3 लाख करोड़ रुपये का खर्च आने का अनुमान है।....  आर एस राणा

गुजरात में सूखे के कारण गेहूं के साथ मोटे अनाजों की बुवाई 25.30 फीसदी घटी

आर एस राणा
नई दिल्ली। खरीफ में मानसूनी बारिश सामान्य से कम होने के कारण गुजरात के कई जिलों में सूखे जैसे हालात होने का असर गेहूं के साथ मोटे अनाजों और अन्य फसलों की बुवाई पर पड़ा है। चालू रबी में राज्य में गेहूं और मोटे अनाजों की बुवाई में 25.30 फीसदी की भारी गिरावट दर्ज की गई है।
राज्य के कृषि निदेशालय के अनुसार 24 दिसंबर तक राज्य में अनाजों की बुवाई केवल 8.53 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई है जबकि पिछले साल इस समय तक 11.42 लाख हेक्टेयर में बुवाई हो चुकी थी। गेहूं की बुवाई चालू रबी में घटकर अभी तक केवल 7.30 लाख हेक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक 10.13 लाख हेक्टेयर में बुवाई हो चुकी थी।
ज्वार की बुवाई बढ़ी, मक्का की घटी
मोटे अनाजों में ज्वार की बुवाई चालू रबी में जरुर राज्य में बढ़कर 34,740 हेक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक राज्य में केवल 24,227 हेक्टेयर में ही हुई थी। मक्का की बुवाई चालू सीजन में घटकर राज्य में अभी तक 82,150 हेक्टेयर में ही हो पाई है जबकि पिछले साल इस समय तक 92,664 हेक्टेयर में बुवाई हो चुकी थी।
रबी दलहन की प्रमुख फसल चना की बुवाई पिछड़ी
दालों की बुवाई भी चालू रबी में घटकर राज्य में 24 दिसंबर तक 1,86,606 हेक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक राज्य में 3,13,582 हेक्टेयर में बुवाई हो चुकी थी। रबी दलहन की प्रमुख फसल चना की बुवाई चालू रबी में घटकर 1.66 लाख हेक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल की समान अवधि में 2.89 लाख हेक्टेयर में बुवाई हो चुकी थी।
रबी तिलहन की बुवाई कम
तिलहन की बुवाई भी चालू रबी में राज्य में पिछले साल के 2.20 लाख हेक्टेयर से घटकर 1.95 लाख हेक्टेयर में ही हुई है। रबी तिलहन की प्रमुख फसल सरसों की बुवाई चालू रबी में 1.93 लाख हेक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक राज्य में 2.18 लाख हेक्टेयर में इसकी बुवाई हो चुकी थी।
मसालों की बुवाई पिछले साल से घटी
मसालों में जीरा की बुवाई चालू सीजन में 3.21 लाख हेक्टेयर में और धनिया की 29,112 हेक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक जीरा की 3.69 लाख हेक्टेयर में और धनिया की 68,784 हेक्टेयर में हो चुकी थी। इसके अलावा अन्य मसालों में सौंफ की बुवाई जरुर पिछले साल के 35,868 हेक्टेयर से बढ़कर चालू सीजन में 40,800 हेक्टेयर में हुई है। चालू सीजन में आलू की बुवाई राज्य में 1.19 और प्याज की 24,873 हेक्टेयर में ही हुई है जोकि पिछले साल की समान अवधि की तुलना में कम है।............  आर एस राणा

दलहन निर्यात 141 फीसदी बढ़ने के बावजूद किसान को नहीं मिल रहा समर्थन मूल्य

आर एस राणा
नई दिल्ली। केंद्र सरकार द्वारा दलहन निर्यात पर इनसेंटिव देने से निर्यात में तो बढ़ोतरी हुई है लेकिन किसानों को उड़द, मूंग और अरहर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से 6,75 से 2,100 रुपये प्रति क्विंटल नीचे भाव पर ही बेचनी पड़ रही है।
कृषि मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सरकार मार्च 2018 से दलहन निर्यात पर 7 फीसदी का इनसेंटिव दे रही है, जिससे दलहन के निर्यात में बढ़ोतरी हुई है। चालू वित्त वर्ष 2018-19 के पहले सात महीनों अप्रैल से अक्टूबर के दौरान दालों का निर्यात 141 फीसदी बढ़कर 1.95 लाख टन का हुआ है जबकि पिछले वित्त वर्ष 2017-18 की समान अवधि में केवल 81,000 टन दालों का ही निर्यात हुआ था। अक्टूबर में 23,344 टन दालों का निर्यात हुआ है जबकि पिछले साल अक्टूबर में केवल 6,594 टन दालों का ही निर्यात हुआ था।
चना और मसूर को हो रहा है ज्यादा निर्यात
उन्होंने बताया कि दलहन में चना और मसूर का निर्यात मुख्यत: बंगलादेश, मिस्र, अमेरिका, सिंगापुर, नेपाल, भूटान, सऊदी अरब, मलेशिया और मालदीव को हुआ है। वित्त वर्ष 2017-18 में कुल 1.79 लाख टन दलहन का ही निर्यात हुआ था। केंद्र सरकार ने नवंबर 2017 में दलहन के निर्यात पर लगी रोक को हटाया था। 
उत्पादक मंडियों में भाव समर्थन मूल्य से नीचे
कर्नाटक की गुलबर्गा मंडी के दलहन कारोबारी चन्द्रशेखर एस नादर ने बताया कि मंडी में अरहर 4,600 से 5,000 रुपये और उड़द 4,400 से 4,800 रुपये प्रति क्विंटल बिक रही है जबकि केंद्र सरकार ने चालू खरीफ विपणन सीजन 2018-19 के लिए अरहर और उड़द का एमएसपी क्रमश: 5,675 और 5,600 रुपये प्रति क्विंटल तय किया हुआ है। राजस्थान की कोटा मंडी के दलहन कारोबारी भानू जैन ने बताया कि मंडी मूंग 4,800 से 5,400 रुपये प्रति क्विंटल बिक रही है जबकि मूंग का एमएसपी 6,975 रुपये प्रति क्विंटल है।
एमएसपी पर खरीद कम
नाफेड उत्पादक मंडियों से एमएसपी पर दालों की खरीद तो कर रही है लेकिन खरीद दैनिक आवक की तुलना में कम हो रही है जिसका असर भी कीमतों पर पड़ा है। नाफेड ने अनुसार चालू खरीफ में 22 दिसंबर तक एमएसपी पर 2,16,939 टन मूंग और 1,61,583 टन उड़द तथा 3,529 टन अरहर की खरीद की है। 
पिछले साल दलहन की रिकार्ड हुई थी पैदावार
कृषि मंत्रालय के अनुसार फसल सीजन 2017-18 में देश में दलहन का रिकार्ड उत्पादन 252.3 लाख टन का हुआ है जबकि इसके पिछले साल दालों का उत्पादन 231.3 लाख टन का ही हुआ था। मंत्रालय ने फसल सीजन 2018-19 में 240 लाख टन दलहन उत्पादन का लक्ष्य तय किया है जबकि खरीफ 2018-19 में 92.2 लाख टन दालों के उत्पादन का अनुमान है। ...............  आर एस राणा

महंगे दाम पर यूरिया खरीदने को मजबूर हैं राजस्थान के किसान

आर एस राणा
नई दिल्ली। राजस्थान में गेहूं की बुवाई हुए महीनेभर से ज्यादा होने के कारण किसान फसल में पानी तो दे रहे हैं, लेकिन यूरिया खाद नहीं मिलने से दूकानों के चक्कर काटने पर मजबूर हैं। यूरिया की सप्लाई कम होने का दुकानदार भी फायदा उठ रहे हैं। कई दुकानदार 270 रुपये का कट्टा 400 से 430 रुपये में बेच रहे हैं। राज्य के कई जिलों में खाद की कमी को लेकर किसान धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं साथ ही खाद लेने के लिए किसानों को घंटों लाईन में लगना पड़ रहा हैं तथा कई जगहों पर पुलिस के पहरे में यूरिया बिक रहा है।
गंगापुर सिटी के गांव सांवटा पिचानौत के किसान महेश सिंह ने आउटलुक को बताया कि सप्ताहभर पहले गेहूं की फसल में पानी लगा दिया था, लेकिन यूरिया खाद सोसायटी में नहीं मिला। अत: कई दिनों तक चक्कर लगाने के बाद बालकिशन खाद बीज भंडार से 430 रुपये में यूरिया का कट्टा खरीदना पड़ा जबकि इसका सरकारी भाव 270 रुपये है। दूकानदार ने पैमेंट तो उदई मोड़ स्थित दूकान पर ली तथा खाद गंगापुर सिटी की पुरानी अनाज मंडी के गोदाम से दिया। साथ ही मांगने पर भी रसीद नहीं दी। उन्होंने बताया कि दुकानों पर यूरिया खाद होने के बावजूद भी दूकानदार 400 से 430 रुपये में कट्टा बेच रहे हैं।
तय भाव से 60-160 रुपये अधिक दाम चुका रहे हैं किसान
किसान जगदीश सिंह पिचानौत ने बताया कि गेहूं की फसल में पानी लगाने का समय है इसलिए किसानों को यूरिया की खरीद तय भाव से 60 से 160 रुपये प्रति कट्टा ज्यादा दाम पर करनी पड़ रही है। गंगापुर सिटी की नादौती और हिंडौन तहसीलों में ज्यादातर प्राइवेट दुकानों पर यूरिया 330 से 430 रुपये प्रति कट्टा बेचा जा रहा है।  
गेहूं की फसल की सिंचाई तो कर दी, लेकिन खाद नहीं मिला
गेहूं की फसल में तीन दिन पहले पानी लगाया था, लेेकिन यूरिया खाद नहीं मिलने से राजस्थान के बारां जिले की किशनगंज तहसील के गांव गोवर्धनपूरा का किसान रामलाल हर रोज दो किलोमीटर दूर अभिषेक कृषि सेवा केंद्र पर इस आस में आता है कि आज तो उसे दो कट्टे यूरिया मिल ही जायेगा लेकिन दूकानदार को भी मालूम नहीं है कि कब तक खाद आयेगा। इसी तरह से किशनगंज तहसील के ही नया गांव का किसान विजय सिंह भी यूरिया के लिए हर रोज चार किलोमीटर दूर यूरिया लेने आता है, लेकिन दूकान पर ही खाद नहीं मिल रहा। कोटा जिले की तहसील सांगोद के गांव जलूरी के किसान मेगराज नागर को उम्मीद बंदी है कि अगले एक-दो दिन में उसे यूरिया मिल जायेगा।
किसान दूकानों के लगा रहे हैं चक्कर
गोवर्धनपूरा के किसान रामलाल ने बताया कि उसने अपनी दो एकड़ गेहूं की फसल में पानी तो लगा दिया है, लेकिन यूरिया खाद नहीं मिल पा रहा है दूकानदार भी नहीं बता पा रहा है कि कब तक खाद आयेगा। अगर दो-तीन दिन और खाद नहीं मिला तो फिर खेत में नमी कम हो जायेगी, और खाद नहीं डाल पायेगा। जिला बारां की तहसील किशनगंज के परनिया मेन रोड पर स्थित अभिषेक कृषि सेवा केंद्र के प्रबंधक देवकीनंदन अगवाल ने बताया कि पहली नवंबर से 21 दिसंबर तक उसके पास केवल 65 टन यूरिया आया है जबकि इस दौरान मांग करीब 110 से 115 टन की रही। अत: किसानों को यूरिया की आपूर्ति में परेशानी हो रही है। उन्होंने बताया कि उनके पास अगली खेप कब आयेगी, अभी इस बारे में कोई जानकारी नहीं है।
नवंबर से ही बनी हुई है परेशानी
कोटा जिला के बारां झालावाड़ रोड पर स्थित अग्रवाल फर्टिलाइजर के प्रबंधक अशोक अग्रवाल ने बताया कि पहली दिसंबर से अभी तक यूरिया नहीं आया है, जबकि नवंबर में भी केवल 36 टन यूरिया ही आया था। अत: मांग के मुकाबले यूरिया की आवक कम होने के कारण किसानों को परेशानी हो रही है। किसानों की लंबी लाईन लग जाती है जिस कारण पुलिस की मदद लेनी पड़ रही है। उन्होंने बताया कि आज 24 दिसंबर को यूरिया का रैक लग रहा है, अत: 25 दिसंबर को उसे खाद मिल जायेगा। उन्होंने कहा कि गेहूं की बुवाई को महीनाभर से ज्यादा हो गया है अत: आगे मांग में कमी आने का अनुमान है।
60 हजार टन अतिरिक्त यूरिया की मांग
सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री के निर्देश पर कृषि विभाग के प्रमुख शासन सचिव अभय कुमार दिल्ली आये थे और यहां केंद्रीय उर्वरक और रसायन मंत्रालय के सचिव से मुलाकात कर राज्य के लिए 60 हजार मीट्रिक टन यूरिया के अतिरिक्त आवंटन की मांग की। दिल्ली से लौटकर अभय कुमार ने यूरिया उत्पादक कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ भी बैठक की और चंबल फर्टिलाइजर तथा श्रीराम फर्टिलाइजर निर्देश दिया कि दोनों कंपनियां सड़क मार्ग से भी यूरिया की सप्लाई सुनिश्चित करें।............  आर एस राणा