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30 सितंबर 2018

मटर आयात पर रोक 31 दिसंबर 2018 तक, तीन महीने तक अवधि बढ़ाई

आर एस राणा
नई दिल्ली। खरीफ दलहन की नई फसल की आवक को देखते हुए केंद्र सरकार ने मटर के आयात पर लगी रोक की अवधि को तीन महीने बढ़ा दिया है। विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) द्वारा जारी अधिसचूना के अनुसार पीली मटर के साथ ही हरी मटर एवं अन्य किसी भी किस्म की मटर के आयात पर 31 दिसंबर 2018 तक पूरी तरह से रोक रहेगी।
केंद्र सरकार ने 25 अप्रैल को 30 जून 2018 तक मटर के आयात की सीमा एक लाख टन की तय की थी, उसके बाद इसको 2 जुलाई को बढ़ाकर सितंबर 2018 तक कर दिया था।
केंद्र सरकार आयात पर रोक की अवधि बढ़ा देने से पीली मटर के भाव में सुधार देखा गया। मुंबई में पीली मटर के भाव 150 रुपये बढ़कर 4,400 रुपये प्रति क्विंटल हो गए। आस्ट्रेलियाई चना के भाव बढ़कर दिल्ली में 4,400 रुपये और चना के भाव 4,300 से 4,325 रुपये प्रति क्विंटल हो गए।
केंद्र सरकार दलहन की कीमतों में सुधार लाना चाहती है, ताकि सरकार को एमएसपी पर खरीद कम करनी पड़े। इसके लिए नेफेड द्वारा बेची जा रही दालों में कम कर सकती है, वैसे भी नेफेड को अक्टूबर से खरीद दालों की एमएसपी पर खरीद भी शुरू करनी है। अत: नेफेड ने बिकवाली कम कर दी, और नई कृषि नीति में दालों के निर्यात के लिए कुछ कदम उठाये तो फिर घरेलू बाजार में दालों की कीमतों में सुधार बन सकता है। 
खरीफ दलहन में मूंग की आवक उत्पादक मंडियों में शुरू हो गई है, तथा उड़द की आवक अगले से सप्ताह से शुरू हो होने की उम्मीद है। चालू खरीफ में दालों की बुवाई 135.52 लाख हैक्टेयर में हुई है जिसमें अरहर की बुवाई 45.41 लाख हैक्टेयर में, उड़द की 38.61 लाख हैक्टेयर में तथा मूंग की बुवाई 32.65 लाख हैक्टेयर में हुई है। इसके अलावा अन्य दालों की बुवाई 18.85 लाख हैक्टेयर में हुई है।............... आर एस राणा

चीनी मिलों को क्यों जरुरत पड़ती है हर बार पैकेज की

आर एस राणा
नई दिल्ली। पहली अक्टूबर 2018 से गन्ने का नया पेराई सीजन (अक्टूबर-18 से सितंबर-19) शुरू हो जायेगा जबकि अमरोहा जिले के गांव डेराचक गांव के गन्ना किसान जोगेंद्र सिंह आर्य का धनौरा चीनी मिल पर अभी भी पौने दो लाख रुपये बकाया बचा हुआ है। बावजूद इसके कि केंद्र सरकार चीनी मिलों को पैकेज पर पैकेज दिए जा रही है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि किसानों के गन्ना मूल्य भुगतान के नाम पर चीनी मिलों को और कितने पैकेज की जरूरत होगी?
चीनी की कीमतों में सुधार के लिए उठाए कदम
सरकार ने चीनी की न्यूनतम बिक्री कीमत 29 रुपये प्रति किलोग्राम तय कर दी, साथ ही चीनी मिलों के लिए चीनी बिक्री की मासिक कोटा व्यवस्था लागू की गई है, जो पहले भी थी। इसके अलावा आयात पर 100 फीसदी शुल्क और निर्यात पर शून्य शुल्क कर दिया गया। इसके अलावा गन्ने के रस से सीधे बनने वाले एथनॉल के मूल्य में 25 फीसदी की बढ़ोतरी कर भाव 59.13 रुपये प्रति लीटर निर्धारित किया है जोकि वर्तमान में 47.13 रुपये प्रति लीटर है। इतना सब करने के बावजूद भी किसानों के गन्ना बकाया भुगतान में तेजी नहीं आ पाई।
किसान में बढ़ रही है नाराजगी
अमरोहा के किसान गुड्डू गुर्जर ने बताया कि धनौरा चीनी मिल ने अभी तक केवल 4 अप्रैल तक का ही भुगतान किया है, जबकि मिल ने 13 मई तक गन्ने की पेराई की थी। मिल पर अभी किसानों का करीब 57 करोड़ रुपये बकाया बचा हुआ है। इससे राज्य के किसान चीनी मिलों के साथ ही राज्य सरकार से भी नाराज हैं। हापुड़ के किसान परविंद्र डिल्लों ने बताया कि सिंभावली शुगर मिल पर अभी भी किसानों का करीब 40 से 45 फीसदी बकाया बचा हुआ है जबकि पेराई सीजन लगभग समाप्त हो चुका है।
रिकरवरी बढ़ने से मिलों को हुआ फायदा
उत्तर प्रदेश में गन्ने का एसएपी पेराई सीजन 2017-18 के लिए कॉमन वेरायटी का 315 रुपये प्रति क्विंटल था, जबकि चालू पेराई सीजन में गन्ने में औसतन रिकवरी की दर 10.85 फीसदी की आई है। उत्तर प्रदेश में चीनी के एक्स फैक्ट्री भाव 3,200 से 3,250 रुपये प्रति क्विंटल चल रहे हैं। चीनी के अलावा मिलें खोई, शीरा आदि अन्य उत्पादों से भी आमदनी कर रही है तो फिर गन्ना किसानों के भुगतान में ही देरी क्यों? मतलब साफ है, चीनी मिलों की नीयत में खोट है। उन्हें पता है कि केंद्र और राज्य सरकार को केवल किसानों के नाम पर ही ब्लैकमेल किया जा सकता है। इसी का चीनी उद्योग फायदा उठा रहा है।
चीनी मिलों पर अभी भी 13,500 करोड़ रुपये है बकाया
केंद्र सरकार ने जून में चीनी मिलों के लिए 8,500 करोड़ रुपये के पैकेज की घोषणा की थी तथा 26 सितंबर को फिर से सरकार ने चीनी उद्योग को सहायता देने के लिए 5,500 करोड़ रुपये के राहत पैकेज पर मोहर लगा दी। इसमें पेराई सीजन 2018-19 के लिए 50 लाख टन के निर्यात के लिए चीनी मिलों को प्रोत्साहन राशि एवं परिवहन सब्सिडी शामिल है। उधर देशभर की चीनी मिलों पर अभी भी किसानों का 13,500 करोड़ रुपये चालू पेराई सीजन का ही बकाया बचा हुआ है।
इससे पहले भी दिए गए हैं पैकेज
ऐसा पहली बार नहीं है जब चीनी उद्योग को पैकेज की जरूरत पड़ी हो। यूपीए सरकार भी 6,000 करोड़ रुपये एवं राजग सराकर के समय भी 1,500 करोड़ रुपये का पैकेज चीनी उद्योग को दिया जा चुका है, मगर गन्‍ना कि‍सानों के बकाए का संकट हर साल खड़ा हो जाता है।
किसान केवल चुनाव के समय आते हैं याद
अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति के संयोजक वीएम सिंह ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार गन्ना किसानों के नाम पर चीनी मिलों को नाजायज फायदा पहुंचा रहे हैं। चुनाव के समय हर पार्टी गन्ना मूल्य भुगतान को बड़ा मुद्दा तो बनाती है, लेकिन चुनाव के बाद उसे भूल जाती है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने भी चुनाव के समय 14 दिन में किसानों के भुगतान का वायदा तो किया था, लेकिन उस पर अमल नहीं किया। .......  आर एस राणा

चीनी निर्यात का पहले लक्ष्य ही पूरा नहीं, फिर और 50 लाख टन का क्या है आचित्य?

आर एस राणा
नई दिल्ली। चीनी निर्यात पर सब्सिडी के सहारे किसानों के भुगतान में तेजी लाने का दावा तो बहुत किया जा रहा है लेकिन हकीकत इसके उल्ट है। छह जून को मोदी कैबिनेट ने 20 लाख टन चीनी के निर्यात पर 5.50 रुपये प्रति क्विंटल गन्ने के फेयर ऐंड रिम्यूनरेटिव प्राइस (एफआरपी) पर सब्सिडी देने की घोषण की थी, लेकिन तीन महीने बीतने के बावजूद भी इसमें से मात्रा 4.5 से 5 लाख टन चीनी का ही निर्यात हो पाया है, जाहिर सी बात है किसानों के बकाया भुगतान में भी तेजी नहीं आ पाई। इसका एक कारण विश्व बाजार में चीनी के भाव नीचे होना भी है, ऐसे में पहली अक्टूबर से शुरू होने वाले पेराई सीजन के लिए केंद्र सरकार ने फिर से 50 लाख टन चीनी के निर्यात की अनुमति दे दी जोकि अभी दूर की कौड़ी नजर आता है।
आगामी पेराई सीजन के लिए 50 लाख टन निर्यात की अनुमति
केंद्र सरकार ने 26 सितंबर को 50 लाख टन चीनी निर्यात पर 13.88 रुपये प्रति क्विंटल की मदद गन्ने के एफआरपी पर देने की घोषणा कर दी। इसमें चीनी मिलों को परिवहन लागत भी 1,000 से 3,000 रुपये प्रति टन दूरी के हिसाब से दी जायेगी। मगर घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजार में चीनी के दाम में अंतर ज्यादा है, ऐसे में निर्यात में तेजी आयेगी, ऐसी उम्मीद बेमानी ही है।
विश्व बाजार में वर्तमान भाव पर निर्यात मुश्किल
इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (इस्मा) के डायरेक्टर जनरल अबिनाश वर्मा कहते हैं कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में चीनी के मौजूदा दाम पर चीनी का निर्यात मुश्किल है। विश्व बाजार में व्हाईट चीनी के भाव 315-320 डॉलर प्रति टन है जोकि रुपये के हिसाब से 2,283 से 2,320 रुपये प्रति क्विंटल होते हैं। उन्होंने बताया कि चालू सीजन में अंतरराष्ट्रीय बाजार में चीनी की उपलब्धता ज्यादा रही है, जिस कारण ब्राजील ने 70 से 80 लाख टन चीनी का उत्पादन कम करने का फैसला किया है। उधर पाकिस्तान में भी चालू पेराई सीजन में चीनी का उत्पादन कम होने का अनुमान है, जिस कारण आगामी दिनों में विश्व बाजार में चीनी के दाम सुधरने की उम्मीद है। पिछले साल पाकिस्तान ने 20 लाख टन चीनी का निर्यात किया था।
अबिनाश वर्मा ने बताया कि विश्व बाजार में चीनी के दाम में सुधार आता है तो 50 लाख टन नहीं तो फिर 30 लाख टन का निर्यात हो सकता है।
सरकार राहत पैकेज के नाम पर कर रही है नाटक
अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति के संयोजक वीएम सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार ने जून में 20 लाख टन चीनी निर्यात की अनुमति दी थी, लेकिन निर्यात केवल 4.5 से 5 लाख टन ही हुआ। नए पेराई सीजन के लिए 50 लाख टन के निर्यात की जो अनुमति दी है, यह केवल दिखावा मात्र है। सरकार अपनी नाकामियां को छिपाने के लिए राहत पे राहत पैकेज देने का नाटक तो कर रही है लेकिन इससे किसानों के बकाया भुगतान में तेजी नहीं आ रही। कैराना में हुए उपचुनाव के समय प्रधानमंत्री ने 10 दिनों में भुगतान का वायदा किया था, लेकिन 4 महीने बीतने के बावजूद भी भुगतान अटका हुआ है।............ आर एस राणा

कर्नाटक, तमिलनाडु और महाराष्ट्र से एमएसपी पर दालों की खरीद को केंद्र ने मंजूरी

आर एस राणा
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने कर्नाटक, तमिलनाडु और महाराष्ट्र से चालू खरीफ में प्राइस स्पोर्ट स्कीम (पीएसएस) के तहत दालों की खरीद को मंजूरी दे दी है। मध्य प्रदेश सरकार ने भी पीएसएस के तहत दालों की खरीद के लिए केंद्र से मंजूरी मांगी है, जिस पर जल्द ही फैसला होने की संभावना है।
अक्टूबर से शुरू हो जायेगी एमएसपी पर खरीद
कृषि मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि कर्नाटक, तमिलनाडु और महाराष्ट्र से चालू खरीफ में मूंग और उड़द की पीएसएस के तहत खरीद को मंजूरी दे दी है, तथा मध्य प्रदेश ने भी दालों की पीएसएस के तहत खरीद के लिए लिखा है, जिसे जल्दी ही मंजूरी दी जायेगी। उन्होंने बताया कि इन राज्यों में दालों की न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीद नेफेड राज्य सरकार की एजेंसियों के साथ मिलकर करेगी।
इन राज्यों से मूंग और उड़द की एमएसपी पर खरीद अक्टूबर में शुरू हो जायेगी। सूत्रों के अनुसार कर्नाटक से चालू खरीफ में 23,250 टन मूंग की पीएसएस के तहत खरीद को केंद्र सरकार ने मंजूरी थी, लेकिन राज्य सरकार ने इसे बढ़ाकर एक लाख टन करने की मांग की है।
मूंग के एमएसपी में ज्यादा बढ़ोतरी
केंद्र सरकार ने चालू खरीफ विपणन सीजन 2018-19 के लिए मूंग का एमएसपी 6,975 रुपये और उड़द का 5,600 रुपये प्रति क्विंटल तय किया हुआ है जबकि उत्पादक मंडियों में इनके दाम एमएसपी से काफी नीचे बने हुए हैं। मूंग के एमएसपी में जहां चालू खरीफ में 1,400 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की गई है, वहीं उड़द का एमएसपी 200 रुपये बढ़ाया है।
दालों के उत्पादन में कमी का अनुमान
पहले आरंभिक अनुमान के अनुसार दालों का उत्पादन चालू खरीफ सीजन 2018-19 में घटकर 92.2 लाख टन ही होने का अनुमान है जबकि फसल सीजन 2017-18 में 93.4 लाख टन दलहन का उत्पादन हुआ था। खरीफ की प्रमुख दलहन अरहर का उत्पादन पिछले साल के 42.5 लाख टन से घटकर 40.8 लाख टन तथा उड़द का पिछले साल के 28.4 लाख टन से घटकर 26.5 लाख टन ही होने का अनुमान है। हालांकि मूंग का उत्पादन चालू खरीफ में पिछले साल के 14.4 लाख टन से बढ़कर 15.8 लाख टन होने का अनुमान है............ आर एस राणा

26 सितंबर 2018

केंद्र ने चीनी उद्योग के लिए 5,500 करोड़ के पैकेज को दी मंजूरी, 50 लाख टन चीनी निर्यात में मदद

आर एस राणा
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने संकट से जूझ रहे चीनी उद्योग को सहायता देने के लिए 5,500 करोड़ रुपये के राहत पैकेज को मंजूरी दे दी। इसमें पेराई सीजन 2018-19 के लिए 50 लाख टन के निर्यात के लिए चीनी मिलों को प्रोत्साहन राशि एवं परिवहन सब्सिडी शामिल है।
बकाया भुगतान में मदद देने के लिए
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) की बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। यह कदम मिलों पर किसानों के बकाया 13,500 करोड़ रुपये के निपटान में मदद के लिए उठाया जा रहा है। चीनी उद्योग को संकट से उबारने के लिए यह दूसरा सरकारी वित्तीय पैकेज है। इससे पहले जून में सरकार ने 8,500 करोड़ रुपये के पैकेज की घोषणा की थी।
मिलों की तरफ से केंद्र सरकार किसानों के खाते में डालेगी राशि
चीनी के रिकार्ड उत्पादन अनुमान की स्थिति से निपटने के लिए खाद्य मंत्रालय ने गन्ने की उत्पादन लागत के असर को कम करने के लिए किसानों को पेराई सीजन 2018-19 के लिए उचित एवं लाभकारी मूल्य (एफआरपी) पर 13.88 रुपये प्रति क्विंटल की दर से सहायता राशि देने की सिफारिश की है। इसके तहत करीब 4,163 करोड़ रुपये का खर्च आयेगा। चालू पेराई सीजन के लिए यह राशि 5.50 रुपये प्रति क्विंटल है। केंद्र सरकार चीनी मिलों की तरफ से किसानों के खातों में यह राशि सीधे भेजेगी।
दूरी के हिसाब से परिवहन सब्सिडी
मंत्रालय ने बंदरगाह से 100 किलोमीटर में स्थित मिलों को 1,000 रुपये प्रति टन की सब्सिडी, जबकि तटीय राज्यों में बंदरगाह से 100 किलोमीटर से अधिक दूरी पर स्थित मिलों के लिए 2,500 रुपये प्रति टन और तटीय राज्यों के अलावा स्थित चीनी मिलों के लिए 3,000 रुपये प्रति टन की परिवहन सब्सिडी का प्रस्ताव किया है। परिवहन सब्सिडी का कुल खर्च 1,375 करोड़ रुपये आने का अनुमान है। 
चीनी का उत्पादन बढ़ने का अनुमान
चालू सीजन में गन्ने की बुवाई में बढ़ोतरी हुई है जबकि उत्पादक राज्यों में मानसूनी बारिश ठीक हुई है। ऐसे में पहली अक्टूबर 2018 से शुरू होने वाले पेराई सीजन (अक्टूबर-सितंबर) में चीनी का उत्पादन बढ़कर 355 लाख टन होने का अनुमान है जबकि चालू पेराई सीजन के 325 लाख टन से ज्यादा है। कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू सीजन में गन्ने की बुवाई बढ़कर 51.94 लाख हैक्टेयर में हुई है जोकि पिछले साल की समान अवधि के 49.86 लाख हैक्टेयर से ज्यादा है।
आगामी पेराई सीजन के लिए एफआरपी 275 रुपये
केंद्र सरकार ने गन्ना पेराई सीजन 2018-19 के लिए उचित एवं लाभकारी मूल्य (एफआरपी) 275 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है जोकि 10 फीसदी रिकवरी पर है। उत्तर भारत के राज्यों उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और उत्तराखंड की राज्य सरकारें स्टेट एडवाइजरी प्राइस (एसएपी) तय करती हैं, जोकि आमतौर पर एफआरपी से ज्यादा ही होता हैं।
न्यूनतम भाव तय करने के साथ ही कोटा प्रणाली लागू की
गन्ने के कीमतों में सुधार लाने के लिए चालू पेराई सीजन में केंद्र सरकार ने चीनी के न्यूनतम बिक्री भाव 29 रुपये प्रति किलो तय करने के साथ ही मिलों पर चीनी बेचने के लिए कोटा प्रणाली तय की। इसके अलावा जहां आयात पर शुल्क को बढ़ाकर 100 फीसदी किया, वहीं निर्यात शुल्क को भी शुन्य किया। इसके साथ ही चीनी मिलों को एथनॉल का उत्पादन बढ़ाने के लिए कर्ज मुक्त ऋण देने के साथ एक साल के लिए 30 लाख टन चीनी का बंपर स्टॉक बनाने को भी मंजूरी दी।............  आर एस राणा

खरीफ में रिकार्ड 14.15 करोड़ टन खाद्यान्न उत्पादन का अनुमान, चावल की पैदावार 992.4 लाख टन

आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू खरीफ सीजन में जहां देश के कई क्षेत्रों में सामान्य से कम बारिश हुई है, वहीं कुछ क्षेत्रों में बाढ़ और बेमौसम बारिश से फसलों को नुकसान होने की आशंका के बीच केंद्र सरकार ने चालू खरीफ सीजन 2018-19 में रिकार्ड 14.15 करोड़ टन खाद्यान्न के उत्पादन का पहला अनुमान जारी किया है।
चावल, मक्का का रिकार्ड उत्पादन 
केंद्रीय कृषि मंत्री राधामोहन सिंह ने जानकारी दी कि पिछले साल खरीफ सीजन 2017—18 में खाद्यान्न का 14.07 करोड़ टन का उत्पादन हुआ था। पहले आरंभिक अनुमान के अनुसार खरीफ सीजन 2018-19 में चावल का रिकार्ड उत्पादन 992.4 लाख टन होने का अनुमान है जबकि फसल सीजन 2017-18 में खरीफ में चावल का उत्पादन 975 लाख टन का हुआ था। इसी तरह से मक्का का उत्पादन भी चालू खरीफ सीजन में रिकार्ड 221.9 लाख टन होने का अनुमान है जबकि पिछले साल 202.4 लाख टन मक्का का उत्पादन हुआ था।
तिलहनों का उत्पादन बढ़ने का अनुमान
तिलहनों का उत्पादन चालू खरीफ सीजन में 221.9 लाख टन होने का अनुमान है जबकि पिछले साल खरीफ में तिलहनों का उत्पादन 209.96 लाख टन का ही हुआ था। गन्ने के उत्पादन का अनुमान साल 2018-19 में 3,838.9 लाख टन होने का अनुमान है जबकि पिछले साल गन्ने का 3,769.05 लाख टन का उत्पादन हुआ था।
बाजरा और ज्वार की पैदावार कम
चालू खरीफ में बाजरा का उत्पादन घटकर 77.7 लाख टन ही होने का अनुमान है जबकि पिछले साल 91.3 लाख टन का उत्पादन हुआ था। इसी तरह से ज्वार का उत्पादन भी पिछले साल के 21 लाख टन से घटकर 18.8 लाख टन ही होने का अनुमान है। रागी का उत्पादन चालू खरीफ में घटकर 16.8 लाख टन ही होने की संभावना है जबकि पिछले साल 19.8 लाख टन रागी का उत्पादन हुआ था। 
दलहन उत्पादन में कमी आने का अनुमान
पहले आरंभिक अनुमान के अनुसार दालों का उत्पादन चालू खरीफ सीजन 2018-19 में
घटकर 92.2 लाख टन ही होने का अनुमान है जबकि फसल सीजन 201718 में 93.4 लाख टन दलहन का उत्पादन हुआ था। खरीफ की प्रमुख दलहन अरहर का उत्पादन पिछले साल के 42.5 लाख टन से घटकर 40.8 लाख टन तथा उड़द का पिछले साल के 28.4 लाख टन से घटकर 26.5 लाख टन ही होने का अनुमान है। हालांकि मूंग का उत्पादन चालू खरीफ में पिछले साल के 14.4 लाख टन से बढ़कर 15.8 लाख टन होने का अनुमान है।
सोयाबीन का उत्पादन ज्यादा, मूंगफली का कम
चालू खरीफ में सोयाबीन का उत्पादन बढ़कर 134.59 लाख टन होने का अनुमान है जबकि पिछले साल इसका उत्पादन केवल 109.81 लाख टन का ही उत्पादन हुआ था। मूंगफली का उत्पादन चालू खरीफ में पिछले साल के 75.40 लाख टन से घटकर केवल 63.28 लाख टन ही होने का अनुमान है। केस्टर सीड का उत्पादन पिछले साल के 15.68 लाख टन से कम होकर 15.17 लाख टन ही होने का अनुमान है। 
कई राज्यों में हुई है सामान्य से कम बारिश
भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) के अनुसार चालू खरीफ सीजन में पहली जून से 25 सितंबर तक देशभर में सामान्य से 9 फीसदी बारिश कम हुई है। गुजरात में चालू खरीफ में सामान्य से 27 फीसदी कम, बिहार में 23 फीसदी कम, झारखंड में 26 फीसदी कम, पश्चिम बंगाल में 18 फीसदी कम, तमिलनाडु में 12 फीसदी कम, आंध्रप्रदेश में 10 फीसदी कम, मध्य प्रदेश में 7 फीसदी कम तथा हरियाणा और उत्तर प्रदेश में भी सामान्य से क्रमश: 8-8 फीसदी बारिश कम हुई है। पूर्वोत्तर भारत के कई राज्यों में भी सामान्य से कम बारिश हुई है। ..............  आर एस राणा

बेमौसम बारिश से खरीफ फसलों को नुकसान की आशंका, फसल की आवक में भी देरी संभव

आर एस राणा
नई दिल्ली। उत्तर भारत के साथ ही मध्य भारत के कई राज्यों में हो रही बेमौसम बारिश से खरीफ फसलों धान, कपास, बाजरा, मूंग, उड़द और सोयाबीन को नुकसान होने की आशंका है। पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और मध्य प्रदेश के कई जिलों में पिछले 24 घंटे में कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश हुई है।
बारिश से फसलों को नुकसान के साथ ही आवक में भी होगी देरी
पंजाब के कृषि सचिव के एस पन्नू ने बताया कि राज्य के कई जिलों में पिछले 24 घंटों से बारिश हुई है। हालांकि अभी तक नुकसान की खबर नहीं है लेकिन बारिश अगर जारी रही, तथा खेतों में पानी रुक गया और फिर हवा चल गई तो नुकसान होगा। उन्होंने बताया कि राज्य के कपास उत्पादक क्षेत्रों में बारिश कम हुई है, लेकिन धान के उत्पादक क्षेत्रों में बारिश ज्यादा हुई है।
उन्होंने बताया कि हाल ही में हुई बारिश से धान की नई फसल की आवक में भी देरी होने की आशंका है, जिस कारण धान की न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीद जोकि पहली अक्टूबर से शुरू होनी थी, उसमें भी देरी हो सकती है। राज्य से चालू खरीफ में 200 लाख टन धान की खरीद का लक्ष्य तय किया है। लुधियाना के किसान धर्मेंद्र गिल ने बताया कि बारिश से खेतों में पानी भर गया है, तथा हवा चलने से धान की फसल गिर गई है जिस कारण नुकसान बढ़ेगा।
जिन खेतों में पानी रुक जायेगा, वहां ज्यादा नुकसान की आशंका
हरियाणा के कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक जगराज दांडी ने बताया कि हाल ही में हो रही बारिश से राज्य में अभी तक फसलों को नुकसान के कोई आंकड़े नहीं आए हैं। उन्होंने बताया कि राज्य में शनिवार से बारिश हो रही है तथा मौसम विभाग ने आगे भी बारिश की चेतावनी जारी की है, अत: बारिश से जिन खेतों में पानी भर गया वहां नुकसान की ज्यादा आशंका है। राज्य में बाजरा, धान और कपास की फसल तैयार है, तथा कई जिलों में जहां धान और बाजरा की कटाई आरंभ हो चुकी है, वहीं कपास की फसल मंडियों में आ रही है।
बाजरा की क्वालिटी हो सकती है प्रभावित
हरियाणा के झज्जर जिले के किसान कृष्ण नेहरा ने बताया कि बाजरा की कटाई चल रही थी, लेकिन बारिश होने से कटाई रुक गई है। उन्होंने बताया कि लगातार हो रही बारिश से फसल की क्वालिटी प्रभावित होने की आशंका है, जिससे सरकारी एजेंसियां खरीदने में आना-कानी कर सकती हैं।
सोयाबीन के साथ दालों की फसल भी हो सकती है प्रभावित
उधर मध्य प्रदेश में सोयाबीन की फसल की कटाई चल रही है। नीमच में पिछले 24 घंटे के दौरान हुई बारिश से सोयाबीन की कटी हुई फसल को नुकसान होने की आशंका है, इसके अलावा पानी भरने से मूंग और उड़द की फसल को भी नुकसान की आशंका है। पूर्वी राजस्थान में भी कई क्षेत्रों में बारिश हुई है, जिससे बाजरा के साथ ही मूंग और मोठ की फसल प्रभावित होने की आशंका है।
उत्तराखंड और हिमाचल में तेजी बारिश की चेतावनी
भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) ने अगले 24 घंटे में उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के कई इलाकों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। पिछले 24 घंटों में उत्तराखंडख् हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और पूर्वी राजस्थान के अलावा पश्चिमी उत्तर प्रदेश और पश्मिची मध्य प्रदेश के कई इलाकों में जोरदार बारिश हुई है। मौसम विभाग के मुताबिक पंजाब में कल सामान्य से 20 गुना ज्यादा बारिश रिकॉर्ड की गई। जबकि हिमाचल प्रदेश में करीब 15 गुना ज्यादा बारिश और पूर्वी राजस्थान में सामान्य से करीब 7 गुना ज्यादा बारिश हुई है। मौसम विभाग के मुताबिक इन इलाकों में आज भी बारिश जारी रह सकती है।............. आर एस राणा