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06 मार्च 2019

पीएम-किसान योजना की दूसरी किस्त के लिए आधार नहीं होगा अनिवार्य

आर एस राणा
नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव की घोषणा से ठीक पहले सरकार ने किसानों को 'पीएम-किसान' योजना की दूसरी किस्त भी बिना आधार नंबर के देने का फैसला किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बृहस्पतिवार को हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में कृषि मंत्रालय के प्रस्ताव पर मुहर लगा दी गई। इसका फायदा देश के 12 करोड़ से अधिक लघु व सीमांत किसानों परिवारों को मिलेगा।
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) योजना की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसी महीने की 24 तारीख को गोरखपुर से की थी। कई राज्यों ने अपने किसानों की सूची भेजने के साथ केंद्र से आग्रह किया था कि उनके यहां आधार से जोड़ने में अभी विलंब हो सकता है। अत: आधार से जोड़ने में आ रही दिक्कतों और देरी को देखते हुए केंद्र सरकार ने योजना के पात्र लघु व सीमांत किसानों को आधार से जोड़ने की शर्त में छूट दी है।
कैबिनेट के फैसले की जानकारी देते हुए केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बताया कि किसानों के हित में सरकार ने यह फैसला लिया है। इसके तहत पहली किस्त के माफिक दूसरी किस्त के भुगतान में किसानों के नाम आधार से जोड़ने की शर्त हटा ली गई है। अत: दूसरी किस्त भी किसानों को बगैर आधार के दी जायेगी। 
अप्रैल में दूसरी किस्त देने की तैयारी
24 फरवरी को योजना की लांचिंग के समय प्रधानमंत्री ने एक करोड़ से अधिक किसानों के खाते में राशि जारी की थी। तथा बाकि किसानों को भी जल्द ही पहली किस्त जारी की जायेगी। केंद्र सरकार इस योजना की दूसरी किस्त अप्रैल में जारी करेगी, इसीलिए दूसरी किस्त में आधार की अनिवार्यता में छूट दी गई है। इस योजना से देशभर के 12 करोड़ से अधिक किसानों परिवारों को सालाना 6,000 रुपये तीन किस्तों 2,000-2,000 रुपये देने की योजना है।
पांच एकड़ तक वाले किसानों को मिल रहा है लाभ
उन सभी किसान परिवारों को इस स्कीम का फायदा मिलेगा जिनके पास पांच एकड़ तक जमीन है। 1 फरवरी, 2019 तक जिन किसानों के नाम राज्य के लैंड रिकॉर्ड्स में दिखेंगे, उन्हें इस स्कीम का फायदा मिलेगा। छोटे एवं सीमांत किसान परिवार की परिभाषा में वैसे परिवारों को शामिल किया गया है जिनमें पति-पत्नी और 18 वर्ष तक की उम्र के नाबालिग बच्चे हों और ये सभी सामूहिक रूप से दो हेक्टेयर यानी 5 एकड़ तक की जमीन पर खेती करते हों।..............  आर एस राणा

बकाया भुगतान के लिए केंद्र सरकार ने चीनी मिलों को 10,540 करोड़ रुपये के सॉफ्ट लोन को दी मंजूरी

आर एस राणा
नई दिल्ली। किसानों के बढ़ते बकाया भुगतान में तेजी लाने के लिए केंद्र सरकार ने चीनी मिलों को 10,540 करोड़ रुपये का सस्ता कर्ज देने की घोषणा की है। इसमें शर्त यह है कि जिन चीनी मिलों ने किसानों का 25 फीसदी गन्ने का बकाया भुगतान कर दिया है, उन्हें ही इसका फायदा मिलेगा।
पहली अक्टूबर से शुरू हुए चालू गन्ना पेराई सीजन (अक्टूबर से सितंबर) के फरवरी के आखिरी सप्ताह तक चीनी मिलों पर किसानों के बकाया की रकम बढ़कर 20,000 करोड़ रुपये को पार कर गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) की बैठक में इसको मंजूरी दी गई।  
पच्चीस फीसदी भुगतान वाली मिलों को मिलेगा सस्ता कर्ज
सीसीईए की बैठक के बाद केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि किसानों के बकाया भुगतान में तेजी लाने के लिए चीनी मिलों को सॉफ्ट लोन देने के लिए 10,540 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है। उन्होंने बताया कि उन्हीं चीनी मिलों को इसका लाभ मिलेगा, जो चालू पेराई सीजन 2018-19 में किसानों को 25 फीसदी का भुगतान कर चुकी होंगी।
उद्योग के अनुसार चीनी उत्पादन अनुमाम कम
केंद्र सरकार ने हाल ही में चीनी उद्योग के राहत देने के लिए चीनी के न्यूनतम बिक्री भाव (एमएसपी) को दो रुपये प्रति किलो बढ़ाकर 31 रुपये किलो कर दिया था। इससे चीनी मिलों को  बड़ी राहत मिली थी। उद्योग के अनुसार चालू गन्ना पेराई सीजन 2018-19 में चीनी का उत्पादन घटकर 307 लाख टन ही होने का अनुमान है जबकि पिछले साल रिकार्ड 325 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ था। देश में चीनी की सालाना खपत करीब 250 से 255 लाख टन की ही होती है। पहली अक्टूबर 2018 को शुरू हुए चालू गन्ना पेराई सीजन के समय चीनी मिलों के पास करीब 100 लाख टन से ज्यादा चीनी का बकाया स्टॉक बचा हुआ था।
इससे पहले भी चीनी मिलों को दी गई है राहत
इससे पहले भी केंद्र सरकार चीनी मिलों को कई तरह की राहत दे चुकी है। जून 2018 में केंद्र सरकार ने चीनी मिलों को 8,500 करोड़ रुपये का पैकेज देने की घोषणा की थी, इसमें 4,440 करोड़ रुपये चीनी मिलों को सस्ते कर्ज के रूप में एथेनॉल क्षमता के विकास के लिए दिए गए थे। उधर सितंबर 2018 में मिलों को राहत देने के लिए केंद्र सरकार ने एथेनॉल की कीमतों में भी बढ़ोतरी की थी। सीधे गन्ने के रस से बनने वाले एथेनॉल का भाव बढ़ाकर 59.19 रुपये प्रति लीटर तय किया था, जबकि बी-ग्रेड एथेनॉल का भाव 47.13 रुपये से बढ़ाकर 52.43 रुपये प्रति लीटर कर दिया था।..............  आर एस राणा

महाराष्ट्र के बैंको ने पीएम-किसान योजना का पैसा ऋण खातों में डाला, सरकार ने किसानों को देने के निर्देश दिए

आर एस राणा
नई दिल्ली। महाराष्ट्र के कई बैंकों ने राज्य के किसानों को मिली प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान योजना की पहली किस्त किसानों के ऋण खाते में डाल दी है, जिसे राज्य सरकार ने बैंकों को किसानों को पैसा देने का निर्देश दिया है।
राज्य के कृषि आयुक्त सुहास दिवासे के अनुसार जिन बैंकों ने किसानों के ऋण खातों में पीएम-किसान योजना की किस्त जमा कर दी है, उन बैंकों को सख्त निर्देश दिए हैं, साथ ही बैंकों को पत्र लिखा है कि जिन किसानों का पैसा ऋण खाते में जमा हो गया है, उनका पैसा वापिस दिया जाये।
बैंक ऑफ महाराष्ट्र के सहायक महाप्रबंधक के अनुसार सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि किसानों को पीएम-किसान योजना की राशि उन्हें मिलनी चाहिए। उन्होंने बताया कि पूरी बैंकिंग प्रणाली ऑनलाइन है, अत: यदि किसी किसान का बैंक खाता एनपीए में हैं, जो जमा किया गया पैसा आनलाइन प्रणाली के माध्यम से सीधा किसान के ऋण खाते में जमा हो जाता है। ऐसी स्थिति में कुछ बैंकों को इस समस्या का सामना करना पड़ा है। उन्होंने कहा कि सभी बैंकों को पीएम—किसान योजना का पैसा सीधे किसान को देने के लिए पत्र जारी किया गया है कि बैंक किसानों के ऋण खाते से पैसा निकाल कर किसानों को दे।
एक अन्य बैंक के अधिकारी के अनुसार बैंकिंग प्रणाली पूरी तरह से आनलाइन होने के कारण लगभग सभी राष्ट्रीयकृत बैंकों को इस समस्या का सामाना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने पीएम-किसान योजना में सहकारी बैंकों को शामिल नहीं किया है।
पात्र किसानों को बिना देरी मिलेगा पैसा
राज्य के नांदेड़, परभणी और नासिक जिलों में किसानों ने शिकायत की है कि पीएम-किसान योजना की राशि उन्हें नहीं मिली है, तथा बैंकों ने किसानों के ऋण खाते में यह राशि जमा कर दी है। कृषि आयुक्त ने कहा कि इसकी जांच की जा रही है तथा किसानों को जल्द ही यह पैसा दिया जायेगा। उन्होंने कहा कि यह आनलाइन प्रणाली के कारण हुआ है। कृषि आयुक्त ने कहा कि इस मामले को सुलझा लिया गया है तथा सभी पात्र किसानों को बिना किसी देरी के उनकी किस्तें मिलेंगी।
बैंक नहीं दे रहे हैं जानकारी
अहमदनगर जिले के माधे वडगांव के एक किसान बालासाहेब मंडे के अनुसार कोई भी हमें यह नहीं बता रहा है कि हमारे पैसे का क्या हुआ है? हम जानकारी लेने के लिए बैंक गए थे, लेकिन बैंक अधिकारी कह रहे हैं कि सरकार ने हमारा पैसा वापस ले लिया है। मेरे गांव के किसी भी किसान को कोई राशि नहीं मिली है।......  आर एस राणा

बारिश सामान्य से 9 फीसदी कम होने के बावजूद खाद्यान्न का रिकार्ड 28.13 करोड़ अन उत्पादन का अनुमान

आर एस राणा
नई दिल्ली। खरीफ सीजन में देशभर में सामान्य से 9 फीसदी बारिश कम हुई थी, जिससे देश के कई राज्यों गुजरात, महाराष्ट्र, ओडिशा और बिहार आदि ने कई जिलों में सूखा घोषित किया हुआ है। इसके बावजूद भी चालू फसल सीजन 2018-19 में देश में खाद्यान्न का रिकार्ड 28.13 करोड़ टन का उत्पादन होने का अनुमान है जबकि पिछले साल 2017-18 में 27.74 करोड़ टन खाद्यान्न का उत्पादन हुआ था।
कृषि मंत्रालय द्वारा जारी दूसरे अग्रिम अनुमान के अनुसार फसल सीजन 2018-19 में देश में चावल का रिकार्ड 11.56 करोड़ टन उत्पादन होने का अनुमान है जोकि फसल सीजन 2017-18 के दूसरे अनुमान 11.10 करोड़ टन से ज्यादा है। गेहूं का उत्पादन भी चालू रबी में रिकार्ड 991 लाख टन होने का अनुमान है जबकि पिछले साल गेहूं का 971 लाख टन का उत्पादन हुआ था।
दलहन में चना और अरहर का उत्पादन अनुमान कम
मंत्रालय द्वारा जारी दूसरे अग्रिम अनुमान के मुताबिक दालों का उत्पादन फसल सीजन 2018-19 में 240.2 लाख टन होने का अनुमान है जोकि फसल सीजन 2017-18 के दूसरे अग्रिम अनुमान 239.5 लाख टन से ज्यादा है। रबी दलहन की प्रमुख फसल चना का उत्पादन चालू रबी में घटकर 103.2 लाख टन ही होने का अनुमान है जोकि पिछले साल के दूसरे अग्रिम अनुमान 111 लाख टन से कम है। अरहर का उत्पादन भी पिछले साल के 40.2 लाख टन से घटकर 36.8 लाख टन होने का अनुमान है। उड़द का उत्पादन चालू फसल सीजन 2018-19 के दूसरे अग्रिम अनुमान में बढ़कर 33.6 लाख टन होने का अनुमान है जबकि पिछले साल 32.3 लाख टन का ही उत्पादन हुआ था। इसी तरह से मूंग का उत्पादन भी पिछले साल के 17.4 लाख टन से बढ़कर 24.1 लाख अन होने का अनुमान है। मसूर का उत्पादन चालू रबी में 15.3 लाख टन होने का अनुमान है।
ज्वार के साथ ही बाजरा के उत्पादन घटने की आशंका
मोटे अनाजों में ज्वार का उत्पादन चालू फसल सीजन 2018-19 के दूसरे अग्रिम अनुमान में घटकर 37.5 लाख टन ही होने का अनुमान है जबकि पिछले साल मोटे अनाजों का उत्पादन 46.6 लाख टन का हुआ था। बाजरा का उत्पादन भी पिछले साल के 92.6 लाख टन से घटकर 74.6 लाख टन ही होने का अनुमान है। मक्का का उत्पादन चालू फसल सीजन में 278 लाख टन होने का अनुमान है जबकि पिछले साल देश में 271.4 लाख टन का उत्पादन ही हुआ था। जौ का उत्पादन चालू रबी में घटकर 19.2 लाख टन ही होने का अनुमान है जबकि पिछले साल इसका उत्पादन 19.9 लाख टन का हुआ था।
सरसों, सोयाबीन का उत्पादन अनुमान ज्यादा, मूंगफली का कम
दूसरे आरंभिक अनुमान के अनुसार फसल सीजन 2018-19 में तिलहन का उत्पादन बढ़कर 315.02 लाख टन होने का अनुमान है जबकि पिछले साल देश में 298.82 लाख टन का उत्पादन हुआ था। तिलहन की प्रमुख फसल सरसों का उत्पादन चालू रबी में पिछले साल के 75.40 लाख टन से बढ़कर 83.97 लाख टन होने का अनुमान है। इसी तरह से सोयाबीन का उत्पादन भी चालू फसल सीजन 2018-19 के दूसरे अग्रिम अनुमान में बढ़कर 136.89 लाख टन होने का अनुमान है जबकि पिछले साल 113.90 लाख टन का उत्पादन हुआ था। मूंगफली का उत्पादन जरुर पिछले साल के 82.17 लाख टन से घटकर 69.70 लाख टन ही होने का अनुमान है। 
कपास के साथ गन्ने का उत्पादन अनुमान ज्यादा
कपास का उत्पादन चालू फसल सीजन में 315.02 लाख गांठ (एक गांठ-170 किलोग्राम) होने का अनुमान है जबकि पिछले साल 298.82 लाख गांठ से ज्यादा है। गन्ने का उत्पादन पिछले साल के 3,532.25 लाख टन से बढ़कर चालू फसल सीजन 2018-19 में बढ़कर 3,808.34 लाख टन होने का अनुमान है।.....  आर एस राणा

27 फ़रवरी 2019

सरसों का उत्पादन 19 फीसदी ज्यादा होने का अनुमान-उद्योग

आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू रबी में सरसों की बुवाई में हुई बढ़ोतरी से उत्पादन 18.88 फीसदी बढ़कर 85 लाख टन होने का अनुमान है जबकि पिछले साल देश में 71.50 लाख टन का उत्पादन ही हुआ था।
साल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एसईए) के आरंभिक अनुमान के अनुसार चालू रबी सीजन में प्रमुख उत्पादक राज्य राजस्थान में सरसों का उत्पादन बढ़कर 33.75 लाख टन होने का अनुमान है जबकि पिछले साल राज्य में 25 लाख टन का ही उत्पादन हुआ था। उत्तर प्रदेश में चालू रबी में सरसों का उत्पादन 14.90 लाख टन होने का अनुमान है जबकि पिछले साल राज्य में केवल 12.50 लाख टन का ही उत्पादन हुआ था।
अन्य राज्यों में उत्पादन बढ़ने का अनुमान
अन्य राज्यों में पंजाब और हरियाणा में सरसों का उत्पादन 8 लाख टन होने का अनुमान है जबकि पिछले साल इन राज्य में 7.75 लाख टन सरसों का उत्पादन हुआ था। मध्य प्रदेश में सरसों का उत्पादन पिछले साल के 8.25 लाख टन से बढ़कर 10.15 लाख टन होने का अनुमान है। गुजरात और पश्चिम बंगाल में चालू रबी में सरसों का उत्पादन क्रमश: 3.45 और 5.50 लाख टन होने का अनुमान है जबकि पिछले साल इन राज्यों में क्रमश: 3.50 और 4.50 लाख टन का उत्पादन हुआ था। अन्य राज्यों में सरसों का उत्पादन चालू रबी में बढ़कर 9 लाख टन होने का अनुमान है जबकि पिछले साल अन्य राज्यों में 8.50 लाख टन का उत्पादन ही हुआ था।
बुवाई में हुई बढ़ोतरी
कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू रबी में सरसों की बुवाई बढ़कर 69.36 लाख हेक्टेयर में हुई है जबकि पिछले साल की समान अवधि में इसकी बुवाई 67.05 लाख हेक्टेयर में बुवाई हुई थी। प्रमुख उत्पादक राज्य राजस्थान में सरसों की बुवाई बढ़कर 24.77 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक केवल 20.88 लाख हेक्टेयर में ही बुवाई हो पाई थी।............  आर एस राणा

पूर्वोत्तर राज्यों में पीएम-किसान योजना का लाभ पट्टे पर खेती करने वाले किसानों को देने की तैयारी

आर एस राणा
नई दिल्ली। पूर्वोत्तर राज्यों में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि को लागू करने के लिए पट्टे पर खेती कर रहे किसानों का आंकड़ा तैयार करने को कहा गया है। पूर्वोतर राज्यों में जमीनों पर किसानों का मालिकाना हक नहीं होने के कारण इन राज्यों में पीएम-किसान योजना को लागू करने में दिक्कत आ रही थी, इसलिए केंद्र सरकार ने नियमों में छूट देने का ऐलान किया है।
कृषि मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार पूर्वोत्तर राज्यों में किसानों का मालिकाना हक नहीं होने के कारण पीएम-किसान योजना को लागू करने में आ परेशानी को दूर करने के लिए पट्टे पर खेती करने वाले किसानों का आंकड़ा तैयार करने के लिए राज्य सरकारों को कहा गया है। उन्होंने बताया कि इन राज्यों में जमीन के वितरण का काम सामुदायिक समितियां करती हैं।
पात्र किसानों को सामुदायिक समिति के प्रमुख के देना होगा हलफनामा
उन्होंने बताया कि सभी राज्यों में सामुदायिक समितियों के साथ मिलकर किसानों का आंकड़ा तैयार करने को कहा गया है। इन राज्यों के आदिवासी किसानों के नाम भी अभी तक पीएम-किसान योजना के पात्र व्यक्तियों की सूची में दर्ज नहीं हो पाए हैं। आदिवासी किसानों के लिए भी केंद्र सरकार कोई रास्ता निकालेगी। पट्टे पर खेती कर रहे किसानों के लिए केंद्र सरकार ने नियमों में छूट दी है। पात्र किसानों को सामुदायिक समितियों के प्रमुखों के साथ पट्टे वाली जमीन का हलफनामा देना होगा, उसके आधार पर ही उसके खाते में राशि जमा की जायेगी।
कुछके राज्यों में आ रही है अड़चन
उन्होंने बताया कि मणिपुर के साथ ही अन्य राज्यों में इसे लागू करने की प्रक्रिया तेज तो कर दी है, लेकिन कुछ राज्यों में इसमें अड़चन भी आ रही है। सभी राज्यों को पात्र किसानों का ब्यौरा जल्द देने को कहा गया है, साथ ही ब्यौरा मिलने के बाद इन सभी किसानों का जमीनी स्तर पर भी सत्यापन भी किया जा रहा है, ताकि समय पर उनको पीएम-योजना सम्मान निधि की राशि मिल सके।
एक करोड़ से ज्यादा किसानों को मिल चुकी है पहली किस्त
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि को प्रधानमंत्री ने 24 फरवरी को लांच किया था, तथा देशभर के एक करोड़ से ज्यादा किसानों को पहली किस्त मिल चुकी है। इस योजना से देश के 12 करोड़ से अधिक लघू एवं सीमांत किसानों जिसके पास पांच एकड़ तक खेती की जमीन है, को सालाना 6,000 रुपये देने की योजना है।
बजट में की थी घोषणा
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने 2019-20 के अंतरिम बजट में छोटे और सीमान्त किसानों के लिए प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) योजना की घोषणा की थी। इस योजना का लाभ पांच एकड़ तक जोत वाले किसानों को मिलेगा। योजना के तहत 6,000 रुपये छोटे किसानों के खातों में तीन किस्तों 2,000-2,000 रुपये डाले जाएंग..............  आर एस राणा

केस्टर सीड का उत्पादन 20 फीसदी घटने का अनुमान-उद्योग

आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू फसल सीजन 2018-19 में केस्टर सीड के उत्पादन में 20 फीसदी की गिरावट आकर कुल उत्पादन 11.26 लाख टन होने का अनुमान है जबकि पिछले साल 14.16 लाख टन का उत्पादन हुआ था।
सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एसईए) के अनुसार चालू फसल सीजन में केस्टर सीड की बुवाई में 6.64 फीसदी की कमी आकर कुल बुवाई 7.69 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी, जबकि पिछले साल 8.21 लाख हेक्टेयर में केस्टर सीड की बुवाई थी। बुवाई में कमी आने के साथ प्रमुख उत्पादक राज्य गुजरात में मानूसनी बारिश सामान्य से कम होने के कारण प्रति हेक्टेयर उत्पादकता में भी कमी आई है। गुजरात में चालू सीजन में केस्टर सीड का उत्पादन घटकर 9.34 लाख टन ही होने का अनुमान है जबकि पिछले साल राज्य में 12 लाख टन का उत्पादन हुआ था।
अन्य राज्यों में उत्पादन घटने का अनुमान
एसईए के अनुसार अन्य राज्यों राजस्थान में चालू फसल सीजन में केस्टर सीड का उत्पादन 1.47 लाख टी ही होने का अनुमान है जबकि पिछले साल राज्य में 1.66 लाख टन का उत्पादन हुआ था। आंध्रप्रदेश और तेलंगाना में केस्टर सीड का उत्पादन घटकर 0.23 लाख टन ही होने का अनुमान है जबकि पिछले साल राज्य में 0.27 लाख टन का उत्पादन हुआ था।
केस्टर तेल के निर्यात में आई कमी
चालू वित्त वर्ष 2018-19 के पहले 9 महीनों अप्रैल से दिसंबर के दौरान केस्टर तेल का निर्यात 4,011.92 करोड़ रुपये मूल्य का 4,31,238 टन का ही हुआ है जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में इसका निर्यात 4,89,256 टन का हुआ था। वित्त वर्ष 2017-18 के दौरान केस्टर तेल का कुल निर्यात 6,345.24 करोड़ रुपये का 6,51,326 टन का हुआ था।
भाव में आगे बनेगी और तेजी
उत्पादक मंडियों में केस्टर सीड की दैनिक आवक 50 से 55 हजार बोरी की हो रही है तथा यार्ड में भाव 1,030 से 1,040 रुपये प्रति 20 किलो चल रहे है। व्यापारियों के अनुसार केस्टर सीड की दैनिक आवकों का दबाव अप्रैल तक बना रह सकता है, उसके बाद आवक कम हो जायेगी। जिससे आगे इसकी कीमतों में और तेजी आने का अनुमान है। केस्टर तेल के निर्यात सौदे 1,075 से 1,080 डॉलर प्रति टन की दर से हो रहे हैं।...... आर एस राणा