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05 मई 2018

ग्वार गम उत्पादों का निर्यात 74 हजार टन ज्यादा, भाव में बड़ी तेजी नहीं

04 मई 2018

गेहूं की खरीद 281 लाख टन से ज्यादा, बारिश से कई मंडियों में भीगा

चीनी पर सेस लगाने और एथेनॉल पर जीएसटी घटाने पर नहीं बनी स​हमति

आर एस राणा
नई दिल्ली। जीएसटी काउंसिल की अहम बैठक से पहले अधिकारियों की बैठक में चीनी पर 5 फीसदी सेस लगाने ओर एथेनॉल पर जीएसटी की दर को 18 फीसदी से घटाकर 5 फीसदी करने पर सहमति नहीं बन सकी। ऐसे में 4 मई को प्रस्तावित जीएसटी काउंसिल की बैठक में इन पर फैसला होने की संभावना कम है।
सूत्रों के अनुसार 4 मई को होने वाली जीएसटी काउंसिल की बैठक से पहले चीनी पर 5 फीसदी सेस और एथेनॉल पर जीएसटी कम करने पर अधिकारियों की सहमति नहीं बन पाई। जिससे यह मामला अभी टल सकता है। ऐसे में सवाल यह भी है कि केंद्र सरकार ने 5.50 रुपये प्रति क्विंटल की दर से जो सब्सिडी देने की घोषणा की है, उसके लिए फंड कहां से आयेगा।
चीनी में गिरावट जारी
घरेलू बाजार में चीनी में मांग काफी कमजोर है जबकि मिलों के पास बंपर स्टॉक होने से बिकवाली का दबाव बना हुआ है। गुरुवार को उत्तर प्रदेश में चीनी के एक्स फैक्ट्री भाव घटकर 2,600 से 2,700 रुपये और महाराष्ट्र में 2,500 से 2,600 रुपये प्रति क्विंटल रहे। दिल्ली में चीनी के भाव इस दौरान 2,900 रुपये प्रति क्विंटल रहे। कमजोर मांग से आगे इसके भाव में ओर भी गिरावट आने का अनुमान है।
मंत्रियों के समूह ने दिया था सुझाव
चीनी की कीमतों में गिरावट रोकने के लिए चीनी पर सेस लगाने और एथेनॉल पर जीएसटी को कम करने का सुझाव मंत्रियों के समूह ने दिया था। गन्ना किसानों के बकाया भुगतान की समस्या का हल करने के लिए केंद्र सरकार ने मंत्रियों के समूह का गठन किया था, जिसकी हाल ही में एक बैठक हुई थी।
केंद्र द्वारा उठाए कदम नाकाफी
घरेलू बाजार में चीनी की कीमतों में चल रही गिरावट को रोकने के लिए केंद्र सरकार पहले भी कई कदम उठा चुकी है, यह अलग बात है कि अभी तक उठाये गए कदमों से चीनी के भाव में सुधार आने के बजाए गिरावट ही आई है। सबसे पहले केंद्र सरकार ने चीनी के आयात को रोकने के लिए आयात शुल्क को 50 फीसदी से बढ़कर 100 फीसदी किया, उसके बाद निर्यात शुल्क को 20 फीसदी से घटकर शून्य किया। साथ ही 20 लाख टन चीनी के निर्यात की भी अनुमति दी लेकिन विश्व बाजार में भाव कम होने के कारण निर्यात नहीं हो रहा है।.........  आर एस राणा

चीनी का उत्पादन 310 लाख टन से ज्यादा, किसानों का बकाया भी रिकार्ड स्तर पर

आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू गन्ना पेराई सीजन 2017-18 में पहली अक्टूबर-17 से अप्रैल के आखिर तक जहां चीनी का उत्पादन बढ़कर रिकार्ड 310.37 लाख टन को हो गया है वहीं चीनी मिलों पर किसानों का बकाया भी बढ़कर करीब 20,000 हजार करोड़ रुपये हो गया है। देशभर में अभी भी करीब 130 चीनी मिलों में पेराई चल रही है ऐसे में उत्पादन बढ़कर 315-320 लाख टन होने का अनुमान है, साथ ही किसानों का बकाया भी बढ़ेगा।
इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (इस्मा) के अनुसार उत्तर प्रदेश में अभी करीब 80 चीनी मिलों में और महाराष्ट्र में 15 मिलों में पेराई चल रही है। हालांकि इनमें से कुछ मिलों में पेराई लगभग बंद होने वाली है लेकिन कुछ चीनी मिलों में मध्य मई तक पेराई जारी रह सकती है। अत: चीनी उत्पादन में बढ़ोतरी के साथ ही किसानों के बकाया की राशि में ओर भी बढ़ोतरी होने का अनुमान है।
देशभर की चीनी मिलों पर किसानों के बाकया की राशि बढ़कर करीब 20,000 करोड़ रुपये हो गई है जोकि अभी तक की सर्वाधिक है। कुल बकाया राशि में सबसे ज्यादा उत्तर प्रदेश की चीनी मिलों पर 12,500 करोड़ रुपये से ज्यादा है। किसानों को समय से भुगतान नहीं मिलने से भारी आर्थिक दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। 
इस्मा के अनुसार चालू पेराई सीजन में महाराष्ट्र में 106.50 लाख टन चीनी का उत्पादन हो चुका है जबकि उत्तर प्रदेश में चीनी का उत्पादन बढ़कर 112 लाख टन का हो चुका है। कर्नाटक में चीनी का उत्पादन चालू पेराई सीजन में अभी तक 36.30 लाख टन का हो चुका है। इसके अलावा पंजाब में 8 लाख टन, बिहार में 7.50 लाख टन और हरियाणा में 7.25 लाख टन चीनी का उत्पादन हो चुका है। बिहार में लगभग चीनी मिलों में पेराई बंद हो चुकी है जबकि हरयिाणा और पंजाब में कुछेक मिलों में पेराई सीमित मात्रा में अभी चल रही है।.....  आर एस राणा

सरकार ही समर्थन मूल्य से नीचे बेच रही है दालें, तो किसानों को कैसे मिलेगा उचित भाव

आर एस राणा
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ही जब सार्वजनिक कंपनियों के माध्यम से न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से नीचे भाव पर दालें बेचेगी तो फिर किसानों से समर्थन मूल्य पर व्यापारी क्यों खरीदेंगे? अत: मजबूरीवश किसानों को उत्पादक मंडियों में दालें समर्थन मूल्य से 1,500 से 2,200 रुपये प्रति​ क्विंटल नीचे भाव पर बेचनी पड़ रही हैं।
नेफेड एमएसपी से नीचे बेच रही है दालें
केंद्रीय पूल में दलहन का सबसे ज्यादा स्टॉक नेफेड के पास है, तथा नेफेड आंधप्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटका की मंडियों में मूंग 3,201 से 4,112 रुपये प्रति क्विंटल की दर से बच रही है जबकि केंद्र सरकार ने मूंग का एमएसपी 5,575 रुपये प्रति क्विंटल तय किया हुआ है। इसी तरह से नेफेड ने उड़द 3,275 से 3,307 रुपये प्रति क्विंटल की दर से बेची है जबकि उड़द का एमएसपी 5,400 रुपये प्रति क्विंटल है।
केंद्रीय पूल में दलहन का बंपर स्टॉक
नेफेड ने चालू रबी में एमएसपी पर 3.51 लाख टन चना की, 13,821 टन मसूर की और 8,381 टन उड़द की खरीद की है। इसके अलावा खरीफ अरहर की नेफेड ने 7.66 लाख टन की खरीद की हुई है। नेफेड के पास खरीफ सीजन में खरीदी गई अन्य दालों का स्टॉक भी है। सूत्रों के अनुसार नेफेड और अन्य एजेंसियों के पास दालों का 20 लाख टन से ज्यादा का बंपर स्टॉक जमा है जब​कि भंडारण की सुविधा पर्याप्त नहीं होने के कारण खरीदी गई दालों की बिक्री भी साथ ही साथ की जा रही है जिस कारण मंडियों में दालों के भाव में सुधार नहीं आ रहा है।
सभी दलहन के भाव एमएसपी से नीचे
उत्पादक मंडियों में सभी दालों के एमएसपी से नीचे बने हुए हैं। केंद्र सरकार ने चना का एमएसपी 4,400 रुपये प्रति क्विंटल तय किया हुआ है जबकि मंडियों में इसके भाव घटकर 3,200 से 3,300 रुपये प्रति क्विंटल रह गए हैं। इसी तरह से मसूर का एमएसपी 4,250 रुपये प्रति क्विंटल है जबकि कई राज्यों की मंडियों में इसके भाव घटकर नीचे में 3,000 रुपये प्रति क्विंटल तक आ गए हैं।
केंद्र द्वारा उठाए गए कदम नाकाफी
घरेलू बाजार में दालों की कीमतों में सुधार लाने के लिए केंद्र सरकार ने मसूर के आयात पर 30 फीसदी का आयात शुल्क, चना के आयात पर 60 फीसदी का आयात शुल्क तथा मटर के आयात पर मात्रात्मक प्रतिबंध लगाया हुआ है। आयातक जून तक केवल एक लाख टन मटर का ही आयात कर सकेंगे। इसके अलावा अरहर, मूंग और उड़द के आयात पर भी मात्रात्मक प्रतिबंध सरकार लगा चुकी है। साथ ही दलहन के निर्यात की अनुमति एवं चना दाल के निर्यात पर निर्यातकों को 7 फीसदी इनसेंटिव भी देने की घोषणा कर चुकी है। इन सब के बावजूद भाव में लगातार मंदा ही बना हुआ है।
बंपर उत्पादन बना किसानों के लिए मुसिबत
चालू फसल सीजन 2017-18 में दलहन का रिकार्ड उत्पादन किसानों के लिए घाटे का सौदा साबित हो रहा है। कृषि मंत्रालय के दूसरे आरंभिक अनुमान के अनुसार फसल सीजन 2017-18 में दालों का 239.5 लाख टन उत्पादन होने का अनुमान है जबकि इसके पिछले साल 231.3 लाख टन का उत्पादन हुआ था।............  आर एस राणा

गन्ना किसानों को 5.50 रुपये की दर से मिलेगी सब्सिडी

आर एस राणा
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने गन्ना किसानों के बकाया भुगतान को चुकता करने के लिए 5.50 रुपये प्रति क्विंटल की दर से सब्सिडी देने को मंजूरी दे दी है। किसानों को प्रोडक्शन लिंक्ड सब्सिडी दी जायेगी। चीनी मिलों पर किसानों के बकाया की राशि बढ़कर करीब 20,000 करोड़ रुपये के करीब पहुंच चुकी है।
बुधवार को हुई कैबिनेट की बैठक में इस पर फैसला लिया गया। गन्ना किसानों के बकाया भुगतान की समस्या का हल करने के लिए केंद्र सरकार ने मंत्रियों के समूह का गठन किया था, तथा मंत्रियों के समूह ने भी सब्सिडी देने की सिफारिश की थी।
पहली अक्टूबर 2017 से शुरू हुए चालू पेराई सीजन 2017-18 में अभी तक चीनी मिलों पर किसानों के बकाया की राशि बढ़कर 20,000 करोड़ के करीब पहुंच चुकी है तथा इसमें सबसे ज्यादा बकाया उत्तर प्रदेश की चीनी मिलों पर 12,526 करोड़ रुपये है। उत्तर प्रदेश के बाद सबसे ज्यादा बकाया की राशि महाराष्ट्र और कर्नाटका की चीनी मिलों पर है।
इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (इस्मा) के अनुसार चालू पेराई सीजन में पहली अक्टूबर 2017 से मध्य अप्रैल तक चीनी का रिकार्ड उत्पादन 299.80 लाख टन हो चुका है जबकि अभी भी चीनी मिलों में पेराई चल रही है। ऐसे में चालू पेराई सीजन में चीनी का रिकार्ड 310 से 315 लाख टन उत्पादन होने का अनुमान है जबकि पिछले साल केवल 203 लाख टन का ही उत्पादन हुआ था।.............   आर एस राणा

02 मई 2018

गेहूं की सरकारी खरीद 270 लाख टन के पार, कई राज्यों में लिफ्टिंग की दिक्कत

आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू रबी विपणन सीजन 2018-19 में गेहूं की समर्थन मूल्य पर खरीद बढ़कर 270.40 लाख टन की हो गई है जोकि पिछले साल की समान अवधि के 241.43 लाख टन से ज्यादा है। पंजाब के साथ ही हरियाणा की मंडियों से लिफ्टिंग की गति धीमी होने के कारण किसानों के साथ ही व्यापारियों को भी परेशानी उठानी पड़ रही है।
पंजाब से खरीद बढ़ी
भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के अनुसार चालू रबी में अभी तक एमएसपी पर 270.40 लाख टन गेहूं की खरीद हो चुकी है। प्रमुख उत्पादक राज्यों पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश से जहां खरीद में बढ़ोतरी हुई है, वहीं मध्य प्रदेश से खरीद पिछड़ी है। पंजाब से चालू रबी में खरीद बढ़कर 115.23 लाख टन की हो चुकी है जबकि पिछले साल की समान अवधि में राज्य से 107.56 लाख टन की खरीद ही हुई थी। चालू रबी में राज्य से खरीद का लक्ष्य 119 लाख टन का तय किया है।
हरियाणा में तय लक्ष्य से ज्यादा हो चुकी है खरीद 
इसी तरह से हरियाणा से चालू रबी में गेहूं की खरीद बढ़कर 79.95 लाख टन की हो चुकी है जोकि तय लक्ष्य 74 लाख टन से भी ज्यादा है। पिछले रबी विपणन सीजन में राज्य से 74.23 लाख टन गेहूं की खरीद हुई थी। उत्तर प्रदेश से चालू सीजन में गेहूं की खरीद बढ़कर 17.23 लाख टन की हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक राज्य की मंडियों से समर्थन मूल्य पर केवल 11.49 लाख टन की ही खरीद हो पाई थी। चालू सीजन में उत्तर प्रदेश से खरीद का लक्ष्य 40 लाख टन का तय किया हुआ है।
मध्य प्रदेश से खरीद में आई है कमी
मध्य प्रदेश से गेहूं की सरकारी खरीद पिछले साल की तुलना में पिछड़ी है। राज्य की मंडियों से एमएसपी पर अभी तक केवल 47.80 लाख टन गेहूं ही खरीदा गया है जबकि पिछले साल इस समय तक राज्य की मंडियों से 49.66 लाख टन की खरीद हो चुकी थी। राज्य से खरीद का लक्ष्य 67 लाख टन का है। उधर राजस्थान से खरीद पिछले साल के 6.99 लाख टन के मुकाबले बढ़कर चालू रबी में 9.46 लाख टन की हो चुकी है।
उठाव की गति धीमी
पंजाब के साथ ही हरियाणा की मंडियों से लिफ्टिंग कम हो रही है। कैथल मंडी के गेहूं व्यापारी रामनिवास खुरानिया ने बताया कि चालू रबी में मंडी से 10 लाख क्विंटल की खरीद हो चुकी है लेकिन उठाव केवल 5 लाख क्विंटल का ही हो पाया है। पंजाब के मोगा जिले की मंडियों से 7 लाख टन से ज्यादा गेहूं की खरीद हो चुकी है जबकि अभी तक उठाव केवल 4 लाख टन टन का ही हुआ है।
खरीद का लक्ष्य 320 लाख टन
चालू रबी में केंद्र सरकार ने गेहूं की खरीद का लक्ष्य 320 लाख टन का तय किया है जबकि पिछले रबी विपणन सीजन में 308 लाख टन की ही खरीद हुई थी।..............  आर एस राणा