16 अक्टूबर 2013
गेहूं का एमएसपी 1,450 रुपये घोषित होने की संभावना
आर एस राणा नई दिल्ली | Oct 16, 2013, 00:04AM IST
सीएसीपी की सिफारिश से दोगुनी वृद्धि हो सकती है गेहूं के एमएसपी में
रबी विपणन सीजन 2014-15 के लिए केंद्र सरकार गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 1,450 रुपये प्रति क्विंटल तय कर सकती है।
कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (सीएसीपी) ने गेहूं के एमएसपी में केवल 50 रुपये की बढ़ोतरी की सिफारिश कर दाम 1,400 रुपये प्रति क्विंटल तय करने की सिफारिश की थी लेकिन इसके उलट कृषि मंत्रालय ने एमएसपी में 100 रुपये की बढ़ोतरी की सिफारिश की है।
चुनावी वर्ष को देखते हुए केंद्र सरकार किसानों को नाराज नहीं करना चाहती इसलिए कृषि मंत्रालय की सिफारिशों को तरजीह दिए जाने की संभावना है। कृषि मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बिजनेस भास्कर को बताया कि 17 अक्टूबर को प्रस्तावित कैबिनेट कमेटी की बैठक में विपणन सीजन 2014-15 के लिए रबी फसलों के एमएसपी पर फैसला हो सकता है।
कृषि मंत्रालय की सिफारिशों के आधार पर गेहूं का एमएसपी 100 रुपये बढ़ाकर 1,450 रुपये प्रति क्विंटल तय करने का प्रस्ताव किया गया है जबकि अन्य रबी फसलों चना, सरसों, मसूर, जौ और सनफ्लावर के एमएसपी में बढ़ोतरी सीएसीपी की सिफारिशों के आधार पर करने का प्रस्ताव है।
उन्होंने बताया कि सीएसीपी ने गेहूं का भंडार ज्यादा होने का हवाला देकर रबी विपणन सीजन 2013-14 के लिए गेहूं का एमएसपी नहीं बढ़ाने की सिफारिश की थी, लेकिन कृषि मंत्रालय की सिफारिशों से एमएसपी में 65 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी हुई थी।
उन्होंने बताया कि रबी दलहन की प्रमुख फसल चना के एमएसपी में सीएसीपी ने 100 रुपये की बढ़ोतरी का दाम 3,100 रुपये प्रति क्विंटल तय करने की सिफारिश की है।
हालांकि कृषि मंत्रालय ने इसके एमएसपी में भी 200 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की सिफारिश की थी लेकिन अंतिम नोट में सीएसीपी की सिफारिश को शामिल किया गया है। इसी तरह से मसूर के एमएसपी में सीएसीपी ने 50 रुपये बढ़ाकर 2,950 रुपये प्रति क्विंटल तय करने की सिफारिश की है। हालांकि कृषि मंत्रालय ने इसके एमएसपी में भी 200 रुपये की बढ़ोतरी की सिफारिश की थी।
उन्होंने बताया कि रबी तिलहनों की प्रमुख फसल सरसों के एमएसपी में सीएसीपी ने 50 रुपये की बढ़ोतरी कर भाव 3,050 रुपये प्रति क्विंटल तय करने की सिफारिश की है। हालांकि कृषि मंत्रालय सरसों के एमएसपी में भी 150 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की सिफारिश की थी लेकिन अंतिम नोट में सीएसीपी की सिफारिशों को शामिल किया गया है।
रबी सीजन में मोटे अनाजों की प्रमुख फसल जौ और तिलहन की फसल सनफ्लावर के एमएसपी में बढ़ोतरी की सिफारिशों पर सीएसीपी और कृषि मंत्रालय की राय समान है। जौ के एमएसपी में दोनों ने 120 रुपये की बढ़ोतरी कर भाव 1,100 रुपये प्रति क्विंटल तय करने की सिफारिश की गई है। सनफ्लॉवर के एमएसपी को 200 रुपये बढ़ाकर 3,000 रुपये प्रति क्विंटल तय करने की सिफारिश की है। (Business Bhaskar)
एथनॉल बिक्री से चीनी मिलों को राहत की आस
चीनी के कम भाव होने के कारण मिलों के सामने वित्तीय कठिनाई
चीनी के काफी नीचे भाव होने के कारण वित्तीय कठिनाई के दौर से गुजर रही चीनी मिलें गन्ने की पेराई करके एथनॉल का उत्पादन करके कुछ राहत पाने की कोशिश कर रहे हैं। सरकार क्रूड ऑयल आयात का खर्च घटाने के लिए ऑयल मार्केटिंग कंपनियों पर बायोफ्यूल का मिश्रण करने के लिए दबाव बना रही है।
क्रूड ऑयल के आयात पर हर साल करीब 20 अरब डॉलर से भी ज्यादा विदेशी मुद्रा खर्च हो रही है। इससे सरकार का करेंट एकाउंट डेफिशिट (सीएडी) रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुका है।
अगर सरकार अपने लक्ष्य के अनुसार पेट्रोल में पांच फीसदी एथनॉल का मिश्रण करने का अभियान पूरा कर पाती है तो उसे एक अरब डॉलर की बचत हो सकती है। सरकार ने छह साल पहले एथनॉल का मिश्रण करने की शुरूआत की थी।
यह लक्ष्य वर्ष 2013-14 तक हासिल होता है तो चीनी मिलों को अपनी आय सुधारने में मदद मिल सकती है। भारत चीनी उत्पादन में दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा देश है। लेकिन यहां के उत्पादन में बार-बार भारी उतार-चढ़ाव आता है।
भारतीय मिलें चीनी उत्पादन के बाय-प्रोडक्ट के रूप में शीरे का उत्पादन करती हैं। अगर इसका उत्पादन बढ़ता है तो चीनी के उत्पादन में स्थिरता आएगी। इससे भारत में चीनी के आयात और निर्यात की स्थिति बार-बार नहीं बदलेगी।
मुंबई स्थित आईसीआईसीआई डायरेक्टर के एनालिस्ट संजय मन्याल ने कहा कि तेल कंपनियों ने गन्ने का पेराई सीजन शुरू होने से पहले एथनॉल खरीद के लिए टेंडर जारी किए हैं। इस साल एथनॉल के मूल्य को लेकर भी कोई विवाद नहीं है। इस साल पांच फीसदी एथनॉल मिश्रण का लक्ष्य इस साल हासिल किया जा सकता है।
प्राइवेट फर्म एथनॉल इंडिया के चीफ कंसल्टेंट दीपक देसाई का कहना है कि तेल कंपनियों को पिछले साल से ज्यादा एथनॉल मूल्य देने में कोई कठिनाई नहीं होनी चाहिए क्योंकि उन्हें क्रूड ऑयल कहीं ज्यादा मूल्य पर आयात करना पड़ रहा है। पिछले टेंडर के अनुसार मिलें 38 रुपये प्रति लीटर के मूल्य पर एथनॉल की सप्लाई कर रही हैं। जबकि आयातित पेट्रोल 46 रुपये प्रति लीटर पड़ रहा है। (Business Bhaskar)
Gold surges most in over two weeks on seasonal demand
New Delhi, Oct 16. Gold gained the most in over two
weeks in the bullion market today on increased buying by
stockists and retail customers for the ongoing festival and
marriage season, amid volatile trade in global markets.
Gold prices surged by Rs 650 to Rs 31,200 per ten gram
on heavy purchases by stockists and retailers for the marriage
season and approaching 'Diwali' festival.
Silver followed suit and rose by Rs 230 to Rs 47,280 per
kg on increased buying by industrial units and coin makers.
Silver coins shot up by Rs 2,000 to Rs 85,000 for buying
and Rs 86,000 for selling of 100 pieces. Silver coins normally
used for pooja on Diwali and gifting purpose in marriages.
A volatile trade in global markets as Senators resumed
talks to avoid US default and end a partial government
shutdown further influenced the sentiment.
Gold in London, which normally sets price trend on the
domestic front, remained uncertain and fell 0.2 per cent to
USD 1,279.28 an ounce after reaching USD 1,251.85 yesterday.
On the domestic front, gold of 99.9 and 99.5 per cent
purity surged by Rs 650 each to Rs 31,200 and Rs 31,000 per
ten gram. Sovereign held unchanged at Rs 25,100 per piece of
eight gram.
Silver ready rose by Rs 230 to Rs 47,280 per kg and
weekly-based delivery by Rs 1,200 to Rs 47,950 on increased
buying by speculators.
14 अक्टूबर 2013
Gold surges on firm global trend, festive buying
New Delhi, Oct 14. Gold prices jumped up by Rs 575
to Rs 30,775 per ten gram in the national capital today on
increased buying by retail customers for the ongoing marriage
and festival season amid a firming global trend.
Silver followed suit and advanced by Rs 680 to Rs 47,570
per kg on emergence of buying by industrial units and coin
manufacturers.
Traders said the precious metals remained in demand for
the ongoing festivals and marriage season, while silver rose
on industrial units and coin makers demand.
They said amid firming global trend gold traded higher and
recent plunge also increased physical demand.
Gold in London, which normally sets price trend on the
domestic front, rose by 0.4 per cent to USD 1,276.66 an
ounce and silver by 0.1 per cent to USD 21.35 an ounce.
On the national front, gold of 99.9 and 99.5 per cent
purity surged by Rs 575 each to Rs 30,775 and Rs 30,575 per
ten gram respectively. Sovereign advanced by Rs 100 to Rs
25,100 per piece of eight gram.
Silver ready spurted by Rs 680 to Rs 47,570 per kg and
weekly-based delivery by Rs 80 to Rs 47,270 per kg. However,
silver coins held steady at Rs 84,000 for buying and Rs 85,000
for selling of 100 pieces.
एनएसईएल प्रबंधन ने अन्य विभागों को रखा अंधेरे में
नैशनल स्पॉट एक्सचेंज लिमिटेड (एनएसईएल) के प्रबंधन ने जानबूझकर एक्सचेंज के विभिन्न विभागों को अंधेरे में रखा। गोदाम रसीद बनाने, क्लियरिंग और निपटान व्यवस्था का सिस्टम बिल्कुल स्वतंत्र था और इनके द्वारा तैयार आंकड़ों का नियमित आधार पर मिलान नहीं किया गया।
एक वरिष्ठ नियामकीय अधिकारी ने कहा, 'एक समन्वित व्यवस्था स्टॉफ को सचेत कर देती है और गोदाम के स्टॉक और कारोबार में अंतर के बारे में सभी को पता चल जाता है। लेकिन इसमें एक विभाग को यह नहीं पता था कि दूसरा विभाग क्या कर रहा है, इसलिए स्टॉक में इतनी भारी कमी होने के बावजूद इस पर लंबे समय तक ध्यान नहीं दिया गया। चुनिंदा लोगों को छोड़कर किसी को वास्तविक स्थिति के बारे में नहीं पता था।Ó
निवेशकों को एक्सचेंज के गोदामों में अपर्याप्त स्टॉक के बारे में दो महीने पहले पता चला। इसके बाद हुए स्टॉक ऑडिट में एनएसईएल के गोदामों में 70 से 80 फीसदी स्टॉक कम मिला। फॉरेंसिक ऑडिटर की रिपोर्ट के मुताबिक, 'ऐसा लगता है कि एनएसईएल में स्वतंत्र सिस्टम था, जिसमें महत्त्वपूर्ण आंकड़ों का भी आदान-प्रदान नहीं होता था।
त्योहारी मांग से भी नहीं बढ़ेंगे इलायची के दाम
इलायची की पैदावार बढऩे की संभावना से भाव पर दबाव रहने के आसार
सर्दियों के साथ ही त्योहारी मांग से इलायची की खपत में तो बढ़ोतरी होगी लेकिन पैदावार ज्यादा होने से कीमतों में तेजी की संभावना नहीं है। चालू सीजन में इलायची की पैदावार करीब 22 फीसदी बढ़कर लगभग 21,000-22,000 टन होने का अनुमान है। उधर, ग्वाटेमाला में भी नई इलायची की आवक शुरू हो गई है तथा पैदावार पिछले साल से ज्यादा ही होने का अनुमान है।
स्मैक्स एजेंसी के मैनेजिंग डायरेक्टर मूलराज भीमजी रुबारल ने बताया कि चालू सीजन में इलायची की पैदावार बढ़कर 21,000-22,000 टन होने का अनुमान है जबकि पिछले साल पैदावार 18,000 टन की हुई थी। उत्पादक क्षेत्रों में इलायची की तीसरी तुड़ाई शुरू होने वाली है, जिससे बोल्ड क्वालिटी (8 से 8.5 एमएम) के मालों की आवक ज्यादा होगी। इस समय साप्ताहिक आवक बढ़कर चार से पांच लाख किलो की हो गई है तथा नीलामी केंद्रों पर इलायची के भाव 586 से 785 रुपये प्रति किलो चल रहे हैं।
अग्रवाल स्पाइस के प्रबंधक अरुण अग्रवाल ने बताया कि चालू वित्त वर्ष 2013-14 के पहले छह महीनों (अप्रैल से सितंबर) के दौरान करीब 2,200 टन इलायची का निर्यात हो चुका है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय इलायची के दाम 9 से 14.5 डॉलर प्रति किलो चल रहे हैं जबकि ग्वाटेमाला की इलायची का भाव 4 से 13 डॉलर प्रति किलो है।
भारत के मुकाबले ग्वाटेमाला की इलायची की क्वालिटी हल्की है इसलिए भारत से निर्यात मांग अच्छी है। त्योहारी सीजन शुरू होने के कारण घरेलू मांग भी अच्छी बनी हुई है, लेकिन उपलब्धता ज्यादा होने से कीमतों में तेजी की संभावना नहीं है। उधर, ग्वाटेमाला में नई फसल की आवक शुरू हो गई है निर्यात नवंबर-दिसंबर डिलीवरी के सौदे कर रहे हैं। ग्वाटेमाला में इलायची की पैदावार बढ़कर 33,000-34,000 टन होने का अनुमान है।
इलायची के थोक कारोबारी अशोक पारिख ने बताया कि इलायची की घरेलू खपत सालाना लगभग 14,000 टन की होती है जबकि चालू वित्त वर्ष 2013-14 में करीब 4,000 टन निर्यात होने का अनुमान है।
ऐसे में नई फसल के समय करीब 3,000-4,000 टन इलायची का बकाया स्टॉक बच जायेगा। उन्होंने बताया कि चौथी तुड़ाई में बोल्ड मालों की आवक ज्यादा रहेगी तथा त्योहारी सीजन शुरू होने से मसाला निर्माताओं की मांग भी बढ़ेगी, इससे कीमतों में हल्का सुधार तो सकता है लेकिन तेजी नहीं।
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर महीने भर में इलायची की कीमतों में 8.8 फीसदी की गिरावट आ चुकी है। 12 सितंबर को नवंबर महीने के वायदा अनुबंध में इलायची का भाव 810 रुपये प्रति किलो था जबकि शनिवार को भाव घटकर 738 रुपये प्रति किलो रह गया। (Business Bhaskar....R S Rana)
ओएमएसएस के गेहूं मूल्य की होगी नियमित समीक्षा
आर एस राणा नई दिल्ली | Oct 14, 2013, 04:04AM IST
मकसद - ओएमएसएस में गेहूं की बिक्री को रफ्तार देने के लिए उठाया कदम
सरकारी प्लान
सचिवों की कमेटी गेहूं के बिक्री भाव व बाजार मूल्य पर नजर रखेगी
हर हफ्ते ईजीओएम को मूल्य समीक्षा रिपोर्ट सौंपी जाएगी
ईजीओएम बिक्री मूल्य के बारे में करेगा समुचित फैसला
राज्यवार बिक्री शुरू होने पर भी उठाव में तेजी नहीं
23 सितंबर से केवल 84,260 टन गेहूं की बिक्री हो पाई
सरकार पांच मंत्रालय सचिवों की कमेटी बनाएगी हर हफ्ते समीक्षा के लिए
केंद्र सरकार ने खुले बाजार बिक्री योजना (ओएमएसएस) के तहत रोलर फ्लोर मिलों को बेचे जाने वाले गेहूं की हर सप्ताह समीक्षा करने की योजना बनाई है। इसकी समीक्षा के लिए पांच सचिवों की कमेटी का गठन किया जायेगा। कमेटी हर सप्ताह ओएमएसएस के तहत गेहूं के बिक्री भाव और खुले बाजार में प्रचलित भाव की समीक्षा कर अपनी रिपोर्ट मंत्रियों के अधिकार प्राप्त समूह (ईजीओएम) का सौंपेगी।
खाद्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बिजनेस भास्कर को बताया कि ओएमएसएस के तहत गेहूं के बिक्री भाव की समीक्षा करने के लिए सचिव स्तर की कमेटी बनाई जायेगी, इसका गठन आगामी सप्ताह में होने की संभावना है।
इस कमेटी में वित्त सचिव, योजना आयोग के सचिव, कृषि और उपभोक्ता मामले मंत्रालय के सचिव के साथ ही खाद्य सचिव होंगे।
कमेटी ओएमएसएस के तहत गेहूं के बिक्री भाव और हाजिर भाव की समीक्षा के अलावा पविहन खर्च आदि की समीक्षा करके अपनी नियमित रिपोर्ट ईजोओएम को सौंपेगी। ईजीओएम ओएमएसएस के तहत गेहूं
के बिक्री भाव के मामले में समुचित फैसला करेगी।
उन्होंने बताया कि ओएमएसएस के तहत गेहूं की बिक्री राज्यवार करने के बावजूद उठाव में तेजी नहीं आ रही है। सरकार ने 23 सितंबर को गेहूं की बिक्री राज्यवार करने का फैसला लिया था। उसके बाद से अभी तक केवल 84,260 टन गेहूं की बिक्री हो पाई है।
इसमें सबसे ज्यादा गेहूं की खरीद दिल्ली की फ्लोर मिलों ने 21,000 टन, पंजाब की फ्लोर मिलों ने 15,570 टन, हरियाणा की फ्लोर मिलों ने 10,632 टन, तमिलनाडु की फ्लोर मिलों ने 10,850 टन और राजस्थान की फ्लोर मिलों ने 1,050 टन तथा चंडीगढ़ की फ्लोर मिलों ने 3,195 टन गेहूं की खरीद की है। ओएमएसएस के तहत अभी
तक केवल 1.97 लाख टन गेहूं की बिक्री हुई है।
ओएमएसएस के तहत गेहूं खरीदने के लिए दिल्ली की फ्लोर मिलों के लिए निविदा भरने का न्यूनतम दाम 1,538 रुपये, मध्य प्रदेश में 1,617 रुपये, राजस्थान में 1,566 रुपये, उत्तर प्रदेश में 1,582 रुपये प्रति क्विंटल है।
अन्य राज्यों में महाराष्ट्र की रोलर फ्लोर मिलों के लिए निविदा भरने का न्यूनतम दाम 1,681 रुपये, तमिलनाडु में 1,725 रुपये, कर्नाटक में 1,753 रुपये, केरल में 1,780 रुपये, बिहार में 1,638 रुपये, उत्तराखंड में 1,548 रुपये, झारखंड में 1,681 रुपये और
उड़ीसा के लिए 1,698 रुपये तय किया गया है।
आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) की 21 जून को ओएमएसएस के तहत 95 लाख टन गेहूं बेचने का फैसला किया था। इसके तहत 85 लाख टन गेहूं की बिक्री बल्क कंज्यूमर को और 10 लाख टन की बिक्री स्मॉल ट्रेडर्स को करनी है। केंद्रीय पूल में पहली सितंबर को 589.33 लाख टन खाद्यान्न का स्टॉक मौजूद था, इसमें 383.60 लाख टन गेहूं और 205.73 लाख टन चावल का स्टॉक जमा है।(Business Bhaskar......R S Rana)
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