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02 नवंबर 2018

उत्तर प्रदेश में गन्ने के एसएपी में देरी, राज्य में दो मिलों ने की पेराई आरंभ

आर एस राणा
नई दिल्ली। पेराई सीजन आरंभ हुए महीना भर बीत जाने के बावजूद भी देश के सबसे बड़े गन्ना उत्पादक राज्य उत्तर प्रदेश में राज्य सरकार ने अभी तक गन्ने का राज्य समर्थित मूल्य (एसएपी) तय नहीं किया है जबकि राज्य में दो चीनी मिलों ने गन्ने की पेराई आरंभ कर दी है।
दीपावली से पहले एसएपी तय होने की उम्मीद
राज्य के चीनी उद्योग एवं गन्ना विकास विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार पहली अक्टूबर 2018 से शुरू हुए पेराई सीजन 2018-19 (अक्टूबर से सितंबर) के लिए गन्ने का एसएपी दीपावली से पहले तय होने की उम्मीद हैं। उन्होंने बताया कि इस बारे में एक बैठक हो चुकी है तथा जल्दी ही दूसरी बैठक होगी। उसके बाद एसएपपी तय किए जाने की संभावना है। उन्होंने बताया कि बीते पेराई सीजन में 26 अक्टूबर 2017 को गन्ने का एसएपी जारी कर दिया गया था।
पिछले पेराई सीजन में 10 रुपये की गई थी बढ़ोतरी
बीते पेराई सीजन के लिए राज्य सरकार ने गन्ने की अगैती प्रजाति के लिए एसएपी 325 रुपये और सामान्य प्रजाति के लिए 315 रुपये प्रति क्विंटल तय किया था तथा पिछले साल एसएपी 10 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ाया गया था।
चीनी का उत्पादन 125 लाख टन होने का अनुमान
उन्होंने बताया कि चालू पेराई सीजन में गन्ने की बुवाई में हुई बढ़ोतरी से राज्य में चीनी का उत्पादन भी बढ़कर 125 लाख टन होने का अनुमान है जबकि पिछले पेराई सीजन में राज्य में 120.45 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ था। सूत्रों के अनुसार राज्य की चीनी मिलों पर अभी भी किसानों का करीब 7,000 करोड़ रुपये बकाया बचा हुआ है।
सप्ताहभर में दर्जनभर चीनी मिलों में पेराई होगी आरंभ
उन्होंने बताया कि राज्य की दो चीनी मिलों ने गन्ने की पेराई आरंभ कर दी है, तथा सप्ताहभर में करीब दर्जनभर चीनी मिलों में पेराई आरंभ हो जायेगी। पिछले पेराई सीजन में राज्य में 119 चीनी मिलों में पेराई हुई थी। राज्य में गन्ने की अगेती फसल पक कर तैयार हो चुकी है तथा चीनी मिलों में पेराई शुरू होने में देरी होती है, तो रबी फसलों की बुवाई के लिए खेत खाली नहीं हो पायेंगे जिससे किसानों को नुकसान होगा।.....  आर एस राणा

राजस्थान : किसान समर्थन मूल्य से नीचे भाव पर बाजरा और मूंग बेचने को मजबूर

आर एस राणा
नई दिल्ली। सरकारी खरीद सुचारु रूप से नहीं होने के साथ ही सरकारी नियम कड़े होने के कारण किसान को जहां मंडियों में व्यापारियों को मूंग समर्थन मूल्य से 2,000-2,200 रुपये प्रति क्विंटल नीचे दाम पर बेचनी पड़ रही है, वही बाजरा भी एमएपी से 500 से 550 रुपये प्रति क्विंटल कम भाव पर बिक रहा है।
राजस्थान के अजमेर जिले की किशनगढ़ कृषि उपज मंडी में मूंग बेचने आए किसान गोपाल शर्मा ने बताया कि उन्होंने पंजीयन तो करवा दिया था लेकिन अभी तक उनके पास कोई मैसेज नहीं आया है जबकि उसे पैसे ही जरुरत है। इसलिए मंडी में उन्होंने अपनी मूंग 4,700 रुपये प्रति क्विंटल के भाव व्यापारियों को बेची है, जबकि केंद्र सरकार ने मूंग का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 6,975 रुपये प्रति क्विंटल तय किया हुआ है।
अक्टूबर में हुई बेमौसम बारिश से क्वालिटी प्रभावित
मंडी में मूंग बेचने आए एक अन्य किसान राजेंद्र कुमार ने बताया कि चालू महीने के आरंभ में हुई बेमौसम बारिश से मूंग के दाने का रंग काला पड़ गया, जिस कारण पंजाीकरण होने के बावजूद भी उनकी मूंग की क्रय केंद्र पर खरीद नहीं की गई। इसलिए उन्हें मंडी में 4,500 रुपये प्रति क्विंटल के भाव बेचनी पड़ी।
बाजरा की सरकारी खरीद शुरू नहीं
राजस्थान के भरतपुर जिले की कामा मंडी में बाजरा बेचने आए सत्यनारायण ने बताया कि मंडी में बाजरा की सरकारी खरीद नहीं हो रही है जिस कारण बोली पर 1,400 रुपये प्रति क्विंटल के भाव बेचना पड़ा। केंद्र सरकार ने बाजरा का एमएसपी 1,950 रुपये प्रति क्विंटल तय किया हुआ है।
खरीद नियम कड़े
सीकर मंडी में मूंग बेचने आए किसान रामचंद्र के अनुसार राज्य सरकार ने खरीद मानक इतने कड़े बनाए हुए हैं, उन्हें पूरा करना मुश्किल है। इसीलिए उन्हें अपनी मूंग क्रय खरीद केंद्र के बजाए मंडी में व्यापारियों को बेचनी पड़ी।
बाजरा का उत्पादन में राज्य उग्रणी
राजस्थान बाजरा उत्पादन में देश का अग्रणी राज्य है। राज्य के कृषि निदेशालय के अनुसार इस बार राज्य में 41.11 लाख हेक्टेयर में बाजरा बोया गया था जिसमें 37.40 लाख टन बाजरा का उत्पादन होने का अनुमान है।.... आर एस राणा

हरियाणा की चीनी मिलें 15 नवंबर के बाद करेंगी पेराई शुरू, एसएपी भी अभी तक तय नहीं

आर एस राणा
नई दिल्ली। पहली अक्टूबर 2018 से गन्ने का नया पेराई सीजन तो शुरू हो चुका है लेकिन हरियाण की चीनी मिलें 15 नवंबर के बाद ही गन्ने की पेराई आरंभ करेंगी। राज्य सरकार ने अभी तक चालू पेराई सीजन 2018-19 (अक्टूबर से सितंबर) के लिए गन्ने का राज्य समर्थित मूल्य (एसएपी) भी तय नहीं किया है।
हरियाणा के सहायक गन्ना आयुक्त रविन्द्र हुड्डा ने आउटलुक को बताया कि राज्य की चीनी मिलों में 15 नवंबर के बाद ही पेराई आरंभ होने का अनुमान है। उन्होंने बताया कि राज्य की तीन प्राइवेट चीनी मिलों पर किसानों का अभी भी करीब 70 करोड़ रुपये बकाया बचा हुआ है। उम्मीद है कि जल्दी ही बकाया का भुगतान चीनी मिलें किसानों को कर देंगी।
एसएपी मध्य नवंबर तक तय होने का अनुमान
उन्होंने बताया कि चालू पेराई सीजन के लिए अभी तक राज्य सरकार ने गन्ने का एसएपी तय नहीं किया है, उम्मीद है 15 नवंबर तक एसएपी भी तय हो जायेगा। उन्होंने बताया कि पिछले पेराई सीजन 2017-18 में राज्य में गन्ने का एसएपी 320 से 330 रुपये प्रति क्विंटल (किस्म अनुसार) था जोकि देश के अन्य राज्यों की तुलना में ज्यादा था।
चीनी उत्पादन ज्यादा होने का अनुमान
उन्होंने बताया कि चालू पेराई सीजन 2018-19 के दौरान राज्य में 8.99 लाख टन चीनी के उत्पादन का अनुमान है जबकि पिछले पेराई सीजन में राज्य में 8.43 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ था। उन्होंने बताया कि पिछले पेराई सीजन में गन्ने में औसतन रिकवरी की दर 10.39 फीसदी की आई थी, जबकि चालू पेराई सीजन में औसत रिकवरी की दर 10.40 फीसदी आने का अनुमान है।
उद्योग के उत्पादन अनुमान में की कटौती
इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (इस्मा) द्वारा जारी अग्रिम अनुमान के अनुसार हरियाणा में चालू पेराई सीजन 2018-19 में चीनी का उत्पादन घटकर 7.73 लाख टन ही होने का अनुमान है जबकि पिछले साल 8.44 लाख टन का उत्पादन हुआ था।.............   आर एस राणा

कपास में निर्यात मांग बढ़ी, दस लाख गांठ के हो चुके हैं निर्यात सौदे

आर एस राणा
नई दिल्ली। कपास में इस समय बंगलादेश के साथ ही अन्य देशों की आयात मांग अच्छी बनी हुई है। पहली अक्टूबर 2018 से शुरू हुए चालू सीजन में अभी तक करीब 10 लाख गांठ (एक गांठ-170 किलो) कपास के निर्यात सौदे हो चुके हैं। विश्व बाजार में कपास की कुल उपलब्धता कम होने से चालू सीजन में भारत से कपास के निर्यात में बढ़ोतरी होने की संभावना है।
नार्थ इंडिया कॉटन एसोसिएशन आॅफ इंडिया के अध्यक्ष राकेश राठी ने बताया कि कपास में इस समय निर्यात मांग अच्छी बनी हुई है, खासकर के बंगलादेश की आयात मांग ज्यादा है। बंगलादेश को दिसंबर के निर्यात सौदे 83 से 84 सेंट प्रति पाउंड की दर से हो रहे है। उन्होंने बताया कि अहमदाबाद में शंकर-6 किस्म की कपास का भाव मंगलवार को 46,500 से 47,200 रुपये प्रति कैंडी (एक कैंडी-356 किलो) रहा।
कॉटन एसोसिएशन आफ इंडिया (सीएआई) के अध्यक्ष अतुल एस. गणात्रा के अनुसार चालू सीजन में कपास का उत्पादन 348 लाख गांठ ही होने का अनुमान है जबकि पिछले साल में 365 लाख गांठ का उत्पादन हुआ था। उन्होंने बताया कि इस समय उत्पादक मंडियों में कपास की दैनिक आवक सवा लाख गांठ से ज्यादा की हो रही है, तथा अभी आवकों का दबाव बना रहेगा। इसलिए घरेलू मंडियों में भाव रुके रह सकते हैं। दैनिक आवकों के दबाव से कपास की मौजूदा कीमतों में 500 से 1,000 प्रति कैंडी की गिरावट तो आ सकता है लेकिन गिरावट आने पर खरीद ही करनी चाहिए क्योंकि भविष्य तेजी का ही है।
उन्होंने बताया कि अमेरिका और आस्ट्रेलिया के साथ ही कई अन्य कई देशों में कपास की पैदावार कम होने का अनुमान है, इसलिए भारत से चालू सीजन में कपास का कुल निर्यात बढ़ सकता है। हालांकि यह चीन की आयात मांग कैसी रहती है, इस पर भी निर्भर करेगा। बीते सीजन भारत से 69 लाख गांठ कपास का निर्यात हुआ था।
कॉटन कार्पोरेशन आॅफ इंडिया (सीसीआई) के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार उत्पादक मंडियों में कपास के भाव न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से उंचे बने हुए हैं, इसलिए निगम ने अभी खरीद शुरू नहीं की है। उन्होंने बताया कि जैसे ही मंडियों में कपास के भाव एमएसपी से नीचे आयेंगे, हम खरीद शुरू कर देंगे। उन्होंने बताया कि कपास की कार्मिशयल खरीद सीसीआई दीपावली के बाद शुरू करेगी।............ आर एस राणा

महंगे खाद, बीज और डीजल से गेहूं की बुवाई लागत में हुई भारी बढ़ोतरी

आर एस राणा
नई दिल्ली। महंगे खाद, बीज और डीजल से खेती की लागत बढ़ गई है। चालू रबी सीजन में गेहूं किसानों को बुवाई के लिए ही प्रति एकड़ 1,000 से 1,100 रुपये ज्यादा खर्च करने पड़ रहे हैं। 
हरियाणा के गोहाना के किसान राजेश कुमार ने बताया कि डीएपी खाद का भाव पिछले साल की तुलना में 220 रुपये बढ़कर 1,400 प्रति बैग (एक बैग-50 किलो) हो गया जबकि गेहूं के बीज का कट्टा 80 रुपये बढ़कर भाव 1,180 रुपये प्रति बैग (एक बैग-40 किलो) हो गया है। इसके अलावा डीजल की कीमतों में हुई बढ़ोतरी से खेत की एक बार की जुताई में ही पिछले साल की तुलना में 100 से 150 रुपये की बढ़ोतरी हो चुकी है। गेहूं की बुवाई के लिए कम से कम पांच से छह बार खेत की जुताई करनी पड़ती है।
बुवाई खर्च में ही 1,100 की बढ़ोतरी का अनुमान
उन्होंने बताया कि डीजल महंगा होने से डीजल पंप से सिंचाई की लागत भी 150 से 200 रुपये प्रति एकड़ बढ़ गई है। अत: गेहूं की बुवाई की लागत पिछले साल की तुलना में 1,000 से 1,100 रुपये प्रति एकड़ ज्यादा हो गई है। उन्होंने बताया कि डीजल के भाव बढ़कर 73 रुपये प्रति लीटर से ज्यादा हो गए हैं, जबकि पिछले साल इन दिनों 59 रुपये प्रति लीटर डीजल मिल रहा था।
डीएपी खाद 220 रुपये महंगी
उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर स्थित खाद बीज विक्रेता अग्रवाल एजेंसी के प्रबंधक मुकेश कुमार ने बताया कि डीएपी खाद के बैग का भाव 1,400 रुपये हो गया जबकि पिछले रबी सीजन में इसका भाव 1,180 रुपये प्रति बैग था। इस दौरान गेहूं के बीज का भाव 1,040 से 1,080 रुपये से बढ़कर 1,140 से 1,180 रुपये प्रति बैग (एक बैग-40 किलो) हो गया। यूरिया खाद का भाव तो 299 रुपये प्रति बैग ही है, लेकिन इसका वजन 50 किलो से घटाकर 45 किलो कर दिया है।
गेहूं की खेती पर कुल खर्च 25-30 फीसदी बढ़ेगा
उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले के गांव खरड़ के किसान सुरेंद्र कुमार मलिक ने बताया कि गेहूं की बुवाई से पहले खेत की चार से छह बार जुताई करनी पड़ती है जबकि सालभर में डीजल के दाम 20 फीसदी से ज्यादा बढ़ चुके हैं। इसीलिए जुताई, बुवाई और सिंचाई का खर्च ज्यादा बढ़ गया है। उन्होंने बताया कि गेहूं की बुवाई के बाद करीब चार से पांच बार सिंचाई करनी पड़ती है, इसके अलावा कीटनाशकों के दाम भी बढ़ गए हैं। डीजल की कीमतों में हुई बढ़ोतरी से कंबाइन से कटाई, थ्रेसिंग और मंडी ले जाने का खर्च भी बढ़ जायेगा, अत: चालू रबी में गेहूं की फसल पर कुल खर्च पिछले साल से 25 से 30 फीसदी प्रति एकड़ के हिसाब से ज्यादा आयेगा।
समर्थन मूल्य में मामूली बढ़ोतरी कम
उन्होंने बताया कि गेहूं की खेती में आने वाले कुल खर्च के मुकाबले समर्थन मूल्य में मामूली बढ़ोतरी की गई है। केंद्र सरकार ने रबी विपणन सीजन 2018-19 के लिए गेहूं के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में केवल 105 रुपये की बढ़ोतरी कर भाव 1,840 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है।......  आर एस राणा

गेहूं का समर्थन मूल्य 105 रुपये बढ़ाया, बुवाई की लागत में ही 1,100 रुपये से ज्यादा का इजाफा

आर एस राणा
नई दिल्ली। महंगे खाद, बीज और डीजल से खेती की लागत बढ़ गई है। चालू रबी सीजन में गेहूं किसानों को बुवाई के लिए प्रति एकड़ 1,000 से 1,100 रुपये ज्यादा खर्च करेंगे पड़ रहे हैं, जबकि केंद्र सरकार ने रबी विपणन सीजन 2018-19 के लिए गेहूं के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में केवल 105 रुपये की बढ़ोतरी कर भाव 1,840 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है।
हरियाणा के गोहाना के किसान राजेश कुमार ने बताया कि डीएपी खाद का भाव पिछले साल की तुलना में 220 रुपये बढ़कर 1,400 प्रति कट्टा हो गया जबकि गेहूं के बीज का कट्टा 80 रुपये बढ़कर भाव 1,180 रुपये प्रति 40 किलो हो गया है। इसके अलावा डीजल की कीमतों में हुई बढ़ोतरी से खेत की एक बार की जुताई में ही पिछले साल की तुलना में 100 से 150 रुपये की बढ़ोतरी हो चुकी है। गेहूं की बुवाई के लिए कम से कम पांच से छह बार खेत की जुताई करनी पड़ती है।
उन्होंने बताया कि डीजल महंगा होने से डीजल पंप से सिंचाई की लागत भी 150 से 200 रुपये प्रति एकड़ बढ़ गई है। अत: गेहूं की बुवाई की लागत पिछले साल की तुलना में 1,000 से 1,100 रुपये प्रति एकड़ ज्यादा हो गई है। उन्होंने बताया कि डीजल के भाव बढ़कर 73 रुपये प्रति लीटर से ज्यादा हो गए हैं, जबकि पिछले साल इन दिनों 59 रुपये प्रति लीटर डीजल मिल रहा था।
उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर स्थित खाद बीज विक्रेता अग्रवाल एजेंसी के प्रबंधक मुकेश कुमार ने बताया कि डीएपी खाद के कट्टे का भाव 1,400 रुपये हो गया जबकि पिछले रबी सीजन में इसका भाव 1,180 रुपये प्रति कट्टा था। इस दौरान गेहूं के बीज का भाव 1,040 से 1,080 रुपये से बढ़कर 1,140 से 1,180 रुपये प्रति कट्टा (एक कट्टा-40 किलो) हो गया। यूरिया खाद का भाव तो 299 रुपये प्रति कट्टा ही है, लेकिन इसका वजन 50 किलो से घटाकर 45 किलो कर दिया है।
उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले के गांव खरड़ के किसान सुरेंद्र कुमार मलिक ने बताया कि गेहूं की बुवाई से पहले खेत की चार से छह बार जुताई करनी पड़ती है जबकि सालभर में डीजल के दाम 20 फीसदी से ज्यादा बढ़ चुके हैं। इसीलिए जुताई, बुवाई और सिंचाई का खर्च ज्यादा बढ़ गया है। उन्होंने बताया कि गेहूं की बुवाई के बाद करीब चार से पांच बार सिंचाई करनी पड़ती है, इसके अलावा कीटनाशकों के दाम भी बढ़ गए हैं। डीजल की कीमतों में हुई बढ़ोतरी से कंबाइन से कटाई, थ्रेसिंग और मंडी ले जाने का खर्च भी बढ़ जायेगा, अत: चालू रबी में गेहूं की फसल पर कुल खर्च पिछले साल से 25 से 30 फीसदी प्रति एकड़ के हिसाब से ज्यादा आयेगा।.....  आर एस राणा

उद्योग की चीनी उत्पादन अनुमान में कटौती, 320 लाख टन उत्पादन की संभावना

आर एस राणा
नई दिल्ली गन्ना के उत्पादक राज्यों महाराष्ट्र और कर्नाटक में मानसूनी सीजन में सामान्य से कम बारिश का असर चीनी के उत्पादन पर पड़ने की आशंका है। पहली अक्टूबर 2018 से शुरू हुए चालू गन्ना पेराई सीजन (अक्टूबर-सितंबर) के दौरान चीनी का उत्पादन 320 लाख टन ही होने का अनुमान है जोकि पेराई सीजन 2017-18 के 325 लाख टन से भी कम है। उद्योग ने जुलाई 2018 में 345 से 350 लाख टन चीनी के उत्पादन का अनुमान जारी किया था।
उत्पादन उत्तर प्रदेश में ज्यादा, महाराष्ट्र में कम
इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (इस्मा) द्वारा जारी अग्रिम अनुमान के अनुसार सबसे बड़े उत्पादक राज्य उत्तर प्रदेश में चालू पेराई सीजन में चीनी का उत्पादन 121 लाख टन होने का अनुमान है जोकि पिछले पेराई सीजन के 120.45 लाख टन के लगभग बराबर ही है। महाराष्ट्र में चालू पेराई सीजन में चीनी का उत्पादन घटकर 95 लाख टन ही होने का अनुमान है जोकि पिछले पेराई सीजन 2017-18 के 107.23 लाख टन से कम है। महाराष्ट्र में गन्ने के बुवाई क्षेत्रफल में तो बढ़ोतरी हुई है लेकिन राज्य के कई जिलों में मानसूनी बारिश पिछले साल की तुलना में कम हुई है जिसका असर गन्ने की उत्पादकता पर पड़ने की आशंका है।
जनवरी 2019 में अगले उत्पादन अनुमान होगा जारी
कर्नाटक में चालू पेराई सीजन 2018-19 में चीनी का उत्पादन घटकर 42 लाख टन ही होने का अनुमान है जबकि इस्मा ने जुलाई 2018 में राज्य में 44.8 लाख टन चीनी के उत्पादन का अनुमान जारी किया था। कर्नाटक के कई जिलों में भी चालू खरीफ में मानसूनी बारिश सामान्य से कम हुई है। इस्मा के अनुसार यह आरंभिक उत्पादन अनुमान है तथा जनवरी 2019 में अगला उत्पादन अनुमान जारी किया जायेगा, चीनी मिलोंं द्वारा पेराई शुरू करने से जनवरी में उत्पादन की सही तस्वीर साफ हो सकेगी।
अगले पेराई सीजन के शुरू में बकाया स्टॉक ज्यादा बचेगा
इस्मा के अनुसार पहली अक्टूबर 2018 को 107 लाख टन चीनी का बकाया स्टॉक बचा हुआ था, जबकि चालू पेराई सीजन में उत्पादन 320 लाख टन होने का अनुमान है। अत: कुल उपलब्धता 427 लाख टन की बैठेगी, जबकि देश में चीनी की सालाना खपत 255 से 260 लाख टन ही होने का अनुमान है। इस दौरान 40 से 50 लाख टन चीनी का निर्यात हो जाता है तो भी आगामी पेराई सीजन पहली अक्टूबर 2019 को घरेलू बाजार में चीनी का बंपर बकाया स्टॉक 112-127 लाख टन बचने की संभावना है।
चीनी के भाव में हल्का सुधार संभव
सोमवार को उत्तर प्रदेश में चीनी के एक्स फैक्ट्री भाव 3,250 से 3,400 रुपये प्रति क्विंटल रहे जबकि दिल्ली में इसके भाव 3,550 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए। चीनी के उत्पादन अनुमान में कमी किए जाने से, इसके मौजूदा भाव में हल्का सुधार बन सकता है। हालांकि व्यापारी नवंबर महीने के कोटे की मात्रा पर भी चीनी की तेजी-मंदी निर्भर करेगी।...............  आर एस राणा