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06 जून 2018

खाद्य तेलों के आयात शुल्क में बढ़ोतरी संभव, सस्ते आयात से घरेलू बाजार में घटे हैं भाव

आर एस राणा
नई दिल्ली। घरेलू बाजार में खाद्य तेलों की कीमतों में चल रही गिरावट को रोकने के लिए केंद्र सरकार आयातित खाद्य तेलों के आयात शुल्क में बढ़ोतरी कर सकती है। क्रुड सोया तेल, सनफ्लावर तेल और कनोला तेल के आयात पर शुल्क में बढ़ोतरी का प्रस्ताव है।
इस समय क्रुड सोया तेल के आयात पर शुल्क 30 फीसदी और क्रुड सनफ्लावर तेल के आयात तेल तथा कनोला तेल के आयात पर शुल्क 25 फीसदी है। साल्वेंट एक्सट्रेक्टर्स एसोसिएशन आफ इंडिया (एसईए) के कार्यकारी निदेशक डॉ. बी वी मेहता ने बताया कि हमने केंद्र सरकार से क्रुड सोया तेल, क्रुड सनफ्लावर तेल और कनोला के आयात पर शुल्क को बढ़ाकर 40 फीसदी करने की सिफारिश की है। ऐसे में अगर केंद्र सरकार इनके आयात शुल्क में बढ़ोतरी करती है तो इससे किसानों को फायदा होगा।
उत्पादक मंडियों में रबी तिलहनों की प्रमुख फसल सरसों, मूंगफली और सूरजमुखी के भाव न्यनूतम स​मर्थन मूल्य (एमएसपी) से नीचे बने हुए हैं। उत्पादक मंडियों में सरसों के भाव 3,500 से 3,600 प्रति क्विंटल है जबकि एमएसपी 4,000 रुपये प्रति क्विंटल है। 
एसईए के अनुसार चालू तेल वर्ष नवंबर-17 से अक्टूबर-18 के पहले छह महीनों नवंबर से अप्रैल के दौरान खाद्य और अखाद्य तेलों का आयात 2.5 फीसदी बढ़कर 71,46,751 टन का हो चुका है जबकि पिछले तेल वर्ष की समान अवधि में इनका आयात 71,68,265 टन का हुआ था। ............   आर एस राणा

खरीफ फसलों के एमएसपी घोषित होने का अनुमान, धान का समर्थन मूल्य 80 रुपये बढ़ाने की सिफारिश

आर एस राणा
नई दिल्ली। किसानों की आय वर्ष-2022 तक दोगुनी करने का लक्ष्य लेकर चल रही केंद्र सरकार खरीफ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) कल घोषित कर सकती है। केंद्र सरकार खरीफ फसलों के एमएसपी लागत का डेढ़ गुना तय करने की बात करती रही है जबकि एमएसपी तय की सिफारिश करने वाले कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (सीएसीपी) ने खरीफ फसलों के एमएसपी में 5 से 10 फीसदी की बढ़ोतरी की ही सिफारिश की है। आमतौर पर सीएसीपी की सिफारिश मान ली जाती है।
सूत्रों के अनुसार खरीफ की प्रमुख फसल धान के समर्थन मूल्य में 80 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की सिफारिश सीएसीपी ने की है। अत: खरीफ विपणन सीजन 2018-19 के लिए सामान्य किस्म के धान का एमएसपी 1,630 रुपये और ए ग्रेड के धान का एमएसपी 1,670 रुपये प्रति क्विंटल तय ​हो सकता है। इसके अलावा ज्वार के एमएसपी में 75 रुपये और बाजरा के एमएसपी में 95 रुपये तथा मक्का के एमएसपी में 60 रुपये और रागी का एमएसपी 175 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ाने की सिफारिश सीएसीपी द्वारा की गई है।
सीएसीपी ने दलहन खरीफ की प्रमुख फसल अरहर और उड़द के एमएसपी में 400-400 रुपये और मूंग के एमएसपी में 350 रुपये बढ़ाने की सिफारिश की है। इसके अलावा कपास के एमएसपी में 160 रुपये और मूंगफली के एमएसपी में 230 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ाने की सिफारिश की है।
इस समय उत्पादक मंडियों में खरीफ की दलहनी फसल अरहर, उड़द और मूंग एमएसपी से 1,500 से 2,000 रुपये प्रति क्विंटल नीचे बिक रही है। इसी तरह से मोटे अनाजों में मक्का के साथ जौ और बाजरा के भाव भी उत्पादक मंडियों में समर्थन मूल्य से नीचे चल रहे हैं। ............  आर एस राणा

चीनी मिलों को मिलने जा रहे 8 हजार करोड़ के राहत पैकेज का सच, जानिए पूरा गणित

आर एस राणा
नई दिल्ली। केंद्र सरकार गन्ना किसानों के बकाया भुगतान में तेजी लाने के लिए चीनी मिलों को करीब 8,000 करोड़ रुपये का राहत पैकेज देने पर विचार कर रही है। बुधवार को प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में होने वाली आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) की बैठक में इस पर निर्णय होने की उम्मीद है।
सूत्रों के अनुसार केंद्र सरकर एथनॉल का उत्पादन बढ़ाने के लिए चीनी मिलों को 4,500 करोड़ रुपये का कर्ज देने की योजना बना रही है। इसके तहत छह फीसदी ब्याज सब्सिडी का प्रस्ताव है। चीनी मिलों को कर्ज चुकाने के लिए पांच साल का समय मिलेगा। इसके साथ ही 1,200 करोड़ रुपये का पैकेज उद्योग को चीनी का बफर स्टॉक बनाने के लिए तथा 1,500 करोड़ रुपये का पैकेज गन्ना किसानों को गन्ने के उचित एवं लाभकारी मूल्य (एफआरपी) में 5.50 रुपये प्रति क्विंटल की दर से सब्सिडी देने का जो पहले ही केंद्र सरकार ऐलान कर चुकी है, उस मद में जायेगा। 
चालू पेराई सीजन में पहली अक्टूबर 2017 से अभी तक चीनी मिलों पर गन्ना किसानों के बकाया की राशि बढ़कर 22,000 करोड़ रुपये पहुंच चुकी है तथा इसमें सबसे ज्यादा रकम 1,200 करोड़ से ज्यादा अकेले उत्तर प्रदेश के किसानों की है। घरेलू बाजार में चीनी के दाम नीचे बने हुए है, जिस कारण चीनी मिलें गन्ना किसानों का बकाया का भुगतान नहीं कर रही है। अत: गन्ना किसानों को भारी आर्थिक दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। 
खाद्य मंत्रालय 30 लाख टन चीनी का बफर स्टॉक बनाने पर विचार कर रहा है इस पर कैबिनेट की प्रस्तावित बैठक में बुधवार को फैसला हो सकता है। इसके अलावा अनिवार्य तौर पर चीनी एक्सपोर्ट करने की शर्त भी केंद्र सरकार हटा सकती है।
चीनी मिलों को राहत देने के लिए सरकार चौतरफा कदम उठाने की तैयारी में है। इस बारे में वित्त मंत्रालय, पेट्रोलियम मंत्रालय और खाद्य मंत्रालय प्रस्ताव तैयार कर रहे हैं। प्रधानमंत्री कार्यालय में बैठक के बाद संबंधित मंत्रालय को इस बारे में निर्देश दिए गए हैं।............  आर एस राणा

05 जून 2018

हरियाणा से एमएसपी पर 2,400 टन सूरजमुखी की खरीद को मंजूरी

आर एस राणा
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने मूल्य सहायता योजना (पीएसएस) के तहत हरियाणा से 2,400 टन सूरजमुखी की खरीद को मंजूरी दी है। केंद्रीय कृषि मंत्री राधामोहन सिंह द्वारा सोमवार को ​टविट पर दी गई जानकारी के अनुसार राज्य से रबी 2018 में इसकी खरीद की जायेगी। 
केंद्र सरकार ने फसल सीजन 2017-18 के लिए सूरजमुखी का न्यनूतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 4,100 रुपये प्रति क्विंटल (बोनस सहित) तय किया हुआ है जबकि उत्पादक मंडियों में सूरजमुखी के भाव 3,600 से 3,800 रुपये प्रति क्विंटल चल रहे है।
केंद्र सरकार द्वारा राज्य से सूरजमुखी की खरीद मात्रा पिछले साल से भी कम तय की गई है। पिछले साल केंद्र सरकार ने एमएसपी पर हरियाणा से 3,150 टन सूरजमुखी की खरीद को मंजूरी दी थी। 
हरियाणा में करीब 9 हजार हैक्टेयर भूमि में सूरजमुखी की खेती होती है तथा राज्य में इसका सालाना उत्पादन लगभग 14 से 15 हजार टन का होता है। राज्य में सूरजमुखी का उत्पादन अंबाला और कुरक्षेत्र में ज्यादा होता है।.............  आर एस राणा

गेहूं की सरकारी खरीद 347 लाख टन के पार, कहां करेंगे भंडारण

आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू रबी विपणन सीजन 2018-19 में गेहूं की न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीद बढ़कर 347.24 लाख टन की हो गई है जोकि तय लक्ष्य 320 लाख टन से ज्यादा है। केंद्रीय पूल में पहली मई को खाद्यान्न का 607 लाख टन का स्टॉक मौजूद है जबकि भंडारण की क्षमता 362.50 लाख टन की ही है, ऐसे में चालू रबी में खरीद गए गेहूं का भंडारण खुले में तिरपालों के नीचे करना सरकार की मजबूरी होगी।
भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के अनुसार चालू रबी में खरीद बढ़कर 347 लाख टन की हो चुकी है जोकि पिछले साल खरीदे गए 308.25 लाख टन की तुलना में 38.75 लाख टन ज्यादा है। पंजाब, हरियाणा, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश से खरीद तय लक्ष्य से ज्यादा हुई है जबकि राजस्थान से खरीद तय लक्ष्य से कम हुई है।
खाद्यान्न का स्टॉक भंडारण क्षमता से ज्यादा
एफसीआई के अनुसार पहली मई को केंद्रीय पूल में 607.07 लाख टन खाद्यान्न का स्टॉक है जिसमें गेहूं की हिस्सेदारी 353.45 लाख टन की है। पिछले साल पहली मई को केंद्रीय पूल में 524.69 लाख टन खाद्यान्न का ही स्टॉक था, जिसमें 296.41 लाख टन गेहूं था। एफसीआई के पास 31 मार्च 2018 के आधार पर कुल भंडारण क्षमता 362.50 लाख टन (स्वयं और किराये पर ली हुई) है इसमें भी 76 फीसदी गोदाम अनाज के 31 मार्च 2018 को भरे हुए थे। अत: चालू रबी में खरीदे गए गेहूं का आधे से ज्यादा का भंडारण खुले में तिरपालों के नीचे ही करना होगा।
हरियाणा से रिर्काड खरीद, पंजाब से भी बढ़ी
भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के अनुसार कुल खरीद में सबसे ज्यादा हिस्सेदारी पंजाब से 126.91 लाख टन की है जबकि पंजाब से खरीद का लक्ष्य चालू रबी के लिए 119 लाख टन का ही तय किया था। इसी तरह से हरियाणा से चालू रबी सीजन में गेहूं की खरीद रिकार्ड 87.39 लाख टन की हुई है जबकि खरीद का लक्ष्य 74 लाख टन का ही तय किया गया था।
मध्य प्रदेश और यूपी से खरीद तय लक्ष्य से ज्यादा
मध्य प्रदेश से चालू रबी में गेहूं की खरीद बढ़कर 72.87 लाख टन की हो चुकी है जबकि राज्य से चालू रबी में खरीद का लक्ष्य 67 लाख टन का ही तय किया था। उधर उत्तर प्रदेश से गेहूं की खरीद बढ़कर चालू रबी विपणन सीजन में 43.59 लाख टन की हो चुकी है जबकि राज्य से खरीद का लक्ष्य केवल 40 लाख टन का ही किया था। राजस्थान से गेहूं की खरीद चालू रबी में 14.97 लाख टन की हुई है जबकि खरीद का लक्ष्य 16 लाख टन का था।
अन्य राज्यों से खरीद तय लक्ष्य से कम
अन्य राज्यों उत्तराखंड से 99 हजार टन, गुजरात से 37 हजार टन, चंडीगढ से 14 हजार टन और बिहार से केवल एक हजार टन की खरीद ही हुई है। केंद्र सरकार ने उत्तराखंड से एक लाख टन, बिहार से 2 लाख टन और गुजरात से 50 हजार टन गेहूं की खरीद का लक्ष्य रखा था।
बंपर उत्पादन का अनुमान
कृषि मंत्रालय के तीसरे आरंभिक अनुमान के अनुसार चालू रबी सीजन 2017-18 में गेहूं का बंपर उत्पादन 986.1 लाख टन होने का अनुमान है जबकि पिछले साल 985.1 लाख टन का हुआ था।...............  आर एस राणा

चालू खरीफ सीजन में कपास की बुवाई पिछड़ी, गन्ने की बढ़ी

आर एस राणा
नई दिल्ली। देश के कई राज्यों में प्री-मानसून की बारिश कम होने से चालू खरीफ सीजन में जहां कपास की बुवाई पिछड़ रही है, वहीं गन्ने के बुवाई क्षेत्रफल में बढ़ोतरी हुई है। कृषि मंत्रालय के अनुसार कपास की बुवाई अभी तक केवल 9.96 लाख हैक्टेयर में ही हो पाई है जबकि पिछले साल इस समय तक 12.18 लाख हैक्टेयर में कपास की बुवाई हो चुकी थी। चालू खरीफ में देश के करीब 14 राज्यों में प्री-मानसून की बारिश कम हुई है। 
सूत्रों के अनुसार उत्तर भारत के राज्यों पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में कपास की बुवाई में कमी आई है, जबकि मध्य प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र तथा अन्य राज्यों में कपास की बुवाई चालू महीने में शुरू होगी। 
गन्ने की बुवाई चालू सीजन में बढ़कर 49.32 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक इसकी बुवाई केवल 48.72 लाख हैक्टेयर में ही हुई थीं। चालू पेराई सीजन में गन्ने के बुवाई क्षेत्रफल में हुई बढ़ोतरी से चीनी का रिकार्ड उत्पादन हुआ है, अत: बुवाई में हुई बढ़ोतरी से आगामी पेराई सीजन में भी चीनी का उत्पादन बढ़ने का अनुमान है।
खरीफ की प्रमुख फसल धान की रोपाई चालू खरीफ में अभी तक केवल 2.95 लाख हैक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक इसकी रोपाई 5.20 लाख हैक्टेयर में हो चुकी थी। चालू खरीफ में मानसूनी बारिश अच्छी होने का अनुमान है इसलिए आगामी दिनों में धान की रोपाई में तेजी आयेगी। दलहनी फसलों की बुवाई चालू खरीफ में अभी तक 1.08 लाख हैक्टेयर में ही हो पाई है जबकि पिछले साल इस समय तक इनकी बुवाई 1.61 लाख हैक्टेयर में हो चुकी थी। 
मोटे अनाजों की बुवाई भी चालू खरीफ सीजन में अभी तक 2.31 लाख हैक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक इनकी बुवाई 2.65 लाख हैक्टेयर में हो चुकी थी। खरीफ तिलहनों सोयाबीन और मूंगफली की बुवाई अभी शुरूआती चरण में ही है, तथा अभी तक केवल 51 हजार हैक्टेयर में ही इनकी बुवाई हुई है।   
मंत्रालय के अनुसार अभी तक देशभर में 72.61 लाख हैक्टेयर में ही खरीफ फसलों की बुवाई हो पाई है जबकि पिछले साल इस समय तक 77.67 लाख हैक्टेयर में फसलों की बुवाई हो चुकी थी। खरीफ फसलों की बुवाई अभी शुरूआती चरण में है, तथा आगामी दिनों में जैसे-जैसे मानसूनी बारिश होगी इनकी बुवाई में तेजी आयेगी। .....आर एस राणा

अप्रैल में ग्वार गम उत्पादों में निर्यात में आई कमी, भाव में बड़ी तेजी की उम्मीद नहीं

आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू वित्त वर्ष 2018-19 के पहले महीनें अप्रैल में ग्वार गम उत्पादों का निर्यात घटकर 40,405 टन का ही हुआ है जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में इसका निर्यात 54,392 टन का हुआ था।
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अनुसार मूल्य के हिसाब से ग्वार गम उत्पादों का निर्यात चालू वित्त वर्ष के पहले महीने में 376 करोड़ रुपये का ही हुआ है जबकि पिछले वित्त वर्ष 2017-18 के अप्रैल महीने मेंं इनका निर्यात 411 करोड़ रुपये का हुआ था।
एपिडा के अनुसार वित्त वर्ष 2017-18 में ग्वार गम उत्पादों का निर्यात 4,94,126 टन का हुआ है जबकि इसके पिछले वित्त वर्ष 2016-17 की समान अवधि में इनका निर्यात 4,19,952 टन का हुआ था। 
व्यापारियों के अनुसार ग्वार गम और ग्वार सीड की कीमतों में नीचे भाव में मांग निकलने से सुधार आया है लेकिन चालू सीजन में मानसूनी बारिश अच्छी होने का अनुमान है, साथ ही मानसून तय समय से पहले आयेगा इसलिए ग्वार गम और ग्वार सीड की कीमतों में आगे मंदा मानकर ही व्यापार करना चाहिए। अनुकूल मौसम से चालू सीजन में ग्वार सीड की बुवाई में बढ़ोतरी होने का अनुमान है। ............  आर एस राणा