नई दिल्ली। कॉटन कारपोरेशन ऑफ इंडिया, सीसीआई ने गुरुवार को लगातार दूसरे दिन कॉटन की बिक्री कीमतों में 300 रुपये प्रति कैंडी, एक कैंडी 356 किलो की बढ़ोतरी की। हालांकि घरेलू बाजार में इस दौरान इसके भाव में मिलाजुला रुख रहा।
सीसीआई ने 23 जुलाई को भी कॉटन के बिक्री दाम 300 रुपये प्रति कैंड़ी तक बढ़ाएं, तथा इस दौरान निगम ने 97,200 गांठ कॉटन की बिक्री की, जिसमें से स्पिनिंग मिलों ने 24,000 गांठ एवं ट्रेडर्स ने 73,200 गांठ कॉटन की खरीद की। मालूम हो कि सीसीआई ने 22 जुलाई को भी कॉटन की बिक्री कीमतों में 300 रुपये प्रति कैंडी की बढ़ोतरी की थी
स्पिनिंग मिलों की मांग बनी रहने से गुरुवार को शाम के सत्र में गुजरात में कॉटन की कीमतों में लगातार दूसरे दिन तेजी आई, जबकि इस दौरान उत्तर भारत के राज्यों में इसके दाम लगभग स्थिर बने रहे।
क्रूड तेल में तेजी के साथ ही अमेरिका के कपास उत्पादक क्षेत्रों में बारिश की कमी की आशंका बुधवार को लगातार दूसरे दिन आईसीई कॉटन वायदा बढ़त के साथ बंद हुआ था, जबकि इससे पहले कार्यदिवस में भी इसकी कीमतों में तीन अंकों की तेजी आई थी।
गुजरात के अहमदाबाद में 29 शंकर-6 किस्म की कॉटन के भाव गुरुवार को तेज होकर 400 रुपये तेज होकर 65,500 से 66,000 रुपये प्रति कैंडी, एक कैंडी-356 किलो हो गए।
पंजाब में रुई हाजिर डिलीवरी के भाव 6,500 से 6,650 रुपये प्रति मन बोले गए। हरियाणा में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के भाव 6,325 से 6,350 रुपये प्रति मन बोले गए। ऊपरी राजस्थान में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के दाम 6,350 से 6,675 रुपये प्रति मन बोले गए। लोअर राजस्थान में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के दाम 60,500 से 61,500 रुपये कैंडी बोले गए।
प्रमुख उत्पादक राज्यों में कपास की कीमत स्थिर से तेज हुई। जानकारों के अनुसार उत्पादक मंडियों में कपास की आवक सीमित मात्रा में ही हो रही है।
स्पिनिंग मिलों की मांग बनी रहने के कारण गुजरात में कॉटन की कीमतों में लगातार दूसरे कार्यदिवस में तेजी दर्ज की गई, जबकि इस दौरान उत्तर भारत के राज्यों में इसके दाम स्थिर हो गए। प्राइवेट जिनिंग मिलों के पास अच्छी क्वालिटी की कॉटन का बकाया स्टॉक कम है। अत: अच्छी क्वालिटी कपास की खरीद के लिए मिलों को सीसीआई एवं एमएनसी कंपनियों से करनी पड़ रही है।
केंद्र सरकार ने घरेलू टेक्सटाइल उद्योग के लिए कच्चे माल की उपलब्धता को बेहतर बनाने के लिए 1 जून, 2026 से आगामी पांच महीनों के लिए कॉटन आयात पर से सभी कस्टम ड्यूटी समाप्त की हुई है, जिस कारण इसके आयात में बढ़ोतरी होने का अनुमान है। घरेलू बाजार में सीसीआई के पास अभी भी कॉटन का बकाया स्टॉक अच्छी मात्रा में बचा हुआ है। इसलिए हाजिर बाजार में कॉटन की कीमतों में तेजी, मंदी सीसीआई के बिक्री दाम पर भी निर्भर करेगी।
कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू खरीफ में 17 जुलाई तक कपास की बुआई घटकर 92.53 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में इसकी बुआई 98.40 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी। अत: पिछले साल की तुलना में कपास की बुआई 5.96 फीसदी पीछे चल रही है।

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