नई दिल्ली, 18 जुलाई। जुलाई के पहले पखवाड़े में उत्पादक राज्यों में हुई बारिश से कपास की बुआई में सुधार तो आया है, लेकिन अभी भी कुल बुआई पिछले साल की समान अवधि की तुलना पीछे चल रही है।
कृषि मंत्रालय के अनुसार 17 जुलाई तक देशभर के उत्पादक राज्यों में 92.53 लाख हेक्टेयर में कपास की बुआई हो चुकी है जोकि पिछले साल की समान अवधि के 98.40 लाख हेक्टेयर की तुलना में 5.96 फीसदी कम है। 10 जुलाई तक देशभर में कपास की बुआई 79.54 लाख हेक्टेयर में ही हुई थे, जबकि पिछले साल की समान अवधि में इसकी बुआई 93.95 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी। अत: 10 जुलाई तक कपास की बुआई 14 फीसदी पीछे चल रही थी।
कॉटन कारपोरेशन ऑफ इंडिया, सीसीआई ने 13 से 17 जुलाई के दौरान 3,18,000 गांठ कॉटन की बिक्री की, जिसमें से स्पिनिंग मिलों ने 1,15,900 गांठ एवं ट्रेडर्स ने 2,02,100 गांठ कॉटन की खरीद की।
स्पिनिंग मिलों की मांग सीमित होने से शनिवार को शाम के सत्र में गुजरात के साथ ही उत्तर भारत के राज्यों में कॉटन की कीमत स्थिर हो गई।
गुजरात के अहमदाबाद में 29 शंकर-6 किस्म की कॉटन के भाव 65,000 से 65,300 रुपये प्रति कैंडी, एक कैंडी-356 किलो पर स्थिर हो गए।
पंजाब में रुई हाजिर डिलीवरी के भाव 6,450 से 6,550 रुपये प्रति मन बोले गए। हरियाणा में रुई के भाव 6,225 से 6,250 रुपये प्रति मन बोले गए। ऊपरी राजस्थान में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के दाम 6,250 से 6,550 रुपये प्रति मन बोले गए। लोअर राजस्थान में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के दाम 59,500 से 60,500 रुपये कैंडी बोले गए।
प्रमुख उत्पादक राज्यों में कपास की कीमत चालू सप्ताह में कमजोर हुई है। हालांकि उत्पादक मंडियों में कपास की आवक भी सीमित मात्रा में ही हो रही है।
स्पिनिंग मिलों की मांग सीमित होने के कारण गुजरात के साथ ही उत्तर भारत में कॉटन की कीमत स्थिर हो गई। हालांकि प्राइवेट जिनिंग मिलों के पास अच्छी क्वालिटी की कॉटन का बकाया स्टॉक कम है। अत: अच्छी क्वालिटी कपास की खरीद के लिए मिलों को सीसीआई एवं एमएनसी कंपनियों से करनी पड़ रही है।
हालांकि केंद्र सरकार ने घरेलू टेक्सटाइल उद्योग के लिए कच्चे माल की उपलब्धता को बेहतर बनाने के लिए 1 जून, 2026 से आगामी पांच महीनों के लिए कॉटन आयात पर से सभी कस्टम ड्यूटी समाप्त की हुई है, जिस कारण इसके आयात में बढ़ोतरी होने का अनुमान है। घरेलू बाजार में सीसीआई के पास अभी बकाया स्टॉक अच्छी मात्रा में बचा हुआ है। इसलिए हाजिर बाजार में कॉटन की कीमतों में तेजी, मंदी सीसीआई के बिक्री दाम पर भी निर्भर करेगी। चालू सीजन में कॉटन का आयात बढ़ने का अनुमान है। हालांकि प्राइवेट जिनर्स के पास कॉटन का बकाया स्टॉक कम है, जिस कारण इनकी बिकवाली कम आ रही है।

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