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09 जुलाई 2026

एल नीनो से बढ़ा खतरा, कमजोर मानसून से ग्रामीण मांग और एफएमसीजी कारोबार पर पड़ सकता है असर : रिपोर्ट

 नई दिल्ली: भारत में उभरते एल नीनो प्रभाव के कारण सामान्य से कमजोर मानसून की आशंका बढ़ गई है, जिसका असर देश के एफएमसीजी (फास्ट मूविंग कंज्यूमर गुड्स) क्षेत्र और ग्रामीण खपत पर पड़ सकता है। ब्रोकरेज फर्म फिलिप कैपिटल (Phillip Capital) की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि, यदि मानसून सामान्य से कमजोर रहता है, तो कृषि उत्पादन, ग्रामीण आय और उपभोक्ता मांग पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

रिपोर्ट के अनुसार, जून महीने में देश में सामान्य से करीब 40 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है। वहीं, भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने जुलाई में भी सामान्य से कम बारिश का अनुमान जताया है।रिपोर्ट में कहा गया है कि, कमजोर मानसून से कृषि उत्पादन प्रभावित होगा, ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियां धीमी पड़ेंगी और इसका असर कुछ समय बाद एफएमसीजी उत्पादों की मांग पर भी दिखाई देगा।

दक्षिण-पश्चिम मानसून जून से सितंबर तक चलता है और देश की करीब 80 प्रतिशत वार्षिक वर्षा इसी दौरान होती है। यही अवधि खरीफ फसलों की बुवाई के लिए सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि धान, दलहन, तिलहन, कपास और गन्ना जैसी प्रमुख फसलें मानसून पर काफी हद तक निर्भर हैं। ऐसे में कमजोर बारिश से इन फसलों का उत्पादन प्रभावित हो सकता है, जिससे किसानों की आय और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ेगा।

रिपोर्ट के मुताबिक, यदि मानसून कमजोर रहता है तो शुरुआत में व्यापारियों द्वारा स्टॉक कम किया जा सकता है, जिससे बाजार में मांग कमजोर पड़ सकती है। इसके बाद अगले एक-दो महीनों में कृषि उत्पादन घटने से खाद्य महंगाई बढ़ने की आशंका है। ऐसी स्थिति में परिवार गैर-जरूरी खर्चों में कटौती कर आवश्यक वस्तुओं की खरीद को प्राथमिकता देंगे, जिससे एफएमसीजी उत्पादों की बिक्री प्रभावित हो सकती है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि कमजोर खरीफ उत्पादन का सबसे अधिक असर वर्षा आधारित खेती वाले क्षेत्रों में किसानों की आय पर पड़ेगा। इसका प्रभाव दो से तीन महीने बाद ग्रामीण खपत में गिरावट के रूप में सामने आ सकता है। फिलिप कैपिटल ने चेतावनी दी है कि यदि एल नीनो का प्रभाव मजबूत रहता है और मानसून कमजोर पड़ता है, तो इसका पूरा असर वर्ष के अंत तक अधिक स्पष्ट रूप से दिखाई देगा।

हालात पहले से बेहतर, लेकिन जोखिम बरकरार

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 2015-16 और 2023 की तुलना में इस बार एल नीनो का असर कुछ कम हो सकता है। इसकी वजह पिछले दो वर्षों में अच्छे मानसून के कारण किसानों की बेहतर आय, फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में वृद्धि और सिंचाई सुविधाओं का विस्तार है। रिपोर्ट के अनुसार, अब देश में लगभग 60 प्रतिशत कृषि क्षेत्र सिंचाई सुविधाओं से जुड़ चुका है, जबकि वित्त वर्ष 2015-16 में यह आंकड़ा 49 प्रतिशत था। इसके अलावा, देश के जलाशयों में जल स्तर भी दीर्घकालिक औसत से करीब 19 प्रतिशत अधिक है, जिससे वर्षा की कमी की स्थिति में कुछ राहत मिल सकती है। हालांकि, रिपोर्ट का निष्कर्ष है कि यदि मानसून वास्तव में कमजोर रहता है, तो उसका वास्तविक प्रभाव 2026 के अंत तक अधिक स्पष्ट रूप से देखने को मिलेगा।

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