नई दिल्ली। भारतीय मौसम विभाग, आईएमडी के अनुसार चालू खरीफ सीजन में देशभर में जहां 1 से 25 जून के दौरान केवल 74.5 एमएम बारिश ही हुई है, जोकि सामान्य 126.9 एमएम की तुलना में 41 फीसदी कम है। वहीं देशभर के प्रमुख जलाशयों में जल भंडारण का स्तर पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में काफी कम दर्ज किया गया है।
केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) की नवीनतम जलाशय स्थिति रिपोर्ट के अनुसार देशभर के 166 प्रमुख जलाशयों की निगरानी करने वाले केंद्रीय जल आयोग के अनुसार 25 जून 2026 तक इन जलाशयों में कुल 48.405 अरब घन मीटर (बीसीएम) पानी उपलब्ध था, जो उनकी कुल 183.565 बीसीएम लाइव स्टोरेज क्षमता का 26.37 फीसदी ही है। पिछले वर्ष इसी अवधि में जलाशयों में 66.114 बीसीएम पानी था। इस प्रकार वर्तमान जल भंडारण पिछले वर्ष के स्तर का केवल 73.21 फीसदी रह गया है।
मध्य भारत (छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड) सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाला क्षेत्र रहा है। यहां के जलाशयों में 15.667 बीसीएम यानी कुल क्षमता का 32.24 फीसदी जल संग्रहित है, जो पिछले वर्ष के 29.29 फीसदी और सामान्य स्तर 26.46 फीसदी से अधिक है। उत्तरी क्षेत्र (हिमाचल प्रदेश, पंजाब और राजस्थान) में जलाशयों का भंडार 6.066 बीसीएम यानी कुल क्षमता का 30.58 फीसदी रहा, जो पिछले वर्ष के 31.89 फीसदी की तुलना में थोड़ा कम है।
पश्चिमी क्षेत्र (गोवा, गुजरात और महाराष्ट्र) में जल भंडारण 10.862 बीसीएम यानी 28.51 फीसदी दर्ज की गई, जबकि पिछले वर्ष यह 37.69 फीसदी था। पूर्वी क्षेत्र (असम, बिहार, झारखंड, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, ओडिशा, त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल) में स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। यहां के जलाशयों में 4.334 बीसीएम यानी कुल क्षमता का 19.92 फीसदी ही पानी बचा हुआ है, जो पिछले वर्ष के 29.89 फीसदी से काफी कम है।
दक्षिणी क्षेत्र (आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु और तेलंगाना) में जल भंडारण 11.476 बीसीएम यानी कुल क्षमता का 20.76 फीसदी दर्ज किया गया, जबकि पिछले वर्ष यह 44.67 फीसदी था।
रिपोर्ट के अनुसार असम, बिहार, छत्तीसगढ़, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश और उत्तराखंड में जलाशयों का जल भंडार पिछले वर्ष की तुलना में बेहतर रहा। वहीं आंध्र प्रदेश, गोवा, झारखंड, कर्नाटक, केरल, महाराष्ट्र, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, ओडिशा, पंजाब, राजस्थान, तमिलनाडु, तेलंगाना, त्रिपुरा, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में जल भंडारण पिछले वर्ष की तुलना में घट गया है।

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