नई दिल्ली। चालू खरीफ सीजन में दक्षिण-पश्चिम मानसून सामान्य से कमजोर रहने का अनुमान है, इससे आने वाले महीनों में देश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ सकता है।
वैश्विक रेटिंग एजेंसी एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स की एक रिपोर्ट के अनुसार कमजोर मानसून के कारण किसानों की आय घट सकती है, साथ ही इससे महंगाई बढ़ने का डर है है। अत: ग्रामीण क्षेत्रों में मांग तथा कर्ज वृद्धि की रफ्तार धीमी पड़ सकती है। रिपोर्ट के अनुसार यदि वर्षा सामान्य से कम रहती है तो कृषि, कृषि रसायन (एग्रोकेमिकल्स), ट्रैक्टर, दोपहिया वाहन और माइक्रो फाइनेंस जैसे क्षेत्रों पर सबसे अधिक प्रभाव पड़ने की आशंका है।
एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स के अनुसार देश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था इस समय दोहरी चुनौती का सामना कर रही है। एक ओर दक्षिण-पश्चिम मानसून कमजोर रहने की आशंका है, वहीं दूसरी ओर भू-राजनीतिक तनाव के कारण कृषि उत्पादों की लागत भी बढ़ रही है। ऐसे में कृषि क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित हो सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि कमजोर मानसून के कारण खरीफ के साथ ही रबी सीजन की फसलों का उत्पादन घट सकता है, जिससे किसानों की आय प्रभावित होगी। इसके साथ ही खाद्य वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी होने की संभावना है। इसका असर ग्रामीण बाजारों में ट्रैक्टर, दोपहिया वाहन और अन्य कृषि आधारित उत्पादों की मांग पर भी पड़ सकता है।
रिपोर्ट के अनुसार यदि मानसून कमजोर रहता है तो देश में जलविद्युत उत्पादन में 10 से 15 फीसदी तक की कमी आ सकती है। इसके अलावा महंगाई बढ़ने, ग्रामीण उपभोग घटने और सरकारी वित्तीय स्थिति पर भी दबाव बढ़ने की आशंका जताई गई है।
एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स के अनुसार कमजोर मानसून का असर वित्तीय क्षेत्र पर भी पड़ सकता है। बैंकों में ऋण वृद्धि की गति धीमी हो सकती है और कृषि क्षेत्र से जुड़े कर्ज की गुणवत्ता में कुछ गिरावट आ सकती है। हालांकि, बैंकों की आय पर इसका प्रभाव सीमित रहने की संभावना है। दूसरी ओर, माइक्रोफाइनेंस संस्थानों (एमएफआई) पर अधिक दबाव पड़ सकता है, क्योंकि उनका बड़ा ग्राहक वर्ग ग्रामीण क्षेत्रों से ही जुड़ा है और उनकी ऋण वापसी क्षमता अपेक्षाकृत कमजोर मानी जाती है।
एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स के अनुसार माइक्रो फाइनेंस संस्थान बैंकों की तुलना में अधिक जोखिम में हैं और कृषि क्षेत्र से जुड़े ऋणों की गुणवत्ता में कुछ गिरावट आ सकती है। हालांकि, गैर-कृषि क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों की मजबूती और भारतीय वित्तीय प्रणाली की स्थिरता व्यापक आर्थिक जोखिमों को सीमित रखने में मदद करेगी। रिपोर्ट के अनुसार विवेकपूर्ण ऋण वितरण और समय पर नियामकीय हस्तक्षेप से मानसून कमजोर रहने की स्थिति में भी वित्तीय जोखिमों को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें