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09 जुलाई 2026

तमिलनाडु के गन्ना किसानों ने एफआरपी 5,500 रुपये प्रति टन तय करने की मांग की

तिरुचिरापल्ली: केंद्र सरकार द्वारा 2026-27 चीनी सत्र के लिए गन्ने का उचित एवं लाभकारी मूल्य (एफआरी) 3,600 रुपये प्रति टन निर्धारित किए जाने पर तमिलनाडु के गन्ना किसानों ने नाराजगी जताई है। किसानों का कहना है कि, 100 रुपये प्रति टन की बढ़ोतरी खेती की लगातार बढ़ती लागत के मुकाबले बेहद कम है।


तमिलनाडु कावेरी किसान संरक्षण संघ के सचिव एस. विमलनाथन ने कहा कि, सरकार द्वारा घोषित मूल्य न तो उचित है और न ही लाभकारी। उन्होंने कहा, खेती में उपयोग होने वाले सभी इनपुट की लागत लगातार बढ़ी है, लेकिन किसानों को उसके अनुरूप लाभकारी मूल्य नहीं मिल रहा। वर्तमान उत्पादन लागत को देखते हुए एफआरी कम से कम 5,500 रुपये प्रति टन होना चाहिए।

लालगुडी के निकट कोप्पावली गांव के किसान केएसटी अंगमुथु के अनुसार चीनी मिलों की आय केवल चीनी बिक्री तक सीमित नहीं है। उन्होंने कहा कि मिलें बिजली उत्पादन, कागज निर्माण, एथेनॉल, जैव उर्वरक और अन्य मूल्यवर्धित उत्पादों से भी अच्छी कमाई करती हैं। ऐसे में सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि इन अतिरिक्त आय का उचित हिस्सा भी किसानों को एफआरपी के माध्यम से मिले।

अंगमुथु ने बताया कि एक एकड़ गन्ने की खेती पर 45,000 से 50,000 रुपये तक खर्च आता है, जबकि किसानों को इससे केवल 55,000 से 60,000 रुपये की आय होती है। कम मुनाफे के कारण उन्होंने अपनी गन्ने की खेती 10 एकड़ से घटाकर 5 एकड़ कर दी है। अरिग्नार अन्ना शुगर मिल गन्ना उत्पादक संघ के अध्यक्ष पी. रामासामी ने बताया कि तंजावुर की चीनी मिल पहले हर वर्ष करीब 6 लाख टन गन्ने की पेराई करती थी, लेकिन अब यह घटकर लगभग 1.40 लाख टन रह गई है।

उन्होंने कहा कि जिले में गन्ने का रकबा भी 15 हजार एकड़ से घटकर लगभग 3,500 एकड़ रह गया है। इसका मुख्य कारण खेती की बढ़ती लागत और किसानों को पर्याप्त मूल्य नहीं मिलना है। रामासामी ने केंद्र सरकार से मांग की कि गन्ने की उत्पादन लागत को ध्यान में रखते हुए FRP में फिर से संशोधन किया जाए, ताकि किसानों को लाभकारी मूल्य मिल सके और गन्ना खेती को बढ़ावा मिले।

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