नई दिल्ली। मानसूनी सीजन का डेढ़ महीना बीतने के बावजूद सामान्य से कम बारिश एवं अल नीनो के असर से घरेलू बाजार में चीनी की कीमतों में तेजी आई है। महीने भर के दौरान चीनी की कीमतों में 320 से 460 रुपये प्रति क्विंटल की तेजी आ चुकी है तथा खपत का सीजन होने के कारण आगामी दिनों में इसकी मांग और बढ़ेगी, जिस कारण भाव तेज बने रहने की उम्मीद है।
भारतीय मौसम विभाग, आईएमडी के अनुसार पहली जून से 14 जुलाई तक देशभर के 36 सब डिवीजनों में से केवल एक में बहुत ज्यादा बारिश, एक में ज्यादा बारिश तथा एक सब डिवीजन में सामान्य बारिश हुई है। इस दौरान 4 सबडिवीजनों में कम बारिश, 15 सब डिवीजनों में बहुत कम और 14 सब डिवीजनों में बारिश हुई ही नहीं है।
दिल्ली में बुधवार 15 जुलाई को को चीनी के थोक दाम बढ़कर 4,760 रुपये, कानपुर में 4,780 रुपये तथा मुंबई में 4,680 रुपये और कोलकाता में 4,860 रुपये प्रति क्विंटल हो गए। दिल्ली में 15 जून 2026 को चीनी के थोक भाव 4,440 रुपये, कानपुर में 4,450 रुपये तथा मुंबई में 4,220 रुपये और कोलकाता में 4,450 रुपये प्रति क्विंटल थे।
जानकारों के अनुसार, जून महीने में मानसून की देरी के साथ मध्य जुलाई तक प्रमुख गन्ना उत्पादक क्षेत्रों में सामान्य से कम बारिश के कारण गन्ने की खड़ी फसल को लेकर चिंता बढ़ गई है। इससे आगामी पेराई सीजन में चीनी के उत्पादन में कमी आने की आशंका बढ़ने लगी है, जिसका असर घरेलू बाजार में चीनी की कीमतों में तेजी के रूप में देखने को मिल रहा है।
व्यापारियों के अनुसार आने वाले दिनों में त्योहारी सीजन के दौरान चीनी की मांग बढ़ने से कीमतों में मजबूती बनी रहने की संभावना है। केंद्र सरकार ने मई में घरेलू उपलब्धता सुनिश्चित करने और अल नीनो के संभावित प्रभाव को देखते हुए चीनी निर्यात पर प्रतिबंध लगाया था। निर्यात पर रोक और मौसम संबंधी चिंताओं के कारण घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता सीमित रहने की आशंका है, जिससे कीमतों को समर्थन मिल रहा है।
केंद्र सरकार ने जुलाई 2026 के लिए घरेलू बाजार में बिक्री हेतु 22 लाख टन चीनी का मासिक कोटा जारी किया था, जबकि जून 2026 में यह कोटा 22.5 लाख टन का था। त्योहारी सीजन को देखते हुए अगस्त में घरेलू बाजार में चीनी की बिक्री बढ़कर 23 से 24 लाख टन होने का अनुमान है।
कृषि मंत्रालय के अनुसार 10 जुलाई तक चालू खरीफ सीजन में गन्ने की बुआई बढ़कर 57.58 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जो कि पिछले साल की समान अवधि के 56.72 लाख हेक्टेयर की तुलना में थोड़ी अधिक है।

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