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11 मार्च 2023

मिलों की खरीद बढ़ने से मूंग एवं उड़द महंगी, चना की कीमतें कमजोर

नई दिल्ली। दाल मिलों की खरीद बनी रहने से घरेलू बाजार में शुक्रवार को आयातित उड़द के साथ ही मूंग के दाम तेज हुए, जबकि चना की कीमतों में मंदा आया। अन्य दालों की कीमतें लगभग स्थिर बनी रही।


व्यापारियों के अनुसार बर्मा के स्थानीय बाजार में उड़द के भाव तेज हुए हैं, जिस कारण घरेलू बाजार में आयातित उड़द के दाम बढ़ गए। सूत्रों के अनुसार भारतीय आयातकों ने करीब 15 कंटेनर नई उड़द एफएक्यू के आयात सौदे किए हैं। आयातित उड़द महंगी है, जबकि देसी उड़द के भाव नीचे हैं। जानकारों के अनुसार आयातक उड़द के दाम तेज करना चाहते हैं लेकिन एक तो घरेलू बाजार में उड़द दाल में दक्षिण भारत की मांग सामान्य की तुलना में कमजोर है, दूसरा आगामी दिनों में आंध्र प्रदेश में नई फसल की आवक बढ़ेगी। उधर बर्मा के स्थानीय बाजार में नई उड़द की आवक लगातार बढ़ रही है तथा उत्पादन अनुमान भी ज्यादा है। इसलिए उड़द की कीमतों में बड़ी तेजी टिक नहीं पायेगी।

बढ़े दाम पर मांग कमजोर होने से घरेलू बाजार में लेमन अरहर के भाव रुक गए हैं। महाराष्ट्र के कृषि निदेशालय ने राज्य में अरहर के उत्पादन अनुमान में कटौती की है, जिस कारण स्टॉकिस्ट इसके भाव तेज कर रहे हैं। हालांकि अरहर दाल में खुदरा के साथ ही थोक में मांग कमजोर है। उधर अफ्रीकी देशों के साथ ही बर्मा से अरहर का आयात बना रहेगा। चालू महीने में घरेलू मंडियों में भी देसी अरहर की आवक बनी रहेगी। इसलिए अरहर की कीमतों में हल्की तेजी तो बन सकती है लेकिन बड़ी तेजी के आसार कम है।

कर्नाटक की गुलबर्गा मंडी में नई अरहर की आवक 8,000 बोरियों की हुई तथा इसके भाव 50 रुपये तेज होकर दाम 7800 से 8250 रुपये प्रति क्विंटल हो गए। लातूर मंडी में नई अरहर के बिल्टी दाम 8400 से 8500 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर बने रहे। उदगीर मंडी में अरहर के बिल्टी भाव 8000 से 8100 रुपये प्रति क्विंटल के पूर्व स्तर पर स्थिर हो गए।

गुलबर्गा मंडी में नए चना की आवक 4,000 बोरियों की हुई तथा इसके भाव 4600 से 4700 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर बने रहे।

गुंटूर मंडी में उड़द के दाम 7400 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर बने रहे, जबकि विजयवाड़ा में नई उड़द 50 रुपये तेज होकर भाव 7400 रुपये प्रति क्विंटल हो गए।

उत्तर प्रदेश ललितपुर मंडी में नई मसूर में व्यापार 5,300 से 6,400 रुपये प्रति क्विंटल की दर से हुआ तथा दैनिक आवक 2,500 बोरियों की हुई।

दिल्ली में देसी मसूर के साथ ही बंदरगाह पर आयातित मसूर के दाम स्थिर बने रहे। जानकारों के अनुसार मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के मसूर उत्पादक क्षेत्रों में मौसम साफ हो गया है, जिससे आगामी दिनों में इन राज्यों की मंडियों में नई मसूर की आवक बढ़ेगी। चालू चालू रबी सीजन में मसूर की बुआई बढ़ी है तथा उत्पादन अनुमान भी ज्यादा है। उधर कनाडा के साथ ही ऑस्ट्रेलिया से आयात बना रहेगा। इसलिए मसूर के भाव में हल्का सुधार तो बन सकता है, लेकिन बड़ी तेजी के आसार कम है।

दाल मिलों की कमजोर मांग से दिल्ली में चना के दाम लगातार दूसरे दिन 50 रुपये कमजोर हुए। व्यापारियों के अनुसार बढ़े दाम मिलों की खरीद नहीं बढ़ पा रही, जबकि पिछले दिनों लगातार नेफेड नीचे दाम पर चना बेच रही थी, जिस कारण व्यापारियों का माल नहीं निकल पाया। कर्नाटक के बाद गुजरात से चना की एमएसपी पर खरीद शुरू हो गई है, तथा नेफेड जल्द ही चना की बिक्री बंद करेगी। अत: आगामी दिनों में एमएसपी पर खरीद बढ़ने पर ही चना की कीमतों में सुधार आ सकता है।

दिल्ली में मूंग के भाव 50 रुपये तेज हुए हैं। व्यापारियों के अनुसार मध्य प्रदेश में हाल ही हुई बारिश से नई मूंग की आवकों में देरी की आशंका है, साथ ही बढ़िया क्वालिटी की उपलब्धता कम मानी जा रही है। इसलिए मूंग के भाव में हल्का सुधार तो आया है, लेकिन बड़ी तेजी के आसार नहीं है।  मूंग दाल में ग्राहकी सामान्य की तुलना में कमजोर है, जिस कारण दाल मिलें केवल जरुरत के हिसाब से ही खरीद कर रही है। चालू रबी सीजन में मूंग की बुवाई पिछले साल की तुलना में बढ़ी है।

दाल मिलों की मांग बनी रहने से दिल्ली में उड़द एफएक्यू नई और पुरानी के भाव में 75-75 रुपये की तेजी आकर दाम क्रमश: 7350 रुपये और 7275 से 7300 रुपये प्रति क्विंटल हो गए। इस दौरान नई उड़द एसक्यू के दाम 75 रुपये बढ़कर 8075 से 8100 रुपये प्रति क्विंटल हो गए, जबकि पुरानी उड़द एसक्यू के दाम 75 रुपये तेज होकर 8,025 रुपये प्रति क्विंटल हो गए।

मुंबई में उड़द एफएक्यू की कीमतों में 50 रुपये की तेजी आकर भाव 6950 से 7000 रुपये प्रति क्विंटल हो गए।

चेन्नई में उड़द एसक्यू के दाम हाजिर डिलीवरी के 100 रुपये बढ़कर 7775 रुपये प्रति क्विंटल हो गए। दौरान उड़द एफएक्यू के दाम हाजिर डिलीवरी के भाव 6925 रुपये प्रति क्विंटल के स्तर पर स्थिर बने रहे।

दाल मिलों की सीमित मांग से दिल्ली में बर्मा की लेमन अरहर के भाव 8050 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए।

इस दौरान चेन्नई में लेमन अरहर के भाव 50 रुपये कमजोर होकर भाव 7700 रुपये प्रति क्विंटल रह गए।

दाल मिलों की सीमित मांग के कारण मुंबई में लेमन अरहर के दाम 7750 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए।

मुंबई में अफ्रीकी देशों से आयातित अरहर के दाम स्थिर बने रहे। सूडान से आयातित अरहर के दाम 7900 से 7950 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए। इस दौरान तंजानिया की अरुषा अरहर के दाम 6800 से 6850 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए। मोजाम्बिक लाइन की गजरी अरहर की कीमतें 6375 से 6400 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गई। मलावी से आयातित अरहर के दाम 6100 से 6150 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए। मोजाम्बिक की सफेद अरहर के भाव 6550 रुपये प्रति क्विंटल के पूर्व स्तर पर स्थिर हो गए।

दाल मिलों की सीमित मांग से दिल्ली में मध्य प्रदेश की मसूर के दाम 6,000 से 6,025 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए। इस दौरान कनाडा की मसूर की कीमतें 5925 रुपये प्रति क्विंटल बोली गई।

कनाडा की मसूर की कीमतें कंटेनर में 6,000 से 6,050 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गई। ऑस्ट्रेलिया की मसूर की कीमतें कंटेनर में 6,050 से 6,100 रुपये प्रति क्विंटल के स्तर पर स्थिर गई। मुंद्रा बंदरगाह पर कनाडा की मसूर के दाम 5650 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए। इस दौरान हजिरा बंदरगाह पर कनाडा की मसूर के भाव 5,725 से 5,750 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए।

दिल्ली में चना के भाव लगातार दूसरे दिन 50 रुपये कमजोर होकर राजस्थानी चना के भाव 5250 से 5275 रुपये प्रति क्विंटल रह गए। इस दौरान मध्य प्रदेश के चना के भाव घटकर 5225 से 5250 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए।

राजस्थान लाईन की मूंग की कीमतें दिल्ली में 50 रुपये तेज होकर दाम 8100 से 8200 रुपये प्रति क्विंटल हो गई।

एफसीआई ने पांचवी ई-नीलामी में 5.39 लाख टन गेहूं बेचा

नई दिल्ली। भारतीय खाद्य निगम, एफसीआई ने खुले बाजार बिक्री योजना, ओएमएसएस के तहत ई-नीलामी के पांचवें दौर में 5.39 लाख टन गेहूं की बिक्री की। इसका औसत बिक्री मूल्य 2,197.91 रुपये प्रति क्विंटल है जो पिछले दौर की तुलना में 4 रुपये प्रति क्विंटल अधिक है।


गेहूं और आटे की कीमत को नियंत्रित करने के लिए एफसीआई द्वारा गेहूं की 9 मार्च को 5वीं ई-नीलामी की गई। एफसीआई के 23 क्षेत्रों में 657 डिपो से कुल 11.88 लाख टन गेहूं बेचने की पेशकश की गई, जिसमें से 1,248 बोलीदाताओं ने 5.39 लाख टन गेहूं की खरीद की।

चौथी ई-नीलामी तक 23.47 लाख टन गेहूं की बिक्री की जा चुकी थी, जिसमें से मिलों ने 19.51 लाख टन गेहूं उठा लिया है। केंद्र सरकार ने ओएमएसएस के तहत 45 लाख टन गेहूं बेचने का फैसला किया हुआ है, जिसमें से 5वीं ई-नीलामी के बाद अब कुल गेहूं की बिक्री 28.86 लाख टन हो गई है।

महंगाई को नियंत्रण में रखने और गेहूं व इसके उत्पादों की कीमतों को घटाने के लिए केंद्र सरकार ने केंद्रीय पूल से 50 लाख टन गेहूं बेचने का फैसला किया है। इसमें से 45 लाख टन गेहूं की बिक्री भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) की ओर से आटा मिलों, गेहूं उत्पाद निर्माताओं और बड़े व्यापारियों जैसे थोक खरीदारों को की जा रही है।

गुजरात और मध्य प्रदेश में गेहूं की दैनिक आवक शुरू हो गई है, तथा मौसम साफ रहा तो चालू महीने के मध्य बाद इन राज्यों में नई फसल की आवक बढ़ेगी। चालू महीने के अंत तक राजस्थान की मंडियों में भी नई फसल की आवक शुरू हो जायेगी। कृषि मंत्रालय के दूसरे आरंभिक अनुमान के अनुसार चालू रबी सीजन में गेहूं की रिकॉर्ड पैदावार 11.21 करोड़ टन होने का अनुमान है।

केंद्र सरकार दस लाख टन अतिरिक्त चीनी के निर्यात कोटे को दे सकती है मंजूरी

नई दिल्ली। केंद्र सरकार चालू पेराई सीजन में 10 लाख टन चीनी के अतिरिक्त कोटे के निर्यात की मंजूरी दे सकती है। इससे पहले सरकार ने इस साल 60 लाख टन चीनी के निर्यात की अनुमति दी हुई है।


खाद्य मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव सुबोध कुमार ने कहा कि अगले महीने हमें देश में चीनी उत्पादन का ठोस आंकड़ा मिल जाएगा, उसके बाद फिर हम चीनी के और निर्यात पर विचार करेंगे।

उन्होंने बताया कि पहली अक्टूबर 2022 से शुरू हुए चालू पेराई सीजन (अक्टूबर-सितंबर) के दौरान देश में चीनी का उत्पादन 336 लाख टन होने का अनुमान है। अत: उत्पादन 336 लाख टन होता है, तो फिर हमारे पास चालू पेराई सीजन में अतिरिक्त 10 लाख टन चीनी का निर्यात करने की गुंजाइश है।

उन्होंने बताया कि चालू पेराई सीजन 2022-23 में फरवरी अंत तक चीनी का उत्पादन 247 लाख टन पर पहुंच गया है। पेराई सीजन 2021-22 में देश का चीनी उत्पादन 359 लाख टन का हुआ था।

भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चीनी उत्पादक देश है और शीर्ष निर्यातकों में से एक है।

इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन, इस्मा के अनुसार पहली अक्टूबर 2022 से शुरू हुए चालू पेराई सीजन 2022-23 के पहले पांच महीनों पहली अक्टूबर 2022 से 28 फरवरी 2023 तक चीनी का उत्पादन 1.81 फीसदी बढ़कर 257.6 लाख टन का हो चुका है, जबकि पिछले पेराई सीजन की समान अवधि में इसका उत्पादन केवल 253 लाख टन का ही हुआ था।

इस्मा के अनुसार 28 फरवरी 2023 तक देशभर में 467 चीनी मिलों में पेराई चल रही है, जबकि पिछले पेराई सीजन की समान अवधि में केवल 484 चीनी मिलों में ही पेराई चल रही थी।

अप्रैल से जनवरी के दौरान बासमती तथा गैर बासमती चावल के निर्यात में बढ़ोतरी

नई दिल्ली। चालू वित्त वर्ष 2022-23 के पहले 10 महीनों अप्रैल से जनवरी के दौरान जहां बासमती चावल के निर्यात में 18.36 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है, वहीं इस दौरान गैर बासमती चावल का निर्यात 3.91 फीसदी बढ़ा है।


वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अनुसार चालू वित्त वर्ष 2022-23 के अप्रैल से जनवरी के दौरान बासमती चावल का निर्यात बढ़कर 36.55 लाख टन का हो चुका है जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में इसका निर्यात केवल 30.88 लाख टन का ही हुआ था।

गैर बासमती चावल का निर्यात चालू वित्त वर्ष के अप्रैल से जनवरी के दौरान 3.91 फीसदी बढ़कर 145.62 लाख टन का हो चुका है जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में इसका निर्यात केवल 140.14 लाख टन का ही हुआ था।

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अनुसार के अनुसार मूल्य के हिसाब से चालू वित्त वर्ष 2022-23 के अप्रैल से जनवरी के दौरान बासमती चावल का निर्यात बढ़कर 30,514 करोड़ रुपये का हुआ है, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में इसका निर्यात केवल 20,111 करोड़ रुपये का ही हुआ था।

गैर बासमती चावल का निर्यात चालू वित्त वर्ष के अप्रैल से जनवरी के दौरान मूल्य के हिसाब से बढ़कर 41,273 करोड़ रुपये का हुआ है, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में इसका निर्यात केवल 37,221 करोड़ रुपये का ही हुआ था।

जानकारों के अनुसार चालू सप्ताह में पंजाब, हरियाणा एवं दिल्ली के नया बाजार में बासमती चावल की कीमतों में 100 से 150 रुपये प्रति क्विंटल का सुधार आया है, तथा आगामी दिनों में मांग बढ़ने की उम्मीद है। हरियणा लाईन से डीपी पूसा सफेद सेला चावल का व्यापार 8200 से 8300 रुपये प्रति क्विंटल की दर पर हुआ। इस दौरान 1,718 स्टीम का व्यापार पंजाब लाइन से 8800 से 8850 पये प्रति क्विंटल की दर से हुए। 1,401 स्टीम चावल का व्यापार हरियाणा से 9000 से 9100 रुपये प्रति क्विंटल की पर हुआ।  

घरेलू मंडियों में धान की आवक घटकर सीमित मात्रा में ही हो रही है, साथ ही मिलर्स की मांग भी कमजोर होने से धान की कीमतें लगभग स्थिर बनी हुई हैं। नरेला मंडी में शनिवार को 1,718 किस्म के धान के भाव 4,260 रुपये, ताज किस्म के धान के भाव 3,152 रुपये एवं आरएच-10 किस्म के धान के भाव 2,928 रुपये प्रति क्विंटल रहे। पंजाब की कोटकपूरा मंडी में पूसा 1,121 किस्म के धान के भाव 4250 से 4515 रुपये, 1,718 किस्म के धान के भाव 4000 से 4450 रुपये प्रति क्विंटल रहे। 

फरवरी अंत तक चीनी का उत्पादन 1.81 फीसदी बढ़ा - इस्मा

नई दिल्ली। पहली अक्टूबर 2022 से शुरू हुए चालू पेराई सीजन 2022-23 के पहले पांच महीनों पहली अक्टूबर 2022 से 28 फरवरी 2023 तक चीनी का उत्पादन 1.81 फीसदी बढ़कर 257.6 लाख टन का हो चुका है, जबकि पिछले पेराई सीजन की समान अवधि में इसका उत्पादन केवल 253 लाख टन का ही हुआ था।


इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन, इस्मा के अनुसार 28 फरवरी 2023 तक देशभर में 467 चीनी मिलों में पेराई चल रही है, जबकि पिछले पेराई सीजन की समान अवधि में केवल 484 चीनी मिलों में ही पेराई चल रही थी।

उत्तर प्रदेश में चालू पेराई सीजन में 28 फरवरी 2023 तक 70 लाख टन चीनी का उत्पादन हो चुका है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 68.6 लाख टन से थोड़ा ज्यादा है। राज्य में 113 चीनी मिलों में पेराई चल रही है, जबकि पिछले पेराई सीजन की समान अवधि में 112 चीनी मिलों में पेराई चल रही थी।

महाराष्ट्र में चालू पेराई सीजन में चीनी का उत्पादन थोड़ा घटकर 28 फरवरी 2023 तक 95.2 लाख टन का ही हुआ है, जबकि पिछले पेराई सीजन में इस समय तक राज्य में 97.2 लाख टन चीनी का उत्पादन हो चुका था। इस समय राज्य में 180 चीनी मिलों में पेराई चल ही है, जबकि पिछले पेराई सीजन में इस समय तक 197 चीनी मिलों में पेराई चल रही थी।

कर्नाटक में चालू पेराई सीजन में फरवरी 2023 अंत तक चीनी का उत्पादन बढ़कर 51.2 लाख टन का हो चुका है जोकि पिछले पेराई सीजन की समान अवधि के 50.8 लाख टन से ज्यादा है। इस समय राज्य में 52 चीनी मिलों में पेराई चल ही है, जबकि पिछले पेराई सीजन में इस समय तक 60 चीनी मिलों में पेराई चल रही थी।

देश के अन्य राज्यों में चालू पेराई सीजन में 28 जनवरी 2023 तक चीनी का उत्पादन 41.2 लाख टन का हो चुका है, जबकि पिछले पेराई सीजन की समान अवधि में इन राज्यों में केवल 36.4 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ था। अन्य राज्य में 122 चीनी मिलों में पेराई चल ही है, जबकि पिछले पेराई सीजन में इस समय तक 115 चीनी मिलों में पेराई चल रही थी।

चालू पेराई सीजन में 528 चीनी मिलों में पेराई चल रही थी, जिनमें से फरवरी अंत तक 61 मिलों में पेराई बंद हो चुकी है।  

समर्थन मूल्य पर 350 लाख टन गेहूं की खरीद का लक्ष्य, चौथी नीलामी में 5.4 लाख टन गेहूं बिका

नई दिल्ली। सूत्रों के अनुसार पहली अप्रैल 3023 से शुरू होने रबी विपणन सीजन 2023-24 के लिए केंद्र सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य, एमएसपी पर 350 लाख टन गेहूं की खरीद का लक्ष्य तय किया है। खाद्य मंत्रालय, राज्य के खाद्य विभागों और भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के अधिकारियों की हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया।


पिछले रबी विपणन सीजन 2022-23 में एफसीआई ने एमएसपी पर 187.92 लाख टन गेहूं की खरीद की थी। पिछले साल मौसम गर्म होने की वजह से गेहूं की उत्पादकता प्रभावित हुई थी, इसलिए सरकारी खरीद तय लक्ष्य से कम हो पाई।

पहली अप्रैल से शुरू होने वाले रबी विपणन सीजन के लिए केंद्र सरकार ने गेहूं का एमएसपी 2,125 रुपए प्रति क्विंटल तय किया हुआ है, जोकि पिछले रबी विपणन सीजन के मुकाबले 110 रुपये ज्यादा है। हालांकि उत्पादक मंडियों में अभी गेहूं के दाम एमएसपी से अभी ज्यादा है। द्य

कृषि मंत्रालय के दूसरे आरंभिक अनुमान के अनुसार चालू रबी सीजन में गेहूं की रिकॉर्ड पैदावार 11.21 करोड़ टन होने का अनुमान है, तथा उत्पादक राज्यों में मौसम साफ है, इसलिए होली के बाद गुजरात और मध्य प्रदेश में गेहूं की दैनिक आवकों में बढ़ोतरी होगी।

एफसीआई की बुधवार को हुई चौथी ई-नीलामी में 11.57 लाख टन गेहूं की बिक्री की पेशकश की गई थी। इसकी तुलना में 5.4 लाख टन गेहूं के लिए बोली लगी। केंद्रीय खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा ने कहा है कि खुले बाजार बिक्री योजना (ओएमएसएस) के तहत भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) द्वारा थोक खरीदारों को गेहूं की बिक्री से घरेलू बाजार में गेहूं और आटा के भाव घटे हैं।

केंद्र सरकार केंद्रीय पूल से ओएमएसएस के तहत 50 लाख टन गेहूं बेच रही है। इसमें 45 लाख टन गेहूं की बिक्री आटा मिलों, गेहूं उत्पाद निर्माताओं और बड़े व्यापारियों जैसे थोक खरीदारों को एफसीआई के जरिये की जा रही है। इससे पहले तीन नीलामी में एफसीआई 18.07 लाख टन गेहूं की बिक्री कर चुका है। चौथी नीलामी के बाद गेहूं की कुल बिक्री 23.47 लाख टन हो चुकी है।

एफसीआई की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है कि बोली लगाने वाले खरीदारों की ओर से 28 फरवरी तक 14.35 लाख टन गेहूं उठा लिया गया है।

केंद्र सरकार ने सूरजमुखी तेल के शुल्क मुक्त आयात कोटे को समाप्त किया

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने सरकार ने क्रूड सूरजमुखी तेल के शुल्क मुक्त आयात कोटा को बंद करने का फैसला किया है, इससे घरेलू जहां घरेलू बाजार में खाद्य तेलों के साथ ही तिलहन की कीमतों में सुधार आयेगा। जानकारों के अनुसार आगामी महीनों में पाम तेल का आयात बढ़ने की उम्मीद है।


विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) द्वारा जारी विज्ञप्ति के अनुसार पहली अप्रैल 2023 से टैरिफ रेट कोटा (टीआरक्यू) के तहत सूरजमुखी तेल का आयात बंद करने का फैसला किया है। टैरिफ रेट कोटा के तहत सूरजमुखी तेल के आयात की अंतिम तिथि को संशोधित कर 31 मार्च, 2023 कर दिया गया है। इसके अलावा, 2023-24 के लिए सूरजमुखी तेल के आयात के लिए टीआरक्यू का कोई आवंटन नहीं किया जाएगा।

अधिसूचना में कहा गया है कि वित्त वर्ष 2022-23 के दौरान जारी वर्ष 2023-24 के लिए कच्चे सूरजमुखी के बीज के तेल के आयात के लिए टैरिफ दर कोटा (टीआरक्यू) की वैधता 30 जून 2023 तक आयात की मंजूरी के लिए मान्य होगी, बशर्ते बिल ऑफ लैडिंग तिथि 31 मार्च 2023 या उससे पहले की हो।

केंद्र सरकार ने घरेलू बाजार में खाद्य तेलों कीमतों को कम करने के लिए सूरजमुखी तेल के 20 लाख टन वार्षिक आयात पर सीमा शुल्क और कृषि अवसंरचना विकास उपकर में छूट दी थी।

सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एसईए) ने कच्चे सूरजमुखी तेल के आयात को बंद करने के सरकार के फैसले का स्वागत किया है। एसईए ने कहा है कि यह एक स्वागत योग्य कदम है जो घरेलू रिफाइनरी के लिए समान अवसर सुनिश्चित करेगा और साथ ही किसानों को रबी तिलहन फसलों का उचित मूल्य दिलाने में मदद करेगा।

इस समय रबी तिलहन की प्रमुख फसल सरसों की कटाई चल रही है, तथा देश के कई राज्यों में सरसों के दाम न्यूनतम समर्थन मूल्य, एमएसपी 5,450 रुपये प्रति क्विंटल से नीचे आ गए हैं।