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30 जून 2015

एसटीसी ने 2,000 टन कोकोनट तेल का आयात करेगी


नई दिल्ली। सार्वजनिक कंपनी स्टेट ट्रेडिंग कार्पोरेषन आफ इंडिया लिमिटेड (एसटीसी) ने 2,000 टन कोकोनेट तेल के आयात हेतु निविदा आमंत्रित की है। निविदा के अनुसार तेल की आपूर्ति मुंदड़ा बंदरगाह पर (सीआईएफ) के आधार पर होगी।
एसटीसी के अनुसार निविदा भरने की अंतिम तिथि 2 जुलाई 2015 है तथा 1,008 टन कोकोनट तेल की षिपमेंट की अवधि 3 जुलाई से 15 अगस्त तय की गई है जबकि 987 टन कोकोनट तेल की षिपमेंट की अवधि 3 जुलाई से 31 अगस्त 2015 तय की गई है।

चालू वित वर्ष के पहले महीने में दलहन आयात 32 फीसदी बढ़ा


आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू वित वर्ष 2015-16 के पहले महीने अप्रैल में दलहन आयात में भारी बढ़ोतरी हुई है। इस दौरान दलहन के आयात में 32 फीसदी की बढ़ोतरी होकर कुल आयात 2.61 लाख टन का हुआ है। आयात में बढ़ोतरी के साथ ही राजस्थान सरकार दालों पर आवष्यक वस्तु अधिनियम के तहत स्टॉक सीमा लगाने के कारण पिछले आठ-दस दिनों में दलहन की कीमतों में गिरावट आई है।
कृषि मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अप्रैल 2015 में देष में दालों का आयात बढ़कर 2.61 लाख टन का हो गया जबकि पिछले साल अप्रैल महीने में 1.97 लाख टन दालों का आयात हुआ था। उन्होंने बताया कि मानसूनी बारिष कम होने के कारण फसल सीजन 2014-15 में दलहन की घरेलू पैदावार में कमी आई थी जिसकी वजह से उत्पादक मंडियों में दालों के भाव में तेजी आई थी। यही कारण है कि अप्रैल महीने में दलहन के आयात में बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने बताया कि वित वर्ष 2014-15 में देष में रिकार्ड 45.8 लाख टन दालों का आयात हुआ था जबकि वित वर्ष 2013-14 में 31.7 लाख टन दालों का आयात हुआ था।
दलहन आयातक फर्म के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि मंगलवार को आस्ट्रेलियाई चने के भाव मुंबई में 4,400 रुपये प्रति क्विंटल रह गए जबकि मयंमार से आयातित उड़द के भाव 7,600 रुपये तथा लेमन अरहर के भाव 7,050 रुपये प्रति क्विंटल रहे। केनेडियन मसूर के भाव मुंबई पहुंच 6,200 से 6,350 रुपये प्रति क्विंटल रहे। कनाडा की पीली मटर के भाव 2,521 रुपये और हरी मटर के भाव 2,750 से 2,850 रुपये प्रति क्विंटल रहे। रुस से आयातित काबुली के भाव 4,000 से 4,250 रुपये प्रति क्विंटल रहे।
दलहन कारोबारी दुर्गा प्रसाद ने बताया कि दिल्ली में चना के भाव 4,325 रुपये, मूंग के भाव 6,400 रुपये, मोठ के भाव 6,600 रुपये, उड़द के 7,800 रुपये, अरहर के भाव 6,900 रुपये और मसूर के भाव 6,500 रुपये प्रति क्विंटल रह गए। काबूली के भाव दिल्ली में 4,800 से 5,000 रुपये प्रति क्विंटल चल रहे हैं। उन्होंने बताया कि आयात में हुई बढ़ोतरी के साथ ही राजस्थान में दलहन पर स्टॉक सीमा लगा देने से दालों की कीमतों में गिरावट आई है।
कृषि मंत्रालय के तीसरे आरंभिक अनुमान के अनुसार फसल सीजन 2014-15 में देष में दलहन का उत्पादन घटकर 173.8 लाख टन होने का अनुमान है जबकि फसल सीजन 2013-14 में देष में रिकार्ड 192.5 लाख टन का उत्पादन हुआ था।.....आर एस राणा

29 जून 2015

निर्यातकों की मांग से बासमती चावल की कीमतों में और तेजी की संभावना


आर एस राणा
नई दिल्ली। बासमती चावल में इस समय निर्यातकों की अच्छी मांग बनी हुई है जबकि मिलरों के पास स्टॉक कम है। इसीलिए पिछले आठ-दस दिनों में पूसा 1,121 बासमती चावल सेला के भाव में 400 से 500 रुपये प्रति क्विंटल की तेजी आकर भाव 4,400 से 4,500 रुपये प्रति क्विंटल हो गए। निर्यातकों की मांग को देखते हुए इसकी मौजूदा कीमतों में और भी 150 से 200 रुपये प्रति क्विंटल की तेजी आने का अनुमान है।
चावल निर्यातक फर्म के एक अधिकारी ने बताया कि बासमती चावल खासकर के पूसा-1,121 सेला में इस समय निर्यात मांग अच्छी बनी हुई है जबकि मिलरों के पास स्टॉक कम है। इसीलिए बासमती चावल की कीमतों में तेजी बनी हुई है। उन्होंने बताया कि अगले आठ-दस दिनों में ईरान की आयात निविदा खुलेंगी, जिससे इसमें मांग और भी बढ़ने का अनुमान है। उत्पादक मंडियों में सोमवार को पूसा-1,121 बासमती चावल सेला का भाव बढ़कर 4,400 से 4,500 रुपये प्रति क्विंटल हो गए जबकि पूसा-1,121 बासमी चावल स्टीम का भाव बढ़कर 4,900 से 5,000 रुपये प्रति क्विंटल हो गया। पूसा 1,509 बासमती चावल सेला का भाव बढ़कर इस दौरान 3,300 से 3,400 रुपये और स्टीम का भाव 4,600 से 4,700 रुपये प्रति क्विंटल हो गया।
चावल व्यापारी संजीव अग्रवाल ने बताया कि चावल की कीमतों में आई तेजी के कारण स्टॉकिस्टा धान की बिकवाली सीमित मात्रा में कर रहे हैं। जिससे मंडियों में धान की कीमतों में तेजी देखी जा रही है। उत्पादक मंडियों में पूसा 1,121 बासमती धान के भाव बढ़कर 2,600 से 2,700 रुपये प्रति क्विंटल हो गए। पूसा 1,509 धान की कीमतें मंडियों में बढ़कर 1,900 से 2,000 रुपये प्रति क्विंटल हो गई।
एपीडा के अनुसार चालू वित वर्ष 2015-16 के पहले महीने अप्रैल में बासमती चावल का निर्यात बढ़कर 3.48 लाख टन का हुआ है जबकि वित वर्ष 2014-15 के अप्रैल महीने में देश से 2.85 लाख टन बासमती चावल का निर्यात हुआ था। वित वर्ष 2014-15 में देश से 37 लाख टन बासमती चावल का निर्यात हुआ था जोकि वित वर्ष 2013-14 के 37.5 लाख टन से कुछ कम था।.....
आर एस राणा

गेहूं की सरकारी खरीद 276 लाख टन के पार


नई दिल्ली। गेहंू की सरकारी खरीद 276.21 लाख टन हो गई है जबकि पिछले साल इस समय तक देशभर की मंडियों से 270.68 लाख टन गेहूं खरीदा गया था।
भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इस समय केवल राजस्थान से ही गेहूं की खरीद हो रही है जबकि अन्य राज्यों से खरीद बंद हो गई है। उन्होंने बताया कि अभी तक गेहूं की कुल खरीद में पंजाब की हिस्सेदारी 99.52 लाख टन, हरियाणा से 67.55 लाख टन, उत्तर प्रदेश से 22.67 लाख टन, मध्य प्रदेश से 72.61 लाख टन और राजस्थान से 12.97 लाख टन गेहूं की खरीद हुई है। उन्होंने बताया कि चालू सीजन में गेहूं की सरकारी खरीद में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी उत्तर प्रदेश में हुई है जबकि कमी राजस्थान में आई है।

27 जून 2015

मक्का की कीमतें एमएसपी से नीचे, खरीफ में बुवाई घटने की आषंका


आर एस राणा
नई दिल्ली। प्रमुख उत्पादक मंडियों में मक्का की कीमतें न्यूनतम निर्यात मूल्य (एमएसपी) से नीचे बनी हुई है जिसका असर चालू खरीफ में मक्का की बुवाई पर पड़ने की आषंका है। उत्तर प्रदेष और बिहार की उत्पादक मंडियों में मक्का के भाव 1,050 से 1,150 रुपये प्रति क्विंटल चल रहे हैं जबकि केंद्र सरकार ने खरीफ विपणन सीजन 2015-16 के लिए मक्का का एमएसपी 1,325 रुपये प्रति क्विंटल तय किया हुआ है।
मक्का कारोबारी पी सी गुप्ता ने बताया कि विष्व बाजार में मक्का के दाम नीचे बने हुए हैं जिसकी वजह से देष से मक्का के निर्यात पड़ते नहीं लग रहे है। गर्मी ज्यादा होने के कारण पोल्ट्री फीड निर्माताओं की मांग भी कमजोर बनी हुई है तथा इस समय थोड़ी-बहुत मांग स्टार्च मिलों की आ रही है। उन्होंने बताया कि उत्पादक मंडियों में रबी मक्का की आवक तो हो ही रही है। उन्होंने बताया कि आगामी दिनों में पोल्ट्री उद्योग की मांग तो बढ़ने का अनुमान है जिससे भाव में थोड़ा सुधार आ सकता है, लेकिन मक्का की उपलब्धता को देखते हुए भारी तेजी की संभावना नहीं है।
मक्का व्यापारी राजेष गुप्ता ने बताया कि दिल्ली में मक्का के भाव 1,215-1,220 रुपये प्रति क्विंटल चल रहे हैं। इस समय बिहार, आंध्रप्रदेष और कर्नाटका में रबी मक्का की आवक चल रही है जबकि अग्रेती फसल की आवक बिहार और पंजाब में षुरु हो गई है। खरीफ मक्का की आवक सितंबर में बन जायेगी। ऐसे में मक्का की कीमतों में तेजी की संभावना नहीं है। उन्होंने बताया कि उत्पादक मंडियों में मक्का के दाम काफी नीचे बने हुए है इसलिए चालू खरीफ में इसकी बुवाई में कमी आने की आषंका है। किसान मक्का के बजाए अन्य फसलों की बुवाई को तरजीह देंगे। उत्तर प्रदेष की मंडियों में मक्का के भाव 1,050 से 1,150 रुपये प्रति क्विंटल तथा बिहार की गुलाबबाग मंडी में भाव 1,125 रुपये प्रति क्विंटल चल रहे हैं।00
कृषि मंत्रालय के तीसरे आरंभिक अनुमान के अनुसार रबी सीजन में मक्का की पैदावार घटकर 64.8 लाख टन होने का अनुमान है जबकि पिछले साल रबी में इसकी पैदावार 71.1 लाख टन की हुई थी। फसल सीजन 2014-15 में मक्का की कुल पैदावार घटकर 227.4 लाख टन ही होने का अनुमान है जबकि पिछले साल इसकी पैदावार 242.6 लाख टन की हुई थी।.......आर एस राणा

केंद्र ने प्याज के निर्यात को हत्तोसाहित करने के लिए एमईपी में की भारी बढ़ोतरी


आर एस राणा
नई दिल्ली। निर्यातकों की अच्छी मांग से प्याज की कीमतों में घरेलू बाजार में आई तेजी से हलकान केंद्र सरकार ने न्यूनतम निर्यात मूल्य (एमईपी) में 175 डॉलर की बढ़ोतरी कर एमईपी 425 डॉलर प्रति टन तय कर दिया है। इससे घरेलू बाजार में प्याज की कीमतों में गिरावट आने का अनुमान है।
देष की मंडियों में प्याज की कीमतों में तीन महीने से तेजी बनी हुई है। चालू महीने में देषभर की मंडियों में प्याज का औसत भाव बढ़कर 973 से 1,936 रुपये प्रति क्विंटल हो गए। जबकि मई 2015 में प्याज का औसत भाव 866 से 1,620 रुपये प्रति क्विंटल था। इसके पहले अप्रैल 2015 में देषभर की मंडियों में प्याज का औसत भाव 800 से 1,440 रुपये प्रति क्विंटल था।
सूत्रों के अनुसार मार्च 2015 में देष से 1,15,629 टन प्याज का निर्यात हुआ है जबकि फरवरी 2015 में केवल 81,769 टन प्याज का निर्यात हुआ था। मार्च 2014 में देष से 1,00,000 टन प्याज का निर्यात हुआ था। हालांकि वित वर्ष 2014-15 में प्याज के कुल निर्यात में पिछले साल की तुलना में कमी आई है। वित वर्ष 2014-15 में देष कुल 10,86,071 टन प्याज का निर्यात हुआ है जबकि वित वर्ष 2013-14 में 13,58,193 टन प्याज का निर्यात हुआ था। अभी तक प्याज का एमईपी 250 डॉलर प्रति टन तय था।
कृषि मंत्रालय के आंरभिक अनुमान के अनुसार फसल सीजन 2014-15 में देष में 11.92 लाख हैक्टेयर में प्याज की बुवाई हुई थी तथा इसकी पैदावार घटकर 193.57 लाख टन होने का अनुमान है। फसल सीजन 2013-14 में देषा में 12.03 लाख हैक्टेयर में प्याज की बुवाई हुई थी तथा पैदावार 194.01 लाख टन की हुई थी। देष में प्याज की सबसे ज्यादा पैदावार महाराष्ट्र, बिहार, कर्नाटका, गुजरात, आंध्रप्रदेष, उत्तर प्रदेष, उड़ीसा और मध्य प्रदेष में होती है। जानकारों के अनुसार मार्च-अप्रैल महीने में हुई बेमौसम बारिष और ओलावृष्टि से भी प्याज की फसल का नुकसान हुआ था जिसकी वजह से उपलब्धता पिछले साल की तुलना में कम है।.....आर एस राणा

26 जून 2015

सेबी अगस्त से करेगा जिंस ब्रोकरों का पंजीकरण

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) खुद में वायदा बाजार आयोग (एफएमसी) के विलय के लिए दिशानिर्देश पूरे होने के साथ ही अगस्त से जिंस ब्रोकरों का पंजीकरण शुरू कर सकता है। सेबी ने मंगलवार को कहा था कि वह जिंस डेरिवेटिव्स के लिए खुद के नियम बना रहा है, जो अगस्त तक बन जाएंगे। सितंबर तक जिंस एक्सचेंजों के नियमन की तैयारी पूरी हो जाएगी। एफएमसी द्वारा प्रशासित जिंस ब्रोकर वर्तमान नियमों में किए गए बदलावों का इंतजार कर रहे हैं। एफएमसी के पास ब्रोकरों को सीधे नियंत्रित करने की शक्तियां नहीं हैं। अभी ब्रोकरों पर नियंत्रण जिंस एक्सचेंजों का होता है। सेबी ब्रोकरों का पंजीकरण करेगा और इसके लिए फीस वसूलेगा।

कमोडिटीज पार्टिसिपेंट्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीपीएआई) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और आईएसएफ कमोडिटीज के प्रवर्तक बी के सभरवाल ने कहा, 'हम सेबी के अधिकारियों के साथ दो बार बैठक (4 और 17 जून) कर चुके हैं। हमें संकेत मिले हैं कि ब्रोकरों का पंजीकरण 1 अगस्त के आसपास शुरू होगा और यह प्रक्रिया 30 सितंबर तक पूरी हो जाएगी।' सेबी ने जिंस ब्रोकरों से पंजीकरण के एवज में ली जाने वाली फीस तय नहीं की है। इस समय ब्रोकर को कोई राशि नहीं चुकानी होती है। सभरवाल ने कहा, 'हम सेबी को इस बात के लिए मनाएंगे कि जिंस ब्रोकरों से पंजीकरण शुल्क नहीं वसूला जाए।'

सीपीएआई जिंस सदस्यों के ऑटोमैटिक पंजीकरण का आग्रह करेगा। क्लियरिंग एजेंटों और गोदाम सेवा प्रदाताओं को भी सेबी के पास पंजीकरण कराना और एकमुश्त फीस देनी पड़ सकती है। पंजीकरण का हर साल नवीनीकरण होगा। डेस्टीमनी सिक्योरिटीज के प्रबंध निदेशक सुदीप बंद्योपाध्याय ने कहा, 'सरकार ने प्रतिभूति एवं अनुबंध नियमन अधिनियम में प्रतिभूति की परिभाषा में जिंसों को शामिल किया है। सेबी मुद्रा ब्रोकरों से मामूली पंजीकरण फीस ले रहा है। इसी तरह नियामक जिंसों के लिए पंजीकरण शुल्क को टाल सकता है।' सेबी के साथ बातचीत से जुड़े एक ब्रोकरेज के अधिकारी ने कहा, 'एफएमसी के सेबी में विलय और इसे लागू करने की तारीख की घोषणा के लिए सरकारी अधिसूचना का इंतजार कर रहे हैं।' इस विलय की घोषणा वित्त मंत्री अरुण जेटली ने फरवरी के आम बजट में की थी और इसके क्रियान्वयन की मियाद एक साल तय की गई थी। इसकेकुछ सप्ताह बाद संसद ने विलय के मसौदे को मंजूरी दे दी, जिसके तहत प्रतिभूति बाजार के वर्तमान नियम जिंस बाजारों पर भी लागू होंगे। (BS Hindi)