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03 मार्च 2017

बासमती चावल के निर्यात में 5 फीसदी कमी की आशंका

आर एस राणा
नई दिल्ली। दिसंबर के मुकाबले जनवरी में बासमती चावल के निर्यात में कुछ कमी आई है, इस दौरान बासमती चावल का निर्यात घटकर 3.31 लाख टन का ही हुआ है जबकि दिसंबर में बासमती चावल का निर्यात 3.41 लाख टन का हुआ था। एपीडा के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार चालू वित्त वर्ष 2016-17 में बासमती चावल के कुल निर्यात में 5 फीसदी की कमी आने की आशंका है तथा कुल निर्यात 38 से 39 लाख टन का ही होने का अनुमान है। उनका मानना है कि फरवरी-मार्च के दौरान बासमती चावल का निर्यात 6.00 से 6.50 लाख टन और होने का अनुमान है। वित्त वर्ष 2015-16 में देश से बासमती चावल का कुल निर्यात 40.45 लाख टन का हुआ था।
बासमती चावल के निर्यात में भले ही कमी आने की आशंका हो लेकिन भाव में आगे तेजी ही बनने का अनुमान है। व्यापारियों के अनुसार चालू सीजन में बासमती धान की कुल पैदावार में कमी आई थी, तथा पिछले दो साल से भाव में तेजी नहीं आने के कारण चावल मिलों ने स्टॉक कम किया, जबकि इस समय उत्पादक मंडियों में धान की दैनिक आवक कम हो रही है। इसलिए आगे बासमती धान के साथ ही चावल की कीमतों में और भी तेजी आने का अनुमान है। शुक्रवार को हरियाणा की करनाल मंडी में पूसा 1,121 बासमती चावल का भाव 3,150 रुपये, 1,509 का भाव 3,000 रुपये और डीपी धान का भाव 3,200 रुपये प्रति क्विंटल रहा। पूसा 1,121 बासमती चावल सेला का भाव मंडी में 5,900 रुपये प्रति क्विंटल रहा।
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अनुसार चालू वित्त वर्ष 2016-17 के अप्रैल से जनवरी के दौरान बासमती चावल का निर्यात 32.51 लाख टन का ही हुआ है जबकि पिछले वित्त वर्ष 2015-16 की समान अवधि में इनका निर्यात 34.51 लाख टन का हुआ था। मूल्य के हिसाब से अप्रैल से जनवरी के दौरान बासमती चावल का निर्यात चालू वित्त वर्ष 2016-17 के पहले 10 महीनों अप्रैल से जनवरी के दौरान 17,204.02 करोड़ रुपये का हुआ है जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में इसका निर्यात 19,469.16 करोड़ रुपये का हुआ था।
गैर-बासमती चावल के निर्याम में अप्रैल से जनवरी के दौरान जहां मात्रा में कमी आई है, वहीं मूल्य के हिसाब से निर्यात बढ़ा है। चालू वित्त वर्ष 2016-17 के अप्रैल से जनवरी के दौरान 52.14 लाख टन गैर बासमती चावल का निर्यात हुआ है जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में इसका निर्यात 53.54 लाख टन का हुआ था। मूल्य के हिसाब से चालू वित्त वर्ष के पहले दस महीनों अप्रैल से जनवरी के दौरान गैर-बामसती चावल का निर्यात 13,350.82 करोड़ रुपये का हुआ है जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में इसका निर्यात 12,843.96 करोड़ रुपये का हुआ था।........आर एस राणा

कॉमैक्स पर सोना 1234 डॉलर के नीचे

3 दिन की लगातार गिरावट के बाद अमेरिकी बाजार में क्रूड के दाम संभलते नजर आ रहे हैं। वहीं नॉन ओपेक में फरवरी में रूस के क्रूड उत्पादन में बदलाव नहीं हुआ है जिसका असर क्रूड के दाम पर पड़ता हुआ दिख रहा है। फिलहाल ब्रेंट क्रूड 55 डॉलर के ऊपर कारोबार कर रहा है। वहीं इस महीने फेड के रेट बढ़ाने की आशंका के चलते सोना दिसंबर के बाद से काफी कमजोर स्तर पर कारोबार कर रहा है। कॉमैक्स पर सोने का दाम 1234 डॉलर के नीचे है।

02 मार्च 2017

चीनी के उत्पादन में 37 लाख टन की कमी

आर एस राणा
नई दिल्ली। पहली अक्टूबर 2016 से शुरु हुए चालू पेराई सीजन में 28 फरवरी 2017 तक चीनी उत्पादन में 36.98 लाख टन की कमी आई है, इस दौरान केवल 162.45 लाख टन चीनी का ही उत्पादन हुआ है जबकि पिछले साल की समान अवधि में 199.43 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ था।
इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (इस्मा) के अनुसार उत्तर प्रदेश में चीनी का उत्पादन 17 फीसदी बढ़कर 62.46 लाख टन का हो चुका है जबकि पिछले साल इस समय तक राज्य में केवल 53.51 लाख टन चीनी का ही उत्पादन हुआ था। राज्य में इस समय 107 चीनी मिलों में पेराई चल रही है जबकि पिछले साल 28 फरवरी 2016 तक राज्य में 102 चीनी मिलों में ही पेराई चल रही थी।
महाराष्ट्र में चालू पेराई सीजन में 28 फरवरी 2017 तक केवल 41.15 लाख टन चीनी का ही उत्पादन हुआ है जबकि पिछले साल की समान अवधि में राज्य में 70.58 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ था। महाराष्ट्र में चालू पेराई सीजन में 153 चीनी मिलों में पेराई आरंभ हुई थी लेकिन गन्ने की कमी के कारण 28 फरवरी 2017 तक 136 चीनी मिलों में पेराई बंद हो चुकी है अब राज्य में केवल 17 चीनी मिलों में ही पेराई चल रही है।
कर्नाटका में चालू पेराई सीजन में 28 फरवरी तक 20.50 लाख टन चीनी का ही उत्पादन हुआ है जबकि पिछले साल इस समय तक राज्य में 36.15 लाख टन चीनी का उत्पादन हो चुका था। इस समय कर्नाटका में केवल एक चीनी मिल में पेराई चल रही है। तमिलनाडु में 28 फरवरी तक चीनी का 6.90 लाख टन का उत्पादन हुआ है जबकि पिछले साल इस समय तक राज्य में 5.28 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ था।
अन्य राज्यों आंध्रप्रदेश और तेलंगाना में 28 फरवरी तक 4.30 लाख टन चीनी का ही उत्पादन हुआ है जबकि पिछले साल 6.51 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ था। गुजरात में पिछले साल के 9.19 लाख टन के मुकाबले चालू पेराई सीजन में 28 फरवरी तक केवल 8 लाख टन चीनी का ही उत्पादन हुआ है। बिहार में चालू पेराई सीजन में अभी तक केवल 4.30 लाख टन चीनी का उत्पादन ही हुआ है जबकि पिछले पेराई सीजन में इस समय तक 4.49 लाख टन चीनी का उत्पादन हो चुका था।
उत्तराखंड में अभी तक 2.45 लाख टन, पंजाब में 4.50 लाख टन, हरियाणा में 3.75 लाख टन और छत्तीसगढ़ में 28 फरवरी तक 3.70 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ है। दक्षिण भारत के राज्यों में सूखे की स्थिति होने के कारण गन्ने की पैदावार महाराष्ट्र, कर्नाटका, तमिलनाडु, आंध्रप्रदेश और तेलंगाना के साथ ही गुजरात में कम हुई, जिससे चीनी का उत्पादन इन राज्यों में कम हुआ है।.................आर एस राणा

रिकार्ड खाद्यान्न की पैदावार से केंद्र सरकार मस्त, किसान पस्त

आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू फसल सीजन 2016-17 में देश में खाद्यान्न की रिकार्ड पैदावार 27.19 करोड़ टन होने के आरंभिक अनुमान से जहां केंद्र सरकार की बांछे खिली हुई हैं, वहीं किसानों को फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) भी नहीं मिलने से कर्जे का बोझ और बढ़ रहा है। उत्पादक मंडियों में खरीफ दलहन अरहर और मूंग के साथ ही तिलहनी फसलों सोयाबीन और मूंगफली के भाव एमएसपी से नीचे बने हुए हैं जबकि रबी दलहन की आवक बनने से पहले ही मसूर के भाव घट गए हैं। रबी तिलहन में सरसों के भाव एमएसपी से नीचे आ गए हैं। गेहूं की फसल की आवक अभी ठीक ठंग से चालू भी नहीं हुई है कि इसके भाव भी एमएसपी से नीचे आ गए हैं। प्याज और आलू की हालत यह कि किसानों को सड़कों पर आलू फैंकना पड़ रहा है जबकि प्याज के किसानों को लागत भी वसूल नहीं हो रही है।
हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात में चालू सीजन में देश में रिकार्ड खाद्यान्न उत्पादन के लिए किसानों को खुब सराहा था, लेकिन रेडियों पर किसानों का गुणगान करने से किसानों की माली हालत में सुधार नहीं आयेगा, कम से कम फसलों का एमएसपी तो किसान को मिलें, यह सुनिश्चित करना केंद्र और राज्य सरकारों की जिम्मेदारी होनी चाहिए। केंद्र सरकार उंचे भाव में दलहन, तिलहन और गेहूं का आयात विदेशों से तो कर सकती है, लेकिन अपने किसानों को एमएसपी भी नहीं दे सकती।
कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू फसल सीजन 2016-17 में देश में गेहूं का रिकार्ड उत्पादन 966.4 लाख टन होने का अनुमान है, तो फिर गेहूं के आयात को अभी तक बंद क्यों नहीं किया गया है? गेहूं की नई फसल की आवक गुजरात, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में ही चालू हुई है, तथा इन राज्यों की मंडियों में भाव घटकर 1,550 से 1,600 रुपये प्रति क्विंटल रह गए हैं, जबकि केंद्र सरकार ने अप्रैल से शुरु होने वाले रबी विपणन सीजन के लिए एमएसपी 1,625 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है। चालू सीजन में अभी तक करीब 41 लाख टन गेहूं का आयात हो चुका है, तथा चालू महीने में और एक से डेढ़ लाख टन गेहूं का आयात होने का अनुमान है।
भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के अध्यक्ष अमित शाह एक चुनावी रैली में उत्तर प्रदेश में सरकार बनने पर किसानों को फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य देने का वादा तो करते हैं, लेकिन महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, गुजरात और राजस्थान जहां बीजेपी की ही सरकारें है वहां के किसानों को अरहर, मूंग, मसूर, सरसों, गेहूं और मूंगफली का बिक्री एमएसपी से नीचे करनी पड़ रही है। हालांकि केंद्र सरकार अरहर, मूंग और मूंगफली की एमएसपी पर खरीद नेफैड, भारतीय खाद्य निगम और एसएफएसी के माध्यम से कर रही है लेकिन खरीद नामामात्र की ही हो रही है। कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू फसल सीजन 2016-17 में रिकार्ड 221.4 लाख टन दलहन की पैदावार होने का अनुमान है जबकि अभी सरकारी एजेंसियों ने एमएसपी पर केवल 7 लाख टन दलहन की खरीद ही की है, इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि उत्पादन के मुकाबले खरीद की स्थिति क्या है।
खरीफ विपणन सीजन 2016-17 के लिए केंद्र सरकार ने मूंग का एमएसपी (5,225 रुपये प्रति क्विंटल बोनस सहित) तय किया हुआ है जबकि उत्पादक राज्यों की मंडियों में मूंग 4,100 से 4,600 रुपये प्रति क्विंटल बिक रही है। इसी तरह से अरहर का एमएसपी (5,050 रुपये प्रति क्विंटल बोनस सहित) तय किया हुआ है लेकिन उत्पादक मंडियों में अरहर 3,700 से 4,400 रुपये प्रति क्विंटल बिक रही है।..........आर एस राणा

कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव

अमेरिका में भंडार बढ़ने से कच्चे तेल की कीमतों में दबाव बढ़ गया है। ब्रेंट और नायमैक्स क्रूड दोनों में गिरावट का रुख है। दरअसल कल अमेरिकी एनर्जी डिपार्टमेंट की रिपोर्ट आई थी जिसके मुताबिक वहां क्रूड का भंडार बढ़कर रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। वहीं नॉन ओपेक में रुस में अभी भी उत्पादन कटौती की रफ्तार बेहद धीमी है। ऐसे में क्रूड की कीमतों पर दबाव बढ़ा है। वहीं डॉलर में बढ़त से ग्लोबल मार्केट में सोने की कीमतों पर दबाव बढ़ गया है। कॉमैक्स पर सोने का दाम 1250 डॉलर के नीचे है। इस महीने अमेरिका में ब्याज दरें बढ़ने की संभावना है। ऐसे में डॉलर में बढ़त देखी जा रही है। हालांकि डॉलर के मुकाबले रुपया भी आज हल्की रिकवरी दिखा रहा है। एग्री कमोडिटी में जीरा, हल्दी और धनिया की आवक मंडियों में बढ़ रही है। वहीं नए गेहूं की आवक होने से इसकी कीमतें एमएसपी के नीचे हैं।

01 मार्च 2017

इस साल प्रचंड गर्मी पड़ने की आशंका

देश में इस साल प्रचंड गर्मी पड़ने की आशंका है। भारतीय मौसम विभाग ने कहा है कि इस साल गर्मी में पारा सामान्य से 1 डिग्री ज्यादा रह सकता है। ये अनुमान मार्च से मई के लिए दिया गया है। खास तौर से उत्तर-पश्चिम भारत में ज्यादा गर्मी पड़ने की आशंका है। स्काईमेट के चीफ मेटरोलॉजिस्ट महेश पलावत ने कहा कि हीट वेव की स्थित शुरू हो चुकी है। इस बार गर्मियों में मौसमी हलचल काफी कम रहने की संभावना है, जब गर्मियों में मौसमी हलचल कम होती है तो सामान्य तौर पर गर्मी ज्यादा होती है।

अल-नीनो आशंका पर मौसम विभाग की शंका

 भले ही आस्ट्रेलियाई मौसम ब्यूरो (एडब्ल्यूबी) ने 2017 के लिए अल नीनो पर अपने नजरिये में बदलाव किया है लेकिन भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) ने कहा है कि कम बारिश के लिए चर्चित इस आपदा से भारत के दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की रफ्तार प्रभावित नहीं होगी। आईएमडी के महानिदेशक के जे रमेश ने बताया, 'दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की शुरुआत मार्च से ही हो जाती है और इस समय के दौरान और उसके बाद मई तक भी अल नीनो का प्रभाव नहीं दिखेगा। इसलिए, दक्षिण पश्चिम मॉनसून की चाल पर इसका कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं दिखेगा।' 
रमेश ने कहा कि भले ही वैश्विक मॉडल और विदेशी मौसम एजेंसियां यह भविष्यवाणी कर रही हैं कि अल नीनो जून के आसपास (जब भारतीय मॉनसून सीजन शुरू होता है) दिख सकता है, लेकिन अल नीनो के अलावा कई अन्य समस्याएं भी हैं जो दक्षिण पश्चिम मॉनसून को प्रभावित करती हैं। उन्होंने कहा, 'कई ऐसे कारक हैं जो मॉनसून के दौरान बारिश को प्रभावित करते हैं जिनमें इंडियन ओशन डाईपोल (आईओडी), मैडन जूलियन ऑसिलेशन, पश्चिमी विक्षोभ आदि शामिल हैं और अल नीनो इनमें से एक है। इसलिए निश्चित तौर पर यह नहीं कहा जा सकता कि इसका मॉनसून पर कोई प्रभाव पड़ेगा।' 
अल नीनो का भारतीय बारिश पर बड़ा प्रभाव पड़ता है और देश में अल नीनो वाले 80 प्रतिशत वर्षों के दौरान बारिश सामान्य से कम दर्ज की गई जबकि 60 प्रतिशत मौकों को सूखे वाले वर्ष के तौर पर घोषित किया गया। कुछ सप्ताह पहले तक, कई मौसम विशेषज्ञों ने अल नीनो के 50 प्रतिशत से कम पर रहने की भविष्यवाणी जताई जबकि वल्र्ड मेटियोरोलॉजिकल ऑर्गेनाइजेशन ने यह अनुमान 40 फीसदी बताया, लेकिन हरेक गुजरते सप्ताह के साथ अल नीनो की आशंका अधिक चिंताजनक होती जा रही है।
आस्ट्रेलियाई मौसम ब्यूरो ने अपनी नियमित जानकारी में कहा है, 'इसके परिणामस्वरूप, ब्यूरो के ईएनएसओ आउटलुक स्टेटस को अपग्रेड कर अल नीनो वॉच कर दिया गया है जिसका मतलब है कि 2017 में अल नीनो बनने की आशंका लगभग 50 प्रतिशत है।' ब्यूरो द्वारा किए गए सर्वे में आठ अंतर्राष्ट्रीय मॉडलों में से सात अगले 6 महीनों के दौरान मध्य उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर में तेज गर्मी का संकेत दे रहे हैं। 6 मॉडलों से यह संकेत मिलता है कि अल नीनो जुलाई 2017 तक दस्तक दे सकता है। आईएमडी ने कहा है कि अप्रैल के आसपास की जाने वाली उसकी पहली भविष्यवाणी में स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो जाएगी। (BS Hindi)