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05 सितंबर 2015

लालमिर्च की कीमतों में तेजी

आर एस राणा
लालमिर्च - घरेलू मसाला कंपनियों के साथ ही निर्यातकों की मांग निकलने से लालमिर्च की कीमतों में तेजी दर्ज की गई। सप्ताहभर में लालमिर्च की कीमतों में 800 से 900 रुपये प्रति क्विंटल की तेजी आई है। प्रमुख उत्पादक मंडियों में लालमिर्च की दैनिक आवक पहले की तुलना कम हो गई है तथा आगामी दिनों में निर्यात मांग और भी बढ़ने का अनुमान है। ऐसे में किसान लालमिर्च की बिकवाली थोड़ा रुक कर करेंगे, तो भाव में और आने वाले सुधार का लाभ उठा सकेंगे।
उद्योग का मानना है कि लालमिर्च की पैदावार तो पिछले साल के लगभग बराबर ही होने का अनुमान है लेकिन वित वर्ष 2015-16 में देष से लालमिर्च के निर्यात में बढ़ोतरी होने का अनुमान है। विदेषी बाजार में भारतीय लालमिर्च के भाव बढ़कर 3.09 डॉलर प्रति किलो हो गए जबकि पिछले महीने इसके भाव 2.91 डॉलर प्रति किलो थे। मसाला निर्यात में लालमिर्च की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा है।
भारतीय मसाला बोर्ड के अनुसार वित वर्ष 2014-15 के दौरान देष से लालमिर्च के निर्यात में 11.04 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। इस दौरान देष से लालमिर्च का निर्यात बढ़कर 3,71,710 टन का हो गया। वित वर्ष 2013-14 में देष से 3,12,500 टन लालमिर्च का निर्यात हुआ था।.....आर एस राणा

आलू की दैनिक आवक बढ़ने से इसकी कीमतों में 100 से 200 रुपये प्रति क्विंटल की गिरावट

आर एस राणा
आलू की दैनिक आवक बढ़ने से इसकी कीमतों में 100 से 200 रुपये प्रति क्विंटल की गिरावट दर्ज की गई। दिल्ली की आजादपुर मंडी में उत्तराखंड की हल्द्वानी लाइन के आलू के भाव 2 सितंबर को 725 से 800 रुपये प्रति 50 किलो थे जोकि घटकर 650 से 750 रुपये प्रति 50 किलो रह गए। हिमाचल प्रदेष की षिमला के आलू का भाव मंडी में इस दौरान 1,200-1,500 रुपये प्रति 80 किलो से घटकर 950 से 1,350 रुपये प्रति 80 किलो रह गया। कर्नाटका के आलू का भाव इस दौरान 550-900 रुपये प्रति 50 किलो से घटकर 500 से 800 रुपये प्रति 50 किलो रह गया। आजादपुर मंडी में उत्तर प्रदेष के कोल्ड स्टोर के आलू का भाव 200 से 550 रुपये प्रति 50 किलो रहा। मंडी में आलू की दैनिक आवक 2 सितंबर को 953 टन की थी जोकि बढ़कर 1,433 टन की हो गई।
राष्ट्रीय बागवानी अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान के अनुसार चालू वित्त वर्ष 2015-16 के पहले महीने अप्रैल में आलू के निर्यात में कमी देखी गई। अप्रैेल 2015 में देष से 11,780.96 टन आलू का निर्यात हुआ है जबकि अप्रैल 2014 में इसका निर्यात 26,815.71 टन का हुआ था। हालांकि वित्त वर्ष 2014-15 में वित्त वर्ष 2013-14 के मुकबाले निर्यात में बढ़ोतरी हुई है। वित वर्ष 2014-15 में देष से 3,05,979 टन आलू का निर्यात हुआ है जबकि वित वर्ष 2013-14 में 1,66,642 टन आलू का ही निर्यात हुआ था।
कृषि मंत्रालय के आरंभिक अनुमान के अनुसार फसल सीजन 2014-15 में देष में आलू की बुवाई 19.90 लाख हैक्टेयर में हुई है तथा पैदावार 421.74 लाख टन होने का अनुमान है। पिछले साल देष में आलू की बुवाई 19.73 लाख हैक्टेयर में हुई थी तथा पैदावार 415.55 लाख टन की हुई थी। हालांकि देष आलू की रिकार्ड पैदावार फसल सीजन 2012-13 में 453.43 लाख टन की हुई थी। ....आर एस राणा

03 सितंबर 2015

बारिष की कमी का असर सोयाबीन की प्रति हैक्टेयर उत्पादन पर पड़ने की आषंका


आर एस राणा
नई दिल्ली। सोयाबीन के प्रमुख उत्पादक राज्यों महाराष्ट्र, राजस्थान और मध्य प्रदेष में अगस्त महीने में हुई कम बारिष का असर फसल पर पड़ने की आषंका है। चालू महीने में भी कम बारिष हुई तो फिर फसल की प्रति हैक्टेयर उत्पादता में कमी आयेगी, जिससे कीमतों में तेजी आने का अनुमान है।
कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू खरीफ सीजन में सोयाबीन की बुवाई 114.17 लाख हैक्टेयर में हुई है जोकि पिछले साल की समान अवधि के 110.30 लाख हैक्टेयर से ज्यादा है। प्रमुख उत्पादक राज्यों में जून से मध्य जुलाई तक अच्छी बारिष हुई थी जिससे बुवाई तो बढ़ी है लेकिन मध्य जुलाई से लेकर अगस्त तक बारिष काफी कम हुई है जिसका असर सोयाबीन की प्रति हैक्टेयर उत्पादकता पर पड़ने की आषंका है।
हालांकि सोया खली में इस समय निर्यात मांग काफी कमजोर है तथा विष्व बाजार में उपलब्धता ज्यादा होने से अभी सोया खली की निर्यात मांग में तेजी आने की संभावना भी कम है लेकिन सोयाबीन की घरेलू पैदावार में कमी की आषंका के कारण ही इस समय प्लांटों की मांग बढ़ी हुई जिससे कीमतों में और भी तेजी आने का अनुमान है। मध्य प्रदेष की इंदौर मंडी में सोयाबीन के भाव 3,400 से 3,450 रुपये, उत्पादक मंडियों में 3,250 से 3,350 रुपये प्रति क्विंटल चल रहे हैं। राजस्थान की कोटा मंडी में सोयाबीन के भाव 3,300 से 3,400 रुपये और महाराष्ट्र की लातूर मंडी में 3,490 रुपये प्रति क्विंटल रहे। सोया खली के भाव इंदौर में 30,500 रुपये प्रति टन रहे।
साल्वेंट एक्ट्रेक्टसर्स एसोसिएषन आफ इंडिया (एसईए) के अनुसार चालू वित वर्ष 2015-16 के पहले चार महीनों अप्रैल से जुलाई के दौरान देष से 35,089 टन सोया खली का ही निर्यात हुआ है जबकि पिछले वित वर्ष की समान अवधि में सोया खली का निर्यात 1,07,381 टन का हुआ था। सोया खली के निर्यात में सबसे ज्यादा कमी जुलाई महीने में आई है। जुलाई महीने में देष से केवल 928 टन सोया खली का ही निर्यात हुआ है। भारतीय बंदरगाह पर सोया खली के भाव जुलाई में घटकर 507 डॉलर प्रति टन रह गए, जबकि जून महीने में इसके भाव 553 डॉलर प्रति टन थे। विष्व बाजार में सोया खली के दाम नीचे बने हुए है जिसका असर भारत से सोया खली के निर्यात पर पड़ रहा है।
कृषि मंत्रालय के चौथे आरंभिक अनुमान के अनुसार फसल सीजन 2014-15 में सोयाबीन की पैदावार 105.28 लाख टन होने का अनुमान है जबकि फसल सीजन 2013-14 में इसकी पैदावार 118.61 लाख टन की हुई थी।.....आर एस राणा

अनुकूल मौसम से आस्ट्रेलिया में चना की पैदावार ज्यादा होने का अनुमान


उत्पादक राज्यों में चालू महीने में होने वाली बारिष पर निर्भर होगी चना की बुवाई
आर एस राणा
नई दिल्ली। आस्ट्रेलिया में चना की पैदावार ज्यादा होने का अनुमान है तथा नई फसल की आवक आस्ट्रेलिया में षुरु हो गई है उम्मीद है अक्टूबर महीने में नई षिपमेंट आनी षुरु हो जायेगी, जिससे घरेलू बाजार में चना की कीमतों में चल रही तेजी, एक बार रुक सकती है। चना की फसल के लिए चालू महीने में होने वाली बारिष काफी अहम है, क्योंकि इस महीने होने वाली बारिष पर बुवाई की तस्वीर साफ होगी। दिल्ली में चना का भाव 4,950 से 4,975 रुपये प्रति क्विंटल रहा।
अनुकूल मौसम से आस्ट्रेलिया में चना की पैदावार पिछले साल से ज्यादा होने का अनुमान है तथा नई फसल की आवक षुरु हो गई है। अक्टूबर में आस्ट्रेलियाई चने की नए खेप भारत पहुंच जायेगी तथा घरेलू बाजार में भाव उंचे होने के कारण आयातक बड़ी मात्रा में आयात सौदे कर रहे हैं ऐसे में आयात बढ़ने से चना की कीमतों में चल रही तेजी, रुकने की उम्मीद है। चना दाल अन्य दालों अरहर, मूंग और उड़द के मुकाबले अभी भी सस्ती है जिससे इसकी खपत ज्यादा हो रही है। चालू वित्त वर्ष 2015-16 के पहले तीन महीनों अप्रैल से जून के दौरान करीब एक लाख टन चना का आयात हो चुका है। नई फसल के आयात सौदे 790 से 800 डॉलर प्रति टन की दर से हो रहे हैं। वित्त वर्ष 2014-15 में देष में 4.19 लाख टन चना का आयात हुआ था जोकि इसके पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 51.8 फीसदी ज्यादा था।
अगस्त महीने में देषभर में हुई कम बारिष का असर चना की बुवाई पर भी पड़ने की आषंका बन गई है। मानसून के लौटने का समय हो गया है ऐसे में चालू महीन में होने वाली बारिष इसके लिए काफी महत्वपूर्ण है, अगर चालू महीने में बारिष कम हुई तो फिर चना के भाव फिर तेज हो जायेंगे। वैसे भी चना की ज्यादातर खेती असिचिंत क्षेत्रफल में ही होती है। महाराष्ट्र की लातूर मंडी में चना के भाव 5,000 रुपये, राज्य की नागपुर मंडी में 5,050 रुपये, अकोला मंडी में 5,025 रुपये और मध्य प्रदेष की इंदौर मंडी में 4,600 रुपये प्रति क्विंटल रहे।
कृषि मंत्रालय के चौथे आरंभिक अनुमान के अनुसार चना की पैदावार 71.7 लाख टन होने का अनुमान है जोकि तीसरे आरंभिक अनुमान 75.9 लाख टन से कम है।......आर एस राणा

02 सितंबर 2015

रोलर फ्लोर मिलों को भारतीय खाद्य निगम से मिल सकता है बढ़िया गेहूं


एफसीआई केवल लस्टर लोस गेहूं की कर रही है बिक्री, भाव में कटौती नहीं करेगी सरकार
आर एस राणा
नई दिल्ली। रोलर फ्लोर मिलों को भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) से रबी विपणन सीजन 2014-15 में खरीदा गया बढ़िया गेहूं खुले बाजार बिक्री योजना (ओएमएसएस) के तहत मिल सकता है। खाद्य मंत्रालय फ्लोर मिलों को 75-25 फीसदी के आधार पर गेहूं की बिक्री करने पर विचार कर रहा है। इसके तहत रोलर फ्लोर मिलें 75 फीसदी चालू रबी विपणन सीजन 2015-16 का लस्टर लोस और 25 फीसदी गेहूं विपणन सीजन 2014-15 का बढ़िया गेहूं खरीद सकेंगी।
खाद्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि फ्लोर मिलों ने एफसीआई से 50-50 फीसदी के आधार पर गेहूं की बिक्री करने की मांग की थी, इसमें 50 फीसदी गेहूं चालू रबी विपणन सीजन 2015-16 का लस्टर लोस और 50 फीसदी बढ़िया गेहूं जोकि पिछले रबी विपणन सीजन 2014-15 में खरीदा गया था। उन्होंने बताया कि मंत्रालय इसको 75-25 फीसदी करने पर विचार कर रहा है तथा उम्मीद है कि अगले सप्ताह तक इस पर अंतिम फैसला हो जाए। उन्होंने बताया कि ओएमएसएस के तहत गेहूं के बिक्री भाव में कटौती का सरकार का कोई इरादा नहीं है।
भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि चालू सीजन में ओएमएसएस और डेडीकेट मूवमेंट के आधार पर अभी तक 2.78 लाख टन गेहूं की बिक्री हुई है। इसमें सबसे ज्यादा गेहूं मध्य प्रदेष से 89,250 टन, पंजाब से 53,000 टन, कर्नाटका से 55,000 टन और जम्मू-कष्मीर से 51,000 टन गेहूं का ही उठाव हुआ है। गुजरात से केवल 16,050 टन गेहूं उठा है जबकि हरियाणा से नाममात्र का ही उठाव हुआ है। सूत्रों के अनुसार हरियाणा और पंजाब में चालू रबी विपणन सीजन 2015-16 में लस्टर लोस गेहूं की ज्यादा खरीद हुई थी।
केंद्र सरकार द्वारा गेहूं के आयात पर 10 फीसदी का आयात षुल्क लगा देने से गेहूं गेहं का आयात बंद हो गया है, इसलिए दक्षिण भारत की रोलर फ्लोर मिलों की खरीद उत्तर भारत के साथ ही भारतीय खाद्य निगम के गोदामों से षुरु हो गई है जिसकी वजह से गेहूं की कीमतों में तेजी आई है। चालू फसल सीजन में दक्षिण भारत की फ्लोर मिलों ने आस्ट्रेलिया और यूक्रेन से करीब 5 लाख टन गेहूं का आयात किया है।
केंद्र सरकार खुले बाजार बिक्री योजना के तहत पंजाब, हरियाणा और मध्य प्रदेष से डेडीकेट मूवमेंट के आधार पर 1,550 रुपये प्रति क्विंटल की दर से गेहूं बेच रही है। भारतीय खाद्य निगम ने चालू रबी विपणन सीजन 2015-16 में न्यूनतम समर्थन मूल्य पर 280.87 लाख टन गेहूं की खरीद की हो जोकि पिछले साल हुई कुल खरीद 280.23 लाख टन से ज्यादा है।
केंद्रीय पूल में पहली अगस्त को गेहूं का स्टॉक 367.78 लाख टन का है जोकि तय मानकों बफर स्टाक से ज्यादा ही है। कृषि मंत्रालय के चौथे आरंभिक अनुमान के अनुसार फसल सीजन 2014-15 में गेहूं का उत्पादन 889.4 लाख टन होने का अनुमान है जबकि फसल सीजन 2013-14 में 958.5 लाख टन गेहूं का उत्पादन हुआ था।.....आर एस राणा

उत्तर प्रदेष में चीनी मिलों पर 7,656 करोड़ का बचा हुआ है बकाया

आर एस राणा
नई दिल्ली। गन्ने का पेराई सीजन भले ही समाप्त हो गया हो लेकिन उत्तर प्रदेष की चीनी मिलों पर अभी भी किसानों का 7,655.79 करोड़ रुपये का बकाया बचा हुआ है। चालू पेराई सीजन में अभी तक चीनी मिलें कुल राषि का केवल 65.33 फीसदी ही अदा कर पाई है।
उत्तर प्रदेष षुगर मिल्स एसोसिषन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि चालू पेराई सीजन में राज्य की चीनी मिलों ने 20,644.40 करोड़ रुपये का गन्ना किसानों से खरीदा था जिसमें से अभी भी मिलों पर किसानों का 7,655.79 करोड़ रुपये बकाया बचा हुआ है। उन्होंने बताया कि चीनी के दाम बाजार में बने रहे, जबकि चीनी मिलों ने गन्ने की खरीद उंची कीमत पर की थी इसीलिए मिलों को बकाया भुगतान में परेषानी आ रही है। हालांकि पिछले डेढ़-दो महीने से चीनी की कीमतों में करीब 150 से 200 रुपये प्रति क्विंटल की तेजी आई है जिससे उम्मीद है कि बकाया भुगतान में भी तेजी आयेगी। उत्तर प्रदेष में बुधवार को चीनी के एक्स फैक्ट्री भाव 2,450 से 2,550 रुपये प्रति क्विंटल हो गए जबकि दिल्ली में एम ग्रेड चीनी के भाव 2,700 रुपये प्रति क्विंटल रहे।
उन्होंने बताया कि राज्य की चीनी मिलों ने चालू पेराई सीजन में 7,437.93 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई की है जिससे 71 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ। चालू पेराई सीजन में गन्ने में रिकवरी की औसत दर 9.55 फीसदी रही जोकि पिछले की तुलना में ज्यादा है।....आर एस राणा

01 सितंबर 2015

दैनिक आवक कम होने से सरसों की कीमतों में तेजी की संभावना


आर एस राणा
नई दिल्ली। उत्पादक मंडियों में दैनिक आवक कम होने से सरसों की कीमतों में तेजी आने की संभावना है। दिल्ली की लारेंस रोड मंडी में सरसों के भाव 4,500 रुपये प्रति क्विंटल रहे। हालांकि सरसों डीओसी में निर्यात मांग काफी कमजोर है, साथ ही आयात ज्यादा होने से खाद्य तेलों की उपलब्धता भी ज्यादा है लेकिन बिहार, पश्चिमी बंगाल और असम की मांग अच्छी बनी हुई है।
खाद्य तेलों के कारोबारी ने बताया कि सरसों तेल में इस समय बिहार, पश्चिमी बंगाल और असम की अच्छी मांग बनी हुई है जबकि उत्पादक मंडियों में सरसों की दैनिक आवक कम है। रबी में सरसों की पैदावार में आई कमी से सरसों की उपलब्धता कम है जिसकी वजह से स्टॉकिस्ट नीचे भाव में बिकवाल नहीं है। उन्होंने बताया कि उत्पादक मंडियों में मंगलवार को सरसों की कीमतों में 25 से 50 रुपये प्रति क्विंटल की तेजी दर्ज की गई।
आगरा के एक सरसों व्यापारी ने बताया कि मंगलवार को मंडी में सरसों की कीमतों में 25 रुपये की तेजी आकर भाव 5,050 रुपये, मध्य प्रदेश की मोरेना मंडी में 4,550 रुपये तथा राजस्थान की अलवर मंडी में 4,600 रुपये प्रति क्विंटल हो गए। सरसों डीओसी के भाव अलवर मंडी में 19,300 रुपये प्रति टन रहे। जयपुर में सरसों के भाव बढ़कर 4,715-4,720 रुपये प्रति क्विंटल हो गए। उन्होंने बताया कि त्यौहारी सीजन के साथ ही सर्दियों का सीजन शुरु हो रहा है जिससे आगामी दिनों में सरसों तेल में मांग और भी बढ़ेगी। ऐसे में सरसों की मौजूदा कीमतों में 100 से 150 रुपये प्रति क्विंटल की और तेजी आने की संभावना है।
साल्वेंट एक्सट्रेशन ऑफ इंडिया (एसईए) के अनुसार जुलाई महीने में सरसों डीओसी का निर्यात घटकर 8,645 टन का ही हुआ है जबकि जून महीने में इसका निर्यात 56,139 टन का हुआ था। कृषि मंत्रालय के चौथे आरंभिक अनुमान के अनुसार फसल सीजन 2014-15 में सरसों का उत्पादन घटकर 63.09 लाख टन का ही हुआ है जबकि इसके पिछले साल इसकी पैदावार 78.77 लाख टन की हुई थी।........आर एस राणा