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01 मई 2013

जीरे की बढ़ेगी उपलब्धता

जीरे की बढ़ेगी उपलब्धता रुतम वोरा / वडोदरा April 30, 2013 Ads by Google Rs.647 p.m. में : अपने परिवार को दें 1 करोड़ की सुरक्षा PolicyBazaar.com/LifeInsurance-plan इस सीजन में मसाला बाजार में जीरे की आपूर्ति में बढ़ोतरी हो सकती है। कारोबारियों ने इस साल पिछले वर्ष के बचे 10 लाख बोरी (55 किग्रा प्रति बोरी) स्टॉक के अलावा 48 लाख बोरी उत्पादन यानी करीब 2,64,000 टन जीरे का कयास लगाया है। बाजार सूत्रों के मुताबिक इस साल जीरे की कुल उपलब्धता 58 लाख टन यानी 3,15,000 टन रहने की उम्मीद है। हालांकि कारोबारियों का कहना है कि घरेलू और अंतरराष्टï्रीय बाजार में जबरदस्त मांग के चलते भारी स्टॉक जमा होने की संभावना नहीं है। सीरिया और तुर्की में उत्पादन के रुझानों के बाद ही इसकी दिशा तय होगी। ऊंझा बाजार में 28,000-30,000 बोरी आवक 12,500-12,600 रुपये प्रति क्विंटल की दर से हुई। बाजार में जीरे की मांग करीब 25,000 बोरी की थी। ऊंझा के एक जीरा कारोबारी कहते हैं, 'फिलहाल अंतरराष्टï्रीय खरीद में तेजी है। ज्यादातर खरीदार भारत का रुख कर रहे हैं।Ó हालांकि एक बार सीरिया और तुर्की से आवक शुरू होने पर अंतरराष्टï्रीय खरीद में गिरावट आना तय है। ऊंझा एपीएमसी के पूर्व अध्यक्ष अरविंद पटेल कहते हैं, 'आने वाले महीनों में कीमतें गिरना लगभग तय है क्योंकि बाजार में जीरे की उपलब्धता बढ़ जाएगी। घरेलू बाजार में मांग कम हो चुकी है और दूसरे देशों के माल की आवक शुरू होने पर निर्यात में गिरावट आएगी। इससे कीमतों पर दबाव बढऩा तय है। (BS Hindi)

पीएसयू की भूमि पर गोदाम बनाने पर विचार

खाद्यान्न भंडारण की परेशानी से निपटने के लिए खाद्य मंत्रालय की अनूठी योजना फायदे का सौदा पीएसयू को जमीन के उपयोग से होगी अतिरिक्त आमदनी एफसीआई को गोदाम बनाने के लिए मिलेगी उपयुक्त जमीन भंडारण की गंभीर चुनौती से निजात मिलेगी सरकार को खाद्य व भारी उद्यम मंत्रालय के बीच होगी बातचीत खाद्यान्न भंडारण की समस्या से निपटने के लिए सरकार ने भारी उद्योग एवं सार्वजनिक उद्यमों का सहारा लेने की योजना बनाई है। दरअसल, भारी उद्योग मंत्रालय के अधीन आने वाले सार्वजनिक उद्यमों की देशभर में खाड़ी पड़ी जमीनों पर खाद्यान्न भंडारण के लिए गोदाम बनाने का खाद्य मंत्रालय ने प्रस्ताव रखा है। देशभर में सार्वजनिक उद्यमों की अच्छी लोकेशन में खाली जमीन पड़ी है। सरकार की दिलचस्पी परिवहन के लिए सुविधाजनक लोकेशन में गोदाम बनाने की ज्यादा है। खाद्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि खाद्यान्न भंडारण की समस्या से निपटने के लिए मंत्रालय ने भारी उद्योग एवं सार्वजनिक उद्यम का सहारा लेने की योजना बनाई है। भारी उद्योग मंत्रालय के अधीन आने वाले सार्वजनिक उद्यमों की देशभर में खाड़ी पड़ी जमीनों पर खाद्यान्न भंडारण के लिए गोदाम बनाने की योजना है। इस योजना से जहां सार्वजनिक उद्यमों को अतिरिक्त आय के रूप में फायदा मिलेगा, वहीं खाद्यान्न भंडारण की समस्या को हल करने में सरकार को मदद मिलेगी। इसके लिए खाद्य मंत्रालय और भारी उद्योग एवं सार्वजनिक उद्यम मंत्रालय के सचिवों की बैठक एक मई को प्रस्तावित है। भारी उद्योग मंत्रालय के अधीन लगभग 32 सार्वजनिक उद्यम आते हैं, जिनकी अलग-अलग राज्यों में काफी जमीनें खाली पड़ी हुई हैं। खाद्यान्न भंडारण के गोदाम बनाने में सबसे ज्यादा दिक्कतें जमीन अधिग्रहण की आती है। इसीलिए सरकार ने 197 लाख टन की अतिरिक्त खाद्यान्न भंडारण क्षमता बनाने के लिए निजी उद्यमी गारंटी योजना (पीईजी) स्कीम का सहारा लिया है। भारतीय खाद्य निगम के अनुसार निगम के पास 338.21 लाख टन कवर्ड और 37.49 लाख टन कैप को मिलाकर कुल 375.70 लाख टन की खाद्यान्न की भंडारण क्षमता है। इसके अलावा राज्य सरकारों के पास 194.17 लाख टन कवर्ड और 147.18 लाख टन कैप को मिलाकर देशभर में कुल खाद्यान्न भंडारण क्षमता 717.05 लाख टन (एफसीआई और राज्य सरकारों की कवर्ड और कैप को मिलाकर) की है। पहली जून 2013 को केंद्रीय पूल में खाद्यान्न का स्टॉक बढ़कर 923 लाख टन होने का अनुमान है। पहली अप्रैल को केंद्रीय पूल में गेहूं और चावल का स्टॉक तय बफर मानकों से स्टॉक कई गुना ज्यादा है। चालू रबी विपणन सीजन में पहली अप्रैल को ही केंद्रीय पूल में 597.58 लाख टन खाद्यान्न का स्टॉक मौजूद था, इसमें 354.68 लाख टन चावल और 242.07 लाख टन गेहूं है। (business Bhaskar)

गेहूं निर्यात का बेस प्राइस घटाने पर विचार संभव

मौजूदा बेस प्राइस पर सरकारी गेहूं निर्यात में प्राइवेट निर्यातकों की दिलचस्पी नहीं : थॉमस केंद्रीय खाद्य मंत्री के. वी. थॉमस ने कहा है कि सरकार प्राइवेट निर्यातकों के जरिये गेहूं निर्यात के लिए न्यूनतम मूल्य (बेस प्राइस) में कटौती करने पर विचार कर सकती है ताकि विश्व बाजार में भारतीय गेहूं निर्यात संभव हो सके और घरेलू सरकारी गोदाम खाली किए जा सकें। मौजूदा बेस प्राइस पर प्राइवेट निर्यातकों ने सरकारी गोदामों से गेहूं निर्यात में कोई खास दिलचस्पी नहीं ली है। पिछले माह सरकार ने 50 लाख टन अतिरिक्त गेहूं पंजाब व हरियाणा के गोदामों से प्राइवेट निर्यातकों के जरिये निर्यात करने की अनुमति दी थी, ताकि अगली फसल का गेहूं रखने के लिए गोदाम खाली किए जा सकें। इसके लिए भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) ने 1484 रुपये प्रति क्विंटल बेस प्राइस निर्धारित किया था। थॉमस ने पीटीआई को बताया कि ऊंचा बेस प्राइस होने के कारण पहले टेंडर के लिए किसी भी व्यापारी ने बिड नहीं भरी है। हम अगले सप्ताह मंत्रि समूह के समक्ष बेस प्राइस घटाने का प्रस्ताव भेजेंगे। उन्होंने कहा कि केंद्रीय कृषि मंत्री शरद पवार की अगुवाई वाला मंत्रि समूह गेहूं का निर्यात 30 जून के बाद भी करने की अनुमति दे सकता है। और ज्यादा गेहूं निर्यात की अनुमति दिए जाने के सवाल पर उन्होंने बताया कि हमारे पास आवश्यकता से ज्यादा गेहूं गोदामों में उपलब्ध है। प्रस्तावित 50 लाख टन गेहूं का निर्यात होने के बाद अतिरिक्त गेहूं निर्यात करने की अनुमति दी जा सकती है। एक अप्रैल को सरकारी गोदामों में 242 लाख टन गेहूं उपलब्ध था, जबकि बफर मानकों के अनुसार सिर्फ 70 लाख टन गेहूं उपलब्ध होने की जरूरत थी। नए सीजन में गेहूं खरीद पर थॉमस ने कहा कि मार्केटिंग सीजन 2013-14 के दौरान 400 लाख टन गेहूं की खरीद होने की संभावना है, जो पिछले साल खरीदे गए 440 लाख टन करीब दस फीसदी कम होगा। (Business bhaskar)

खाद्यान्न निर्यात में तेजी लाने के लिए केंद्र सरकार गंभीर

आर एस राणा नई दिल्ली | May 01, 2013, 01:14AM IST पहल - मौजूदा स्थिति पर समीक्षा के लिए दो मई को सचिव स्तरीय बैठक समीक्षा के बिंदु गेहूं व गैर-बासमती चावल के घरेलू स्टॉक पर विचार होगा खाद्यान्न के मौजूदा निर्यात की स्थिति आकी जाएगी अगले महीनों में वैश्विक सप्लाई की भी होगी समीक्षा अंतरराष्ट्रीय बाजार में संभावित मूल्य स्तर पर तय होगी नीति आगामी महीनों में विश्व बाजार के संभावित परिदृश्य पर ही तय होगी निर्यात नीति देश में गेहूं व चावल की अच्छी पैदावार और भारी स्टॉक के चलते सरकार इनके निर्यात में तेजी लाने पर गंभीरता से विचार कर रही है। लेकिन निर्यात नीति में कोई बदलाव करने से पहले सरकार निर्यात से जुड़े सभी पहलुओं की समीक्षा करेगी और अंतरराष्ट्रीय बाजार के आगामी महीनों में संभावित परिदृश्य के अनुरूप नीति में बदलाव करने पर विचार करेगी। खाद्यान्न निर्यात नीति की समीक्षा करने के लिए सरकार ने दो मई को सचिव स्तर की बैठक बुलाई है। खाद्य सचिव की अध्यक्षता में होने वाली बैठक में गेहूं और गैर-बासमती चावल के घरेलू स्टॉक, निर्यात की स्थिति, अंतरराष्ट्रीय बाजार में खाद्यान्न की उपलब्धता और कीमतों की समीक्षा की जाएगी। केंद्रीय पूल में पहली अप्रैल को 596.75 लाख टन खाद्यान्न का भारी-भरकम स्टॉक जमा है जो तय बफर मानकों के मुकाबले कई गुना है। खाद्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि खाद्यान्न निर्यात की समीक्षा करने के लिए दो मई को सचिव स्तर की बैठक प्रस्तावित है। खाद्य सचिव की अध्यक्षता में होने वाली बैठक में सभी संबंधित मंत्रालयों के सचिव भाग लेंगे। उन्होंने बताया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय गेहूं और गैर-बासमती चावल की आयात मांग अच्छी मांग बनी हुई है जबकि केंद्रीय पूल में खाद्यान्न का स्टॉक तय बफर मानकों के मुकाबले कई गुना ज्यादा है। बैठक में घरेलू बाजार में खाद्यान्न की उपलब्धता, निर्यात की स्थिति और अंतरराष्ट्रीय बाजार में खाद्यान्न की उपलब्धता के अलावा कीमतों की समीक्षा की जायेगी। उन्होंने बताया कि तय मानकों के अनुसार पहली अप्रैल को केंद्रीय पूल में 162 लाख टन खाद्यान्न (गेहूं और चावल को मिलाकर) स्टॉक होना चाहिए जबकि खाद्यान्न का स्टॉक 596.75 लाख टन था। उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष 2012-13 में करीब 65 लाख टन गैर-बासमती चावल और 60 लाख टन गेहूं का निर्यात हुआ है। कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि वित्त वर्ष 2012-13 के पहले 11 महीनों (अप्रैल से फरवरी) के दौरान 61.02 लाख टन गैर-बासमती चावल का निर्यात हुआ है जबकि 56.76 लाख टन गेहूं का निर्यात हुआ है। इस दौरान करीब 35 लाख टन बासमती चावल का भी निर्यात हुआ है जो पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले लगभग 10 फीसदी ज्यादा है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के वाणिज्य विभाग के अनुसार वित्त वर्ष 2012-13 के पहले 11 महीनों (अप्रैल से फरवरी) के दौरान 13,095.88 करोड़ रुपये मूल्य का गैर-बासमती चावल का निर्यात हुआ है जो पिछले वर्ष की समान अवधि के मुकाबले 69.10 फीसदी ज्यादा है। इसी तरह से इस दौरान 9,149.90 करोड़ रुपये मूल्य का गेहूं निर्यात हुआ है जो पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 894.97 फीसदी ज्यादा है। बासमती चावल का निर्यात मूल्य के लिहाज से इस दौरान 22.29 फीसदी बढ़कर 16,868.76 करोड़ रुपये का हुआ है। (Business Bhaskar.....R S Rana)

Hooda writes to PM, seeks bonus on wheat's MSP

Rohtak, May 1. Haryana Chief Minister Bhupinder Singh Hooda today urged Prime Minister Manmohan Singh to provide a bonus on minimum support price of wheat to the farmers. Hooda in a letter to the Prime Minister made the request for bonus on MSP of wheat as he believed it was in the interest of the farmers in Haryana. In an interaction with media persons here, he expressed the optimism that PM would act upon the suggestions made in the letter. He hailed the decision of the UPA Government to scrap wealth tax on farmland as a major decision in favour of the farmers and said that he had expressed his gratitude to the UPA Chairperson Sonia Gandhi, the Prime Minister and Union Finance Minister P Chidambaram. Describing it as a "historic decision", he said it had become amply clear that the interests of the farmers were completely safe in the hands of the Congress Government. Hooda said after this issue was raised, a large delegation of Congress leaders from various states met the Chidambaram and apprised him its adverse impact on the farming community. The Chief Minister said that he had recommended reduction in the interest on short-term loans for fertilisers and seeds from 11 per cent to four per cent. "After commencement of the Horticulture Mission, we urged the Union Government to start livestock mission which has since been implemented, giving the farmers the benefit of the crop insurance scheme", Hooda added. Extending his best wishes to the labours on the occasion of Labour day today, he said that Haryana have scripted and implemented a labour policy. He said that Congress Vice President Rahul Gandhi would meet all MPs, MLAs, legislators, former legislators and party officials of the state on May 8 at Panchkula.

Gold falls as investors weigh Fed meet, ETP holdings drop

London, May 1. Gold today fell, extending its worst monthly loss in more than a year, on concern the US Federal Reserve will reduce stimulus measures and after a record drop in exchange-traded product assets. The gold slid 0.4 per cent to 1,470.58 dollar an ounce and silver by 0.8 per cent to 24.13 dollar an ounce. The Fed, which is buying 85 billion dollar of bonds a month in a third round of quantitative easing, concludes a two-day policy meeting today and may reduce purchases to 50 billion dollar as it begins to unwind record stimulus, according to economists. Gold-backed ETPs plunged 174 metric tons last month, the biggest drop on record. China’s manufacturing expanded at a weaker pace in April, a report showed today. While prices have rebounded 11 per cent since touching a two-year low on April 16, they dropped 7.6 per cent last month, the biggest loss since December 2011, as some investors lost faith in gold as a traditional store of value. Markets in the European Union, China, Hong Kong, India, South Korea, Taiwan, Singapore, Malaysia, Thailand, Vietnam and the Philippines are closed today for holidays.

Gold, silver prices fall further on sluggish demand

New Delhi, May 1. In restricted trading activities, gold and silver prices fell further in the national capital today due to slackened demand at prevailing levels amid a weak global trend. While gold shed another Rs 50 to Rs 27,900 per ten grams, silver lost Rs 135 to Rs 46,600 per kg on lack of buying support. Traders said sluggish demand at current level and closure of markets for a public holiday kept pressure on the precious metals. The bullion market in Mumbai, Kolkata, Chennai and futures commodity markets were closed today on account of 'May Day.' Gold in London, which normally set price trend on the domestic front, slid 0.4 per cent to USD 1,470.58 an ounce and silver dipped 0.8 per cent to USD 24.13 an ounce. On the domestic front, gold of 99.9 and 99.5 per cent purity shed Rs 50 each at Rs 27,900 and Rs 27,700 per ten grams, respectively. The metal had lost Rs 250 yesterday. Sovereign remained stable at Rs 24,200 per piece of eight gram in limited deals. In line with a general weak trend, silver ready declined further by Rs 135 to Rs 46,600 per kg and weekly-based delivery by Rs 125 to Rs 44,835 per kg. It had lost Rs 265 in the previous session. Silver coins maintained a steady trend at Rs 76,000 for buying and Rs 77,000 for selling of 100 pieces.