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15 सितंबर 2017

16 सितम्बर 2017 का मॉनसून

जम्मू और कश्मीर पर एक पश्चिमी विक्षोभ पूर्वोत्तर बना हुआ है।
मानसून की अक्षीय रेखा का पश्चिमी छोर हिमालय के तराई इलाकों के करीब चल रहा है, जबकि पूर्वी छोर राँची, दिघा और बंगाल की उत्तरी खाड़ी की तरफ जा रहा है।
एक चक्रवाती हवाओं का क्षेत्र पूर्व-मध्य अरब सागर और इससे सटे हुए कर्नाटक तट पर देखा जा सकता है।
उत्तरी बांग्लादेश पर एक और चक्रवाती हवाओं का क्षेत्र बना हुआ है।
एक तीसरा चक्रवाती हवाओं का क्षेत्र उत्तर बंगाल की खाड़ी और गंगीय पश्चिम बंगाल पर बना हुआ है।
एक चौथा चक्रवाती हवाओं का क्षेत्र दक्षिण-पूर्व राजस्थान और आस-पास मध्य प्रदेश पर देखा जा सकता है। एक ट्रफ़ रेखा इस सिस्टम से गुजरात होते हुए पूर्वोत्तर अरब सागर तक जा रही है।
मॉनसून कोंकण और गोवा और तटीय कर्नाटक पर व्यापक रूप से सक्रिय रहा।
वहीं दक्षिण गुजरात, विदर्भ, मध्य प्रदेश, दक्षिण छत्तीसगढ़, उत्तरी तटीय उड़ीसा, तेलंगाना, केरल और अंडमान निकोबार द्वीप समूह के कुछ हिस्सों में मॉनसून सक्रिय रहा।
सामान्य मॉनसून की स्थिति आंतरिक कर्नाटक, रायलसीमा, तटीय आंध्र प्रदेश, शेष छत्तीसगढ़, झारखंड और गंगीय पश्चिम बंगाल पर देखी गयी।
मॉनसून पूर्वोत्तर राज्य, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और जम्मू और कश्मीर पर कमजोर रहा।
मॉनसून दक्षिण गुजरात, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक और केरल के तटीय और उत्तर के हिस्सों पर सक्रिय रहेगा।
वहीं सामान्य मॉनसून की स्थिति रायलसीमा, तेलंगाना, तटीय आंध्र प्रदेश, ओडिशा, छत्तीसगढ़ और झारखंड के कुछ हिस्सों में देखी जा सकती है।
आंतरिक तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, पूर्वोत्तर राज्यों और उत्तराखंड में मॉनसून कमजोर रहेगा।......www.skymet.com

सोयाबीन का उत्पादन 16 फीसदी कम होने की आशंका-एसईए

आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू खरीफ में बुवाई में आई कमी के साथ बारिश सामान्य से कम होने के कारण सोयाबीन के उत्पादन में 16 फीसदी और मूंगफली के उत्पादन में 2.75 फीसदी की कमी आने की आशंका है।
साल्वेंट एक्सट्रेक्टर्स एसोसिएशन आफ इंडिया (एसईए) के अनुसार चालू खरीफ में सोयाबीन का उत्पादन घटकर 89 लाख टन ही होने का अनुमान है जबकि पिछले साल इसका उत्पादन 105 लाख टन का हुआ था। इसी तरह से मूंगफली का उत्पादन चालू खरीफ में घटकर 51 लाख टन होने की संभावना है जबकि फसल सीजन 2016-17 में मूंगफली का उत्पादन 73.75 लाख टन का हुआ था। सनफ्लावर सीड का उत्पादन भी चालू खरीफ में घटकर 0.80 लाख टन ही होने का अनुमान है जबकि पिछले साल इसका उत्पादन 1.45 लाख टन का हुआ था। शीसम सीड का उत्पादन पिछले साल के 4.15 लाख टन से घटकर 3.50 लाख टन ही होने का अनुमान है। एसईए के अनुसार खरीफ में तिलहनों का कुल उत्पादन 20.05 फीसदी घटकर 144.30 लाख टन ही होने का अनुमान है जबकि पिछले साल इनकी पैदावार 164.35 लाख टन की हुई थी।
सोयाबीन के उत्पादन तो कमी आने का अनुमान है लेकिन पिछले साल का बकाया स्टॉक ज्यादा बचा हुआ है। ऐसे में कुल उपलब्धता पिछले साल के लगभग बराबर ही बैठेगी। इसी तरह से मूंगफली का बकाया स्टॉक ज्यादा होने से इसकी कुल उपलब्धता भी उत्पादक राज्यों में ज्यादा ही है। उत्पादक मंडियों में नई सोयाबीन की आवक चालू हो गई है, तथा अक्टूबर में आवकों का दबाव बनने पर इसके भाव में मंदा आने की उम्मीद है। मूंगफली के भाव में भी नई फसल की आवक बढ़ने पर मंदा आने का अनुमान है।
कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू खरीफ में सोयाबीन की बुवाई घटकर 105.76 लाख हैक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल इसकी बुवाई 114.72 लाख हैक्टेयर में हुई थी। इसी तरह से मूंगफली की बुवाई चालू खरीफ में घटकर 41.36 लाख हैक्टेयर में ही हुई है, जबकि पिछले साल इस समय तक इसकी बुवाई 46.78 लाख हैक्टेयर में हो चुकी थी। सनफ्लावर की बुवाई चालू खरीफ में पिछले साल के 1.59 लाख हैक्टेयर से घटकर 1.37 लाख हैक्टेयर में ही हुई है जबकि शीसम सीड की बुवाई चालू खरीफ में अभी तक केवल 13.78 लाख हैक्टेयर में ही हो पाई है जबकि पिछले साल इसकी बुवाई 15.70 लाख हैक्टेयर में हो चुकी थी। ...........   आर एस राणा

खरीफ में धान, दलहन व तिलहन की बुवाई कम, कपास और गन्ने की ज्यादा

आर एस राणा
नई दिल्ली। खरीफ में कई राज्यों में मानसूनी बारिश सामान्य से कम होने के कारण खरीफ फसलों खासकर के धान, दलहन, तिलहन और मोटे अनाजों की बुवाई में कमी आई है, वहीं कपास के साथ ही गन्ने की बुवाई ज्यादा हुई है। बुवाई में आई कमी के साथ ही बारिश जुलाई से अगस्त के दौरान सामान्य से कम होने और कई राज्यों में बाढ़ जैसी स्थिति बनने से चालू खरीफ में जहां दलहन की पैदावार कम होने की आशंका है, वहीं तिलहनों व मोटे अनाजों खासकर के मक्का व ज्वार आदि का उत्पादन भी कम रहेगा। हालांकि बुवाई में हुई बढ़ोतरी से कपास और गन्ने की पैदावार ज्यादा होने का अनुमान है।
कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू खरीफ में फसलों की कुल बुवाई घटकर अभी तक केवल 1,049.42 लाख हैक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल की समान अवधि में 1,057.15 लाख हैक्टेयर में बुवाई हो चुकी थी। खरीफ की प्रमुख फसल धान की रौपाई चालू खरीफ में घटकर 374 लाख हैक्टेयर में ही पाई है जबकि पिछले साल की समान अवधि में इसकी रौपाई 379.12 लाख हैक्टेयर में हो चुकी थी।
मंत्रालय के अनुसार चालू खरीफ में दलहन की बुवाई घटकर 140.38 लाख हैक्टेयर में ही हो पाई है जबकि पिछले साल इस समय तक दलहन की बुवाई 145.55 लाख हैक्टेयर में हो चुकी थी। दलहनी फसलों में अरहर की बुवाई में करीब 9 लाख हैक्टेयर में कमी आकर कुल बुवाई अभी तक 43 लाख हैक्टेयर में ही हुई है, जबकि मूंग की बुवाई भी पिछले साल की तुलना में 3 लाख हैक्टेयर से ज्यादा घटी है। उड़द की बुवाई पिछले साल की तुलना में सात लाख हैक्टेयर से ज्यादा हुई है।
तिलहनों की बुवाई चालू खरीफ में घटकर 172.02 लाख हैक्टेयर में ही पाई है जबकि पिछले साल की समान अवधि में तिलहनों की बुवाई 188.63 लाख हैक्टेयर में हो चुकी थी। तिलहनों में सोयाबीन के साथ ही मूंगफली की बुवाई भी पिछड़ रही है। सोयाबीन की बुुवाई चालू खरीफ में अभी तक केवल 105.76 लाख हैक्टेयर में ही हो पाई है जबकि पिछले साल इस समय तक 114.72 लाख हैक्टेयर में सोयाबीन की बुवाई हो चुकी थी। मूंगफली की बुवाई भी चालू खरीफ में घटकर 41.36 लाख हैक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल की समान अवधि में इसकी बुवाई 46.78 लाख हैक्टेयर में हो चुकी थी। केस्टर सीड की बुवाई भी चालू खरीफ में पिछड़ रही है। चालू खरीफ में केस्टर सीड की बुवाई घटकर 7.90 लाख हैक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक 8.24 लाख हैक्टेयर में बुवाई हो चुकी थी।
मोटे अनाजों की बुवाई चालू रबी में पिछले साल की तुलना में घटकर अभी तक केवल 184.50 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक 188.40 लाख हैक्टेयर में मोटे अनाजों की बुवाई हो चुकी थी। मोटे अनाजों में जहां बाजरा की बुवाई में हल्की बढ़ोतरी हुई है वहीं मक्का के साथ ही ज्वार की बुवाई में कमी आई है।
कपास की बुवाई चालू रबी में बढ़कर 121.51 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक केवल 102.23 लाख हैक्टेयर में ही कपास की बुवाई हो पाई थी। गन्ने की बुवाई भी चालू सीजन में बढ़कर 49.95 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक 45.64 लाख हैक्टेयर में ही गन्ने की बुवाई हो पाई थी।................   आर एस राणा

उत्तर कोरिया को लेकर फिर से तनाव बढ़ने से सोना में चमक

उत्तर कोरिया को लेकर फिर से तनाव बढ़ने से कमोडिटी बाजार का समीकरण फिर से बिगड़ गया है और कच्चे तेल में कल जोरदार तेजी आई थी और नायमैक्स पर क्रूड का दाम 50 डॉलर के ऊपर चला गया था। हालांकि आज ऊपरी स्तर से कुछ दबाव है। वहीं ब्रेंट में भी 5 महीने के ऊपरी स्तर से हल्की गिरावट आई है। हालांकि इस हफ्ते ब्रेंट क्रूड 3 फीसदी और नायमैक्स क्रूड का दाम करीब 5 फीसदी बढ़ चुका है। वहीं ऐसे माहौल में सोना फिर से चमक गया है और कॉमैक्स पर इसका दाम 1330 डॉलर के स्तर पर चला गया है। वहीं चांदी में भी तेजी आई है। लेकिन लंदन मेटल एक्सचेंज पर बेस मेटल में सपाट कारोबार हो रहा है। चीन में मांग घटने के अनुमान से कल कॉपर का दाम 1 महीने के निचले स्तर पर लुढ़क गया था।

14 सितंबर 2017

कच्चे तेल में ऊपरी स्तर से दबाव

कल की जोरदार तेजी के बाद कच्चे तेल में ऊपरी स्तर से दबाव दिख रहा है। इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी ने ओपेक का उत्पादन घटने और अमेरिका और यूरोप में क्रूड की मांग बढ़ने का अनुमान जताई है। ऐसे में ब्रेंट का दाम 55 डॉलर के ऊपर का स्तर छू लिया। अमेरिका में भंडार बढ़ने से ऊपरी स्तर से अब हल्का दबाव है। वहीं दबाव के बावजूद नायमैक्स क्रूड  49 डॉलर के ऊपर है। अमेरिका में गैसोलीन के भंडार में रिकॉर्ड साप्ताहिक गिरावट दर्ज हुई है। सोने में भी आज दबाव है और ग्लोबल मार्केट में इसका दाम पिछले दो हफ्ते के निचले स्तर पर आ गया है। कॉमैक्स पर फिलहाल सोना 1320 डॉलर के पास कारोबार कर रहा है। चांदी में भी दबाव है। लंदन मेटल एक्सचेंज पर बेस मेटल में आज रिकवरी आई है और चीन में लेड का दाम उछल गया है। डॉलर में रिकवरी से रुपये पर दबाव बढ़ गया है और 1 डॉलर की कीमत 64.10 रुपये के पार चली गई है।

13 सितंबर 2017

मॉनसून की बदल रही चाल; भारत में बढ़ रहा है सूखे और बाढ़ का संकट

दक्षिण-पश्चिम मॉनसून पर भारत की खरीफ फसलें ही नहीं हैं बल्कि पानी की अन्य जरूरतें भी मॉनसून वर्षा से काफी हद तक तक पूरी होती हैं। मॉनसून का भारत के लिए बहुत अधिक महत्व है। यही वजह है कि किसान से लेकर आम आदमी और सरकार तक की नज़रें मॉनसून पर टिकी रहती हैं। मॉनसून के प्रदर्शन को ध्यान में रखकर सरकार की कई नीतियाँ तैयार की जाती हैं।
चार महीनों का मॉनसून का सफर अपने आखिरी चरण में पहुँच गया है और इसकी विदाई राजस्थान के पश्चिमी भागों से कभी भी शुरू हो सकती है। वर्ष 2017 में स्काइमेट ने सामान्य से 5 फीसदी कम 95 प्रतिशत यानि मॉनसूनी बारिश की संभावना जताई थी और अब तक देश में जितनी वर्षा हुई है वह स्काइमेट को 100 प्रतिशत सही साबित करती है।
मॉनसून की बदलती चाल चिंता का विषय है क्योंकि मॉनसून के परंपरागत प्रदर्शन में बदलाव ना सिर्फ कृषि को प्रभावित कर रहा है बल्कि परिस्थितिकी पर भी इसका असर देखने को मिलेगा। बदल रही जलवायु किसानों को गंभीर रूप में प्रभावित कर सकती है।
वर्षा 2017 में अब तक हुई बारिश के आंकड़े बताते हैं कि कहीं भीषण बाढ़ की विभीषिका रही तो कहीं सूखे जैसे हालात से बंजर होती धरती है। ऐसा नहीं है कि यह स्थिति इस बार अचानक आई है। लेकिन सच यह भी है कि हर वर्ष सूखे और बाढ़ वाले इलाकों का दायरा बढ़ता जा रहा है। नीचे दिए गए आंकड़ों में यह अंतर समझा जा सकता है, जो 1 जून से 11 सितंबर तक हुई बारिश पर आधारित हैं।
Monsoon rains in India in 2017
दक्षिण-पश्चिम मॉनसून ने 2017 में असम, बिहार, उत्तर-पूर्वी उत्तर प्रदेश, राजस्थान के कुछ इलाकों और गुजरात में बाढ़ ने तबाही मचाई। दक्षिणी छत्तीसगढ़ और ओड़ीशा के कुछ भागों में भी भारी वर्षा और बाढ़ का संकट रहा। पश्चिमी राजस्थान और कच्छ में बारिश कम होती थी। इन भागों में मॉनसूनी बारिश बढ़ रही है और सामान्य से अधिक बारिश होने लगी है।
दूसरी ओर हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, विदर्भ और तटीय कर्नाटक में कई जगह सूखे जैसे हालात हैं। यही नहीं जिन राज्यों में सामान्य से अधिक बारिश हुई है उनमें भी वितरण संतुलित नहीं रहा।
अगर यही क्रम आगे भी बना रहता है तो इस पर गंभीरता से चिंतन करना होगा और कृषि के लिए रणनीति बदलनी होगी। यानि जब मॉनसून हमारे अनुकूल नहीं चल रहा है तो क्यों ना हम उसके अनुकूल चलें, इस पर सोचने की ज़रूरत है।..........www.skymet.com
 

सोयाबीन का बकाया स्टॉक 20 लाख टन से ज्यादा बचने का अनुमान

आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू खरीफ में सोयाबीन का बकाया स्टॉक 20 लाख टन से ज्यादा बचने का अनुमान है जबकि पिछले साल अक्टूबर के शुरु में बकाया स्टॉक 4.41 लाख टन का ही बचा हुआ था। चालू खरीफ में सोयाबीन की बुवाई कम हुई है, साथ ही उत्पादक राज्यों में मानसूनी बारिश सामान्य से कम होने के कारण उत्पादन तो कम होने का अनुमान है लेकिन बकाया स्टॉक को मिलाकर कुल उपलब्धता पिछले साल के लगभग बराबर ही होने का अनुमान है। उत्पादक मंडियों में नई सोयाबीन की आवक चालू हो गई है, तथा अगले महीने दैनिक आवक और बढ़ेगी, जिससे मौजूदा भाव 50 से 100 रुपये का मंदा आने का अनुमान है।
सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन आफ इंडिया (सोपा) के अनुसार उत्पादक राज्यों में अगस्त के आखिर में बकाया स्टॉक करीब 24.91 लाख टन का बचा हुआ है, जबकि सितंबर में औसत खपत करीब चार से पांच लाख टन ही होने का अनुमान, ऐसे में बकाया स्टॉक 20 लाख टन के करीब बचेगा, जबकि पिछले साल नई फसल के बकाया स्टॉक केवल 4.41 लाख टन का ही बचा हुआ था।
सोपा के अनुसार चालू खरीफ में सोयाबीन की बुवाई घटकर 105.26 लाख हैक्टेयर में ही हुई है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में इसकी बुवाई 114.66 लाख हैक्टेयर में हुई थी। चालू खरीफ उत्पादक राज्यों में जुलाई से अगस्त के दौरान बारिश सामान्य से काफी कम हुई है जिससे प्रति हैक्टेयर उत्पादकता में कमी आने की आशंका है। ऐसे में चालू खरीफ में उत्पादन पिछले साल के 114.91 लाख टन से कम होने का अनुमान है लेकिन बकाया स्टॉक को मिलाकर कुल उपलब्धता पिछले साल के लगभग बराबर ही बैठेगी।
सोयाबीन की नई फसल की आवक मध्य प्रदेश की मंडियों में चालू हो गई है तथा नई फसल के भाव 2,400 से 2,700 रुपये और पुरानी सोयाबीन के भाव 2,700 से 3,000 रुपये प्रति क्विंटल है। नई सोयाबीन में नमी की मात्रा ज्यादा है, अक्टूबर में नई फसल की आवक तो बढ़ेगी ही, साथ ही सूखे मालों की आवक बढ़ेगी, जिससे सोयाबीन की कीमतों में नरमी आने का अनुमान है।
सोपा के अनुसार फसल सीजन 2016-17 में अक्टूबर-16 से अगस्त-17 के दौरान 17.34 लाख टन सोया डीओसी का निर्यात हुआ है। इस दौरान घरेलू बाजार में डीओसी की खपत करीब 41.25 लाख टन का हुई है। ...........  आर एस राणा