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31 जुलाई 2015

खरीफ फसलों की बुवाई में 9 फीसदी की बढ़ोतरी

खरीफ फसलों की बुवाई में 9 फीसदी की बढ़ोतरी
तिलहन के साथ ही दलहन की बुवाई में अच्छी बढ़ोतरी
आर एस राणा
नई दिल्ली। खरीफ फसलों की बुवाई चालू सीजन में 9 फीसदी बढ़कर 764.28 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल की समान अवधि में 703.04 लाख हैक्टेयर में हुई थी। उत्पादक राज्यों में हुई अच्छी बारिष से दलहन के साथ ही तिलहनों की बुवाई में अच्छी बढ़ोतरी हुई है।
कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू खरीफ में प्रमुख फसल धान की रोपाई बढ़कर 227.8 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल की समान अवधि में 214.82 लाख हैक्टेयर में ही धान की रोपाई हुई थी।
दलहन की बुवाई चालू रबी में बढ़कर 82.44 लाख हैक्टेयर में हुई है जबकि पिछले साल की समान अवधि में 48.15 लाख हैक्टेयर में ही दालों की बुवाई हुई थी। खरीफ दलहन की प्रमुख फसल अरहर की बुवाई चालू खरीफ में बढ़कर 27.6 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक 26.25 लाख हैक्टेयर में बुवाई हुई थी। उड़द की बुवाई चालू खरीफ में 21.15 लाख हैक्टेयर में हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक 16.64 लाख हैक्टेयर में बुवाई हुई थी।
तिलहनों की बुवाई चालू खरीफ में 148.50 लाख हैक्टेयर में हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक 135.60 लाख हैक्टेयर में तिलहनी फसलों की बुवाई हुई थी। खरीफ तिलहन की प्रमुख फसल सोयाबीन की बुवाई 106.35 लाख हैक्टेयर में हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक 95.66 लाख हैक्टेयर में बुवाई हुई थी। मूंगफली की बुवाई चालू खरीफ में 29.05 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक 26.29 लाख हैक्टेयर में हुई थी।
मोटे अनाजों की बुवाई चालू खरीफ में बढ़कर 148.49 लाख हैक्टेयर में हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक 125.50 लाख हैक्टेयर में हुई थी। मक्का की बुवाई खरीफ सीजन में 66.74 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल की समान अवधि में 60.70 लाख हैक्टेयर में बुवाई हुई थी।
गन्ने बुवाई चालू सीजन में 47.33 लाख हैक्टेयर में हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक 46.42 लाख हैक्टेयर में बुवाई हुई थी। कपास की बुवाई भी चालू खरीफ में 101.91 लाख हैक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल इसकी बुवाई 104.84 लाख हैक्टेयर में हुई थी।................आर एस राणा

उत्पादक राज्यों में अच्छी बारिष से कपास की कीमतों में और गिरावट की आषंका


सीसीआई के पास करीब 45 लाख गांठ कपास का बचा हुआ है स्टॉक
आर एस राणा
नई दिल्ली। कपास के प्रमुख उत्पादक राज्यों गुजरात, मध्य प्रदेष, आंध्रप्रदेष और उत्तर भारत के राज्यों में हुई अच्छी बारिष से पैदावार बढ़ने का अनुमान है। इसीलिए कपास की कीमतों में सप्ताहभर में करीब 500 से 800 रुपये की गिरावट आकर अहमदबाद में षंकर-6 किस्म की कपास के भाव 34,000 से 34,500 रुपये प्रति कैंडी (एक कैंडी-356 किलो) रह गए। कमजोर मांग को देखते हुए मौजूदा कीमतों में और भी गिरावट आने की आषंका है वैसे भी कॉटन कार्पोरेषन ऑफ इंडिया (सीसीआई) के पास अभी भी करीब 45 लाख गांठ (एक गांठ-170 किलो) कपास का स्टॉक बचा हुआ है।
नार्थ इंडिया कॉटन एसोसिएषन के अध्यक्ष राकेष राठी ने बताया कि प्रमुख कपास उत्पादक राज्यों गुजरात, मध्य प्रदेष, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, तेलंगाना और आंध्रप्रदेष में चालू महीने में अच्छी बारिष हुई है जोकि फसल के लिए अच्छी है। हालांकि महाराष्ट्र के मराठवाड़ा में अभी भी स्थिति चिंताजनक है, मराठवाड़ा में सामान्य से करीब 50 फीसदी कम बारिष हुई है जबकि आंध्रप्रदेष के भी कुछ क्षेत्रों में बारिष कम हुई है। उन्होंने बताया कि ज्यादातर उत्पादक क्षेत्रों में बारिष अच्छी होने के कारण ही कपास में मिलों की मांग घटी है जबकि सीसीआई ई-निलामी के द्वारा लगातार भाव घटाकर बिकवाली कर रही है। इसीलिए उत्पादक मंडियों में भाव कम हुए हैं तथा मौजूदा कीमतों में और भी गिरावट आने की आषंका है।
सीसीआई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि निगम चालू सीजन में अभी तक 39 लाख गांठ कपास की बिक्री ई-निलामी के माध्यम से घरेलू बाजार में कर चुकी है जबकि 3 लाख गांठ कपास का निर्यात किया है। निगम के पास अभी भी करीब 45 लाख गांठ कपास का स्टॉक बचा हुआ है तथा आगामी दिनों में निगम बिक्री और भी बढ़ा सकता है। सीसीआई ने चालू सीजन में न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर 87 लाख गांठ कपास की खरीद की थी।
कपास कारोबारी हरी भाई ने बताया कि चालू सीजन में करीब 45 लाख गांठ कपास का निर्यात ही हुआ है तथा विष्व बाजार में इस समय कपास के भाव 63.50 डॉलर प्रति औंस हैं। इन भावो में निर्यात सौदे सीमित मात्रा में ही हो रहे है तथा विष्व बाजार में अभी कीमतो में भारी तेजी की उम्मीद भी नहीं है।
कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू खरीफ में कपास की बुवाई 101.91 लाख हैक्टेयर में हुई है जबकि पिछले साल की समान अवधि में 104.84 लाख हैक्टेयर में हुई थी।......आर एस राणा

30 जुलाई 2015

खरीफ में 300 लाख टन चावल की खरीद का लक्ष्य

आर एस राणा
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने खरीफ विपणन सीजन 2015-16 में न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर 300 लाख टन चावल की खरीद का लक्ष्य तय किया है। भारत सरकार के खाद्य सचिव की अध्यक्षता में राज्यों के खाद्य सचिवों के साथ हुई बैठक में यह लक्ष्य तय किया गया है।
खाद्य मंत्रालय के अनुसार भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) एमएसपी पर धान की खरीद के सभी राज्यों में पुख्ता इंतजाम किए करेगी, साथ ही पैकेजिंग के साथ ही भंडारण की भी उचित व्यवस्था की जायेगी। खरीफ सीजन में आंध्रप्रदेष से 20 लाख टन, असम से 50 हजार टन, बिहार से 20 लाख टन, छत्तीसगढ़ से 36 लाख टन, हरियाणा से 23.45 लाख टन, झारखंड से 3 लाख टन, कर्नाटका से 95 हजार टन और केरल से एक लाख टन की खरीद का लक्ष्य तय किया गया है।.......आर एस राणा

मूंगफली दाने का निर्यात मूल्य में बढ़ा, मात्रा में घटा


आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू वित्त वर्ष 2015-16 के पहले दो महीनों अप्रैल-मई में मूंगफली दाने के निर्यात में जहां मूल्य के हिसाब से बढ़ोतरी हुई है, वहीं मात्रा में इसके निर्यात में कमी आई है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अनुसार अप्रैल-मई में मूल्य के हिसाब से मूंगफली दाने के निर्यात में 10.51 फीसदी की बढ़ोतरी होकर कुल 675.09 करोड़ रुपये मूल्य का निर्यात हुआ है जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में इसका निर्यात 610.86 करोड़ रुपये का हुआ था।
एपीडा के अनुसार चालू वित्त वर्ष 2015-16 के पहले दो महीनों अप्रैल-मई में मूंगफली दाने का निर्यात मात्रा के हिसाब से घटकर 89,023 टन का ही हुआ है जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में इसका निर्यात 1,03,728 टन का हुआ था।......आर एस राणा

पोल्ट्र फीड कंपनियों के साथ स्टार्च मिलों की मांग से मक्का में और तेजी संभव


विष्व बाजार में मक्का की कीमतें कम होने से भारत से निर्यात पड़ते नहीं
आर एस राणा
नई दिल्ली। पोल्ट्र फीड निर्माता कंपनियों के साथ ही स्टार्च मिलों की मांग से मक्का की कीमतों में तेजी बनी हुई है। दिल्ली में मक्का के भाव बढ़कर 1,340 से 1,350 रुपये प्रति क्विंटल हो गए। खरीफ में मक्का की नई फसल की आवक सितंबर महीने में बनेगी, इसलिए मौजूदा कीमतों और भी तेजी आने की संभावना है।
मक्का कारोबारी राजेष गुप्ता ने बताया कि मक्का में पोल्ट्री फीड निर्माताओं के साथ ही स्टार्च मिलों की मांग बराबर बनी हुई है जबकि बिहार और आंध्रप्रदेष की मंडियों में आवक कम हुई है। पिछले पंद्रह दिनों में मक्का की कीमतो में करीब 125 से 150 रुपये प्रति क्विंटल की तेजी आ चुकी है। उत्तर प्रदेष की मंडियों में मक्का के भाव बढ़कर 1,260 रुपये और बिहार की मंडियों में 1,270 रुपये प्रति क्विंटल हो गए। पंजाब और हरियाणा डिलीवरी मक्का के भाव बढ़कर 1,400 से 1,450 रुपये प्रति क्विंटल हो गए।
यूएस ग्रेन काउंसिल के भारतीय प्रतिनिधि अमित सचदेव ने बताया कि विष्व बाजार में मक्का के दाम नीचे होने के कारण भारत से निर्यात पड़ते नहीं लग रहे हैं। ब्राजील की मक्का के भाव 166 डॉलर प्रति टन और अर्जेंटीना की मक्का के भाव 167 डॉलर प्रति टन है। अमेरिका में मौसम मक्का की फसल के लिए अनुकूल है जिससे पैदावार ज्यादा ही होने का अनुमान है ऐसे में विष्व बाजार में मक्का की कीमतांें में अभी तेजी की संभावना भी नहीं है। इसलिए भारत से निर्यात पड़ते नई फसल आने के बाद भी लगने की उम्मीद नहीं है। उन्होंने बताया कि मक्का के एफओबी भाव खाड़ी देषों में 222 से 224 डॉलर प्रति टन हैं तथा सप्ताहभर में इसमें करीब 10 डॉलर प्रति टन की गिरावट आई है।
मक्का कारोबारी पी सी गुप्ता ने बताया कि आवक कम होने से उत्पादक राज्यों की मंडियों में मक्का की कीमतों में तेजी आई है। खरीफ मक्का की आवक सितंबर महीने में षुरु होगी तथा आवकों का दबाव अक्टूबर में बनेगा। ऐसे में अगस्त महीने में मक्का के दाम तेज ही बने रहने की संभावना है।  आंध्रप्रदेष की निजामाबाद मंडी में मक्का के भाव बढ़कर 1,370 रुपये, करीमनगर मंडी में 1,445 रुपये और सांगली मंडी में 1,595 रुपये प्रति क्विंटल हो गए। बिहार से दक्षिण भारत के राज्यों में पहुंच मक्का के  सौदे 1,525 से 1,550 रुपये प्रति क्विंटल की दर से हो रहे हैं।.....आर एस राणा

29 जुलाई 2015

चालू फसल सीजन में 200 लाख टन से ज्यादा दलहन पैदावार का अनुमान

चालू फसल सीजन में 200 लाख टन से ज्यादा दलहन पैदावार का अनुमान
आर एस राणा
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने चालू फसल सीजन 2015-16 में 200.5 लाख टन दलहन पैदावार का अनुमान लगाया है जोकि पिछले सीजन के मुकाबले 15.53 फीसदी ज्यादा है। खरीफ में 70.5 लाख टन और रबी में 130 लाख टन दलहन पैदावार का लक्ष्य तय किया गया है।
कृषि मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि चालू फसल सीजन 2015-16 में केंद्र सरकार ने राज्यों के साथ मिलकर दलहन की खेती को बढ़ावा दिया है। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिषन (एनएफएसएम) के तहत किसानों को उन्नत किस्म के बीज के साथ ही अन्य सहायता भी दी जा रही है। उन्होनें बताया कि एनएफएसएम के तहत आवंटित कुल राषि का 50 फीसदी से ज्यादा खर्च दलहन पैदावार को बढ़ाने के लिए किया जायेगा। ऐसे में मंत्रालय ने चालू फसल सीजन 2015-16 में दलहन उत्पादन बढ़ाकर 200.5 लाख टन करने का लक्ष्य तया किया है। पिछले साल देष के कुछ भागों में बारिष कम होने से दलहन की पैदावार में कमी आई थी। फसल सीजन 2014-15 में देष में 173.8 लाख टन ही दालों की पैदावार हुई थी जबकि फसल सीजन 2013-14 में रिकार्ड 192.5 लाख टन दालों की पैदावार हुई थी।
उन्होंने बताया कि चालू खरीफ में मराठवाडा को छोड़ देष के अन्य भागों में अभी तक अच्छी वर्षा हुई है हालांकि पैदावार के अनुमान का आंकलन अगस्त माह में होने वाली बारिष की स्थिति पर निर्भर करेगा। चालू खरीफ में मराठवाडा में सामान्य से 53 फीसदी, कर्नाटका के कुछ हिस्सों में 44 फीसदी, रायलसीमा में 33 फीसदी और बिहार में 28 फीसदी कम बारिष हुई है।
उन्होंने बताया कि फसल सीजन 2014-15 में दलहन की पैदावार में आई कमी के कारण ही घरेलू मार्किट में दालों के भाव में तेजी बनी हुई है। दलहन पैदावार में आई कमी के कारण ही वित्त वर्ष 2014-15 में देष में रिकार्ड 45 लाख टन दालों का आयात हुआ था तथा देष की आयात मांग ज्यादा होने के कारण विदेषी बाजार में भी दालों की कीमतों में तेजी बनी हुई है।
व्यापारिक सूत्रों के अनुसार महाराष्ट्र की अकोला मंडियों में चना के भाव 4,500 रुपये, अरहर के भाव 7,550 रुपये, उड़द के भाव 7,200 रुपये और मूंग के भाव 6,000 से 6,500 रुपये प्रति क्विंटल चल रहे हैं। दिल्ली में मूंग के भाव 6,500 रुपये, चना के भाव 4,600 रुपये, उड़द एफएक्यू 7,400 रुपये, एसक्यू 7,800 रुपये और मसूर के भाव 7,000 प्रति क्विंटल चल रहे हैं।................आर एस राणा

27 जुलाई 2015

गुजरात में बारिष से केस्टर सीड की बुवाई बढ़ने की संभावना, भाव में गिरावट


केस्टर तेल में अच्छी निर्यात मांग से भाव में फिर सुधार आने का अनुमान
आर एस राणा
नई दिल्ली। गुजरात के प्रमुख केस्टर सीड उत्पादक क्षेत्रों में पिछले तीन दिनों से हुई अच्छी बारिष से बुवाई बढ़ने की संभावना है। ऐसे में मिलों की मांग घटने से केस्टर सीड की कीमतों में 75 से 100 रुपये प्रति क्विंटल की गिरावट आकर भाव 3,800 से 3,900 रुपये प्रति क्विंटल रह गए। हालांकि इस समय केस्टर तेल में निर्यात मांग अच्छी बनी हुई है जिससे भाव में फिर से सुधार आने का अनुमान है।
केस्टर सीड के थोक कारोबारी कुषल राज पारिख ने बताया कि उत्पादक क्षेत्रों में पिछले तीन दिनों से हुई बारिष से केस्टर सीड की बुवाई हो चुकी फसल को तो फायदा होगा ही, साथ ही जिन क्षेत्रो में बुवाई नहीं हुई है, वहां भी बुवाई बढ़ने का अनुमान है। इसीलिए कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। उन्होंने बताया मंडियो में केस्टर सीड के भाव घटकर 3,800 रुपये और प्लांट डिलीवरी 3,900 रुपये प्रति क्विंटल रह गए। केस्टर तेल का भाव 790 से 795 रुपये प्रति 10 किलो रहा।
केस्टर व्यापारी वामन भाई ने बताया कि केस्टर तेल के निर्यात सौदे 1,270 डॉलर प्रति टन की दर से हो रहे हैं तथा इस समय चीन की आयात मांग अच्छी है। चालू वित्त वर्ष 2015-16 में केस्टर तेल का निर्यात पिछले साल से ज्यादा ही होने का अनुमान है। वैसे भी इस समय उत्पादक मंडियों में केस्टर सीड की दैनिक आवक घटकर 20 से 25 हजार बोरियों (एक बोरी-75 किलो) की रह गई।  ऐसे में आगामी दिनों में फिर से केस्टर सीड की कीमतों में सुधार आने का अनुमान है।
साल्वेंट एक्सट्रेक्टर्स एसोएिषन आफ इंडिया (एसईए) के अनुसार चालू वित वर्ष 2015-16 के पहले दो महीनों अप्रैल से मई के दौरान 90,396 टन केस्टर तेल का निर्यात हो चुका है जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में 85,837 टन तेल का निर्यात हुआ है। वित वर्ष 2014-15 में देष से 4.59 लाख टन केस्टर तेल का निर्यात हुआ था तथा चालू वित वर्ष 2015-16 में भी निर्यात अच्छा होने का अनुमान है।
कृषि मंत्रालय के तीसरे आरंभिक अनुमान के अनुसार फसल सीजन 2014-15 में केस्टर सीड की पैदावार बढ़कर 18.24 लाख टन होने का अनुमान है जबकि पिछले साल इसकी पैदावार 17.27 लाख टन की हुई थी।.....आर एस राणा