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09 दिसंबर 2023

राजस्थान में गेहूं, चना एवं सरसों के साथ ही जौ की बुआई तय लक्ष्य से कम

नई दिल्ली। चालू रबी सीजन में 4 दिसंबर 2023 तक राजस्थान में गेहूं, चना, सरसों के साथ ही जौ की बुआई तय लक्ष्य से पीछे चल रही है। हालांकि गेहूं की बुआई के लिए अभी समय है लेकिन चना, सरसों तथा जौ की बुआई का समय लगभग समाप्त हो चुका है।


राज्य के कृषि निदेशालय के अनुसार राज्य में जौ की बुआई घटकर 3.54 लाख हेक्टेयर में ही हुई है जोकि तय लक्ष्य 3.65 लाख हेक्टेयर की तुलना में कम है। हालांकि पिछले साल की समान अवधि में राज्य में जौ की बुआई 3.37 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई थी।

रबी तिलहन की प्रमुख फसल सरसों की बुआई घटकर राज्य में 34.91 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जोकि तय लक्ष्य 41 लाख हेक्टेयर की तुलना में कम है। पिछले साल इस समय तक राज्य में 37.10 लाख हेक्टेयर में सरसों की बुआई हो चुकी थी। तिलहनी फसलों की कुल बुआई चालू रबी में 36.19 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जोकि तय लक्ष्य 43.60 लाख हेक्टेयर से कम है।

दलहन की प्रमुख फसल चना की बुआई चालू रबी में घटकर 17.71 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जोकि तय लक्ष्य 21 लाख हेक्टेयर की तुलना में कम है। पिछले साल इस समय तक राज्य में चना की बुआई 20.43 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी। दलहन की कुल बुआई चालू रबी में राज्य में 18.10 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में इनकी बुआई 20.71 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी। दलहनी फसलों की बुआई का लक्ष्य 21.40 लाख हेक्टेयर तय किया गया है।

गेहूं की बुआई चालू रबी में राज्य में 21.97 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 23.49 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है। चालू रबी में राज्य में 31 लाख हेक्टेयर में गेहूं की बुआई का लक्ष्य राज्य के कृषि निदेशालय ने तय किया हुआ है।

गुजरात में दलहन एवं तिलहन की बुआई पीछे, गेहूं में हल्का सुधार

नई दिल्ली। चालू रबी सीजन में गुजरात में दलहन एवं तिलहन की बुआई पीछे चल रही है, जबकि गेहूं की बुआई में हल्का सुधार आया है।


राज्य के कृषि निदेशालय के अनुसार राज्य में 4 दिसंबर तक तिलहन की बुआई केवल 2.43 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई है, जबकि पिछले साल इस समय तक इसकी बुआई 2.87 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी। रबी तिलहन की प्रमुख फसल सरसों की बुआई चालू रबी में 2.43 लाख हेक्टेयर में हुई है जोकि पिछले साल की समान अवधि के 2.87 लाख हेक्टेयर की तुलना में कम है।

इसी तरह से चालू रबी में दलहन की प्रमुख फसल चना की बुआई राज्य में घटकर 4.56 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई है, जबकि पिछले साल इस समय तक 5.07 लाख हेक्टेयर में बुआई हो चुकी थी। दलहनी फसलों की कुल बुआई चालू रबी में 4.92 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जबकि पिछले साल इस समय तक इसकी बुआई 5.39 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी।

रबी की प्रमुख फसल गेहूं की बुआई चालू रबी में राज्य में थोड़ी सुधरकर 6.87 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल इस समय तक इसकी बुआई केवल 6.86 लाख हेक्टेयर में बुआई ही हुई थी।

मोटे अनाजों में ज्वार की बुआई चालू रबी में राज्य में 17,929 हेक्टेयर में, मक्का की 83,087 हेक्टेयर में तथा अन्य फसलों की 10,233 हेक्टेयर में ही हुई है, जबकि पिछले साल क्रमश: इनकी बुआई 14,982 हेक्टेयर में, 84,995 हेक्टेयर में तथा 9,381 हेक्टेयर में हो चुकी थी। 


उत्पादक राज्यों में हाल ही में हो रही बारिश चना की फसल के लिए फायदेमंद

नई दिल्ली। चालू रबी में चना की बुआई में भले ही 11 फीसदी से ज्यादा की कमी आई है, लेकिन हाल में उत्पादक राज्यों में हो रही बारिश इसकी फसल के लिए फायदेमंद है। इससे चना की प्रति हेक्टेयर उत्पादकता में बढ़ोतरी होने की संभावना है।


भारतीय मौसम विभाग, आईएमडी के अनुसार पिछले 24 घंटों के दौरान, दक्षिणी तमिलनाडु, मध्य प्रदेश के पूर्वी हिस्सों और छत्तीसगढ़ के कुछ हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश हुई। आंध्र प्रदेश के दक्षिणी तट, विदर्भ, मराठवाड़ा, मध्य प्रदेश के पश्चिमी हिस्सों और पूर्वी गुजरात और हिमाचल प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में हल्की बारिश हुई।

आईएमडी के अनुसार अगले 24 घंटों के दौरान, तटीय आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में हल्की से मध्यम बारिश के साथ कुछ स्थानों पर भारी बारिश संभव है। आंतरिक तमिलनाडु और पूर्वी मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। इसके अलावा तटीय कर्नाटक में हल्की बारिश संभव है।

कृषि मंत्रालय के अनुसार 1 दिसंबर 23 तक चना की बुआई 11.26 फीसदी कम होकर 75.09 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में इसकी बुआई 85.54 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी।

प्रमुख उत्पादक राज्य मध्य प्रदेश में चालू रबी में चना की बुआई बढ़कर 20.26 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 18.60 लाख हेक्टेयर से कम है। हालांकि महाराष्ट्र में चालू रबी इसकी बुआई घटकर केवल 15.26 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 19.36 लाख हेक्टेयर से कम है।

कर्नाटक में चालू रबी में चना की बुआई कम होकर 8.24 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 10.73 लाख हेक्टेयर से कम है। इसी तरह से आंध्र प्रदेश में चना की बुआई 1.41 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जबकि पिछले साल इस समय तक 2.50 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी।

राजस्थान में चालू रबी में चना की बुआई घटकर 17.52 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 20.42 लाख हेक्टेयर से कम है। उत्तर प्रदेश में चना की बुआई 6.44 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 8.82 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है।

गुजरात में चना की बुआई चालू रबी में घटकर 3.14 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जबकि पिछले साल इस समय तक 4.65 लाख हेक्टेयर में बुआई हो चुकी थी। छत्तीसगढ़ में चालू रबी में चना की बुआई 1.22 लाख हेक्टेयर में ही हुई है जोकि पिछले साल की समान अवधि के 1.30 लाख हेक्टेयर से कम है।

चालू रबी में गेहूं के साथ ही दलहन एवं तिलहन तथा मोटे अनाजों की बुआई घटी

नई दिल्ली। चालू रबी सीजन में गेहूं के साथ ही दलहन एवं तिलहन तथा धान की बुवाई पिछले साल की तुलना में पीछे चल रही है।


कृषि मंत्रालय के अनुसार 1 दिसंबर तक रबी सीजन की प्रमुख फसल गेहूं की बुआई 187.94 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में इसकी बुआई 197.55 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी।

रबी दलहन की बुआई घटकर चालू सीजन में 108.09 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 119.37 लाख हेक्टेयर से कम है।

रबी दलहन की प्रमुख फसल चना की बुआई चालू सीजन में 75.09 लाख हेक्टेयर में हुई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 85.54 लाख हेक्टेयर से कम है। हालांकि इस दौरान मसूर की बुआई चालू रबी में बढ़कर 14.30 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल इस समय तक इसकी बुआई केवल 13.99 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी। मटर की बुआई चालू रबी में 7.94 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल इस समय तक इसकी बुआई केवल 7.57 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी। उड़द की बुआई 2.46 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जबकि पिछले साल इस समय तक 3.17 लाख हेक्टेयर से कम है।

मोटे अनाजों की बुवाई चालू रबी में 39.93 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई है, जबकि पिछले साल इस समय तक इसकी बुआई 41.68 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी।

मोटे अनाजों में ज्वार की बुआई चालू रबी में 16.74 लाख हेक्टेयर में, मक्का की 14.55 लाख हेक्टेयर में और जौ की 7.92 लाख हेक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल की समान अवधि में इनकी बुआई क्रमश: 18.21 लाख हेक्टेयर, 14.27 लाख हेक्टेयर और 7.98 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी।

तिलहनी फसलों की बुआई चालू रबी सीजन में घटकर 89.49 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 89.88 लाख हेक्टेयर से थोड़ी कम है।

रबी तिलहन की प्रमुख फसल सरसों की बुआई चालू रबी में थोड़ी बढ़कर 84.26 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले इस समय तक इसकी बुआई 83.71 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी। अन्य रबी तिलहन में मूंगफली की बुआई 2.20 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 2.74 लाख हेक्टेयर से कम है। सफ्लावर की बुआई चालू रबी में 47 हजार हेक्टेयर में ही हुई है, जबकि पिछले साल इस समय तक 53 हजार हेक्टेयर में हो चुकी थी। अलसी की बुआई चालू में बढ़कर 2.18 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल इस समय तक केवल 2 लाख हेक्टेयर में ही बुआई हो पाई थी।

धान की रोपाई चालू रबी में 9.28 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 10.70 लाख हेक्टेयर से कम है।

रबी फसलों की कुल बुआई चालू रबी सीजन में 434.72 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 459.22 लाख हेक्टेयर से कम है।

चालू वित्त वर्ष के पहले सात महीनों में कैस्टर तेल का निर्यात 3.38 फीसदी बढ़ा - उद्योग

नई दिल्ली। चालू वित्त वर्ष 2023-24 के पहले सात महीनों अप्रैल से अक्टूबर के दौरान कैस्टर तेल का निर्यात 3.38 फीसदी बढ़कर 3.66 लाख टन का हुआ है जबकि इसके पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में इसका निर्यात केवल 3.54 लाख टन का ही हुआ था।


सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया, एसईए के अनुसार अक्टूबर में कैस्टर तेल का निर्यात बढ़कर 50,070 टन का हुआ है, जबकि पिछले साल अक्टूबर में इसका निर्यात केवल 39,783 टन ही हुआ था।

एसईए के अनुसार मूल्य के हिसाब से वित्त वर्ष 2023-24 के पहले सात महीनों में कैस्टर  तेल का निर्यात 4,607.97 करोड़ रुपये का हुआ है, जबकि पिछले वित्त वर्ष 2022-23 के अप्रैल से मार्च के दौरान इसका निर्यात 9,027.64 करोड़ रुपये का हुआ था।

व्यापारियों के अनुसार ग्राहकी कमजोर होने से कैस्टर सीड के साथ ही कैस्टर तेल की कीमतों में गिरावट आई। गुजरात की राजकोट मंडी में केस्टर तेल कर्मिशलय के भाव गुरुवार को कमजोर होकर 1,230 रुपये और एफएसजी के दाम घटकर 1,240 रुपये प्रति 10 किलो रह गए। राजकोट मंडी में कैस्टर सीड के दाम घटकर 1,185 से 1,210 रुपये और गोंडल मंडी में 1,120 से 1,151 रुपये तथा जूनागढ़ में 1,130 से 1,170 रुपये तथा जामनगर मंडी में इसके दाम घटकर 1,130 से 1,167 रुपये प्रति 20 किलो रहे।  

अक्टूबर में 20 लाख टन सोयाबीन की आवक, एक लाख टन सोया डीओसी का निर्यात

नई दिल्ली। चालू फसल सीजन 2023-24 के पहले महीने अक्टूबर में घरेलू मंडियों में 20 लाख टन सोयाबीन की आवक हुई, जबकि पिछले साल की समान अवधि में इसकी आवक केवल 17 लाख टन की हुई थी।

सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया, सोपा के अनुसार अक्टूबर में एक लाख टन सोया डीओसी का निर्यात हुआ है, जबकि पिछले साल अक्टूबर में केवल 49 हजार टन का ही हुआ था। अक्टूबर में सोया डीओसी का उत्पादन 9.07 लाख टन हा हुआ है, जबकि 1.17 लाख टन का पिछला स्टॉक बचा हुआ है। अत: इस दौरान डीओसी की घरेलू खपत फीड में 6.50 लाख टन और फूड में 75 हजार टन की हुई है। अत: पहली नवंबर को 1.99 लाख टन सोया डीओसी का बकाया स्टॉक बचा हुआ है, जबकि पिछले साल पहली नवंबर के 2.25 लाख की तुलना में कम है।

सोपा के अनुसार अक्टूबर में उत्पादक मंडियों में 20 लाख टन सोयाबीन की आवक हुई है, जिसमें से 11.50 लाख टन की क्रॉसिंग हो चुकी है। 40 हजार टन सोयाबीन की इस दौरान सीधी खपत हुई है। अत: पहली नवंबर को किसान, व्यापारियों एवं प्लांटों के पास 118.21 लाख टन सोयाबीन का बकाया स्टॉक बचा हुआ है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 126.37 लाख टन की तुलना में कम है।

सोपा के अनुसार चालू फसल सीजन में सोयाबीन का उत्पादन 118.74 लाख टन होने क अनुमान है, जोकि पिछले साल के 124.11 लाख टन से कम है। चालू फसल सीजन में पहली अक्टूबर को सीजन की शुरुआत में घरेलू बाजार में 24.07 लाख टन सोयाबीन का बकाया स्टॉक बचा हुआ था। 


25 नवंबर 2023

दिसंबर के लिए चीनी का कोटा 24 लाख टन का जारी

 केंद्रीय खाद्वय एवं उपभोक्ता मामले मंत्रालय ने दिसंबर के लिए चीनी का कोटा 24 लाख टन का जारी किया है।