कुल पेज दृश्य

08 मई 2015

दलहन के बाद टमाटर की कीमतों में आई भारी तेजी


आर एस राणा
नई दिल्ली। दालों के बाद टमाटर की कीमतों में तेजी का रुख बनने लगा है। आजादपुर मंडी में शुक्रवार को टमाटर की कीमतों में 300 रुपये की तेजी आकर भाव 600 से 800 रुपये प्रति पेटी (एक पेटी-25 किलो) हो गए। हाल ही कई प्रमुख उत्पादक राज्यों में टमाटर की फसल में बीमारी से भारी नुकसान हुआ है इसलिए आगामी दिनों में भाव और भी बढ़ने का अनुमान है।
टमाटर के थोक कारोबारी बलबीर सिंह ने बताया कि आजादपुर मंडी में टमाटर की दैनिक आवक घटकर 15 से 18 ट्रक की रह गई जबकि गत सप्ताह तक दैनिक आवक 25 से 30 ट्रक की हो रही थी। उन्होंने बताया कि प्रमुख उत्पादक राज्यों महाराष्ट्र, राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश और कर्नाटक में टमाटर की फसल में बीमारी लगने से भारी नुकसान हुआ है जिससे इसकी दैनिक आवक कम हो गई है। उन्होंने बताया कि पिछले सप्ताह तक मंडी में टमाटर के भाव 400 से 500 रुपये प्रति पेटी चल रहे थे जबकि शुक्रवार को इसके भाव बढ़कर 600 से 800 रुपये प्रति पेटी हो गए।
टमाटर कारोबारी सुरेंद्र सिंघला ने बताया कि प्याज में इस समय पाकिस्तान की अच्छी मांग बनी हुई है। दिल्ली की आजादपुर मंडी से दैनिक आधार पर पांच से सात ट्रक प्याज वाघा बार्डर के जरिए पाकिस्तान जा रहा है। उन्होंने बताया कि प्याज की आवक आगामी दिनों में और भी कम होने का अनुमान है जिससे मौजूदा भाव में तेजी बनी रहने की संभावना है। इस समय आजादपुर मंडी में टमाटर की आवक राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश से ज्यादा हो रही है।
कृषि मंत्रालय के अनुसार 2014-15 में टमाटर की बुवाई 8.47 लाख हैक्टेयर में हुई है तथा पैदावार 183.05 लाख टन होने का अनुमान है।...आर एस राणा

कालीमिर्च की कीमतों में गिरावट आने की आशंका


आर एस राणा
नई दिल्ली। निर्यात मांग कम होने से कालीमिर्च की कीमतों में गिरावट आने की आशंका है। नीलामी केंद्रों में अनर्गाबल्ड कालीमिर्च का भाव 58,000 रुपये और र्गाबल्ड कालीमिर्च का भाव 61,500 रुपये प्रति क्विंटल रहा।
कालीमिर्च के थोक कारोबारी पारिख राज ने बताया कि चालू सीजन में केरल में कालीमिर्च की पैदावार कम हुई है लेकिन कर्नाटक में पैदावार ज्यादा है। इस समय नीलामी केंद्रों पर आवक अच्छी हो रही है तथा चालू सीजन में कालीमिर्च की पैदावार 50 से 55 हजार टन होने का अनुमान है। विदेशी बाजार में वियतनाम की कालीमिर्च का भाव कम होने के कारण भारत से निर्यात भी सीमित मात्रा में हो रहा है। इसीलिए कीमतों में गिरावट आने का अनुमान है।
कालीमिर्च कारोबारी अमित जैन ने बताया कि कालीमिर्च के भाव में पिछले दो दिनों में करीब 1,000 रुपये प्रति क्विंटल की गिरावट आकर चुकी है। नीलामी केंद्रों में अनर्गाबल्ड कालीमिर्च का भाव घटकर 58,000 रुपये और र्गाबल्ड कालीमिर्च का भाव 61,500 रुपये प्रति क्विंटल रह गया। उन्होंने बताया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कालीमिर्च की कुल पैदावार पिछले साल से घटकर 3.36 लाख टन होने का अनुमान है जबकि पिछले साल पैदावार 3.79 लाख टन हुई थी। उन्होंने बताया कि जुलाई-अगस्त में घरेलू मसाला निर्माताओं के साथ ही निर्यातकों की मांग बढ़ सकती है जिससे कालीमिर्च की कीमतों में तेजी आने आने का अनुमान है।
भारतीय मसाला बोर्ड के अनुसार सकेंगे। वित्त वर्ष 2014-15 के पहले नो महीनों अप्रैल से दिसंबर के दौरान कालीमिर्च का निर्यात 14,500 टन का हुआ है जबकि वित्त वर्ष 2013-14 की समान अवधि में 15,428 टन कालीमिर्च का निर्यात हुआ था। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय कालीमिर्च के भाव 10.25 डॉलर प्रति किलो चल रहे हैं जबकि पिछले साल इस समय भाव 8.82 डॉलर प्रति किलो थे।......आर एस राणा

07 मई 2015

विदेशी बाजार में गेहूं की कीमतों में आई गिरावट से बढ़ रहा है आयात


आस्ट्रेलिया से 1.5 लाख टन गेहूं के हो चुके हैं आयात सौदे
आर एस राणा
नई दिल्ली। विदेशी बाजार में गेहूं की कीमतों में आई गिरावट से आयात में बढ़ोतरी हो रही है। आस्ट्रेलियाई गेहूं का भाव घटकर भारतीय बंदरगाह पर 250 डॉलर प्रति टन रह गया जबकि अप्रैल महीने के शुरू में इसका भाव 268 डॉलर प्रति टन था। अप्रैल से अभी तक आस्ट्रेलिया से लगभग 1.5 लाख टन गेहूं के आयात सौदे हो चुके हैं।
बंगुलरू की आयातक फर्म के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि बड़ी कंपनियां गेहूं के लगातार गेहूं के आयात सौदे कर रही हैं। आस्ट्रेलिया का गेहूं प्रीमियम क्वालिटी का है। विदेशी बाजार में उपलब्धता ज्यादा होने से आयातित गेहूं की कीमतों में गिरावट बनी हुई है। उन्होंने बताया कि अभी तक आस्ट्रेलिया से करीब 1.5 लाख टन गेहूं के आयात सौदे हो चुके हैं तथा आगामी दिनों में कनाडा से भी गेहूं के आयात सौदे होने की संभावना है। आस्ट्रेलिया से गेहूं की डिलीवरी जुलाई, अगस्त, सितंबर और अक्टूबर महीने में होगी। दक्षिण भारत की फ्लोर मिलें राजस्थान, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश से भी गेहूं की खरीद कर रही है। इन राज्यों से गेहूं के खरीद सौदे 1,750 से 1,800 रुपये प्रति क्विंटल की दर से पहुंच के हो रहे हैं।
उन्होंने बताया कि यूक्रेन के साथ रूस में गेहूं की नई फसल की आवक बनने से विदेशी बाजार में उपलब्धता ज्यादा है इसीलिए विदेशी बाजार में गेहूं की कीमतों में गिरावट बनी हुई है। आस्ट्रेलिया से आयातित गेहूं के भाव भारतीय बंदरगाह पर अप्रैल के पहले सप्ताह में 267 से 268 डॉलर प्रति टन थे जबकि इस समय भाव 250 डॉलर प्रति टन रह गए हैं। आस्ट्रेलिया के साथ ही रूस और यूक्रेन तथा कनाडा के पास गेहूं की उपलब्धता ज्यादा है इसलिए विदेशी बाजार में गेहूं के दाम नीचे ही रहने की संभावना है।
भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) चालू रबी विपणन सीजन में अभी तक न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर 222.2 लाख टन गेहूं की खरीद कर चुकी है जोकि पिछले रबी विपणन सीजन के 230.4 लाख टन से 3.5 फीसदी कम है। अभी तक हुई कुल खरीद में सबसे ज्यादा हिस्सेदारी पंजाब की 90 लाख टन, हरियाणा से 63 लाख टन और मध्य प्रदेश से 54 लाख टन गेहूं की खरीद हुई है।
उत्पादक मंडियों में गेहूं की दैनिक आवक अगले सप्ताह से कम हो जायेगी, जबकि इस समय फ्लोर मिलर्स के साथ ही बड़ी कंपनियों की मांग भी बढ़िया गेहूं में बढ़ेगी। इसलिए बढ़िया गेहूं की कीमतों में तेजी आने का अनुमान है। दिल्ली के लारेंस रोड़ पर गेहूं के भाव बढ़कर 1,500 से 1,525 रुपये प्रति क्विंटल हो गए। कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू रबी में गेहूं की पैदावार 957.6 लाख टन होने का अनुमान है जोकि पिछले साल की तुलना में थोड़ा कम है।.....आर एस राणा

मूंग की कीमतों में गिरावट आने की आशंका


आर एस राणा
नई दिल्ली। दलहन की उंची कीमतों से दो-चार हो रहे उपभोक्ताओं के लिए एक अच्छी खबर है। जून महीने में मूंग की नई फसल आने से कीमतों में आठ से दस फीसदी की गिरावट आने की आशंका है। उत्पादक मंडियों में मूंग के भाव 8,000 से 8,100 रुपये प्रति क्विंटल चल रहे हैं।
मूंग के थोक कारोबारी हरिशंकर गुप्ता ने बताया कि जून महीने में मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की मंडियों में नई मूंग की फसल की आवक शुरू हो जायेगी जिससे कीमतों में गिरावट आने की संभावना है। उन्होंने बताया कि मध्य प्रदेश के साथ ही उत्तर प्रदेश में मूंग की बुवाई ज्यादा हुई है तथा पैदावार पिछले साल की तुलना में ज्यादा होने का अनुमान है। उन्होंने बताया कि उत्पादक मंडियों में इस समय मूंग के भाव 8,000 से 8,100 रुपये प्रति क्विंटल चल रहे हैं। जून महीने में मूंग की नई फसल की आवक बढ़ने के बाद मौजूदा कीमतों में आठ से दस फीसदी की गिरावट आने की संभावना है।
कृषि मंत्रालय के अनुसार वर्ष 2014-15 में मूंग की पैदावार 13.9 लाख टन होने का अनुमान है जबकि पिछले साल पैदावार 16.1 लाख टन की पैदावार हुई थी। वित्त वर्ष 2014-15 के पहले नो महीनों अप्रैल से दिसंबर के दौरान करीब 5 लाख टन मूंग-उड़द का आयात हुआ है जबकि वित्त वर्ष 2013-14 में 6.24 लाख टन का आयात हुआ था।.....आर एस राणा

04 मई 2015

स्टॉकिस्टों की सक्रियता से मेंथा तेल की कीमतों में तेजी की आशंका


आर एस राणा
नई दिल्ली। मार्च-अप्रैल महीने में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से मेंथा की रोपाई में हुई देरी से मेंथा की नई फसल की आवक लेट होने की आशंका है। इसलिए स्टॉकिस्टों की सक्रियता से मेंथा तेल की कीमतों में तेजी बनने की संभावना है।
मेंथा कारोबारी अनुराग रस्तोगी ने बताया कि प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों में मार्च-अप्रैल महीने में हुई बारिश से मेंथा की रोपाई में देरी हुई जिसकी वजह से नई फसल की आवक 15-20 दिन देर से शुरू होगी। चालू फसल सीजन में मेंथा तेल की कीमतें भी कम रही थी जिसकी वजह से नए सीजन में किसानों ने मेंथा की बुवाई भी कम की है। यही कारण है कि इस समय मेंथा में स्टॉकिस्टों की खरीद बढ़ गई है जिससे भाव में तेजी का रुख बना हुआ है। सोमवार को चंदौसी में मेंथा तेल के भाव बढ़कर 1,125 रूपये और संभल मंडी में 1,135 रुपये प्रति किलो हो गए। उत्पादक मंडियों में मेंथा तेल की दैनिक आवक 200-250 ड्रम (एम ड्रम-180 किलो) की हो रही है।
मेंथा निर्यातक जुगल किशोर ने बताया कि सिंथेटिक मेंथा की खपत लगातार बढ़ रही है तथा कुछ बढ़ी कंपनियां भी सिथेंटिक मेंथ तेल का उपयोग कर रही है इसलिए मेंथा तेल के भाव चालू सीजन में नीचे ही थे। उन्होंने बताया कि सिथेंटिक तेल बनाने में लागत भी काफी कम आती है। उन्होंने बताया कि नए सीजन में मैंथा की पैदावार पिछले साल की तुलना में घटने का अनुमान है। पिछले साल देश में 50,000 टन मेंथा तेल का उत्पादन हुआ था, नए सीजन में 10 से 12 फीसदी पैदावार कम होने का अनुमान है।
भारतीय मसाला बोर्ड के अनुसार वित्त वर्ष 2014-25 के पहले 9 महीनों (अप्रैल से दिसंबर 2014) के दौरान मेंथा उत्पादों का निर्यात 21,700 टन का रहा जोकि अप्रैल-दिसंबर 2013 के 19,546 टन के मुकाबले ज्यादा है। मेंथा तेल के निर्यात सौदे अप्रैल में 15 से 16 डॉलर प्रति किलो की दर से हुए थे उन्हीं का भुगतान तो रहा है।......आर एस राणा

आयात पड़ते महंगे होने से दालों की कीमतों में भारी तेजी


आर एस राणा
नई दिल्ली। आयात पड़ते मंहगे होने होने से दालों की कीमतों में 250 से 300 रुपये प्रति क्विंटल की तेजी दर्ज की गई। सोमवार को दिल्ली में चना के भाव बढ़कर 4,600 रुपये और उड़द के भाव बढ़कर 8,000 से 8,200 रुपये, अरहर के भाव 7,000 से 7,300 रुपये और मसूर के भाव बढ़कर 7,200 से 7,300 रुपये प्रति क्विंटल हो गए।
दलहन के थोक कारोबारी दुर्गा प्रसाद ने बताया कि आयात पड़ते महंगे होने से दालों की कीमतों में एकतरफा तेजी बनी हुई है। हालांकि उंचे भाव में दालों की खपत में कमी आने का अनुमान है। वैसे भी मई-जून में दालों की खपत कम रहती है लेकिन घरेलू पैदावार में कमी आने के कारण इस समय स्टॉकिस्टों खरीद बराबर बनी हुई है। उन्होंने बताया कि मुंबई से आयातित चने के भाव बढ़कर मुंबई में 4,550 रुपये, उड़द के भाव बढ़कर 8,150 रुपये और लेमन के भाव बढ़कर 7,350 रुपये प्रति क्विंटल हो गए। केनेडियन मसूर के भाव बढ़कर मुंबई में 5,300 से 6,550 रुपये प्रति क्विंटल हो गए।
दलहन व्यापारी संजीव गुप्ता ने बताया कि चालू सीजन में रबी दलहन की बुवाई में कमी आने से पैदावार तो कम होने का अनुमान है ही साथ ही प्रतिकूल मौसम से चना की फसल को नुकसान भी हुआ है। इसलिए स्टॉकिस्टों की खरीद बनी हुई है। उन्होंने बताया कि उंचे भाव में स्टॉकिस्टों की मुनाफावसूली से भाव में आंषिक गिरावट तो आ सकती है लेकिन फिर तेजी आने का ही अनुमान है।
कृशि मंत्रालय के अनुसार चालू रबी में दालों की पैदावार 129.3 लाख टन ही होने का अनुमान है जबकि पिछले साल पैदावार 137.9 लाख टन हुई थी। फसल सीजन 2014-15 में दालों की पैदावार 184.3 लाख टन होने का अनुमान है जबकि पिछले साल 197.8 लाख टन की पैदावार हुई थी। पैदावार में कमी आने के कारण ही वित वष 014-15 के पहले दस महीनों अप्रैल से जनवरी के दौरान 41 लाख टन दालों का आयात भी हो चुका है।......आर एस राणा

02 मई 2015

गेहूं की सरकारी खरीद 182 लाख टन के पार


आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू रबी विपणन सीजन में भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर अभी तक 182.29 लाख टन गेहूं की खरीद कर चुकी है। चालू सप्ताह में प्रमुख उत्पादक राज्यों की मंडियों में गेहूं की आवक बढ़ी है जिससे गेहूं की सरकारी खरीद में भी तेजी आई है।
एफसीआई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि चालू रबी विपणन सीजन 2015-16 में एमएसपी पर अभी तक 182.29 लाख टन गेहूं की सरकारी खरीद हो चुकी है जबकि पिछले रबी विपणन सीजन की समान अवधि में 185.80 लाख टन गेहूं की खरीद हुई थी। उन्होंने बताया कि खरीद मानकों में छूट के बाद से सरकारी खरीद में तेजी आई है। उन्होंने बताया कि उत्पादक मंडियों में 212.73 लाख टन गेहूं की आवक हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक 227.89 लाख टन गेहूं की आवक हुई थी।
उन्होंने बताया कि अभी तक हुई कुल खरीद में सबसे ज्यादा हिस्सेदारी पंजाब की है। चालू रबी विपणन सीजन में पंजाब से अभी तक 70.06 लाख टन गेहूं की खरीद हो चुकी है। हरियाणा से चालू सीजन में अभी तक 56.73 लाख टन और मध्य प्रदेश से 45.48 लाख टन गेहूं की खरीद हो चुकी है। अन्य राज्यों में उत्तर प्रदेश से चालू सीजन में अभी तक 4.22 लाख टन और राजस्थान से 5.33 लाख टन गेहूं की खरीद हो चुकी है।
केंद्र सरकार ने चालू रबी विपणन सीजन में एमएसपी पर 300 लाख टन गेहूं की खरीद का लक्ष्य तय किया है जबकि पिछले रबी विपणन सीजन में 280 लाख टन गेहूं की खरीद हुई थी। कृषि मंत्रालय के दूसरे आरंभिक अनुमान के अनुसार चालू रबी सीजन में देश में गेहूं की पैदावार 956.7 लाख टन होने का अनुमान है। हालांकि जानकारों का मानना है कि मार्च-अप्रैल महीने में हुई बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से गेहूं की फसल को नुकसान हुआ है। गेहूं की प्रति हैक्टेयर उत्पादकता के साथ ही क्वालिटी भी प्रभावित हुई है। ऐसे में गेहूं की कुल पैदावार सरकारी अनुमान से कम होने की आशंका है। इसलिए बढ़िया गेहूं की कीमतों में तेजी रहने की संभावना है।.....आर एस राणा