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01 July 2018

दलहन, तिलहन के साथ मोटे अनाजों की बुवाई पिछड़ी, प्री-मानसून की बारिश कम होने का असर

आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू खरीफ में प्री-मानसून की बारिश कई राज्यों में सामान्य से कम होने के कारण खरीफ फसलों की ​बुवाई पिछड़ी है। कपास, दलहन, तिलहन और मोटे अनाजों के साथ ही धान की रोपाई पिछले साल की तुलना में कम हुई है। हालांकि मानसूनी बारिश लगभग देशभर के सभी राज्यों में शुरू हो चुकी है, इसलिए आगामी दिनों में खरीफ फसलों की बुवाई में तेजी आने की संभावना है।
कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू खरीफ में दालों की बुवाई अभी तक 10.72 लाख हैक्टेयर में ही हो पाई है जबकि पिछले साल इस समय तक 18.18 लाख हैक्टेयर में इनकी बुवाई हो चुकी थी। खरीफ दलहन की प्रमुख फसलों अरहर, उड़द और मूंग की बुवाई में चालू सीजन में कमी आई है। इसी तरह से खरीफ तिलहनों की बुवाई चालू सीजन में घटकर अभी तक केवल 14.55 लाख हैक्टेयर में ही हो पाई है जबकि पिछले साल की समान अवधि में इनकी बुवाई 26 लाख हैक्टेयर में हो चुकी थी। खरीफ तिलहन की प्रमुख फसलों सोयाबीन और मूंगफली की बुवाई पिछले साल से पिछे चल रही है।
मोटे अनाजों की बुवाई चालू खरीफ सीजन में अभी तक केवल 23.89 लाख हैक्टेयर में ही हो पाई है जबकि पिछले साल इस समय तक इनकी बुवाई 34.02 लाख हैक्टेयर में हो चुकी थी। मोटे अनाजों में बाजरा की बुवाई चालू खरीफ में अभी तक केवल 4.09 लाख हैक्टेयर में ही हो पाई है जबकि पिछले साल इस समय तक इसकी बुवाई 12.60 लाख हैक्टेयर में हो चुकी थी। मक्का की बुवाई चालू खरीफ में 15.20 लाख हैक्टेयर में और ज्वार की 2.21 लाख हैक्टेयर में ही हो पाई है।
कपास की बुवाई चालू खरीफ सीजन में घटकर अभी तक केवल 32.20 लाख हैक्टेयर में ही हो पाई है जबकि पिछले साल इस समय तक कपास की बुवाई 46.10 लाख हैक्टेयर में हो चुकी थी। खरीफ की प्रमुख फसल धान की रोपाई चालू खरीफ में अभी तक 26.91 लाख हैक्टेयर में ही हो पाई है जबकि पिछले साल इस समय तक 30.02 लाख हैक्टेयर में इसकी रोपाई हो चुकी थी।
गन्ने की बुवाई जरुर चालू सीजन में बढ़कर 50.01 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल की समान अवधि में इसकी बुवाई केवल 49.48 लाख हैक्टेयर में ही हो पाई थी। 
मंत्रालय के अनुसार चालू खरीफ सीजन में फसलों की कुल बुवाई घटकर अभी तक केवल 165.21 लाख हैक्टेयर में ही हो पाई है जबकि पिछले साल इस समय तक 210.75 लाख हैक्टेयर में फसलों की बुवाई हो चुकी थी।......आर एस राणा

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