आर एस राणा
नई दिल्ली। कॉटन कारपोरेशन आफ इंडिया (सीसीआई) ने सप्ताहभर बाद फिर से कपास की नीलामी शुरू का दी है। सीसीआई ने 24 अगस्त के बिक्री भावों में 400 से 800 रुपये प्रति कैंडी (एक कैंडी-356 किलो) की कटौती की है, जिससे घरेलू बाजार में कपास की कीमतों पर और दबाव बनेगा।
सीसीआई ने नये नियम और शर्तों के तहत कपास की नीलामी फिर से शुरू कर दी है, ताकि जमाखोरों पर नजर रखी जा सके। एक खरीदार को प्रति दिन 2 लाख गांठ (एक गांठ-170 किलो) की अधिकतम खरीद की अनुमति है और पूरे सीजन के लिए 10 लाख गांठ की खरीद की सीमा निर्धारित की गई है। आईसीई में कॉटन वायदा की कीमतों में गिरावट आइ है, क्योंकि निवेशकों ने पिछले सत्र में बढ़त के बाद मुनाफावसूली की, जबकि मजबूत डॉलर के कारण भी कीमतों पर दबाव बढ़ा। पिछले सत्र में दो साल के निचले स्तर से डॉलर 0.6 फीसदी बढ़ गया।
उत्तर भारत के राज्यों में बुआई पिछले साल से ज्यादा
उत्तर भारत की मंडियों में कपास की दैनिक आवक बढ़ने लगी है, हालांकि दाम रुक गए हैं, लेकिन माना जा रहा है कि मौसम साफ रहा तो मध्य सितंबर तक आवक बढ़ जायेगी, जिससे कीमतों में मंदा ही आयेगा। उत्तर भारत के राज्यों में फसल को नुकसान की आशंका तो है लेकिन पंजाब, हरियाणा के साथ ही राजस्थान में कपास की बुआई क्रमश: 5.01, 7.37 और 6.97 लाख हेक्टेयर में हुई है जबकि पिछले साल इन राज्यों में क्रमश: 4.02, 7.01 और 6.44 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी। ऐसे में चालू सीजन में उत्पादन अनुमान भी ज्यादा है।
तेलंगाना में बुआई ज्यादा, महाराष्ट्र एवं गुजरात में कम
चालू खरीफ में कपास के सबसे बड़े उत्पादक राज्यों गुजरात और महाराष्ट्र में बुआई पिछले साल की तुलना में कम हुई है लेकिन तेलंगाना में बुआई बढ़ी है। तेलंगाना में चालू सीजन में बुआई बढ़कर 23.86 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल इस समय तक केवल 17.69 लाख हेक्टेयर में ही बुआई हो पाई थी। गुजरात और महाराष्ट्र में कपास की बुआई क्रमश: 22.76 और 42.01 लाख हेक्टेयर में हुई है जबकि पिछले साल इन राज्यों में बुआई क्रमश: 26.52 और 43.68 लाख हेक्टेयर में बुआई हो पाई थी।
कपास का उत्पादन अनुमान ज्यादा
कॉटन एसोसिएशन आफ इंडिया (सीएआई) के अनुसार पहली अक्टूबर 2019 से शुरू हुए चालू फसल सीजन 2019-20 में 354.50 लाख गांठ कपास के उत्पादन का अनुमान है जोकि इसके पिछले साल के 312 लाख गांठ से ज्यादा है। गुजरात में 92.50 लाख गांठ, महाराष्ट्र में 84.50 लाख गांठ, तेलंगाना में 51 लाख गांठ, कर्नाटक में 21 लाख गांठ, आंध्रप्रदेश 15.25 लाख गांठ, मध्य प्रदेश 17.50 लाख गांठ, तमिलनाडु पांच लाख गांठ तथा उत्तर भारत के राज्यों पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में 63 लाख गांठ के उत्पादन का अनुमान है इसके अलावा अन्य राज्यों 4.75 लाख गांठ के उत्पादन का अनुमान है। चालू सीजन में कुल बुआई बढ़ी है इसलिए कपास का उत्पादन अनुमान भी ज्यादा है।.............. आर एस राणा
03 सितंबर 2020
सीसीआई ने फिर शुरू की कपास की नीलामी, बिक्री भाव में कटौती से कीमतों पर दबाव
02 सितंबर 2020
मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तराखंड और पंजाब के कुछ हिस्सों में बारिश का अनुमान
आर एस राणा
नई दिल्ली। मौसम विभाग के अनुसार अगले 24 घंटों के दौरान मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तराखंड और पंजाब के कुछ हिस्सों में हल्की बारिश का अनुमान है जबकि बिहार, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, सिक्किम, असम, मेघालय, दक्षिण भारत में आंतरिक तमिलनाडु, केरल, और कर्नाटक में कहीं तेज तो कहीं मध्यम बारिश होने की संभावना है।
स्काईमेट के अनुसार निम्न दबाव का क्षेत्र पश्चिमी राजस्थान के आगे निकाल गया है और इस समय यह पश्चिमी राजस्थान और इससे सटे पाकिस्तान पर है। जल्द ही यह कमजोर हो जाएगा। मानसून की अक्षीय रेखा इस निम्न दबाव के क्षेत्र से उत्तर प्रदेश में मथुरा और बहराइच होते हुए पूर्वोत्तर भारत में हिमालय के तराई क्षेत्रों में पहुँच गई है। दक्षिण भारत में तमिलनाडु के तटों पर एक ट्रफ बना हुआ है। राजस्थान के जैसलमर और बाड़मेर में अगस्त में बारिश का 10 वर्षों का टूटा रिकॉर्ड, 3-4 सितंबर को फिर से अच्छी वर्षा के आसार
आगामी 24 घंटों के दौरान देश में कहाँ सक्रिय होगा मानसून
अगले 24 घंटों के दौरान बिहार, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, सिक्किम, असम, मेघालय, दक्षिण भारत में आंतरिक तमिलनाडु, केरल, और कर्नाटक तथा उत्तर भारत में जम्मू कश्मीर में हल्की से मध्यम वर्षा के साथ कुछ स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है। पूर्वोत्तर भारत के बाकी भागों, छत्तीसगढ़, तेलंगाना, तटीय कर्नाटक, उत्तरी आंतरिक कर्नाटक, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान के पश्चिमी हिस्सों, लक्षद्वीप और गुजरात में भी हल्की से मध्यम वर्षा होने की संभावना है। पूर्वी मध्य प्रदेश, पूर्वी राजस्थान, उत्तराखंड और पंजाब के कुछ हिस्सों में हल्की बारिश होने का अनुमान है।
पिछले 24 घंटों में कैसा रहा मानसून का प्रदर्शन
बीते 24 घंटों के दौरान पश्चिमी राजस्थान, गुजरात के कुछ हिस्सों, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल, सिक्किम, असम, मेघालय, उत्तरी कोंकण गोवा में हल्की से मध्यम बारिश के साथ कुछ स्थानों पर भारी वर्षा दर्ज की गई। दक्षिण भारत में कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु में भी कुछ जगहों पर हल्की से मध्यम बारिश के साथ कुछ कहीं-कहीं भारी वर्षा हुई है। अंडमान व निकोबार द्वीपसमूह, पूर्वी राजस्थान उत्तर पश्चिमी राजस्थान, पश्चिमी मध्य प्रदेश, जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, ओडिशा, गंगीय पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर भारत के बाकी हिस्सों में कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई।............... आर एस राणा
मौसम साफ रहा तो मूंग और उड़द में आयेगा मंदा, चना और अरहर में रहेगी घटबढ़
आर एस राणा
नई
दिल्ली। उत्पादक राज्यों में मौसम साफ रहा तो आगे उड़द के साथ ही मूंग की
दैनिक आवक बढ़ेगी, जिससे इनकी मौजूदा कीमतों में 200 से 300 रुपये प्रति
क्विंटल का मंदा आने का अनुमान है। चना और अरहर में उंचे भाव में मांग
कमजोर हुई है, हालांकि स्टॉकिस्ट तेजी करना चाहते हैं, इसलिए इनके भाव में
100 से 150 रुपये की तेजी आए तो फिर स्टॉक बेचना ही चाहिए।
उत्पादक
राज्यों में मौसम साफ रहा तो अगले आठ-दस दिनों में मूंग के साथ ही उड़द की
नई फसल की आवक बढ़ेगी, जिससे इनकी कीमतों में मंदा ही आने का अनुमान है।
कर्नाटक की मंडियों में उड़द के भाव 4,000 से 6,000 रुपये प्रति क्विंटल
हैं, जबकि चालू खरीफ में उड़द के साथ ही मूंग का उत्पादन अनुमान ज्यादा है।
मूंग के भाव राजस्थान की मंडियों में 5,500 से 6,500 रुपये प्रति क्विंटल
चल रहे हैं। उड़द की बुआई बढ़कर चालू खरीफ सीजन में 37.52 लाख हेक्टेयर में
और मूंग की बुआई 34.85 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय
तक इनकी बुआई क्रमश: 37.09 एवं 30.19 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी।
व्यापारियों
के अनुसार उत्पादक मंडियों में चना के भाव 4,600 से 5,000 रुपये प्रति
क्विंटल हैं जबकि नेफेड ने राजस्थान में 5,001 से 5,071 रुपये और मध्य
प्रदेश में 4,901 से 5,001 रुपये प्रति क्विंटल के भाव चना बेचा है। नेफेड
के बिक्री भाव उंचे हैं जबकि आगे त्यौहारी सीजन है इसलिए चना की कीमतों में
हल्का तेजी आए तो फिर स्टॉक बेचना ही चाहिए। वैसे भी केंद्र सरकार ने
बदगाह पर पड़ी हुई डेढ़ लाख टन को घरेलू बाजार में बेचने की अनुमति दी है,
जोकि उंचे भाव की है। केंद्र सरकार नवंबर तक गरीबों को एक किलो राशन में
फ्री में चना दे रही है जबकि आगे अक्टूबर में बुआई भी शुरू हो जायेगी।
इसलिए बड़ी तेजी की उम्मीद नहीं है।
अरहर की कीमतों में आगे अब बड़ी
तेजी की संभावना नहीं है, चालू खरीफ में बुआई बढ़ी है, जिससे उत्पादन
अनुमान ज्यादा है। सूत्रों के अनुसार केंद्र सरकार चार लाख टन अरहर के आयात
को मंजूरी चालू महीने के अंत तक दे सकती है, ऐसे में अक्टूबर, नवंबर में
आयात होगा, जबकि घरेलू मंडियों में नई फसल की आवक नवंबर में बनेगी, तथा
दिसंबर में आवक का दबाव बन जायेगा। इसलिए अब बड़ी तेजी मानकर व्यापार नहीं
करना चाहिए। अरहर के भाव में उपर का टारगेट 6,200 से 6,300 रुपये प्रति
क्विंटल का था, जोकि लगभग पूरा हो चुका है अत: मौजूदा कीमतों में 100-150
रुपये की तेजी आए तो फिर स्टॉक बेचना ही चाहिए। अरहर की बुआई पिछले साल की
तुलना में 5.72 फीसदी बढ़कर 47.10 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जोकि पिछले
साल इस समय तक 44.55 लाख हेक्टेयर में ही बुआई हुई थी है।
सस्ती मसूर
का आयात नहीं हो पायेगा, जबकि 30 फीसदी आयात शुल्क पर नए आयात सौदे नहीं
होंगे। ऐसे में मसूर की कीमतों में हल्का सुधार और भी बन सकता है। जानकारों
के अनुसार उत्पादक मंडियों में मसूर के भाव 5,500 से 6,000 रुपये प्रति
क्विंटल के दायरे में रहने का अनुमान है।............. आर एस राणा
कपास में मांग कमजोर, आवक बढ़ने से आगे कीमतों में नरमी की उम्मीद
आर एस राणा
नई दिल्ली। उत्तर भारत के राज्यों में आगे कपास की दैनिक आवक बढ़ेगी, जबकि अन्य राज्यों में भी यार्न मिलों की मांग कमजोर है। इसलिए आगे इसकी कीमतों में नरमी ही आने का अनुमान है। वैसे भी चालू खरीफ में कपास का उत्पादन अनुमान ज्यादा है।
पिछले सप्ताह में तेजी के बाद महाराष्ट्र और गुजरात आदि में कपास की कीमतें स्थिर सी हो गई हैं। इन राज्य में कपास की 2,500 गांठ (एक गांठ-170 किलो) की आवक हुई, जबकि कीमतें 4,450-4,800 रुपये क्विंटल रही। मध्य प्रदेश कपास की कीमतें राज्य में लगभग स्थिर सी बनी रही जबकि उत्तर भारत में सुस्त मांग के कारण कपास की चयनित किस्मों की कीमतें 200 रुपये प्रति कैंडी (एक कैंडी-356 किलो) घट गई गयी। उत्तर भारत के राज्य में 1,000 से 1,200 गांठ कपास की आवक हुई।
अहमदाबाद में 29 मिमी संकर-6 कपास की कीमतों 35,800-36,000 रुपये और 28.5 प्लस मिमी कपास की कीमतों 34,800-35,000 रुपये प्रति कैंडी थी जबकि 28 मिमी की कीमत 200 रुपये कम होकर 33,000-33,300 रुपये प्रति कैंडी रह गई। सीसीआई के पास कपास का बकाया स्टॉक ज्यादा है जबकि विदेशी बाजार में भी भाव नरम हैं। आगे नई फसल की आवक बढ़ेगी, तथा कपास का समर्थन मूल्य उंचा है, जबकि मंडियों में कीमतें कम है। ऐसे में पहली अक्टूबर 2020 से शुरू होने वाले सीजन में भी सीसीआई को ज्यादा खरीद करनी पड़ेगी। खरीफ विपणन सीजन 2019-20 में सीसीआई ने 100 लाख गांठ से ज्यादा कपास की खरीद की थी, जबकि महाराष्ट्र में राज्य की एजेंसी ने भी अलग से समर्थन मूल्य पर खरीद की थी।
मीडियम स्टेपल कपास का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) खरीफ विपणन सीजन 2020-21 के लिए 5,515 रुपये और लोंग स्टेपल कपास का एमएसपी 5,828 रुपये प्रति क्विंटल तय किया हुआ है। कपास की बुआई चालू खरीफ में 2.80 फीसदी बढ़कर 128.41 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक केवल 124.90 लाख हेक्टेयर में ही बुआई हो पाई थी। सामान्यत: कपास की बुआई 120.97 लाख हेक्टेयर में होती है।.......... आर एस राणा
01 सितंबर 2020
सोने-चांदी ने फिर रफ्तार पकड़ी, डॉलर के मुकाबले रुपया भी तेज
आर एस राणा
नई दिल्ली। रुपये में दिसंबर 2018 के बाद आज एक दिन की सबसे बड़ी तेजी देखने को मिली है। रुपया आज करीब 6 महीने के ऊपरी स्तर पर पहुंचा। डॉलर के मुकाबले रूपया आज 75 पैसे मजबूत होकर 72.86 पर बंद हुआ है।
इस बीच सोने-चांदी ने फिर रफ्तार पकड़ी है। कॉमेक्स पर सोने ने फिर 2,000 डॉलर का स्तर छू लिया है। डॉलर की कमजोरी से सोना की कीमतों में तेजी आई, लेकिन रुपए में मजबूती से घरेलू बाजार में बढ़त कम हुई है। एमसीएक्स पर सोना 52 हजार के करीब दिख रहा है।
कच्चे तेल में भी मजबूती के साथ कारोबार हो रहा है। ब्रेंट 46 डॉलर के करीब पहुंच गया है। घरेलू बाजार में भी बढ़त देखने को मिल रही है। उधर नैचुरल गैस में करीब 2 फीसदी की तेजी है। बेस मेटल्स में बढ़त का रुझान जारी है। निकेल करीब 9 महीने की ऊंचाई पर है। जिंक में भी अच्छी तेजी है। लेकिन कॉपर छोटे दायरे में है।
आज की सबसे हॉट नान-एग्री कमोडिटी गैस है। एमसीएक्स पर नेचुरल गैस में जोरदार तेजी देखने को मिल रही है। सिर्फ अगस्त में इसके भाव 40 फीसदी से ज्यादा बढ़े हैं। 1 हफ्ते में नेचुरल गैस में करीब 5 फीलसी की बढ़त देखने को मिली है। जून में इसका भाव 25 साल के निचले स्तर पर था।
चना में लगातार 8वें दिन तेजी देखने को मिल रही है। एनसीडीईएक्स पर इसका दाम 33 महीने के ऊपरी स्तर पर है। तंग सप्लाई और त्योहारी मांग से चने को सपोर्ट मिल रहा है। चना के साथ दूसरे दालों में भी तेजी देखने को मिल रही है। भारी बारिश की वजह से मध्य प्रदेश, राजस्थान और गुजरात में बड़े पैमाने पर मूंग और उड़द की फसल खराब होने की आशंका है। .... आर एस राणा
सब्जियों संग दालें भी हुईं महंगी, महीनेभर में 500 से 1,000 रुपये की तेजी आई
आर एस राणा
नई दिल्ली। देश के राज्यों में हुई भारी बारिश और बाढ़ जैसे हालात बनने से सब्जियों के साथ ही दालों की कीमतों में भी तेजी दर्ज की गई। महीने भर में ही दालों की कीमतों में 50 से 1,000 रुपये प्रति क्विंटल तक की तेजी आ चुकी है।
व्यापारियों के अनुसार चना की कीमतों में महीने भर में करीब 800 से 1,000 रुपये प्रति क्विंटल की तेेजी आ चुकी है तथा उत्पादक मंडियों में बढ़िया चना के भाव उपर में 5,000 रुपये और हल्के मालों के भाव 4,400 से 4,800 रुपये प्रति क्विंटल हो गए। हालांकि कृषि मंत्रालय ने चौथे आरंभिक अनुमान में चना का उत्पादन अनुमान बढ़ाया है लेकिन स्टॉकिस्टों की सक्रियता से तेजी बनी हुई है। उपर में व्यापारियों का लक्ष्य 5,000 रुपये प्रति क्विंटल का था, जोकि लगभग पूरा हो गया है, ऐसे में मोजूदा कीमतों में 100 से 200 रुपये की तेजी तो और भी बन सकती है लेकिन अब बड़ी तेजी की उम्मीद नहीं है।
सब्जियों के साथ ही दालों पर मौसम की मार
चालू खरीफ सीजन की दलहन फसलों पर मौसम की मार से फसल खराब होने की भी आशंका जता रहे हैं। जुलाई में देश के प्रमुख दलहन बाजारों में उड़द की कीमतों में 500 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी हुई है, जबकि अरहर के दाम में करीब 500 से 600 रुपये प्रति क्विंटल बढ़े हैं। जानकारों के अनुसार उड़द की नई फसल की आवक आगे बढ़ेगी, इसलिए मौसम साफ होने के बाद इसकी कीमतों में मंदा ही आयेगा, जबकि अरहर में भी उंचे भाव में मांग कमजोर हुई है। नई फसल की आवक नवंबर, दिसंबर में बनेगी, इसलिए अरहर के भाव में हल्की तेजी तो आ सकती है लेकिन बड़ी तेजी मानकर व्यापार नहीं करना चाहिए।
केंद्र सरकार ने अरहर आयात के लिए नहीं किए हैं लाइसेंस जारी
व्यापारियों के अनुसार अरहर आयात के लाइसेंस के लिए करीब 3,000 आवेदन किए गए हैं, लेकिन सरकार ने अब तक दाल मिलों को आयात के लिए लाइसेंस जारी नहीं किए हैं। उन्होंने कहा कि देश के कई राज्यों में बाढ़ से फसलों खासकर के मूंग, उड़द और अरहर को नुकसान की आशंका तो है लेकिन चालू खरीफ में बुआई में बढ़ोतरी हुई है, जबकि दालों में मांग अभी भी सामान्य की तुलना में कम है इसलिए इनके मौजूदा भाव में अब बड़ी तेजी मानकर व्यापार नहीं करना चाहिए।
खुदरा में दाम और बढ़ने का अनुमान
उपभोक्ता मामले मंत्रालय के अनुसार दिल्ली में खुदरा बाजार में अरहर दाल का भाव 98 रुपये प्रति किलो, उड़द दाल 104 रुपये प्रति किलो, मूंग दाल 104 रुपये किलो तथा मसूर दाल 78 रुपये प्रति किलो बिक रही है। साबूत दालों की कीमतों में हुई बढ़ोतरी से खुदरा में इनके दाम और बढ़ने का अनुमान है। कृषि मंत्रालय द्वारा जारी चौथे अग्रिम अनुमान के अनुसार, फसल वर्ष 2019-20 (जुलाई-जून) में दालों का उत्पादन 231.5 लाख टन का हुआ था, जबकि इससे पहले 2018-19 में 220.8 लाख टन उत्पादन था। देश में दालों की सालाना खपत 240 से 245 लाख टन की होती है। कोरोना वायरस के कारण पिछले तीन-चार महीनों में खपत में कमी आई है, तथा चालू खरीफ में उत्पादन अनुमान ज्यादा है। इसलिए घरेलू बाजार में दालों की कीमतों में अब ज्यादा तेजी की संभावना तो नहीं है लेकिन सितंबर में तेजी, मंदी उत्पादक राज्यों में होने वाली बारिश पर भी निर्भर करेगी।
बुआई में हुई बढ़ोतरी
दालों की बुआई चालू खरीफ सीजन में 4.60 फीसदी बढ़कर 134.57 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है पिछले साल इस समय तक 128.65 लाख हेक्टेयर में ही बुआई हो पाई थी। खरीफ सीजन में सामान्यत: 128.88 लाख हेक्टेयर में दालों की बुआई होती है। खरीफ दलहन की प्रमुख फसल अरहर की बुआई पिछले साल की तुलना में 5.72 फीसदी बढ़कर 47.10 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जोकि पिछले साल की समान अवधि के 44.55 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है। इसी तरह से उड़द की बुआई बढ़कर 37.52 लाख हेक्टेयर में और मूंग की बुआई 34.85 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक इनकी बुआई क्रमश: 37.09 एवं 30.19 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी।.............. आर एस राणा
उड़द के आयात की मियाद समाप्त, सस्ती मसूर भी नहीं आयेगी
आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू वित्त वर्ष 2020-21 के लिए केंद्र सरकार ने चार लाख टन आयात की अनुमति दाल मिलों को दी थी, तथा मिलों को 31 अगस्त 2020 तक आयात करना था, लेकिन इस अवधि में केवल ढ़ाई लाख टन उड़द का ही आयात हो पाया है जबकि कोटे की तय मात्रा का डेढ़ लाख टन बचा हुआ है।
व्यापारियों के अनुसार पहले अनुमान लगाया जा रहा था कि सरकार आयात की तय सीमा में बढ़ोतरी कर सकती है, लेकिन घरेलू मंडियों में नई उड़द की आवक शुरू हो गई है, तथा आगे मौसम साफ होने पर आवक और बढ़ेगी, इसीलिए सरकार ने आयात कोटा नहीं बढ़ाया है।
चालू वित्त वर्ष के लिए केंद्र सरकार ने चार लाख टन उड़द आयात का कोटा जारी किया था। जिसकी मियाद 31 अगस्त 2020 तक थी। हालांकि इसे अगस्त के बाद भी बढ़ाए जाने को लेकर बाजार में चर्चा जरूर थी, लेकिन सरकार की ओर से इस पर कोई फैसला नहीं आया है। ऐसे में इस साल के लिए उड़द आयात की मियाद खत्म मानी जा रही है।
केंद्र सरकार द्वारा दो जून 2020 को जारी अधिसूचना के तहत मसूर आयात पर शूल्क 30 फीसदी से घटाकर 10 फीसदी करने के फैसले की अवधि भी 31 अगस्त 2020 को समाप्त हो गई है। दाल की कीमतों को लेकर भारतीय रिजर्व बैंक के एक बयान के बाद सरकार ने आनन फानन में अमेरिका के अलावा सभी देशों से आयातित मसूर पर लगने वाले शुल्क को 30 फीसदी से घटाकर 10 फीसदी कर दिया था। जो महज 31 अगस्त 2020 तक ही मान्य था। अब इसकी भी मियाद खत्म हो जाने के बाद माना जा रहा है कि सस्ते आयात शुल्क पर अब मसूर का आयात नहीं हो सकेगा। मसूर की नई फसल आगे मार्च, अप्रैल में आयेगी, अत: आयात पड़ते महंगे होने से आगे इसकी कीमतों में घरेलू बाजार में जरुर हल्का सुधार बन सकता है। .............. आर एस राणा
