अमेरिका में इस हफ्ते जारी होने वाले नॉन फार्म पेरोल डाटा से पहले सोने
की कीमतों पर दबाव बढ़ गया है और ये 1225 डॉलर के नीचे आ गया है। इस
महीने ब्याज दरें बढ़ने का अनुमान है ऐसे में डॉलर मजबूत हो रहा है।
बाजार की नजर ईसीबी की मॉनेटरी पॉलिसी पर भी है। चांदी में
गिरावट बढ़ गई है और इसका दाम 18 डॉलर के काफी नीचे आ गया है। इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी ने अगले 5 साल में अमेरिका में शेल तेल
का उत्पादन करीब 14 लाख बैरल बढ़ने की उम्मीद जताई है। ऐसे में ऐसे में
कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव बढ़ गया है। बाजार की नजर आज अमेरिकी
पेट्रोलियम इंस्टीट्यूट की इंवेंट्री रिपोर्ट पर भी है। गेहूं की कीमतों
में आई गिरावट के बाद सरकार ने 15 मार्च से मध्यप्रदेश, गुजरात और राजस्थान
में गेहूं की सरकारी खरीद शुरू करने का फैसला लिया है। आज डॉलर के मुकाबले
रुपये में हल्की रिकवरी है।
07 मार्च 2017
खाद्य तेलों के निर्यात में और छूट संभव
आर एस राणा
नई दिल्ली। खरीफ के बाद रबी में भी तिलहन की पैदावार ज्यादा से उत्पादक मंडियों में तिलहनों के भाव न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से भी नीचे चल रहे हैं, ऐसे में केंद्र सरकार चुनिंदा खाल तेलों के बल्क निर्यात को छूट दे सकती है।
सूत्रों के अनुसार मूंगफली के साथ तिल आदि के तेल के निर्यात की अनुमति देने के लिए खाद्य मंत्रालय ने एक प्रस्ताव वाणिज्य, वित्त और कृषि मंत्रालय के पास भेजा है। घरेलू मंडियों में तिलहनों की कीमतों में आई कमी के कारण कृषि मंत्रालय इस प्रस्ताव के पहले ही पक्ष में है। खाद्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार सभी मंत्रालय की सहमति के बाद कैबिनेट के पास भेजा जायेगा।
इस समय केवल 5 किलो की पैकिंग में खाद्य तेल के निर्यात की ही अनुमति है, तथा इसका निर्यात भी साल में केवल 10,000 टन का किया जा सकता है। केंद्र सरकार ने खाद्य तेलों के निर्यात में कुछ और छूट दी तो घरेलू बाजार में खाद्य तेलों की कीमतों में हल्का सुधार बन सकता है।..........आर एस राणा
नई दिल्ली। खरीफ के बाद रबी में भी तिलहन की पैदावार ज्यादा से उत्पादक मंडियों में तिलहनों के भाव न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से भी नीचे चल रहे हैं, ऐसे में केंद्र सरकार चुनिंदा खाल तेलों के बल्क निर्यात को छूट दे सकती है।
सूत्रों के अनुसार मूंगफली के साथ तिल आदि के तेल के निर्यात की अनुमति देने के लिए खाद्य मंत्रालय ने एक प्रस्ताव वाणिज्य, वित्त और कृषि मंत्रालय के पास भेजा है। घरेलू मंडियों में तिलहनों की कीमतों में आई कमी के कारण कृषि मंत्रालय इस प्रस्ताव के पहले ही पक्ष में है। खाद्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार सभी मंत्रालय की सहमति के बाद कैबिनेट के पास भेजा जायेगा।
इस समय केवल 5 किलो की पैकिंग में खाद्य तेल के निर्यात की ही अनुमति है, तथा इसका निर्यात भी साल में केवल 10,000 टन का किया जा सकता है। केंद्र सरकार ने खाद्य तेलों के निर्यात में कुछ और छूट दी तो घरेलू बाजार में खाद्य तेलों की कीमतों में हल्का सुधार बन सकता है।..........आर एस राणा
06 मार्च 2017
सरसों का उत्पादन 69.25 लाख टन होने का अनुमान-उद्योग
आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू रबी में सरसों की बुवाई में हुई बढ़ोतरी के साथ ही अनुकूल मौसम से उत्पादन 69.25 लाख टन होने का अनुमान है जबकि पिछले साल इसका उत्पादन 58 लाख टन का हुआ था।
जयपुर में हुए तेल-तिलहन सेमीनार में उद्योग ने चालू सीजन में सरसों का उत्पादन बढ़ाकर 69.25 लाख टन होने का अनुमान लगाया है जबकि पिछले साल का 2.50 लाख टन का बकाया स्टॉक बचा हुआ है।
प्रमुख उत्पादक राज्य राजस्थान में सरसों का उत्पादन 31 लाख टन होने का अनुमान है जबकि पिछले साल राजस्थान में 27 लाख टन का उत्पादन हुआ था। इसी तरह से उत्तर प्रदेश में पिछले साल के 9 लाख टन के मुकाबले चालू रबी में सरसों का उत्पादन 10.25 लाख टन होने का अनुमान है। पंजाब और हरियाणा में सरसों का उत्पादन पिछले साल क 7.30 लाख टन से घटकर 6.25 लाख टन होने का अनुमान है जबकि गुजरात में इसका उत्पादन पिछले साल के 2.95 लाख टन से बढ़कर 3.50 लाख टन होने का अनुमान है। मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में सरसों का उत्पादन चालू रबी में पिछले साल के 4.55 लाख टन से बढ़कर 6.75 लाख टन, पश्चिमी बंगाल में 3.10 लाख टन से बढ़कर 3.25 लाख टन और अन्य राज्यों में 5.10 लाख टन से बढ़कर 8.25 लाख टन सरसों का उत्पादन होने का अनुमान है।
चालू सीजन में सरसों का उत्पादन ज्यादा होने का अनुमान है तथा मौसम साफ रहा तो होली के बाद उत्पादक मंडियों में सरसों की दैनिक आवक बढ़ जायेगी। ऐसे में उत्पादक मंडियों में होली के बाद सरसों के भाव घटकर 3,400 से 3,500 रुपये प्रति क्विंटल (42 प्रतिशत कंडीशन) और नोन कंडीशन की सरसों के भाव उत्पादन मंडियों में 3,000 से 3,200 रुपये प्रति क्विंटल बनने की संभावना है। सरसों की खरीद होली के बाद दैनिक आवकों का दबाव बनने के बाद ही करनी चाहिए।..........आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू रबी में सरसों की बुवाई में हुई बढ़ोतरी के साथ ही अनुकूल मौसम से उत्पादन 69.25 लाख टन होने का अनुमान है जबकि पिछले साल इसका उत्पादन 58 लाख टन का हुआ था।
जयपुर में हुए तेल-तिलहन सेमीनार में उद्योग ने चालू सीजन में सरसों का उत्पादन बढ़ाकर 69.25 लाख टन होने का अनुमान लगाया है जबकि पिछले साल का 2.50 लाख टन का बकाया स्टॉक बचा हुआ है।
प्रमुख उत्पादक राज्य राजस्थान में सरसों का उत्पादन 31 लाख टन होने का अनुमान है जबकि पिछले साल राजस्थान में 27 लाख टन का उत्पादन हुआ था। इसी तरह से उत्तर प्रदेश में पिछले साल के 9 लाख टन के मुकाबले चालू रबी में सरसों का उत्पादन 10.25 लाख टन होने का अनुमान है। पंजाब और हरियाणा में सरसों का उत्पादन पिछले साल क 7.30 लाख टन से घटकर 6.25 लाख टन होने का अनुमान है जबकि गुजरात में इसका उत्पादन पिछले साल के 2.95 लाख टन से बढ़कर 3.50 लाख टन होने का अनुमान है। मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में सरसों का उत्पादन चालू रबी में पिछले साल के 4.55 लाख टन से बढ़कर 6.75 लाख टन, पश्चिमी बंगाल में 3.10 लाख टन से बढ़कर 3.25 लाख टन और अन्य राज्यों में 5.10 लाख टन से बढ़कर 8.25 लाख टन सरसों का उत्पादन होने का अनुमान है।
चालू सीजन में सरसों का उत्पादन ज्यादा होने का अनुमान है तथा मौसम साफ रहा तो होली के बाद उत्पादक मंडियों में सरसों की दैनिक आवक बढ़ जायेगी। ऐसे में उत्पादक मंडियों में होली के बाद सरसों के भाव घटकर 3,400 से 3,500 रुपये प्रति क्विंटल (42 प्रतिशत कंडीशन) और नोन कंडीशन की सरसों के भाव उत्पादन मंडियों में 3,000 से 3,200 रुपये प्रति क्विंटल बनने की संभावना है। सरसों की खरीद होली के बाद दैनिक आवकों का दबाव बनने के बाद ही करनी चाहिए।..........आर एस राणा
सोया डीओसी के निर्यात में भारी बढ़ोतरी
आर एस राणा
नई दिल्ली। फरवरी महीने में सोया डीओसी के निर्यात में 594.40 फीसदी की भारी बढ़ोतरी होकर कुल निर्यात 2,07,977 टन का हुआ है जबकि फरवरी 2016 में इसका निर्यात केवल 29,951 टन का ही हुआ था।
सोपा द्वारा जारी आंकड़ो के अनुसार चालू वित्त वर्ष 2016-17 के पहले 11 महीनों में जहां सोया डीओसी के निर्यात में 124.39 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है, वहीं चालू तेल वर्ष (अक्टूबर-16 से सितंबर-17) के पहले पांच महीनों में इसके निर्यात में 360.98 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। चालू वित्त वर्ष के अप्रैल से फरवरी के दौरान सोया डीओसी का निर्यात बढ़कर 8,09,271 टन का हुआ है, वहीं पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में इसका निर्यात 3,60,652 टन का ही हुआ था।
चालू तेल वर्ष के पहले पहले पांच महीनों अक्टूबर से फरवरी के दौरान सोया डीओसी का निर्यात बढ़कर 7,33,539 टन का हो चुका है जबकि पिछले तेल वर्ष की समान अवधि में इसका निर्यात 1,59,124 टन का ही निर्यात हुआ था। चालू तेल वर्ष में निर्यात मांग अच्छी रहने का अनुमान है तथा कुल निर्यात बढ़कर 14 से 15 लाख टन होने का अनुमान है।.............आर एस राणा
नई दिल्ली। फरवरी महीने में सोया डीओसी के निर्यात में 594.40 फीसदी की भारी बढ़ोतरी होकर कुल निर्यात 2,07,977 टन का हुआ है जबकि फरवरी 2016 में इसका निर्यात केवल 29,951 टन का ही हुआ था।
सोपा द्वारा जारी आंकड़ो के अनुसार चालू वित्त वर्ष 2016-17 के पहले 11 महीनों में जहां सोया डीओसी के निर्यात में 124.39 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है, वहीं चालू तेल वर्ष (अक्टूबर-16 से सितंबर-17) के पहले पांच महीनों में इसके निर्यात में 360.98 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। चालू वित्त वर्ष के अप्रैल से फरवरी के दौरान सोया डीओसी का निर्यात बढ़कर 8,09,271 टन का हुआ है, वहीं पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में इसका निर्यात 3,60,652 टन का ही हुआ था।
चालू तेल वर्ष के पहले पहले पांच महीनों अक्टूबर से फरवरी के दौरान सोया डीओसी का निर्यात बढ़कर 7,33,539 टन का हो चुका है जबकि पिछले तेल वर्ष की समान अवधि में इसका निर्यात 1,59,124 टन का ही निर्यात हुआ था। चालू तेल वर्ष में निर्यात मांग अच्छी रहने का अनुमान है तथा कुल निर्यात बढ़कर 14 से 15 लाख टन होने का अनुमान है।.............आर एस राणा
कच्चे तेल पर दबाव
प्रोडक्शन कटौती पर रुस की धीमी चाल से कच्चे तेल पर दबाव बढ़ गया है।
ग्लोबल मार्केट में ब्रेंट का दाम 56 डॉलर के नीचे आ गया है। जबकि नायमैक्स
क्रूड 54 डॉलर के भी नीचे कारोबार कर रहा है। दरअसल रूस ने फरवरी के दौरान
जनवरी के बराबर ही क्रूड का उत्पादन किया है। इसका मतलब ये है कि फरवरी
में प्रोडक्शन कटौती नहीं बढ़ी है। महीने अमेरिका में ब्याज दरें
बढ़ने के अनुमान से सोना भी सिमट गया है। ग्लोबल मार्केट में इसका दाम 1235
डॉलर के नीचे है। आगे गिरावट के अनुमान से निवेशक अपना पैसा सोने से निकाल
रहे हैं। शुक्रवार को दुनिया के सबसे बड़े गोल्ड ईटीएफ-एसपीडीआर गोल्ड
फंड की होल्डिंग में करीब 0.5 फीसदी की गिरावट देखने को मिली और ये 840 टन
के स्तर पर आ गया है। डॉलर में बढ़त से भी ग्लोबल मार्केट में सोना सुस्त
है। डॉलर के मुकाबले रुपया संभलने में कामयाब है और 1 डॉलर की कीमत
66 रुपये 75 पैसे के नीचे है।
04 मार्च 2017
जनवरी में ग्वार गम उत्पादों का निर्यात बढ़ा
आर एस राणा
नई दिल्ली। जनवरी महीने में ग्वार गम उत्पादों का निर्यात बढ़कर 44,000 टन का हुआ है जबकि पिछले साल जनवरी में इसका निर्यात 26,000 टन का ही हुआ था।
वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार चालू वित्त वर्ष 2016-17 के पहले 10 महीनों अप्रैल से जनवरी के दौरान ग्वार गम उत्पादों का निर्यात बढ़कर 3.22 लाख टन का हो चुका है जबकि पिछले वित्त वर्ष 2015-16 की समान अवधि में इनका निर्यात 2.71 लाख टन का ही हुआ था।
वित्त वर्ष 2015-16 में ग्वार गम उत्पादों का कुल निर्यात 3.25 लाख टन का हुआ था। वर्तमान में हो रहे निर्यात सौदों को देखते हुए फरवरी और मार्च में करीब 80 से 90 हजार ग्वार गम उत्पादों का निर्यात होने का अनुमान है। ऐसे में कुल निर्यात 4 लाख टन से ज्यादा हो जायेगा।
चालू साल में अलनीनो का प्रभाव होने से बारिश कम होने की आशंका है, इसलिए स्टॉकिस्ट ग्वार गम और ग्वार सीड की कीमतों में आगे लायेगा। चालू सीजन में जरुर ग्वार सीड की पैदावार कम हुई है, लेकिन उत्पादक राज्यों में पिछले साल का बकाया स्टॉक ज्यादा मात्रा में बचा हुआ है। अप्रैल में मानूसन विभाग का पहला अनुमान आयेगा, उसके बाद ही आगे ग्वार सीड और ग्वार गम की कीमतों की तेजी-मंदी उसी आधार पर तय होगा।.............आर एस राणा
नई दिल्ली। जनवरी महीने में ग्वार गम उत्पादों का निर्यात बढ़कर 44,000 टन का हुआ है जबकि पिछले साल जनवरी में इसका निर्यात 26,000 टन का ही हुआ था।
वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार चालू वित्त वर्ष 2016-17 के पहले 10 महीनों अप्रैल से जनवरी के दौरान ग्वार गम उत्पादों का निर्यात बढ़कर 3.22 लाख टन का हो चुका है जबकि पिछले वित्त वर्ष 2015-16 की समान अवधि में इनका निर्यात 2.71 लाख टन का ही हुआ था।
वित्त वर्ष 2015-16 में ग्वार गम उत्पादों का कुल निर्यात 3.25 लाख टन का हुआ था। वर्तमान में हो रहे निर्यात सौदों को देखते हुए फरवरी और मार्च में करीब 80 से 90 हजार ग्वार गम उत्पादों का निर्यात होने का अनुमान है। ऐसे में कुल निर्यात 4 लाख टन से ज्यादा हो जायेगा।
चालू साल में अलनीनो का प्रभाव होने से बारिश कम होने की आशंका है, इसलिए स्टॉकिस्ट ग्वार गम और ग्वार सीड की कीमतों में आगे लायेगा। चालू सीजन में जरुर ग्वार सीड की पैदावार कम हुई है, लेकिन उत्पादक राज्यों में पिछले साल का बकाया स्टॉक ज्यादा मात्रा में बचा हुआ है। अप्रैल में मानूसन विभाग का पहला अनुमान आयेगा, उसके बाद ही आगे ग्वार सीड और ग्वार गम की कीमतों की तेजी-मंदी उसी आधार पर तय होगा।.............आर एस राणा
गेहूं के आयात पर 25 फीसदी शुल्क लगाने का प्रस्ताव
आर एस राणा
नई दिल्ली। गेहूं की घरेलू फसल की आवक को देखते हुए खाद्य मंत्रालय ने आयात पर 25 फीसदी आयात शुल्क लगाने की सिफारिश की है। सूत्रों के अनुसान चालू सप्ताह के आखिर तक इस पर फैसला होने की संभावना है।
खाद्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि मंत्रालय ने आयात को रोकने के लिए 25 फीसदी आयात शुल्क लगाने का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा है, उम्मीद की जा रही है कि 8 मार्च बाद ही आयात शुल्क लगाने का फैसला किया जायेगा। दिसंबर 2016 में केंद्र सरकार ने गेहूं पर आयात शुल्क को 10 फीसदी से घटाकर शुन्य कर दिया था।
जानकारों के अनुसार गेहूं पर 25 फीसदी आयात शुल्क लगने के बाद आयात पड़ते नहीं लगेंगे तथा आयात बंद हो जायेगा। इस समय आस्ट्रेलिया से आयातित गेहूं का भाव तुतीकोरन बंदरगाह पर 1,665 से 1,710 रुपये प्रति क्विंटल है जबकि यूक्रेन से आयातित लाल गेहूं का भाव 1,610 से 1,620 रुपये प्रति क्विंटल है। चालू सीजन में अभी तक करीब 41 से 42 लाख टन गेहूं का आयात हो चुका है तथा आयातकों ने करीब एक से डेढ़ लाख टन के और आयात सौदे किए हुए हैं जोकि 10 से 15 मार्च तक भारतीय बंदरगाहों पर पहुंच जायेगा।
कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू सीजन में गेहूं का उत्पादन 966 लाख टन होने का अनुमान है तथा भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) ने रबी विपणन सीजन 2017-18 के लिए 330 लाख टन गेहूं की खरीद का लक्ष्य तय किया है। पहली अप्रैल से चालू रबी विपणन सीजन के लिए केंद्र सरकार ने गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 1,625 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है। मध्य प्रदेश और गुजरात की मंडियों में नए गेहूं की आवक बढ़ रही है तथा उत्पादक मंडियों में 1,550 से 1,600 रुपये प्रति क्विंटल बिक रहा है। उत्तर प्रदेश की मंडियों में गेहूं की आवक का दबाव बनने पर भाव घटकर 1,450 से 1,500 बनने का अनुमान है।.............आर एस राणा
नई दिल्ली। गेहूं की घरेलू फसल की आवक को देखते हुए खाद्य मंत्रालय ने आयात पर 25 फीसदी आयात शुल्क लगाने की सिफारिश की है। सूत्रों के अनुसान चालू सप्ताह के आखिर तक इस पर फैसला होने की संभावना है।
खाद्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि मंत्रालय ने आयात को रोकने के लिए 25 फीसदी आयात शुल्क लगाने का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा है, उम्मीद की जा रही है कि 8 मार्च बाद ही आयात शुल्क लगाने का फैसला किया जायेगा। दिसंबर 2016 में केंद्र सरकार ने गेहूं पर आयात शुल्क को 10 फीसदी से घटाकर शुन्य कर दिया था।
जानकारों के अनुसार गेहूं पर 25 फीसदी आयात शुल्क लगने के बाद आयात पड़ते नहीं लगेंगे तथा आयात बंद हो जायेगा। इस समय आस्ट्रेलिया से आयातित गेहूं का भाव तुतीकोरन बंदरगाह पर 1,665 से 1,710 रुपये प्रति क्विंटल है जबकि यूक्रेन से आयातित लाल गेहूं का भाव 1,610 से 1,620 रुपये प्रति क्विंटल है। चालू सीजन में अभी तक करीब 41 से 42 लाख टन गेहूं का आयात हो चुका है तथा आयातकों ने करीब एक से डेढ़ लाख टन के और आयात सौदे किए हुए हैं जोकि 10 से 15 मार्च तक भारतीय बंदरगाहों पर पहुंच जायेगा।
कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू सीजन में गेहूं का उत्पादन 966 लाख टन होने का अनुमान है तथा भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) ने रबी विपणन सीजन 2017-18 के लिए 330 लाख टन गेहूं की खरीद का लक्ष्य तय किया है। पहली अप्रैल से चालू रबी विपणन सीजन के लिए केंद्र सरकार ने गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 1,625 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है। मध्य प्रदेश और गुजरात की मंडियों में नए गेहूं की आवक बढ़ रही है तथा उत्पादक मंडियों में 1,550 से 1,600 रुपये प्रति क्विंटल बिक रहा है। उत्तर प्रदेश की मंडियों में गेहूं की आवक का दबाव बनने पर भाव घटकर 1,450 से 1,500 बनने का अनुमान है।.............आर एस राणा
सदस्यता लें
संदेश (Atom)
