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06 फ़रवरी 2017

ग्वार सीड, सरसों और क्रुड में एनसीडीईएक्स-एमसीएक्स की 6 फरवरी की टिप्स

बेचे - क्रुड पाम तेल पर फरवरी महीने के वायदा अनुबंध में 3,640-3,650 रुपये पर बेचे.........3,660 रुपये का स्टोप लोस लगाए ( तथा पहला टारगेट है 3,600 और दूसरा टारगेट है 3,620 रुपये का
ग्वार सीड बेचे - फरवरी वायदा के अनुबंध में 3,275 और 3,300 रुपये प्रति क्विंटल पर बेचे...........3,330 पर स्टॉप लोस लगाए............. टारेगट 3,250 रुपये प्रति क्विंटल का है।
सरसों बेचे -सरसों के अप्रैल वायदा अनुबंध में भाव 3,840....3,850 पर बेचे, तथा 3,870 का स्टोप लोस लगाए ............इसका टारगेट है 3,800 रुपये का
(मार्किट की खबर के हिसाब से यह केवल सलाहभर है, जोखिम के लिए हमारी कोई जिम्मेदारी नहीं है।)

04 फ़रवरी 2017

एग्री कमोडिटी में आगे की रणनीति कैसे बनाए

एग्री कमोडिटी दलहन, तिलहन, और मसालों के साथ ही गेहूं, मक्का, जौ, कपास, खल, बिनौला, ग्वार सीड, चीनी, और कपास आदि की कीमतों में कब आयेगी तेजी तथा आगे की रणनीति कैसे बनाये, भाव में कब आयेगी तेजी, किस भाव पर स्टॉक करने पर मिलेगा मुनाफा, क्या रहेगी सरकार की नीति, आयात-निर्यात की स्थिति के साथ ही विदेष में कैसी है पैदावार, इन सब की स्टीक जानकारी के लिए हमसे जुड़े............एग्री कमोडिटी की दैनिक रिपोर्ट के साथ ही मंडियों के ताजा भाव आपको ई-मेल से हिंदी में भेजे जायेंगे
एग्री जिंसों के अलावा किराना में हल्दी, जीरा, धनिया, लालमिर्च, इलायची, कालीमिर्च आदि की जानकारी भी हिंदी में ई-मेल के माध्यम से दी जायेगी। हमें ई-मेल करे या फिर फोन पर संपक करें।

............एक महीना रिपोर्ट लेने का चार्ज मात्र 1,000 रुपये, 6 महीने का 5,000 रुपये और एक साल का केवल 8,000 रुपये........

आर एस राणा
 rsrana2001@gmail.com
09811470207

एनसीडीईएक्स और एमसीएक्स पर एग्री कमोडिटी में किन भाव पर निवेश से होगा फायदा


प्रिय पाठकों,
एनसीडीईएक्स और एमसीएक्स पर एग्री कमोडिटी में दैनिक आधार पर किस भाव पर खरीद करें, क्या स्टोप लोस लगाए तथा टारगेट क्या है, इस बारे में एग्री कमोडिटी न्यूज ब्लॉग पर सलाह दी जायेगी,  बाद में यह सर्विस मोबाईल पर एसएमएस के माध्यम से दी जायेगी। आपसे निवेदन है कि इस सर्विस को देखें तथा इस बारे में अपने सुझाव हमें जरुर दें, आपके सुझाव हमारे लिए बहुत उपयोगी हैं। इस बारे में हमें अपने सुझाव   rsrana2001@gmail.com     ई मेल पर भेजे या फिर मोबाईल नं0 - 09811470207 पर संपर्क करें।
धन्यवाद,
आर एस राणा
09811470207
rsrana2001@gmail.com

03 फ़रवरी 2017

रबी फसलों की बुवाई 645 लाख हैक्टेयर के पार

गेहूं, दलहन और तिलहन की बुवाई बढ़ी, मोटे अनाजों और धान की पिछड़ी   
आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू रबी सीजन में अभी तक देशभर में 645.12 लाख हैक्टेयर में फसलों की बुवाई हो चुकी है जबकि पिछले साल की समान अवधि में इनकी बुवाई 610.44 लाख हैक्टेयर में ही हुई थी। चालू रबी में जहां गेहूं, दलहन और तिलहन की बुवाई में बढ़ोतरी हुई है, वहीं मोटे अनाजों के साथ ही धान की रौपाई पिछे चल रही है। रबी फसलों के बुवाई अभी लगभग पूरी हो चुकी है तथा अभी तक मौसम भी फसलों के अनुकूल बना हुआ है, ऐसे में चालू रबी में गेहूं के साथ चना, मसूर, सरसों, मूंगफली, मक्का और जौ की पैदावार में तो बढ़ोतरी का अनुमान है लेकिन बुवाई में आई कमी से ज्वार और धान की पैदावार कम होगी।
कृषि मंत्रालय के अनुसार रबी की प्रमुख फसल गेहूं की बुवाई बढ़कर 317.81 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक केवल 297.25 लाख हैक्टेयर में ही बुवाई हो पाई थी। रबी दहलन की बुवाई चालू सीजन में रिकार्ड 159.72 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक 143.70 लाख हैक्टेयर में बुवाई हुई थी।
रबी दलहन की प्रमुख फसल चना की बुवाई 99.01 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल की समान अवधि में इसकी बुवाई 89.45 लाख हैक्टेयर में ही हुई थी। मसूर की बुवाई भी बढ़कर चालू रबी में अभी तक 16.65 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक केवल 13.73 लाख हैक्टेयर में बुवाई हुई थी। मटर की बुवाई भी चालू रबी में बढ़कर 11.26 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक केवल 9.59 लाख हैक्टेयर में ही बुवाई हो पाई थी।
रबी तिलहनों की बुवाई चालू सीजन में अभी तक 84.34 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक 79.42 लाख हैक्टेयर में ही बुवाई हुई थी। रबी तिलहन की प्रमुख फसल सरसों की बुवाई 70.56 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल की समान अवधि में इसकी बुवाई 64.53 लाख हैक्टेयर में ही हो पाई थी। मूंगफली की बुवाई चालू रबी में बढ़कर 6.16 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक 5.96 लाख हैक्टेयर में ही बुवाई हुई थी।
चालू रबी में मोटे अनाजों की बुवाई अभी भी पिछे चल रही है, अभी तक देषभर में केवल 57.61 लाख हैक्टेयर में ही मोटे अनाजों की बुवाई हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक 61.05 लाख हैक्टेयर में इनकी बुवाई हो चुकी थी। मोटे अनाजों में सबसे ज्यादा कमी ज्वार की बुवाई में आई है। ज्वार की बुवाई चालू रबी में अभी तक केवल 32.22 लाख हैक्टेयर में ही हो पाई है जबकि पिछले साल इस समय तक 37.43 लाख हैक्टेयर में बुवाई हो चुकी थी। रबी मक्का की बुवाई भी चालू सीजन में अभी तक 16.50 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक 15.07 लख हैक्टेयर में इसकी बुवाई हुई थी। जौ की बुवाई चालू रबी में 8.16 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक 7.59 लाख हैक्टेयर में बुवाई हुई थी। धान की रोपाई चालू रबी में अभी तक केवल 25.64 लाख हैक्टेयर में ही हो पाई है जबकि पिछले साल इस समय तक 29.03 लाख हैक्टेयर में धान की रोपाई हो चुकी थी।............आर एस राणा

उत्पादन में कटौती से कच्चे तेल में तेजी

अमेरिका में आज जनवरी महीने के रोजगार के आंकड़े आएंगे। इस आंकड़ों से अमेरिकी इकोनॉमी की सेहत का पता चलेगा और ये आंकड़े अमेरिका में ब्याज दरों पर आगे फेड के फैसले को भी प्रभावित करेगा। ऐसे में डॉलर इंडेक्स बेहद छोटे दायरे में है, वहीं रुपये में भी बेहद सुस्त कारोबार हो रहा है। लेकिन पिछले महीने रोजाना 14 लाख बैरल उत्पादन में कटौती से कच्चे तेल में तेजी आई है और ग्लोबल मार्केट में इसका दाम करीब 0.5 फीसदी बढ़ गया है। नॉन फार्म पेरोल के इंतजार में सोना 11 हफ्ते के ऊपरी स्तर से नीचे आ गया है। फिलहाल कॉमैक्स पर सोने में 1212 डॉलर के आसपास कारोबार हो रहा है। कल सोना 1220 डॉलर के पार जाने में कामयाब हुआ था। ग्लोबल मार्केट में चांदी का दाम भी 0.5 फीसदी गिर गया है।

वहीं इस हफ्ते करीब 7 फीसदी की उछाल के बाद एलएमई पर निकेल का दाम करीब 2 फीसदी गिर गया है। कॉपर में भी सुस्ती है। दरअसल अमेरिका चीन से स्टेनलेस स्टील उत्पादों के इंपोर्ट पर भारी ड्यूटी लगाने की तैयारी में है, ऐसे में मेटल की तेजी पर ब्रेक लग गया है।

02 फ़रवरी 2017

चीनी उत्पादन में 14 लाख टन से ज्यादा की कमी

महाराष्ट्र और कर्नाटका में उत्पादक कम, उत्तर प्रदेश में ज्यादा
आर एस राणा
नई दिल्ली। पहली अक्टूबर 2016 से चालू हुए पेराई सीजन में 31 जनवरी 2017 तक चीनी उत्पादन में 14.25 लाख टन की कमी आकर कुल उत्पादन 128.55 लाख टन का ही हुआ है जबकि पिछले साल की समान अवधि में 142.80 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ था। इस समय देशभर में केवल 334 चीनी मिलों में पेराई चल रही है जबकि पिछले साल की समान अवधि में 494 चीनी मिलों में पेराई चल रही थी।
सबसे बड़े चीनी उत्पादक राज्य महाराष्ट्र के साथ ही कर्नाटका में गन्ना कम होने के कारण मिलों में पेराई बंद होने लगी है। महाराष्ट्र में चालू पेराई सीजन में 31 जनवरी 2017 तक केवल 36.76 लाख टन चीनी का ही उत्पादन हुआ है जबकि पिछले साल राज्य में इस समय तक 54.17 लाख टन चीनी का उत्पादन हो चुका था। इस समय राज्य में केवल 58 चीनी मिलों में ही पेराई चल रही है। उधर कर्नाटका में भी चालू पेराई सीजन में अभी तक 20.25 लाख टन चीनी का ही उत्पादन हुआ है जबकि पिछले साल इस समय तक राज्य में 26.92 लाख टन चीनी का उत्पादन हो चुका था। राज्य में इस समय केवल 13 चीनी मिलों में पेराई चल रही है।
उत्तर प्रदेश में चालू पेराई सीजन में पहली अक्टूबर 2016 से 31 जनवरी 2017 तक 45.59 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ है जबकि पिछले साल इस समय तक केवल 35.94 लाख टन चीनी का ही उत्पादन हुआ था। तमिलनाडु में चालू पेराई सीजन में अभी तक 3.50 लाख टन चीनी का उत्पादन हुअ है जबकि पिछले साल इस समय तक 2.66 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ था। गुजरात में 5.75 लाख टन चीनी का उत्पादन हो चुका है जबकि पिछले साल इस समय तक 6.99 लाख टन का उत्पादन हुआ था।
अन्य राज्यों में आंध्रप्रदेश और तेलंगाना में चालू पेराई सीजन में 3.50 लाख टन, बिहार में 3 लाख टन, उत्तराखंड में 1.73 लाख टन, पंजाब में 3 लाख टन और हरियाणा में 2.60 लाख टन तथा मध्य प्रदेश में भी 31 जनवरी 2017 तक 2.60 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ है। .............आर एस राणा

आयात शुल्क के अंतर में बढ़ोतरी न होने से तिलहन उद्योग निराश

आर एस राणा
नई दिल्ली। केंद्र द्वारा बजट में क्रुड तेलों और रिफाइंड तेलों के आयात शुल्क में अंतर को नहीं बढ़ाने से तिलहन उद्योग को निराशा हुई है। सालवेंट एक्सटेंशन आफ इंडिया (एसईए) के अध्यक्ष अतुल चतुर्वेदी के अनुसार क्रुड तेलों पर आयात शुल्क इस समय 12.5 फीसदी है जबकि रिफाइंड तेलों पर आयात शुल्क 20 फीसदी है अतः इनमें अंतर केवल 7.5 फीसदी का ही है जबकि उद्योग ने केंद्र सरकार को पत्र लिखकर आयात शुल्क में अंतर को 7.5 फीसदी से बढ़ाकर 15 फीसदी करने की मांग की थी।
उन्होंने बताया कि आयात शुल्क में अंतर कम होने के कारण क्रुड तेलों के बजाए रिफाइंड तेलों के आयात में लगातार बढ़ोतरी हो रही है जिससे घरेलू उद्योग को नुकसान हो रहा है। सीईए के अनुसार नवंबर 2016 में रिफाइंड तेलों का आयात 2,40,948 टन का हुआ है जोकि कुल आयात का 21 फीसदी है। ......आर एस राणा