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22 अगस्त 2013

दाल व खाद्य तेलों का आयात और महंगा

पिछले दस दिनों में दालें 300-600 जबकि खाद्य तेल 200-300 प्रति क्विंटल बढ़े अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये में आई भारी गिरावट से दलहन और खाद्य तेलों का आयात महंगा हो गया है। दालों की थोक कीमतों में पिछले दस दिनों में जहां 300 से 600 रुपये प्रति क्विंटल की तेजी आ चुकी है, वहीं आयातित खाद्य तेलों के दाम सप्ताहभर में ही 200 से 300 रुपये प्रति क्विंटल तक बढ़े गए हैं। ग्लोबल दाल इंडस्ट्रीज के डायरेक्टर चंद्रशेखर एस. नादर ने बताया कि डॉलर के मुकाबले रुपये में लगातार गिरावट बनी हुई है। बुधवार को डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर होकर 65.54 के स्तर तक पहुंच गया था, हालांकि दिन के निचले स्तर से शाम को थोड़ी रिकवरी जरूर हुई और रुपया 64.11 के स्तर पर बंद हुआ। पिछले तीन महीनों में डॉलर के मुकाबले रुपया करीब 15 फीसदी तक कमजोर हो चुका है। इसका असर घरेलू बाजार में दलहन की कीमतों पर पड़ रहा है। दलहन के थोक कारोबारी निशांत मित्तल ने बताया कि आयात महंगा होने से घरेलू बाजार में दालों की कीमतें बढ़ रही हैं। थोक बाजार में उड़द दाल का दाम बढ़कर 5,000 से 5,600 रुपये, मूंग दाल का 6,600 रुपये, अरहर दाल का 6,400 रुपये और मसूर दाल का 5,300 रुपये प्रति क्विंटल हो गया। चना दाल की कीमतों में 300 रुपये की तेजी आकर शनिवार को भाव 3,500-3,700 रुपये प्रति क्विंटल हो गए। सॉल्वेंट एक्सट्रेक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एसईए) के कार्यकारी निदेशक डॉ. बी वी मेहता ने बताया कि डॉलर की मजबूती से आयातित खाद्य तेलों के दाम सप्ताहभर में ही 200 से 300 रुपये प्रति क्विंटल तक बढ़ चुके हैं। उन्होंने बताया कि इसका घरेलू खाद्य तेलों की कीमतों पर भी पडऩा शुरू हो गया है। आरबीडी पाम तेल का भाव बढ़कर बंदरगाह पर 530-540 रुपये और क्रूड पाम तेल का भाव 500-510 रुपये प्रति दस किलो हो गया।a (Business Bhaskar....R S Rana)

सख्त नियमों से मूंगफली दाने के निर्यात में भारी गिरावट

अनुमान - अक्टूबर में नई फसल आने पर मूल्य में हो सकती है कमी नई फसल चालू खरीफ में मूंगफली का रकबा बढ़कर 39.96 लाख हैक्टेयर पिछले साल 34.35 लाख हैक्टेयर में हुई भी मूंगफली की बुवाई पिछले खरीफ सीजन में 31 लाख टन मूंगफली का उत्पादन रहा नए सीजन में मूंगफली का उत्पादन व सप्लाई बढऩे का अनुमान अप्रैल-जून के दौरान निर्यात 60 फीसदी घटकर 673 करोड़ रुपये चालू वित्त वर्ष 2013-14 की पहली तिमाही (अप्रैल से जून) के दौरान मूंगफली दाने के निर्यात में 59.99 फीसदी की गिरावट आकर कुल 673.86 करोड़ रुपये का ही हुआ है। चालू खरीफ सीजन में मूंगफली के बुवाई क्षेत्रफल में 16.3 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। ऐसे में अक्टूबर महीने में नई फसल की आवक का दबाव बनने के बाद मूंगफली दाने और तेल की कीमतों में गिरावट आने की संभावना है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार चालू वित्त वर्ष 2013-14 की पहली तिमाही अप्रैल से जून के दौरान मूंगफली दाने का निर्यात घटकर मूल्य के हिसाब से 673.86 करोड़ रुपये का ही हुआ है जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में 1,684.13 करोड़ रुपये मूल्य का निर्यात हुआ था। श्रीराज मोती इंडस्ट्रीज के डायरेक्टर समीर भाई साह ने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा मूंगफली दाने के निर्यात नियमों में सख्ती कर देने से इसके निर्यात में भारी कमी आई है। इसका घरेलू बाजार में मूंगफली दाने और तेल की कीमतों पर भी पड़ा है। उत्पादक मंडियों में मूंगफली सीड की कीमतें घटकर 3,000 से 3,700 रुपये प्रति क्विंटल रह गई जबकि मार्च-अप्रैल में इसके दाम 5,500 से 6,000 रुपये प्रति क्विंटल थे। इस दौरान मूंगफली तेल के दाम 1,250-1,300 रुपये से घटकर 950-975 रुपये प्रति दस किलो रह गए हैं। राजकोट के मूंगफली कारोबारी दयालाल ने बताया कि पिछले साल गुजरात में सूखे के कारण मूंगफली के बुवाई क्षेत्रफल में कमी आई थी लेकिन चालू खरीफ में मानसूनी वर्षा अच्छी हुई है जिससे मूंगफली के बुवाई क्षेत्रफल में बढ़ोतरी हुई है। मूंगफली दाने के निर्यात में कमी आने से घेरलू बाजार में दाम काफी घट चुके हैं। वैसे भी उत्पादक मंडियों में मूंगफली की आवक काफी कम है। चालू खरीफ में मूंगफली की पैदावार में बढ़ोतरी होने का अनुमान है। ऐसे में अक्टूबर महीने में मूंगफली दाने के साथ ही तेल की कीमतों में गिरावट आने की संभावना है। कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू खरीफ में मूंगफली की बुवाई बढ़कर 39.96 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल की समान अवधि में 34.35 लाख हैक्टेयर में ही बुवाई हुई थी। मंत्रालय के चौथे आरंभिक अनुमान के अनुसार वर्ष 2012-13 खरीफ सीजन में मूंगफली की पैदावार 31 लाख टन की ही हुई थी। (Business Bahskar....R S Rana)

एफएमसी का एनएसईएल को नोटिस

एनएसईएल की मुश्किलें खत्म होने का नाम नहीं ले रही हैं। मंगलवार को डिफॉल्ट होने के बाद एफएमसी ने एनएसईएल को नोटिस जारी कर के कहा है कि निवेशकों के पैसे लौटाने के लिए गोदामों में पड़ी कमोडिटी को नीलाम कर दिया जाए। वहीं कमोडिटी की क्वॉलिटी में गड़बड़ी होने पर एफएमसी को सूचित करने के निर्देश दिए गए हैं। एफएमसी ने एनएसईएल को डिफॉल्टर से कागजात, एसेट और चेकबुक लेने का निर्देश दिया है। एफएमसी ने कहा है कि डिफॉल्टर के एसेट बेचकर एनएसईएल निवेशकों का सेटलमेंट कराए। एफएमसी ने कमोडिटी की नीलामी से मिला पैसा एस्क्रो अकाउंट में डालने के लिए कहा है कि साथ ही नीलामी से मिला पैसा एफएमसी की मंजूरी के बाद निवेशकों को देने का निर्देश है। इस बीच सूत्रों से एक्सक्लूसिव जानकारी मिली है कि एनएसईएल डिफॉल्ट मामले में प्रवर्तन निदेशालय और डिपार्टमेंट ऑफ रेवेन्यु इंटेलिजेंस से काम तेज करने को कहा गया है। कंज्यूमर अफेयर्स मंत्रालय ने इस मामले पर प्रधानमंत्री को भी रिपोर्ट सौंपने वाला है। सूत्रों का कहना है कि कार्पोरेट अफेयर्स मंत्रालय से इस मामले में एमसीएक्स और फाइनेंशियल टेक्नोलॉजीज की भूमिका की जांच को कहा गया है। एनएसईएल मामले में कानून मंत्रालय से भी राय मांगी गई है। माना जा रहा है कि वित्त मंत्रालय जल्द ही कंज्यूमर अफेयर्स मंत्रालय से पूरा मामला अपने हाथ में ले लेगा। इस मामले में वित्त मंत्रालय के अधिकारी के नेतृत्व में कमेटी जल्द बनेगी। एफएमसी को वित्त मंत्रालय के अधीन लाया जाएगा। सूत्रों की मानें तो प्रवर्तन निदेशालय की तरफ से एनएसईएल के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग मामले पर जल्द कार्रवाई संभव है। प्रवर्तन निदेशालय एनएसईएल में पैसे के सोर्स (मनी ट्रेल) की जांच कर रहा है। प्रवर्तन निदेशालय के पास एनएसईएल में मनी लॉन्ड्रिंग के पुख्ता सबूत हैं। दरअसल प्रवर्तन निदेशालय एनएसईएल के निवेशकों की तरफ से मामला दर्ज करने का इंतजार कर रहा है। उधर एनएसईएल सेटलमेंट कमेटी की 26 अगस्त को बैठक होगी। बैठक में सेटलमेंट से जुड़े सभी मुद्दों पर विचार होगा। एनएसईएल की कमेटी में कंपनी लॉ बोर्ड के पूर्व मेंबर शरद उपासनी, हाईकोर्ट के पूर्व जज आर जे कोचर बैठक में शामिल होंगे। एनएसईएल की कमेटी में सेबी के पूर्व चेयरमैन जी एन बाजपेई और पूर्व डीजीपी डी शिवानंदन भी शामिल होंगे। नेशनल स्पॉट एक्सचेंज (एनएसईएल) अपने निवेशकों के पहली किश्त के पैसे नहीं लौटा पाया है। एनएसईएल को 175 करोड़ रुपये का पहला भुगतान करना था। जबकि एक्सचेंज सिर्फ 92.12 करोड़ रुपये ही दे पाया है। एनएसईएल ने पे-आउट के तहत मोतीलाल ओसवाल कमोडिटी को 4.3 करोड़ रुपये चुकाए हैं। वहीं इंडिया इंफोलाइन कमोडिटी को 5.34 करोड़ रुपये और आनंद राठी कमोडिटी को 10.49 करोड़ रुपये चुकाए हैं। इसके अलावा एमएमटीसी को 3.6 करोड़ रुपये, इंडियन बुलियन एसोसिएशन को 19.16 करोड़ रुपये और जियोजित कॉमट्रेड को 5.13 करोड़ रुपये चुकाए हैं। एनएसईएल के 24 देनदारों के पास नकदी और एसेट की कमी है। एनएसईएल के देनदारों में 17 कंपनियों ने तय रकम से कम पेमेंट किया है। वहीं 9 कंपनियों ने डिफॉल्ट किया है। एनएसईएल के देनदारों में शामिल एन के प्रोटीन्स पर 970 करोड़ रुपये की देनदारी है, जबकि इस कंपनी की एसेट 564 करोड़ रुपये और मुनाफा 15 करोड़ रुपये है। ए आर के इंपोर्ट्स पर 719 करोड़ रुपये की देनदारी है, जबकि इस कंपनी की एसेट 124 करोड़ रुपये और मुनाफा 7.7 करोड़ रुपये है। वहीं लॉइल कॉन्टिनेंटल पर एनएसईएल की 335 करोड़ रुपये देनदारी है, जबकि लॉइल कॉन्टिनेंटल की एसेट 14.6 करोड़ रुपये और मुनाफा 8.7 करोड़ रुपये है। लॉइल हेल्थ फूड्स पर 289 करोड़ रुपये की देनदारी है, जबकि इस कंपनी की एसेट 71 करोड़ रुपये और मुनाफा 11 करोड़ रुपये है। मोहन इंडिया पर 575 करोड़ रुपये की देनदारी है, जबकि इस कंपनी की एसेट 17 करोड़ रुपये और मुनाफा 2,044 करोड़ रुपये है। (Moneycantrol.com)

एनएसईएल पेमेंट मामला जल्द सुलझेगाः जिग्नेश शाह

मंगलवार को हुए एनएसईएल डिफॉल्ट के बाद पहली बार एनएसईएल के वाइस चेयरमैन जिग्नेश शाह एफएमसी के सामने पेश हुए। इस पेशी से पहले उन्होंने भरोसा दिलाया कि जल्द से जल्द इस मामले को सुलझा लिया जाएगा। वहीं बैठक के बाद उन्होंने कहा कि सही समय पर पेमेंट करने की कोशिश जारी है। जिग्नेश शाह ने बताया कि उन्होंने एफएमसी को मौजूदा स्थिति के बारे में पूरी जानकारी दी है। एफएमसी के उठाए गए सवालों पर जानकारी देते हुए सही समय पर पेमेंट करने की कोशिश जारी रखने की जानकारी दी है। हालांकि एफएमसी ने एनएसईएल को गोदामों में पड़ी कमोडिटी की जल्द से जल्द नीलामी करने को कहा है। इसके अलावा डिफॉल्टरों की संपत्ति बेचने का भी निर्देश दे दिया है। उधर एनएसईएल में पेमेंट का डिफाल्ट करने वाले एन के प्रोटीन्स के अहमदाबाद दफ्तरों पर आयकर विभाग ने छापे डाले हैं। एन के प्रोटीन्स के कड़ी, थौल और अहमदाबाद दफ्तरों पर ईडी ने छापे डाले हैं। इसके अलावा एन के प्रोटीन्स के प्रोमोटरों के कड़ी, अहमदाबाद के घर पर भी ईडी के छापे पड़े हैं। (Moneycantrol.com)

21 अगस्त 2013

रुपये में रिकॉर्ड कमजोरी, सोने-चांदी में क्या करें

एग्री कमोडिटीज में आज का कारोबार बंद हो गया है। रुपये में कमजोरी के वजह से खाने के तेलों में तेजी आई। एमसीएक्स पर सीपीओ 2 फीसदी चढ़ा। एनसीडीईएक्स पर सोया तेल 1.5 फीसदी मजबूत हुआ। सोयाबीन करीब 2.5 फीसदी चढ़ा। सरसों में 1.5 फीसदी की तेजी आई। त्यौहारों में मांग बढ़ने के अनुमान से एनसीडीईएक्स पर चना 3 फीसदी उछला। जौ 1.5 फीसदी मजबूत हुआ। कैस्टर सीड में 0.5 फीसदी से ज्यादा की बढ़त दिखी। हालांकि, गेहूं और चीनी में सुस्ती नजर आई। एमसीएक्स पर आलू 0.25 फीसदी मजबूत हुआ। इलायची के अलावा बाकी मसालों में खरीदारी का रुझान रहा। एनसीडीईएक्स पर धनिया 2 फीसदी चढ़ा। जीरे और लाल मिर्च में 1.5 फीसदी की तेजी आई। हल्दी भी 1 फीसदी से ज्यादा मजबूत हुई। वहीं, एमसीएक्स पर इलायची 0.5 फीसदी कमजोर हुई। रुपये में रिकॉर्ड कमजोरी से सोने और चांदी में जोरदार तेजी आई है। एमसीएक्स पर सोना 1.5 फीसदी और चांदी 2 फीसदी मजबूत हुए हैं। गौर करने वाली बात ये है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व अपना पिछली बैठक का ब्यौरा भी जारी करने वाला है। क्यूई3 में कटौती की आशंका से अंतर्राष्ट्रीय बाजार में सोना-चांदी पर दबाव है। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में गिरावट के बावजूद घरेलू बाजार में कच्चे तेल में तेजी आई है। कमजोर रुपये की वजह से एमसीएक्स पर कच्चा तेल करीब 1 फीसदी चढ़कर 6750 रुपये के ऊपर पहुंच गया है। वहीं, नायमैक्स पर कच्चा तेल 105 डॉलर के नीचे कारोबार कर रहा है। कच्चे तेल के साथ नैचुरल गैस भी घरेलू बाजार में जोरदार तेजी दिखा रही है। एमसीएक्स पर नैचुरल गैस 2.5 फीसदी चढ़कर 224 रुपये के स्तर पर कारोबार कर रही है। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में भी नैचुरल गैस में करीब 1 फीसदी की तेजी नजर आ रही है। रुपये में कमजोरी आने की वजह से घरेलू बाजार में बेस मेटल्स में मजबूती आई है। वहीं, शुरुआती कारोबार में बेस मेटल्स पर दबाव दिखा था। एमसीएक्स पर कॉपर 1 फीसदी चढ़कर 470 रुपये पर पहुंच गया है। एल्यूमिनियम, जिंक, लेड, निकेल में 1.7-1 फीसदी की तेजी है। (Money cantrol.com)

एनएसईएल नहीं कर पाया पूरी पेमेंट!

जिसका डर था, वही हुआ। नेशनल स्पॉट एक्सचेंज (एनएसईएल) अपने निवेशकों के पहली किश्त के पैसे नहीं लौटा पाया है। एनएसईएल को 175 करोड़ रुपये का पहला भुगतान करना था। जबकि एक्सचेंज सिर्फ 92.12 करोड़ रुपये ही दे पाया है। एनएसईएल ने पे-आउट के तहत मोतीलाल ओसवाल कमोडिटी को 4.3 करोड़ रुपये चुकाए हैं। वहीं इंडिया इंफोलाइन कमोडिटी को 5.34 करोड़ रुपये और आनंद राठी कमोडिटी को 10.49 करोड़ रुपये चुकाए हैं। इसके अलावा एमएमटीसी को 3.6 करोड़ रुपये, इंडियन बुलियन एसोसिएशन को 19.16 करोड़ रुपये और जियोजित कॉमट्रेड को 5.13 करोड़ रुपये चुकाए हैं। एनएसईएल के 24 देनदारों के पास नकदी और एसेट की कमी है। एनएसईएल के देनदारों में 17 कंपनियों ने तय रकम से कम पेमेंट किया है। वहीं 9 कंपनियों ने डिफॉल्ट किया है। एनएसईएल के देनदारों में शामिल एन के प्रोटीन्स पर 970 करोड़ रुपये की देनदारी है, जबकि इस कंपनी की एसेट 564 करोड़ रुपये और मुनाफा 15 करोड़ रुपये है। ए आर के इंपोर्ट्स पर 719 करोड़ रुपये की देनदारी है, जबकि इस कंपनी की एसेट 124 करोड़ रुपये और मुनाफा 7.7 करोड़ रुपये है। वहीं लॉइल कॉन्टिनेंटल पर एनएसईएल की 335 करोड़ रुपये देनदारी है, जबकि लॉइल कॉन्टिनेंटल की एसेट 14.6 करोड़ रुपये और मुनाफा 8.7 करोड़ रुपये है। लॉइल हेल्थ फूड्स पर 289 करोड़ रुपये की देनदारी है, जबकि इस कंपनी की एसेट 71 करोड़ रुपये और मुनाफा 11 करोड़ रुपये है। मोहन इंडिया पर 575 करोड़ रुपये की देनदारी है, जबकि इस कंपनी की एसेट 17 करोड़ रुपये और मुनाफा 2,044 करोड़ रुपये है। हालांकि, कमोडिटी वायदा रेगुलेटर एफएमसी ने एनएसईएल को निर्देश दिया है कि एक्सचेंज पास जितने भी पैसे हैं वो निवेशकों में बिना किसी भेदभाव के बांटे। एफएमसी ने कहा है कि मिली कुल रकम में से आईबीएमए के सदस्यों को भी पेमेंट की जाए। आईबीएमए के वास्तविक कारोबारियों को ही पहले भुगतान किया जाए। वहीं, एफएमसी ने एनएसईएल को वैट और एक्सचेंज फंड युटिलाइजेशन का भुगतान अभी नहीं करने का निर्देश दिया गया है। पेमेंट के बाद निवेशकों का नाम और पूरा ब्यौरा एनएसईएल को अपनी वेबसाइट पर लगाना होगा। एनएसईएल को कुल 5500 करोड़ रुपये लौटाने हैं, जिसे 30 हफ्तों में चुकाने की योजना है। लेकिन, बड़ा सवाल है कि एनएसईएल में इतना बड़ा पेमेंट संकट कैसे खड़ा हो गया। एनएसईएल को सिर्फ एक दिन के कॉन्ट्रैक्ट में कारोबार की इजाजत थी। लेकिन, नियमों के अभाव में एक्सचेंज ने कुछ प्रोडक्ट्स में शॉर्ट सेलिंग की इजाजत दी थी। शॉर्ट सेलिंग एफएमसी ने आपत्ति जताते हुए एक्सचेंज को कारोबार से रोका। कारोबार पर रोक से 5500 करोड़ रुपये के सौदों के सेटलमेंट खड़ी हुई है। एफएमसी की सख्ती के बाद एक्सचेंज को अपना सेटलमेंट प्लान लाना पड़ा। निवेशकों को अब बस सरकार से ही कोई उम्मीद है। निवेशक और ब्रोकरों का कहना है कि वो एनएसईएल मामले में कानूनी रास्ता अपना सकते हैं। मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के चेयरमैन मोतीलाल ओसवाल के मुताबिक सरकार को इस मामले को निपटाने के लिए एनएसईएल को अपने हाथ में ले लेना चाहिए। निवेशकों को एनएसईएल पर कोई भरोसा नहीं है। एनएसईएल को यह कदम 20 दिन पहले ही उठाना चाहिए था। कोर्ट जाने से पहले पे-आउट का इंतजार कर रहे थे, लेकिन अब कानूनी विकल्पों पर विचार जारी है। निवेशक एनएसईएल के रवैये से दुखी हैं। इन्वेस्टर ग्रीवांस फोरम के प्रेसिडेंट किरीट सोमैय्या के मुताबिक एफएमसी और सरकार को इस मामले की जांच सीबीआई से करानी चाहिए। वहीं एनएसईएल इंवेस्टर फोरम के चेयरमैन शरद श्रॉफ का कहना है कि एनएसईएल के डूबने से एमसीएक्स पर बहुत गहरा प्रभाव पड़ेगा। अभी तक एमसीएक्स का कामकाज काफी अच्छा नजर आ रहा है, लेकिन आगे दिक्कतें काफी ज्यादा हैं। निवेशकों को एनएसईएल पर बिल्कुल भरोसा नहीं रह गया है। सूत्रों से जानकारी मिली है कि एनएसईएल डिफॉल्ट मामले में सरकार अगले 48 घंटों में कुछ कड़े कदम उठा सकती है। खास तौर पर प्रवर्तन निदेशालय और डिपार्टमेंट ऑफ रेवेन्यु इंटेलिजेंस से काम तेज करने को कहा गया है। कंज्यूमर अफेयर्स मंत्रालय ने इस मामले पर प्रधानमंत्री को भी रिपोर्ट सौंपने वाला है। सूत्रों का कहना है कि कार्पोरेट अफेयर्स मंत्रालय से इस मामले में एमसीएक्स और फाइनेंशियल टेक्नोलॉजीज की भूमिका की जांच को कहा गया है। एनएसईएल मामले में कानून मंत्रालय से भी राय मांगी गई है। माना जा रहा है कि वित्त मंत्रालय जल्द ही कंज्यूमर अफेयर्स मंत्रालय से पूरा मामला अपने हाथ में ले लेगा। इस मामले में वित्त मंत्रालय के अधिकारी के नेतृत्व में कमेटी जल्द बनेगी। एफएमसी को वित्त मंत्रालय के अधीन लाया जाएगा। सूत्रों की मानें तो प्रवर्तन निदेशालय की तरफ से एनएसईएल के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग मामले पर जल्द कार्रवाई संभव है। प्रवर्तन निदेशालय एनएसईएल में पैसे के सोर्स (मनी ट्रेल) की जांच कर रहा है। प्रवर्तन निदेशालय के पास एनएसईएल में मनी लॉन्ड्रिंग के पुख्ता सबूत हैं। दरअसल प्रवर्तन निदेशालय एनएसईएल के निवेशकों की तरफ से मामला दर्ज करने का इंतजार कर रहा है। उधर एनएसईएल सेटलमेंट कमेटी की 26 अगस्त को बैठक होगी। बैठक में सेटलमेंट से जुड़े सभी मुद्दों पर विचार होगा। एनएसईएल की कमेटी में कंपनी लॉ बोर्ड के पूर्व मेंबर शरद उपासनी, हाईकोर्ट के पूर्व जज आर जे कोचर बैठक में शामिल होंगे। एनएसईएल की कमेटी में सेबी के पूर्व चेयरमैन जी एन बाजपेई और पूर्व डीजीपी डी शिवानंदन भी शामिल होंगे। एफएमसी के चेयरमैन रमेश अभिषेक का कहना है कि एनएसईएल के पहले पेमेंट पर सवाल खड़े हो गए हैं। इससे एनएसईएल की नीयत और विश्वसनीयता पर संदेह हो रहा है। एफएमसी को गोदामों में माल के बारे में जिग्नेश शाह की सफाई पर भरोसा नहीं है। गोदाम में पर्याप्त स्टॉक का नहीं होना एनएसईएल सिस्टम की नाकामी है। इसके अलावा एनएसईएल ने मनी लॉन्ड्रिंग की या नहीं इसकी भी जांच होगी। अगर एनएसईएल का बोर्ड योग्य नहीं पाया गया तो असर एमसीएक्स पर भी पड़ेगा। आनंद राठी फाइनेंशियल सर्विसेज के चेयरमैन आनंद राठी का कहना है कि एनएसईले का पेमेंट शेड्यूल काफी कमजोर था लेकिन उसके बावजूद एनएसईएल पैसा नहीं जुटा पाया जो काफी निराशाजनक है। एनएसईएल पेमेंट देना बोर्ड और प्रमोटर्स की जिम्मेदारी है। बोर्ड और प्रमोटर्स को देखना चाहिए कि पैसा आए या ना आए किसी भी तरीके से निवेशकों का पैसा लौटाया जाए। आनंद राठी के मुताबिक इस मामले में ईडी, एसएफआईओ की जांच की जरूरत है। साथ ही इस मामले के बाद एनएसईएल में जो स्टॉक बचा हुआ है उस पर नियंत्रण करने की जरूरत है। (Moneycantrol.com)

20 अगस्त 2013

एनएसईएल ने खरीदारों और विक्रेताओं की सूची पेश की

वायदा बाजार आयोग (एफएमसी) द्वारा दिए गए एक आदेश के बाद एनएसईएल ने आज अपनी वेबसाइट पर खरीदारों और विक्रेताओं की सूची का खुलासा कर दिया। जिंसों के खरीदारों की सूची के अनुसार शीर्ष 5 खरीदारों का 5574.35 करोड़ रुपये के कुल बकाया में लगभग 60 फीसदी का योगदान है। वहीं शीर्ष 10 का इसमें लगभग 85 फीसदी का योगदान है। कुल मिला कर 24 पार्टियों से बकाया रकम वसूली जानी है। हालांकि एक्सचेंज को 148 सदस्यों को 5380.53 करोड़ रुपये चुकाने हैं। इन सदस्यों में इंडियन बुलियन मार्केट एसोसिएशन (आईबीएमए) भी शामिल है जो कई निवेशकों के लिए समाशोधन एजेंसी है। आईबीएमए के लिए देय रकम 1159 करोड़ रुपये है। 100 से अधिक निवेशकों को आईबीएमए से रकम हासिल होगी। एनएसईएल की वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार जिनकी रकम फंसी हुई है, उनमें एमएमटीसी और पीईसी जैसे सरकारी उद्यम शामिल हैं। सबसे अधिक बकाया रकम वाले सदस्यों में एन के प्रोटीन्स 967 करोड़ रुपये के साथ सबसे ऊपर है जो अपनी परिसंपत्तियां बेच कर बकाया का भुगतान करेगी। मुंबई की खाद्य तेल उत्पादक एवं रिटेलर लोटस रिफाइनरीज ने एनएसईएल द्वारा 252.56 करोड़ की लंबित बकाया रकम के लिए किए गए वादे का विरोध किया है। एनएसईएल ने अपनी वेबसाइट पर एक सर्कुलर में लोटस रिफाइनरीज को सिर्फ 'नॉन-कॉम्पलिएंटÓ सदस्य के तौर पर श्रेणीबद्घ किया है। इस दावे का विरोध करते हुए लोटस ने एफएमसी को पत्र लिखा है। इस पत्र में कहा गया कि खाद्य तेल कंपनी के लिए एनएसईएल 108 करोड़ रुपये की रकम चुकाए जाने के लिए जिम्मेदार है। लोटस रिफाइनरीज के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक अरुण कुमार शर्मा ने कहा, 'हमने एनएसईएल से 108 करोड़ रुपये की बकाया राशि वसूले जाने के लिए एफएमसी के समक्ष अपना दावा पहले ही सौंप दिया है। हम एफएमसी की सलाह पर अमल करेंगे।Ó भंडार की गुणवत्ता और मात्रा पर सवाल नैशनल स्पॉट एक्सचेंज (एनएसईएल) के दो निदेशकों ने एक्सचेंज के गोदामों में पड़े माल की मात्रा और गुणवत्ता को लेकर जिंस बाजार नियामक वायदा बाजार आयोग (एफएमसी) के समक्ष अपनी चिंता प्रकट की है। एफटी समूह के संस्थापक जिग्नेश शाह और एमसीएक्स स्टॉक एक्सचेंज के प्रबंध निदेशक जोसफ मैसी के ये बयान पिछले मंगलवार को नियामक के साथ हुई बैठक के दौरान सामने आए। साथ ही एक्सचेंज के मुख्य कार्यकारी अंजनी सिन्हा ने निवेशकों और अन्य शेयरधारकों को आश्वस्त किया है कि देनदारियों के निपटान के लिए पर्याप्त स्टॉक है। 13 अगस्त को एफएमसी के साथ हुई बैठक के दौरान एनएसईएल के निदेशक जिग्नेश शाह और एनएसईएल के निदेशक जोसफ मैसी ने अन्य बातों के साथ साथ एनएसईएल के गोदामों में रखे जिंस की गुणवत्ता और मात्रा पर भी चिंता प्रकट की। इन दोनों ने एफएमसी को यह भी बताया कि उन्होंने गोदामों में रखे जिंस की गुणवत्ता और मात्रा के विस्तृत आकलन के लिए एक प्रबंधन फर्म एसजीएस को भी नियुक्त किया है। सेबी के एक पूर्व अधिकारी एवं वरिष्ठï नियामक विश्लेषक का इस संबंध में कहना है, 'ये अधिकारी सिर्फ यह कहकर इस संबंध में किसी संभावित जिम्मेदारी से बचने की कोशिश कर रहे हैं कि वे भी माल की गुणवत्ता और मात्रा को लेकर चिंतित हैं। (BS Hindi)