नई दिल्ली। अप्रैल में देश से कैस्टर तेल का निर्यात 1.30 फीसदी बढ़कर 74,542 टन का हुआ है, जबकि पिछले साल अप्रैल में इसका निर्यात 73,585 टन का हुआ था।
सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया, एसईए के अनुसार मूल्य के हिसाब से अप्रैल में कैस्टर तेल का निर्यात 528.87 करोड़ रुपये का ही हुआ है, जो कि पिछले साल अप्रैल के 964.29 करोड़ रुपये की तुलना में कम है।
एसईए के अनुसार चालू वर्ष 2026 के पहले चार महीनों जनवरी से अप्रैल के दौरान कैस्टर तेल का निर्यात 238,049 टन का हुआ है, जबकि पिछले वर्ष 2025 की समान अवधि के दौरान इसका निर्यात 248,929 टन का हुआ था। मूल्य के हिसाब से चालू वर्ष 2026 के जनवरी से अप्रैल के दौरान कैस्टर तेल का निर्यात 2,751,55 करोड़ रुपये का ही हुआ है जबकि वर्ष 2025 की समान अवधि के दौरान मूल्य के हिसाब से कैस्टर तेल का निर्यात 3,324.14 करोड़ रुपये का हुआ था।
गुजरात में कैस्टर सीड के भाव सोमवार को 1,290 से 1,320 रुपये प्रति 20 किलो पर स्थिर हो गए। राजकोट में कैस्टर तेल कमर्शियल के दाम 1,325 रुपये और एफएसजी के दाम 1,335 रुपये प्रति 10 किलो पर स्थिर हो गए।
व्यापारियों का मानना है कि कैस्टर तेल की मांग पहले की तुलना में कम हुई है जिस कारण सीड की कीमत स्थिर बनी रही। हालांकि मिलों के पास स्टॉक सीमित मात्रा में होने के कारण कैस्टर सीड के भाव में बड़ी गिरावट के आसार कम है।
गुजरात में कैस्टर सीड की आवक 70,000 बोरी (1 बोरी,75 किलोग्राम), राजस्थान से 30,000 बोरी और सीधी मिलों में पहुंच करीब 15,000 बोरी की आवक के साथ कुल आवक लगभग 1.15 लाख बोरियों की हुई।
कृषि मंत्रालय के आरंभिक अनुमान के अनुसार फसल सीजन 2025-26 के दौरान कैस्टर सीड का उत्पादन 16.96 लाख टन का ही होने का अनुमान है, जबकि इसके पिछले फसल सीजन के दौरान 17.86 लाख टन का उत्पादन हुआ था।

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