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30 मई 2026

मार्च के दौरान डीओसी का निर्यात 33 फीसदी घटा - एसईए

नई दिल्ली। मार्च में डीओसी के निर्यात में 33 फीसदी की गिरावट आकर कुल निर्यात 274,887 टन का ही हुआ है, जबकि पिछले साल मार्च में इनका निर्यात 409,148 टन का ही हुआ था।


सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया, एसईए के अनुसार देश की डीओसी की निर्यात मार्केट और लॉजिस्टिक को बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, जिससे निर्यात से होने वाली आय और मुनाफे पर बुरा असर पड़ रहा है। मुख्य समस्याओं में रेड सी शिपिंग रूट में गंभीर रुकावट शामिल हैं, जिससे माल ढुलाई की लागत तेजी से बढ़ गई है और साउथ अमेरिकन और यूरोपियन सप्लायर से कीमतों को लेकर कड़ा मुकाबला करना पड़ रहा है। यही कारण है कि वित्त वर्ष 2025-26 के अप्रैल 2025 से मार्च 2026 के दौरान देश से कुल डीओसी का निर्यात पिछले साल की समान अवधि के 4,342,498 टन से घटकर 3,768,710 टन का रह गया। इस इसमें 13 फीसदी की गिरावट आई है। इस दौरान मूल्य के हिसाब से निर्यात 12,171 करोड़ रुपये से घटकर 9,340 करोड़ रुपये का रह गया।

एसईए के अनुसार इस समय चीन एक मेगा बाजार के तौर पर उभरा है। अप्रैल 2025 से मार्च 2026 के दौरान चीन ने भारतीय ऑयलमील का आयात बड़े पैमाने पर किया है। इस दौरान चीन को निर्यात बढ़कर 8.78 लाख टन तक पहुंच गया। यह काफी हद तक सरसों डीओसी की देश में  कम कीमत और कैनेडियन कैनोला पर चीन की रोक की वजह से हुआ है। भारतीय निर्यात का एक बड़ा कारण कैनेडियन रेपसीड/कैनोला मील पर चीन का 100 फीसदी टैरिफ है।

सोया डीओसी के निर्यात में कमी आई है। अर्जेंटीना और ब्राजील जैसे बड़े उत्पादक देशों के साथ कीमत में अंतर के कारण भारतीय सोया डीओसी का निर्यात दुनिया भर में महंगा है। इसके अलावा, घरेलू जानवरों का चारा बनाने वाली कंपनियां सोया डीओसी और दूसरे ऑयलमील की कीमत पर डीडीजीएस (इथेनॉल को बाय-प्रोडक्ट) जैसे सस्ते ऑप्शन की ओर तेजी से बढ़ रही हैं।

एसईए के अनुसार रेड सी और होर्मुज स्ट्रेट के कारण संकट बढ़ा है। जियोपॉलिटिकल झगड़ों ने शिपिंग कंपनियों को रेड सी को बायपास करने पर मजबूर कर दिया है। केप ऑफ गुड होप के आसपास चक्कर लगाने से शिपिंग यात्रा में 10-15 दिन बढ़ गए हैं, जिससे कंटेनर की कमी हो गई है और माल ढुलाई का खर्च बढ़ गया है। भारत का लगभग 20 फीसदी डीओसी का निर्यात (जो पश्चिम एशिया के लिए है) और 15 फीसदी (जो यूरोप के लिए है) इन लॉजिस्टिक में देरी और लागतों की वजह से बहुत ज्यादा कमजोर हुआ है।

सोयाबीन की कम उपलब्धता के कारण घरेलू बाजार में दाम ज्यादा होने से, क्रशिंग एक्टिविटी कम होने से शिपिंग वॉल्यूम के लिए उपलब्धता कम हुई है।

भारतीय बंदरगाह पर फरवरी की तुलना में मार्च में सोया डीओसी का भाव कमजोर होकर 477 डॉलर प्रति टन रह गए, जबकि फरवरी में इसका दाम 489 डॉलर प्रति टन था। इस दौरान सरसों डीओसी का मूल्य मार्च में भारतीय बंदरगाह पर घटकर 228 डॉलर प्रति टन रह गया, जबकि फरवरी में इसका भाव 239 डॉलर प्रति टन था। इस दौरान कैस्टर डीओसी का दाम फरवरी के 82 डॉलर प्रति टन से कमजोर होकर फरवरी में 78 डॉलर प्रति टन रह गया।

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