नई दिल्ली। कॉटन कारपोरेशन ऑफ इंडिया, सीसीआई द्वारा लगातार तीसरे दिन कॉटन की बिक्री कीमतों में बढ़ोतरी करने से बुधवार को उत्तर भारत के साथ ही गुजरात में कॉटन की कीमतों में तेजी जारी रही।
सूत्रों के अनुसार सीसीआई ने बुधवार को लगातार तीसरे दिन कॉटन की बिक्री कीमतों में 400 रुपये प्रति कैंडी, एक कैंडी 356 किलो की बढ़ोतरी की। इस दौरान निगम ने फसल सीजन 2025-26 की 1,22,200 गांठ कॉटन की बिक्री की, जिसमें से 55,400 गांठ की खरीद स्पिनिंग मिलों ने की तथा 66,800 गांठ की खरीद व्यापारियों ने की।
सीसीआई पिछले तीन कार्यदिवस में कॉटन की कीमत 4,100 रुपये प्रति कैंडी तक बढ़ा चुकी है।
सीसीआई चालू फसल सीजन 2025-26 की खरीदी हुई लगभग 64,50,500 कपास गांठ की बिक्री अभी तक कर चुकी हैं।
गुजरात के अहमदाबाद में 29 शंकर-6 किस्म की कॉटन के भाव बुधवार को 750 रुपये तेज होकर 64,800 से 65,200 रुपये प्रति कैंडी, एक कैंडी-356 किलो हो गए।
पंजाब में रुई हाजिर डिलीवरी के भाव तेज होकर 6,600 से 6,800 रुपये प्रति मन बोले गए।
हरियाणा में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के भाव बढ़कर 6,450 से 6,500 रुपये प्रति मन बोले गए। ऊपरी राजस्थान में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के दाम बढ़कर 6,500 से 6,800 रुपये प्रति मन बोले गए। लोअर राजस्थान में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के दाम 62,500 से 63,500 रुपये कैंडी बोले गए।
हालांकि आईसीई के इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग में कॉटन की कीमतों में गिरावट का रुख रहा।
प्रमुख उत्पादक राज्यों में कपास की कीमतों में भी लगातार तीसरे दिन 50 से 100 रुपये प्रति क्विंटल की तेजी आई। उत्तर भारत के राज्यों की मंडियों में कपास के दाम तेज होकर 8,400 से 8,900 रुपये प्रति क्विंटल हो गए, जबकि पिछले साल की समान अवधि में इसके दाम 5,500 से 5,600 रुपये प्रति क्विंटल थे। जानकारों के अनुसार उत्पादक मंडियों में कपास की आवक सीमित मात्रा में ही हो रही है।
आईसीई कॉटन वायदा में मंगलवार को भी तेजी जारी रही थी, तथा बेंचमार्क जुलाई वायदा अनुबंध दो साल से ज्यादा समय के अपने सबसे ऊंचे लेवल पर बंद हुआ था क्योंकि वेस्ट टेक्सास में लगातार सूखे की वजह से फसल को नुकसान की चिंता बनी हुई है।
सीसीआई द्वारा बिक्री कीमतों में बढ़ोतरी करने से लगातार कॉटन की कीमतों में तेजी बनी हुई। व्यापारियों के अनुसार सूती धागे में स्थानीय मांग अच्छी है, साथ ही चीन की आयात मांग भी बराबर बनी हुई है। घरेलू बाजार में कॉटन का बकाया स्टॉक प्राइवेट जिनिंग मिलों के पास नहीं के बराबर है, जबकि सीसीआई के पास अभी बकाया स्टॉक अच्छा है। सीसीआई घरेलू बाजार में लगातार कॉटन बेच रही है ऐसे में घरेलू बाजार में कॉटन की कीमतों में तेजी, मंदी काफी हद तक सीसीआई के बिक्री दाम पर निर्भर करेगी।

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