नई दिल्ली। नेशनल कमोडिटीज एंड डेरिवेटिव्स एक्सचेंज (एनसीडीईएक्स) ने घोषणा की है कि वह एक जून, 2026 को भारत का पहला सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (सेबी) से मंजूर एक्सचेंज-ट्रेडेड वेदर डेरिवेटिव्स कॉन्ट्रैक्ट लॉन्च करेगा। इससे देश मौसम से जुड़े फाइनेंशियल रिस्क की ट्रेडिंग के लिए एक रेगुलेटेड मार्केट में एंट्री करेगा।
इस कॉन्ट्रैक्ट का नाम “RAINMUMBAI” है, जिसे आईआईटी बॉम्बे के साथ मिलकर बनाया गया है और यह इंडिया मेटियोरोलॉजिकल डिपार्टमेंट (आईएमडी) से मिले ऑफिशियल बारिश के डेटा का इस्तेमाल करेगा। एनसीडीईएक्स के अनुसार, यह प्रोडक्ट मार्केट पार्टिसिपेंट्स को मानसून की बारिश में उतार-चढ़ाव से होने वाले फाइनेंशियल रिस्क को हेज करने में मदद करने के लिए डिजाइन किया गया है। यह मौसम के बदलाव को एक साइंटिफिक, रेगुलेटेड फ्रेमवर्क के अंदर एक मापने लायक और ट्रेड करने लायक रिस्क में बदल देता है।
एक्सचेंज ने कहा कि यह कॉन्ट्रैक्ट किसानों, कंस्ट्रक्शन फर्मों, पावर यूटिलिटीज, लॉजिस्टिक्स ऑपरेटरों और एग्रीकल्चर लोन पोर्टफोलियो वाले बैंकों सहित कई तरह के यूजर्स के लिए है। एनसीडीईएक्स के अनुसार यह प्रोडक्ट इंश्योरेंस और सरकारी राहत स्कीम जैसे मौजूदा सिस्टम को पूरा करने के लिए है, न कि उन्हें बदलने के लिए, यह एक मार्केट-लिंक्ड रिस्क मैनेजमेंट टूल देता है।
यह कॉन्ट्रैक्ट एक वायदा कॉन्ट्रैक्ट की तरह होगा, जो टिकर सिंबल “RAINMUMBAI” के तहत ट्रेड करेगा और जून से सितंबर के मानसून महीनों में मुंबई में लॉन्ग पीरियड एवरेज (एलपीए) से बारिश के डेविएशन को ट्रैक करेगा। इसका टिक साइज 1 एमएम, लॉट मल्टीप्लायर 50 रुपये प्रति एमएम और मैक्सिमम ऑर्डर साइज 50 लॉट होगा। सेटलमेंट कैश-बेस्ड होगा, जिसमें बारिश का डेटा आईएमडी सरफेस ऑब्जर्वेशन और सांताक्रूज और कोलाबा में ऑटोमेटिक वेदर स्टेशन से लिया जाएगा। ट्रेडिंग का समय सोमवार से शुक्रवार सुबह 10:00 बजे से रात 11:30 बजे या रात 11:55 बजे तक रहेगा, जो डेलाइट सेविंग टाइम एडजस्टमेंट के अधीन है।
यह प्रोडक्ट एक क्यूमुलेटिव डेविएशन रेनफॉल (सीडीआर) मॉडल पर बनाया गया है, जो असल बारिश और हिस्टॉरिकल एवरेज के बीच के गैप को मापता है। यह बेंचमार्क 1991 से 2020 तक के 30 साल के बारिश के डेटासेट का इस्तेमाल करके बनाया गया है।
एनसीडीईएक्स के मैनेजिंग डायरेक्टर और चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर अरुण रास्ते ने कहा कि भारत सदियों से मानसून की अनिश्चितता के साथ जी रहा है और यह कॉन्ट्रैक्ट स्टेकहोल्डर्स को उस अनिश्चितता को मैनेज करने के लिए एक साइंटिफिक और रेगुलेटेड टूल देगा। उन्होंने कहा कि पारंपरिक इंश्योरेंस प्रोडक्ट्स के उलट, ये डेरिवेटिव्स पूरी तरह से देखे गए मौसम के डेटा पर सेटल किए जाएंगे, जिससे नुकसान के असेसमेंट की जरूरत खत्म हो जाएगी और पेमेंट तेजी से हो सकेगा।
आईएमडी के बिक्रम सिंह के अनुसार डिपार्टमेंट का ऑब्जर्वेशनल इंफ्रास्ट्रक्चर और लॉन्ग-टर्म डेटासेट ट्रांसपेरेंट बारिश के इंडेक्स बनाने के लिए एक भरोसेमंद आधार देते हैं, उन्होंने इस पहल को एक रेगुलेटेड मार्केटप्लेस में साइंस और फाइनेंस के मिलने का एक उदाहरण बताया।
एनसीडीईएक्स ने इस लॉन्च को भारत की क्लाइमेट इकोनॉमी के लिए एक नए एसेट क्लास के उभरने के रूप में बताया और कहा कि यह देश के क्लाइमेट रिस्क मैनेजमेंट इकोसिस्टम को मजबूत करने में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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