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30 मई 2026

उत्तर प्रदेश में चीनी का उत्पादन 89.68 लाख टन, अन्य राज्यों के मुकाबले रिकवरी दर ज्यादा

नई दिल्ली। पहली अक्टूबर 2025 से शुरू हुए चालू पेराई सीजन (अक्टूबर-25 से सितंबर-26) में उत्तर प्रदेश में 89.68 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ है। राज्य में औसत चीनी रिकवरी की दर 10.21 फीसदी दर्ज की गई, जबकि महाराष्ट्र में यह 9.49 फीसदी और कर्नाटक में 8.19 फीसदी रही।


राज्य सरकार के अनुसार 2025-26 पेराई सत्र में गन्ना किसानों के कुल बकाया का 90 फीसदी भुगतान कर दिया गया है। किसानों को अब तक 30,831.81 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। सरकारी प्रवक्ता के अनुसार, कुछ चीनी मिलों की ओर से अभी भुगतान लंबित है। इसे जल्द से जल्द पूरा करने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं।

सरकार ने बताया कि, 2025-26 पेराई सत्र में उत्तर प्रदेश में कुल 121 चीनी मिलें संचालित हैं। इनमें उत्तर प्रदेश राज्य चीनी निगम की 3 मिलें, यूपी सहकारी चीनी मिल संघ की 23 मिलें और 95 निजी चीनी मिलें शामिल हैं। इन सभी मिलों ने मिलकर 877.96 लाख टन गन्ने की पेराई की और 89.68 लाख टन चीनी का उत्पादन किया।

सरकारी प्रवक्ता के अनुसार राज्य सरकार ने 2025-26 सत्र में गन्ने के दाम में 30 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की थी। इसके बाद जल्दी पकने वाली प्रजातियों के लिए राज्य परामर्शित मूल्य 400 रुपये प्रति क्विंटल और सामान्य प्रजातियों के लिए 390 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया था। इस बढ़ोतरी से किसानों को लगभग 3,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त लाभ मिला है। योगी सरकार के कार्यकाल में गन्ना मूल्य में यह चौथी बार वृद्धि की गई थी।

सरकार के अनुसार, समय पर भुगतान से प्रदेश के 48 लाख गन्ना किसान परिवारों को आर्थिक मजबूती मिली है। गन्ना विकास विभाग राज्य की अर्थव्यवस्था को एक ट्रिलियन डॉलर के लक्ष्य तक पहुंचने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

सरकारी प्रवक्ता के अनुसार 2017 में योगी आदित्यनाथ सरकार के सत्ता में आने के बाद से अब तक कुल 3,22,722 करोड़ रुपये का गन्ना मूल्य का भुगतान राज्य के किसानों को किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि ‘स्मार्ट गन्ना किसान’ प्रणाली के तहत गन्ना क्षेत्र पंजीकरण, सर्वेक्षण, कैलेंडर और गन्ना पर्ची जारी करने की प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन कर दी गई है। अब किसानों को गन्ना पर्ची सीधे मोबाइल फोन पर मिल रही है और भुगतान डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के जरिए सीधे उनके बैंक खातों में भेजा जा रहा है।

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