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02 फ़रवरी 2017

पीडीएस में चीनी पर केंद्र सरकार नहीं देगी सब्सिडी

आर एस राणा
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडाीएस) में वितरण की जानी वाली चीनी पर सब्सिडी समाप्त कर दी है अगर राज्य सरकार चाहे तो आगे पीडीएस में सब्सिडी दे सकती हैं। केंद्र सरकार ने बजट में राशन पर दी जाने वाली सब्सिडी को समाप्त करते हुए इस मद में केवल 200 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है जिससे कि पहले के दावों का निपटान हो सके।
चालू वित्त वर्ष 2016-17 के लिए केंद्र सरकार ने पीडीएस में चीनी पर सब्सिडी के लिए 4,500 करोड़ रुपये का आवंटन किया था जिसे घटाकर 2017-18 के पेश बजट में केवल 200 करोड़ का आवंटन किया हैं। राज्य सरकारें राशन में चीनी बाजार भाव पर खरीदती थी, तथा केंद्र सरकार 18.50 प्रति किलो की दर से सब्सिडी प्रदान करती थी। राज्य सरकारें राशन में चीनी का आवंटन लाभार्थियों को 13.50 रुपये प्रति किलो की दर से करती हैं। ......आर एस राणा

चीनी पर सब्सिडी नहीं



केंद्र सरकार ने 4,500 करोड़ रुपये सब्सिडी वापस ले ली, जो राज्यों को सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के माध्यम से बिकने वाली सब्सिडीयुक्त चीनी पर दी जाती थी। अब माना जा रहा है कि यह राज्यों का दायित्व होगा। 2017-18 के लिए इस मद में आवंटन घटाकर 200 करोड़ रुपये कर दिया गया है, इसी से राज्यों को बकाये का भुगतान करना है।
वित्त मंत्री के भाषण में सब्सिडी शब्द दरअसल सिर्फ एक बार आया, जब उन्होंने मिट्टी के नमूनों के परीक्षण और उनमें पोषक तत्वों की जांच के लिए कृषि विज्ञान केंद्र के तहत शिक्षित स्थानीय कारोबारियों द्वारा 1,000 छोटी प्रयोगशालाओं के लिए कर्ज से जुड़ी सब्सिडी का हवाला दिया। सरकार पर कुल सब्सिडी बोझ 2017-18 में मामूली रूप से 5 प्रतिशत बढ़ेगा।
खाद्य सब्सिडी अगले साल करीब 8 प्रतिशत बढ़कर 145,338.60 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है। वहीं उर्वरक सब्सिडी पिछले साल के 70,000 करोड़ रुपये के स्तर पर, पेट्रोलियम सब्सिडी कम होकर 2,532 करोड़ रुपये रहने की उम्मीद है, जिससे पता चलता है कि सरकार ने पेट्रोलियम के वैश्विक दाम में संभावित बढ़ोतरी को इसमें शामिल नहीं किया है। सही मायने में यह पेट्रोलियम क्षेत्र में कीमतों में सुधार के लाभ की वजह से है। वहीं 2017-18 में एलपीजी सब्सिडी में 14 प्रतिशत गिरावट आने का अनुमान है। चालू वर्ष के दौरान उज्ज्वला योजना के तहत सरकार ने गरीबों को एलपीजी कनेक् शन देने के लिए पुनरीक्षित अनुमान में बजट 500 करोड़ रुपये बढ़ा दिया, जिसके लिए बजट में 2,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था। 

कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का रुख

अमेरिका में कच्चे तेल का भंडार 65 लाख बैरल बढ़ गया है, ऐसे में इसकी कीमतों पर दबाव बढ़ता जा रहा है। आज लगातार चौथे दिन कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का रुख है। भाव बेहद छोटे दायरे में है। नायमैक्स पर क्रूड की भाव 54 डॉलर के नीचे और ब्रेंट 56 डॉलर के ऊपर है। अमेरिका में ब्याज दरें नहीं बढ़ने से सोना चमक गया है। ग्लोबल मार्केट में सोने का दाम फिर से 1215 डॉलर के पार है। सोना में करीब 1 फीसदी ऊपर कारोबार हो रहा है। वहीं चांदी में भी करीब 0.5 फीसदी की तेजी आई है।

सप्लाई की किल्लत की आशंका से एलएमई पर कॉपर का दाम 3 महीने की ऊंचाई पर चला गया है। कल ये 6000 डॉलर के पार चला गया था। दुनिया की सबसे बड़ी कॉपर की खदान बीएचपी बिलिटन में मजदूरों में हड़ताल पर जाने की चेतावनी दी है। ऐसे में कॉपर की सप्लाई पर असर पड़ सकता है।

ग्वार सीड, सरसों और क्रुड में एनसीडीईएक्स-एमसीएक्स की 2 फरवरी की टिप्स

खरीदें - क्रुड पाम तेल पर फरवरी महीने के वायदा अनुबंध में 3,580-3,595 रुपये पर खरीदें..........3,560 रुपये का स्टोप लोस लगाए ( तथा पहला टारगेट है 3,610 और दूसरा टारगेट है 3,630 रुपये का
ग्वार सीड खरीदें - फरवरी वायदा के अनुबंध में 3,270 और 3,280 रुपये प्रति क्विंटल पर खरीदें............3,220 पर स्टॉप लोस लगाए............. टारेगट 3,350 रुपये प्रति क्विंटल का है।
ग्वार गम खरीदें - फरवरी वायदा के अनुबंध में 6,340 और 6,350 रुपये प्रति क्विंटल पर खरीदें............6,300 पर स्टॉप लोस लगाए............. टारेगट 6,400 और 6,430 रुपये प्रति क्विंटल का है।
सरसों बेचे -सरसों के अप्रैल वायदा अनुबंध में भाव 3,880....3,890 पर बेचे, तथा 3,910 का स्टोप लोस लगाए ............इसका टारगेट है 3,850.... 3,810 रुपये का
(मार्किट की खबर के हिसाब से यह केवल सलाहभर है, जोखिम के लिए हमारी कोई जिम्मेदारी नहीं है।)

01 फ़रवरी 2017

ओएमएमएस के तहत गेहूं की बिक्री जारी रहेगी-एफसीआई

आर एस राणा
नई दिल्ली। भले ही केंद्रीय पूल में का स्टॉक तय मानकों बफर स्टॉक से कम है लेकिन भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) खुले बाजार बिक्री योजना (ओएमएसएस) के तहत गेहूं की बिक्री जारी रखेंगी। एफसीआई ने फरवरी के पहले सप्ताह के लिए दिल्ली में 16,000 टन गेहूं बेचने के लिए निविदा भी जारी कर दी है।
एफसीआई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि ओएमएसएस के तहत गेहूं की बिक्री जारी रहेगी तथा चालू सीजन में ओएमएसएस के तहत अभी तक 40.70 लाख टन गेहूं की बिक्री हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक 51.60 लाख टन गेहूं बेचा गया था।
ओएमएसएस के तहत अभी तक हुई कुल बिक्री में हरियाणा में 7.52 लाख टन, मध्य प्रदेश में 6.47 लाख टन, पंजाब में 6 लाख टन, दिल्ली में 3.47 लाख टन, पश्चिमी बंगाल में 5.50 लाख टन, जम्मू-कश्मीर में 1.74 लाख टन और तलिनाडु में 1.55 लाख टन गेहूं की बिक्री हुई है।.........आर एस राणा

कृषि क्षेत्र को 10 लाख करोड़ रुपये का कर्ज उपलब्ध कराने का लक्ष्य -बजट 2017

दिल्ली । वित्त मंत्री अरुण जेटली ने इस साल के बजट में कृषि पर विशेष जोर देते हुए किसानों की आय अगले पांच साल में दोगुना करने की सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई है तथा कृषि क्षेत्र के लिए वित्त वर्ष 2017-18 में कर्ज का लक्ष्य एक लाख करोड़ रुपये बढ़ाकर रिकार्ड 10 लाख करोड़ रुपये कर दिया है।
जेटली ने बुधवार को अपने बजट भाषण में कहा, ‘वित्त वर्ष 2017-18 में कृषि लोन के लिये लक्ष्य रिकार्ड 10 लाख करोड़ रुपये तय किया गया है।‘ पूर्वोत्तर तथा जम्मू कश्मीर में सरकार ने कृषि क्षेत्र के लिए कर्ज प्रवाह सुनिश्चित करने के लिये विशेष उपाय करेगी।
सरकार तीन लाख रुपये तक अल्पकालीन फसल कर्ज सब्सिडीशुदा सात प्रतिशत ब्याज दर पर उपलब्ध कराती है। कर्ज के समय पर भुगतान के लिये किसानों को प्रोत्साहन के रूप में तीन प्रतिशत की अतिरिक्त राहत दी जाती है।
इस प्रकार, फसल ऋण पर प्रभावी ब्याज दर 4.0 प्रतिशत बैठती है। वित्त मंत्री ने रेखांकित किया कि चालू वित्त वर्ष में मानूसन के बेहतर रहने से कृषि क्षेत्र की वृद्धि दर चालू वित्त वर्ष में 4.1 प्रतिशत रहेगी। खरीफ और रबी दोनों फसलों की बुवाई अधिक रही है।
जेटली ने कहा कि पिछले साल शुरू की गयी नई फसल बीमा योजना ‘प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना’ के लिये चालू वित्त वर्ष में आवंटन बढ़ाकर 13,240 करोड़ रपये किया गया है जो बजट प्रस्ताव में पहले 5,500 करोड़ रुपये था। अगले वित्त वर्ष के लिए बजट में इस योजना के लिए 9,000 करोड़ रपये की व्यवस्था की गयी है। उन्होंने कहा, ‘प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का दायरा 2016-17 में 30 प्रतिशत फसल क्षेत्र से बढ़ाकर 2017-18 में 40 प्रतिशत तथा 2018-19 में 50 प्रतिशत किया जाएगा।‘
वित्त मंत्री जेटली ने कहा कि अलग से 5,000 करोड़ रुपये के कोष से सूक्ष्म सिंचाई कोष बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि किसानों के लिये डेयरी अतिरिक्त आय का प्रमुख जरिया है। ऐसे में सरकार 2,000 करोड़ रपये के शुरूआती कोष से डेयरी प्रसंस्करण कोष गठित करेगी जिसे तीन साल में बढ़ाकर 8,000 करोड़ रुपये किया जाएगा।
जेटली ने यह भी कहा कि सरकार ठेका कृषि मॉडल कानून बनाएगी जिसे राज्यों को उपलब्ध कराया जाएगा।
दिल्ली (जेएनएन)। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने इस साल के बजट में कृषि पर विशेष जोर देते हुए किसानों की आय अगले पांच साल में दोगुना करने की सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई है तथा कृषि क्षेत्र के लिए वित्त वर्ष 2017-18 में कर्ज का लक्ष्य एक लाख करोड़ रुपये बढ़ाकर रिकार्ड 10 लाख करोड़ रुपये कर दिया है। - See more at: http://www.jagran.com/business/biz-budget-announcement-for-farmers-15462190.html?src=JAG-NAV-BUS-ART#sthash.15zV2Zao.dpuf
दिल्ली (जेएनएन)। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने इस साल के बजट में कृषि पर विशेष जोर देते हुए किसानों की आय अगले पांच साल में दोगुना करने की सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई है तथा कृषि क्षेत्र के लिए वित्त वर्ष 2017-18 में कर्ज का लक्ष्य एक लाख करोड़ रुपये बढ़ाकर रिकार्ड 10 लाख करोड़ रुपये कर दिया है। - See more at: http://www.jagran.com/business/biz-budget-announcement-for-farmers-15462190.html?src=JAG-NAV-BUS-ART#sthash.15zV2Zao.dpuf
दिल्ली (जेएनएन)। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने इस साल के बजट में कृषि पर विशेष जोर देते हुए किसानों की आय अगले पांच साल में दोगुना करने की सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई है तथा कृषि क्षेत्र के लिए वित्त वर्ष 2017-18 में कर्ज का लक्ष्य एक लाख करोड़ रुपये बढ़ाकर रिकार्ड 10 लाख करोड़ रुपये कर दिया है।
जेटली ने बुधवार को अपने बजट भाषण में कहा, ‘वित्त वर्ष 2017-18 में कृषि लोन के लिये लक्ष्य रिकार्ड 10 लाख करोड़ रुपये तय किया गया है।‘ पूर्वोत्तर तथा जम्मू कश्मीर में सरकार ने कृषि क्षेत्र के लिए कर्ज प्रवाह सुनिश्चित करने के लिये विशेष उपाय करेगी।
सरकार तीन लाख रुपये तक अल्पकालीन फसल कर्ज सब्सिडीशुदा सात प्रतिशत ब्याज दर पर उपलब्ध कराती है। कर्ज के समय पर भुगतान के लिये किसानों को प्रोत्साहन के रूप में तीन प्रतिशत की अतिरिक्त राहत दी जाती है।
इस प्रकार, फसल ऋण पर प्रभावी ब्याज दर 4.0 प्रतिशत बैठती है। वित्त मंत्री ने रेखांकित किया कि चालू वित्त वर्ष में मानूसन के बेहतर रहने से कृषि क्षेत्र की वृद्धि दर चालू वित्त वर्ष में 4.1 प्रतिशत रहेगी। खरीफ और रबी दोनों फसलों की बुवाई अधिक रही है।
जेटली ने कहा कि पिछले साल शुरू की गयी नई फसल बीमा योजना ‘प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना’ के लिये चालू वित्त वर्ष में आवंटन बढ़ाकर 13,240 करोड़ रपये किया गया है जो बजट प्रस्ताव में पहले 5,500 करोड़ रुपये था। अगले वित्त वर्ष के लिए बजट में इस योजना के लिए 9,000 करोड़ रपये की व्यवस्था की गयी है। उन्होंने कहा, ‘प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का दायरा 2016-17 में 30 प्रतिशत फसल क्षेत्र से बढ़ाकर 2017-18 में 40 प्रतिशत तथा 2018-19 में 50 प्रतिशत किया जाएगा।‘
वित्त मंत्री जेटली ने कहा कि अलग से 5,000 करोड़ रुपये के कोष से सूक्ष्म सिंचाई कोष बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि किसानों के लिये डेयरी अतिरिक्त आय का प्रमुख जरिया है। ऐसे में सरकार 2,000 करोड़ रपये के शुरूआती कोष से डेयरी प्रसंस्करण कोष गठित करेगी जिसे तीन साल में बढ़ाकर 8,000 करोड़ रुपये किया जाएगा।
जेटली ने यह भी कहा कि सरकार ठेका कृषि मॉडल कानून बनाएगी जिसे राज्यों को उपलब्ध कराया जाएगा।
- See more at: http://www.jagran.com/business/biz-budget-announcement-for-farmers-15462190.html?src=JAG-NAV-BUS-ART#sthash.15zV2Zao.dpuf
दिल्ली (जेएनएन)। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने इस साल के बजट में कृषि पर विशेष जोर देते हुए किसानों की आय अगले पांच साल में दोगुना करने की सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई है तथा कृषि क्षेत्र के लिए वित्त वर्ष 2017-18 में कर्ज का लक्ष्य एक लाख करोड़ रुपये बढ़ाकर रिकार्ड 10 लाख करोड़ रुपये कर दिया है।
जेटली ने बुधवार को अपने बजट भाषण में कहा, ‘वित्त वर्ष 2017-18 में कृषि लोन के लिये लक्ष्य रिकार्ड 10 लाख करोड़ रुपये तय किया गया है।‘ पूर्वोत्तर तथा जम्मू कश्मीर में सरकार ने कृषि क्षेत्र के लिए कर्ज प्रवाह सुनिश्चित करने के लिये विशेष उपाय करेगी।
सरकार तीन लाख रुपये तक अल्पकालीन फसल कर्ज सब्सिडीशुदा सात प्रतिशत ब्याज दर पर उपलब्ध कराती है। कर्ज के समय पर भुगतान के लिये किसानों को प्रोत्साहन के रूप में तीन प्रतिशत की अतिरिक्त राहत दी जाती है।
इस प्रकार, फसल ऋण पर प्रभावी ब्याज दर 4.0 प्रतिशत बैठती है। वित्त मंत्री ने रेखांकित किया कि चालू वित्त वर्ष में मानूसन के बेहतर रहने से कृषि क्षेत्र की वृद्धि दर चालू वित्त वर्ष में 4.1 प्रतिशत रहेगी। खरीफ और रबी दोनों फसलों की बुवाई अधिक रही है।
जेटली ने कहा कि पिछले साल शुरू की गयी नई फसल बीमा योजना ‘प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना’ के लिये चालू वित्त वर्ष में आवंटन बढ़ाकर 13,240 करोड़ रपये किया गया है जो बजट प्रस्ताव में पहले 5,500 करोड़ रुपये था। अगले वित्त वर्ष के लिए बजट में इस योजना के लिए 9,000 करोड़ रपये की व्यवस्था की गयी है। उन्होंने कहा, ‘प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का दायरा 2016-17 में 30 प्रतिशत फसल क्षेत्र से बढ़ाकर 2017-18 में 40 प्रतिशत तथा 2018-19 में 50 प्रतिशत किया जाएगा।‘
वित्त मंत्री जेटली ने कहा कि अलग से 5,000 करोड़ रुपये के कोष से सूक्ष्म सिंचाई कोष बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि किसानों के लिये डेयरी अतिरिक्त आय का प्रमुख जरिया है। ऐसे में सरकार 2,000 करोड़ रपये के शुरूआती कोष से डेयरी प्रसंस्करण कोष गठित करेगी जिसे तीन साल में बढ़ाकर 8,000 करोड़ रुपये किया जाएगा।
जेटली ने यह भी कहा कि सरकार ठेका कृषि मॉडल कानून बनाएगी जिसे राज्यों को उपलब्ध कराया जाएगा।
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दिल्ली (जेएनएन)। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने इस साल के बजट में कृषि पर विशेष जोर देते हुए किसानों की आय अगले पांच साल में दोगुना करने की सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई है तथा कृषि क्षेत्र के लिए वित्त वर्ष 2017-18 में कर्ज का लक्ष्य एक लाख करोड़ रुपये बढ़ाकर रिकार्ड 10 लाख करोड़ रुपये कर दिया है।
जेटली ने बुधवार को अपने बजट भाषण में कहा, ‘वित्त वर्ष 2017-18 में कृषि लोन के लिये लक्ष्य रिकार्ड 10 लाख करोड़ रुपये तय किया गया है।‘ पूर्वोत्तर तथा जम्मू कश्मीर में सरकार ने कृषि क्षेत्र के लिए कर्ज प्रवाह सुनिश्चित करने के लिये विशेष उपाय करेगी।
सरकार तीन लाख रुपये तक अल्पकालीन फसल कर्ज सब्सिडीशुदा सात प्रतिशत ब्याज दर पर उपलब्ध कराती है। कर्ज के समय पर भुगतान के लिये किसानों को प्रोत्साहन के रूप में तीन प्रतिशत की अतिरिक्त राहत दी जाती है।
इस प्रकार, फसल ऋण पर प्रभावी ब्याज दर 4.0 प्रतिशत बैठती है। वित्त मंत्री ने रेखांकित किया कि चालू वित्त वर्ष में मानूसन के बेहतर रहने से कृषि क्षेत्र की वृद्धि दर चालू वित्त वर्ष में 4.1 प्रतिशत रहेगी। खरीफ और रबी दोनों फसलों की बुवाई अधिक रही है।
जेटली ने कहा कि पिछले साल शुरू की गयी नई फसल बीमा योजना ‘प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना’ के लिये चालू वित्त वर्ष में आवंटन बढ़ाकर 13,240 करोड़ रपये किया गया है जो बजट प्रस्ताव में पहले 5,500 करोड़ रुपये था। अगले वित्त वर्ष के लिए बजट में इस योजना के लिए 9,000 करोड़ रपये की व्यवस्था की गयी है। उन्होंने कहा, ‘प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का दायरा 2016-17 में 30 प्रतिशत फसल क्षेत्र से बढ़ाकर 2017-18 में 40 प्रतिशत तथा 2018-19 में 50 प्रतिशत किया जाएगा।‘
वित्त मंत्री जेटली ने कहा कि अलग से 5,000 करोड़ रुपये के कोष से सूक्ष्म सिंचाई कोष बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि किसानों के लिये डेयरी अतिरिक्त आय का प्रमुख जरिया है। ऐसे में सरकार 2,000 करोड़ रपये के शुरूआती कोष से डेयरी प्रसंस्करण कोष गठित करेगी जिसे तीन साल में बढ़ाकर 8,000 करोड़ रुपये किया जाएगा।
जेटली ने यह भी कहा कि सरकार ठेका कृषि मॉडल कानून बनाएगी जिसे राज्यों को उपलब्ध कराया जाएगा।
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दिल्ली (जेएनएन)। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने इस साल के बजट में कृषि पर विशेष जोर देते हुए किसानों की आय अगले पांच साल में दोगुना करने की सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई है तथा कृषि क्षेत्र के लिए वित्त वर्ष 2017-18 में कर्ज का लक्ष्य एक लाख करोड़ रुपये बढ़ाकर रिकार्ड 10 लाख करोड़ रुपये कर दिया है।
जेटली ने बुधवार को अपने बजट भाषण में कहा, ‘वित्त वर्ष 2017-18 में कृषि लोन के लिये लक्ष्य रिकार्ड 10 लाख करोड़ रुपये तय किया गया है।‘ पूर्वोत्तर तथा जम्मू कश्मीर में सरकार ने कृषि क्षेत्र के लिए कर्ज प्रवाह सुनिश्चित करने के लिये विशेष उपाय करेगी।
सरकार तीन लाख रुपये तक अल्पकालीन फसल कर्ज सब्सिडीशुदा सात प्रतिशत ब्याज दर पर उपलब्ध कराती है। कर्ज के समय पर भुगतान के लिये किसानों को प्रोत्साहन के रूप में तीन प्रतिशत की अतिरिक्त राहत दी जाती है।
इस प्रकार, फसल ऋण पर प्रभावी ब्याज दर 4.0 प्रतिशत बैठती है। वित्त मंत्री ने रेखांकित किया कि चालू वित्त वर्ष में मानूसन के बेहतर रहने से कृषि क्षेत्र की वृद्धि दर चालू वित्त वर्ष में 4.1 प्रतिशत रहेगी। खरीफ और रबी दोनों फसलों की बुवाई अधिक रही है।
जेटली ने कहा कि पिछले साल शुरू की गयी नई फसल बीमा योजना ‘प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना’ के लिये चालू वित्त वर्ष में आवंटन बढ़ाकर 13,240 करोड़ रपये किया गया है जो बजट प्रस्ताव में पहले 5,500 करोड़ रुपये था। अगले वित्त वर्ष के लिए बजट में इस योजना के लिए 9,000 करोड़ रपये की व्यवस्था की गयी है। उन्होंने कहा, ‘प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का दायरा 2016-17 में 30 प्रतिशत फसल क्षेत्र से बढ़ाकर 2017-18 में 40 प्रतिशत तथा 2018-19 में 50 प्रतिशत किया जाएगा।‘
वित्त मंत्री जेटली ने कहा कि अलग से 5,000 करोड़ रुपये के कोष से सूक्ष्म सिंचाई कोष बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि किसानों के लिये डेयरी अतिरिक्त आय का प्रमुख जरिया है। ऐसे में सरकार 2,000 करोड़ रपये के शुरूआती कोष से डेयरी प्रसंस्करण कोष गठित करेगी जिसे तीन साल में बढ़ाकर 8,000 करोड़ रुपये किया जाएगा।
जेटली ने यह भी कहा कि सरकार ठेका कृषि मॉडल कानून बनाएगी जिसे राज्यों को उपलब्ध कराया जाएगा।
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जेटली ने बुधवार को अपने बजट भाषण में कहा, ‘वित्त वर्ष 2017-18 में कृषि लोन के लिये लक्ष्य रिकार्ड 10 लाख करोड़ रुपये तय किया गया है।‘ पूर्वोत्तर तथा जम्मू कश्मीर में सरकार ने कृषि क्षेत्र के लिए कर्ज प्रवाह सुनिश्चित करने के लिये विशेष उपाय करेगी।
सरकार तीन लाख रुपये तक अल्पकालीन फसल कर्ज सब्सिडीशुदा सात प्रतिशत ब्याज दर पर उपलब्ध कराती है। कर्ज के समय पर भुगतान के लिये किसानों को प्रोत्साहन के रूप में तीन प्रतिशत की अतिरिक्त राहत दी जाती है।
इस प्रकार, फसल ऋण पर प्रभावी ब्याज दर 4.0 प्रतिशत बैठती है। वित्त मंत्री ने रेखांकित किया कि चालू वित्त वर्ष में मानूसन के बेहतर रहने से कृषि क्षेत्र की वृद्धि दर चालू वित्त वर्ष में 4.1 प्रतिशत रहेगी। खरीफ और रबी दोनों फसलों की बुवाई अधिक रही है।
जेटली ने कहा कि पिछले साल शुरू की गयी नई फसल बीमा योजना ‘प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना’ के लिये चालू वित्त वर्ष में आवंटन बढ़ाकर 13,240 करोड़ रपये किया गया है जो बजट प्रस्ताव में पहले 5,500 करोड़ रुपये था। अगले वित्त वर्ष के लिए बजट में इस योजना के लिए 9,000 करोड़ रपये की व्यवस्था की गयी है। उन्होंने कहा, ‘प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का दायरा 2016-17 में 30 प्रतिशत फसल क्षेत्र से बढ़ाकर 2017-18 में 40 प्रतिशत तथा 2018-19 में 50 प्रतिशत किया जाएगा।‘
वित्त मंत्री जेटली ने कहा कि अलग से 5,000 करोड़ रुपये के कोष से सूक्ष्म सिंचाई कोष बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि किसानों के लिये डेयरी अतिरिक्त आय का प्रमुख जरिया है। ऐसे में सरकार 2,000 करोड़ रपये के शुरूआती कोष से डेयरी प्रसंस्करण कोष गठित करेगी जिसे तीन साल में बढ़ाकर 8,000 करोड़ रुपये किया जाएगा।
जेटली ने यह भी कहा कि सरकार ठेका कृषि मॉडल कानून बनाएगी जिसे राज्यों को उपलब्ध कराया जाएगा।
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