05 मार्च 2014
Gold remains weak on sluggish demand, global cues
New Delhi, Mar 5. Extending losses for the second
day, gold prices declined by another Rs 140 to Rs 31,100 per
ten gram in the national capital today on sluggish demand amid
a lower global trend.
However, silver recovered by Rs 70 to Rs 47,400 per kg
on scattered buying by industrial units.
Traders said besides sluggish demand at prevailing higher
levels, a weak global trend where gold declined from a 17-week
high following easing tensions between Russia and Ukraine
mainly reduced demand for the precious metals as a safe haven.
On the other hand, some buying by industrial units helped
silver to trade higher, they said.
Gold in New York, which sets price trend on the domestic
front, fell by 1.18 per cent to USD 1334.40 an ounce.
On the domestic front, gold of 99.9 and 99.5 per cent
purity fell by Rs 140 each to Rs 31,100 and Rs 30,900 per ten
gram respectively. It had shed Rs 60 yesterday. Sovereign
declined by Rs 50 to Rs 25,450 per piece of eight gram.
On the other hand, silver ready recovered by Rs 70 to Rs
47,400 per kg and weekly-based delivery by similar margin to
Rs 47,400 per kg, after losing Rs 570 in last trade.
Meanwhile, silver coins lacked necessary follow up support
and plunged by Rs 1,000 to Rs 87,000 for buying and Rs 88,000
for selling of 100 pieces.
Farm yields may drop if climate change impact not addressed
New Delhi, Mar 5. Agriculture yields are likely to
decline to 9 per cent in the next 25 years if the climate
change impact is not mitigated, Minister of State for
Agriculture Tariq Anwar said today.
He also said biotechnology is expected to play a major
role in improving farm yields and healthy scientific debate is
required on this contentious issue.
"It is increasingly being observed that occurrences of
certain natural calamities such as cyclones and drought have
become more frequent and that this is related to climate
change induced by global warming," Anwar said addressing an
Assocham event on calamities.
The warming trend in India from the year 1901 to 2000 is
estimate to be 0.4 degree centigrade. "The impact of further
warming is likely to aggravate yield fluctuations of many
crops," he said.
If climate change impact is not mitigated, Anwar said that
farm yields are expected to drop by up to 9 per cent in the
next 25 years from the level of 4.5 per cent in 2010.
Besides farm yields, climate change is expected to
aggravate prevalence of pests and insects, decline in soil
quality and higher heat stress among cattle affected milk
productivity, he said.
However, the government is making all efforts to ensure
that the goal of food security is not compromised by
challenges posed by climate change. Several measures are being
taken to achieve sustainable agriculture through mission mode,
he added.
Emphasising the need to focus on biotechnology in
improving farm yields, Anwar said: "There is need for a
healthy scientific debate on the whole topic since it has been
quite contentious not only in India but across the world with
strong opinion being expressed on both sides of debate."
Currently, government has allowed commercial cultivation
of Bt cotton, while moratorium has been imposed on Bt brinjal
in the wake of safety concerns.
Speaking on the occasion, Prabhudayal Meena, Special
Secretary in Rural Development Ministry expressed concern that
improper use of land is leading to disasters and affecting
climate change.
"To ensure better utilisation of scarce land resource,
the government is in the process of framing land use policy in
consultation with state governments," he said.
Michael J Ernst, South Asia Regional Advisor for
Disaster Risk Reduction at the Office of US Foreign Disaster
Assistance (OFDA) emphasised the role of private sector in
addressing the challenges of climate change.
04 मार्च 2014
खाद्य तेल आयात बढ़ेगा पर पाम तेल में कमी
दलते समीकरण
पाम तेल व सोया तेल के मूल्य में अंतर कम हुआ
सोया तेल आयात करने में भारतीय खरीदारों की दिलचस्पी
मलेशिया व इंडोनेशिया में सूखे के चलते पाम तेल उच्च स्तर पर
इस साल पाम तेल आयात 6 फीसदी कम होने के आसार
सोया तेल और पाम तेल के मूल्य में अंतर कम होने की वजह से भारत का पाम तेल आयात घटने की संभावना है। अनुमान है कि अगले अक्टूबर में समाप्त होने वाले मार्केटिंग वर्ष में आयात छह फीसदी कम रह सकता है। भारतीय खरीदार मूल्य में अंतर कम होने के कारण सोया तेल आयात करने में ज्यादा दिलचस्पी ले रहे हैं। कारोबारियों का अनुमान है कि 17 माह के उच्चतम स्तर पर पहुंचने मलेशियाई पाम तेल के दाम भारत की मांग कम रहने से सुस्त पड़ सकते हैं।
यहां एक इंडस्ट्री कांफ्रेंस के मौके पर एक व्यापारी ने कहा कि क्रूड पाम तेल 940-950 डॉलर प्रति टन (लागत, बीमा व भाड़ा खर्च) पर भारत में सप्लाई करने का ऑफर किया जा रहा है। पाम तेल का भाव सोयाबीन के डिगम तेल के बराबर ही चल रहे हैं। आमतौर पर पाम तेल के दाम सोयाबीन के मुकाबले करीब 100-150 डॉलर प्रति टन कम रहते हैं। लेकिन पिछले एक माह के दौरान पाम तेल के दाम करीब दस फीसदी बढ़ चुके हैं।
बुर्शा मलेशिया डेरिवेटिव्स में मई डिलीवरी क्रूड पाम तेल के दाम 2860 रिंगिट का उच्चतम स्तर छू गए। यह स्तर सितंबर 2012 के बाद का सबसे ज्यादा है। बाद में भाव 2836 रिंगिट (870 डॉलर) प्रति टन पर रह गए। पाम तेल में भारी तेजी आने की इस वजह से मूल्य में अंतर काफी कम हो गया है।
मुंबई की ब्रोकरेज फर्म सनविन ग्रुप के चीफ एक्जीक्यूटिव संदीप बाजौरिया ने कहा कि इंडोनेशिया और मलेशिया में सूखे के हालात हैं। इससे पाम तेल की तेजी को बढ़ावा मिल रहा है। इस साल भारत का आयात कम रहने की संभावना है। अनुमान है कि अगले अक्टूबर में समाप्त हो रहे मार्केटिंग वर्ष में 78 लाख टन पाम तेल का आयात हो सकता है। जबकि पिछले साल 83 लाख टन आयात रहा था।
व्यापारियों के अनुसार इस साल भारत का कुल खाद्य तेल आयात 9 फीसदी बढ़कर 113 लाख टन तक पहुंचने की संभावना है। पिछले साल 104 लाख टन आयात रहा था। सॉल्वेंट एक्सट्रेक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर बी. वी. मेहता ने कहा कि अगर भारतीय मांग की बात करें तो इसमें हर साल करीब 3-4 फीसदी का इजाफा हो रहा है।
पिछले साल भारत के कई क्षेत्रों में आंधी-तूफान के चलते सरसों की पैदावार घट सकता है। इससे सोयाबीन तेल के आयात पर निर्भरता और बढ़ जाएगी। प्रतिकूल मौसम से तिलहन की पैदावा में गिरावट का अनुमान लगाना अभी जल्दबाजी होगी लेकिन मोटे तौर पर कहा जा सकता है कि फसल में गिरावट दो लाख से सात लाख टन के बीच रह सकती है। (BS Hindi)
चीनी मिलों को सब्सिडी देने के लिए अधिसूचना
सरकार ने चालू वित्त वर्ष 2013-14 में फरवरी व मार्च के दौरान रॉ शुगर निर्यात पर 3300 रुपये प्रति टन सब्सिडी देने के लिए अधिसूचना जारी कर दी है। आर्थिक मामलों की कैबिनेट कमेटी (सीसीईए) ने चीनी के मूल्य कम होने से आर्थिक तंगी से गुजर रही मिलों को मदद देने के लिए फरवरी माह में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। अधिसूचना में कहा गया है कि फरवरी और मार्च में रॉ शुगर निर्यात पर सब्सिडी 3300 रुपये प्रति टन होगी।
प्रत्येक दो महीने के बाद सब्सिडी रेट की समीक्षा होगी। सब्सिडी की दर रुपया-अमेरिकी डॉलर के औसत एक्सचेंज रेट के आधार पर तय की जाएगी। हालांकि इस सब्सिडी के लिए मात्रात्मक सीमा 40 लाख टन रहेगी। मार्केटिंग वर्ष 2013-14 और 2014-15 में उत्पादित रॉ शुगर इसी अवधि में निर्यात करने पर सब्सिडी दी जाएगी।
रॉ शुगर का उत्पादन करने वाली मिलें स्वयं अथवा निर्यातकों के जरिये इसका निर्यात करती हैं तो उन्हें सब्सिडी मिलेगी। शिपमेंट की तारीख के आधार पर सब्सिडी की दर तय होगी। दुनिया के दूसरे सबसे बड़े चीनी उत्पादक भारत में पिछला स्टॉक बड़ी मात्रा में बचा है। (BS Hindi)
गेहूं की खरीद में आढ़तियों को मिलेगा कम कमीशन
आर एस राणा नई दिल्ली | Mar 03, 2014, 14:46PM IS
कटौती
पंजाब और हरियाणा के आढ़तियों को पहले की तरह ही 2.5 फीसदी कमीशन मिलेगा। लेकिन मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे अन्य राज्यों में मध्यस्थ को तय कमीशन 33.75 रुपये प्रति क्विंटल की दर से मिलेगा
केंद्र सरकार ने खाद्य सब्सिडी में कटौती करने के लिए कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। इसी कड़ी में खाद्य मंत्रालय ने रबी विपणन सीजन 2014-15 में गेहूं की खरीद में आढ़तियों को दिए जाने वाले कमीशन में कटौती कर दी है।
हालांकि पंजाब और हरियाणा के आढ़तियों को पहले की तरह 2.5 फीसदी कमीशन ही मिलेगा, लेकिन अन्य राज्यों मध्य प्रदेश और राजस्थान आदि में मध्यस्थ को तय कमीशन 33.75 रुपये प्रति क्विंटल की दर से मिलेगा।
खाद्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बिजनेस भास्कर को बताया कि गेहूं की खरीद में आढ़तियों को दिया जाने वाला कमीशन फीसदी के आधार पर नहीं, बल्कि तय आधार पर मिलेगा।
रबी विपणन सीजन 2013-14 के लिए कमीशन को पिछले साल के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के आधार पर तय किया है। पिछले रबी विपणन सीजन में गेहूं का एमएसपी 1,350 रुपये प्रति क्विंटल था। इसके आधार पर 2.5 फीसदी की दर से कमीशन 33.75 रुपये प्रति क्विंटल होता है।
मालूम हो कि अप्रैल से शुरू होने वाले नए रबी विपणन सीजन 2014-15 के लिए केंद्र सरकार ने गेहूं का एमएसपी 1,400 रुपये प्रति तय किया हुआ है जिसके आधार पर 2.5 फीसदी की दर से कमीशन 35 रुपये प्रति क्विंटल होता है। पंजाब और हरियाणा में गेहूं की सरकारी खरीद पूर्व की भांति 2.5 फीसदी कमीशन के आधार पर ही होगी, क्योंकि इन राज्यों के मंडी कानून में यह प्रावधान किया गया है।
इसलिए पंजाब और हरियाणा के आढ़तियों को रबी विपणन सीजन 2014-15 में गेहूं की खरीद पर 2.5 फीसदी के आधार पर ही कमीशन मिलेगा। मध्य प्रदेश और राजस्थान तथा अन्य राज्यों में गेहूं की सरकारी खरीद सहकारी संस्थाओं के अलावा स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से की जाती है। पंजाब और हरियाणा को छोड़ इन राज्यों में गेहूं की सरकारी खरीद में मध्यस्थ को 33.75 रुपये प्रति क्विंटल के आधार पर तय कमीशन ही मिलेगा। (Business Bhaskar....R S Rana)
बारिश व ओलों से सरसों को नुकसान, चढ़े दाम
बारिश व ओलों से सरसों को नुकसान होने का असर इसकी कीमतों पर दिखने लगा है। पिछले एक सप्ताह में इसके भाव करीब 200 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ चुके हैं। यह तेजी राजस्थान के कुछ इलाकों से सरसों की नई आवक के बावजूद आई है। जानकारों के मुताबिक सरसों की आवक जोर नहीं पकडऩे तक कीमतों में तेजी बरकरार रह सकती है। प्रमुख उत्पादक राजस्थान की जयपुर मंडी में एक सप्ताह पहले 3,530 रुपये बिकने वाली सरसों आज बढ़कर 3,725 रुपये प्रति क्विंटल बिकी। नैशनल कमोडिटी ऐंड डेरिवेटिव एक्सचेंज लिमिटेड (एनसीडीईएक्स) में 25 फरवरी को सरसों अप्रैल अनुबंध 3,406 रुपये पर बंद हुआ था, जिसने आज 3,620 रुपये प्रति क्विंटल का ऊपरी स्तर छू लिया। हालांकि बाद में इसमें गिरावट आई।
ऐंजल ब्रोकिंग के सह उपाध्यक्ष (शोध-जिंस) अनुज गुप्ता ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया कि बारिश से सरसों को नुकसान की खबर के बाद से ही इसके भाव चढ़ रहे हैं। सप्ताह भर में सरसों करीब 200 रुपये प्रति क्विंटल महंगी हुई है। कमोडिटी इनसाइट डॉट कॉम के वरिष्ठï जिंस विश्लेषक प्रशांत कपूर भी मानते हैं कि ओलों से नुकसान के बाद सरसों की कीमतों में तेजी आई है। इसके अलावा अंतरराष्टï्रीय बाजार में खाद्य तेलों में तेजी का असर भी सरसों की कीमतों पर पड़ रहा है। कपूर कहते हैं कि राजस्थान के कुछ इलाकों में नई सरसों की आवक भी शुरू हो गई है। बावजूद इसके दाम चढ़ रहे हैं।
अगले कुछ दिनों तक सरसों की कीमतों में खास गिरावट की उम्मीद नहीं है, क्योंकि बारिश से सरसों की नई आवक और देर होगी। सेंट्रल आर्गेनाइजेशन फॉर ऑयल इंडस्ट्री ऐंड ट्रेड (कोएट) के अध्यक्ष लक्ष्मीचंद अग्रवाल ने बताया कि पिछले सप्ताह राजस्थान के कोटा, अलवर समेत अन्य सरसों उत्पादक क्षेत्रों में बारिश के साथ ओले पड़े थे। राजस्थान के अलावा अन्य सरसों उत्पादक राज्यों में भी बारिश व ओले से नुकसान हुआ है। ऐसे में शुरुआती आकलन के मुताबिक सरसों की पैदावार 10 फीसदी तक घटने का अंदेशा है, जबकि इस साल रिकॉर्ड 82 लाख टन से ज्यादा सरसों पैदा होने की संभावना थी। चालू फसल वर्ष में 71.32 लाख हेक्टेअर में सरसों की बुआई हुई है, जो पिछले साल के मुकाबले 6 फीसदी ज्यादा है। (BS Hindi)
रबर उत्पादन में फिसला भारत
प्राकृतिक रबर उत्पादक देशों के संघ (एएनआरपीसी) के आंकड़ों के मुताबिक भारत 2013 में रबर उत्पादन के मामले में फिसलकर चीन और वियतनाम से नीचे 5वें पायदान पर आ गया है। इससे रबर बोर्ड और नीति-निर्माताओं को गहरा झटका लगा है। वर्ष 2012 में भारत चौथे स्थान पर था और इससे ऊपर थाईलैंड, इंडोनेशिया और मलेशिया थे। वर्ष 2013 में भारत का स्थान और गिर सकता था, लेकिन मलेशिया में उत्पादन में भारी गिरावट से भारत 5वें पायदान पर बना रहा।
पिछले वर्ष के दौरान विश्व के शीर्ष 9 उत्पादक देशों में से केवल भारत, मलेशिया और श्रीलंका के उत्पादन में ऋणात्मक वृद्धि दर्ज की गई है। वियतनाम और चीन के उत्पादन में वृद्धि चौंकाने वाली थी, क्योंकि ये देश कुछ वर्षों पहले इस सूची में काफी नीचे थे। वियतनाम में पहली बार प्राकृतिक रबर का उत्पादन 2013 में 10 लाख टन के आंकड़े से पार हुआ है। कुछ वर्षों पहले भारत उत्पादन सूची में थाईलैंड और इंडोनेशिया के बाद तीसरे स्थान पर था, लेकिन अब फिसलकर 5वें स्थान पर आ गया है। देश में वर्ष 2008 से 2013 के दौरान उत्पादकता में गिरावट आई है और यह उत्पादन में गिरावट की मुख्य वजह है। (BS Hindi)
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