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04 अप्रैल 2011

आधुनिकता के रंग में रंग जाएगा केएमपी एक्स-वे

फरीदाबाद. केएमपी (कुंडली-मानेसर-पलवल) एक्सप्रेस-वे के आसपास आने वाली गतिविधियों को लगभग तय कर दिया गया है। इन्हें अंतिम मंजूरी देने के लिए २६ मई को एक मीटिंग होगी, लेकिन यह माना जा रहा है कि जो गतिविधियां तय की गई हैं, उन्हें ही मंजूरी मिलेगी। इन गतिविधियों को एनसीआर लेबल की कमेटी से मंजूरी मिल चुकी है। इसके बाद अब स्टेट लेबल कमेटी से अप्रूवल मिलनी बाकी है। इस कमेटी से अप्रूवल मिलने के बाद इन गतिविधियों पर काम शुरू हो जाएगा। केएमपी के निर्माण का कार्य भी तेजी से जारी है। यह एक्सप्रेस-वे सात जिलों के विकास में मील का पत्थर साबित होगा। इन जिलों के विकास के लिए बेहतर गतिविधियों का खाका तैयार किया जा रहा है। कौन सी गतिविधियां होंगी : सोनीपत के कुंडली से तैयार किए जा रहे एक्सप्रेस-वे के दोनों तरफ दो-दो किलोमीटर तक बेहतर गतिविधियांे को लेकर अंतिम रूप दिया जा रहा है। इनमें सोनीपत व कुंडली के बीच मल्टी फंक्शनल कॉम्प्लेक्स व झज्जर के खरखौदा में एक्सपोज एमिनिटीस जिसमें होटल व अन्य गतिविधियां शामिल हैं। झज्जर के सांपला व रोहतक के बीच साइबर सिटी व मेडिसिटी, झज्जर व गुड़गांव के बीच मेडिसिटी बायोसिटी, गुड़गांव व सोहना के बीच वर्ल्ड ट्रेड सिटी, फैशन सिटी व एंटरटेनमेंट सिटी, मेवात व फरीदाबाद के बीच लेजर सिटी व पलवल के पृथला में ड्राइपोर्ट सिटी जैसी गतिविधियां शामिल हैं। क्या है केएमपी : सड़कों पर लगातार बढ़ रहे वाहनों के दबाव के सामने आज तमाम एक्सप्रेस-वे बौने नजर आ रहे हैं। इससे आए दिन लोगांे को जाम का सामना करना पड़ता है। इस समस्या से निपटने व वाहन चालकों की सहूलियत के लिए सरकार की तरफ से कई एक्सप्रेस-वे...

पड़ोस के कारोबार पर भी मानेसर का असर

मानेसर February 11, 2011 गुडग़ांव से सटा मानेसर औद्योगिक इकाइयों के लिए राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में सबसे पसंदीदा जगह बनता जा रहा है। राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-8 पर होने और कुंडली-मानेसर-पलवल (केएमपी) एक्सप्रेसवे बनने की वजह से इस क्षेत्र का महत्व और बढ़ गया है। रिहायशी परियोजनाओं के मामले में भी यह इलाका एनसीआर के दूसरे इलाकों को टक्कर दे रहा है। मानेसर में रियल एस्टेट के बाजार में विस्तार का असर दारुहेड़ा और राजस्थान से सटे इलाके जैसे कोटकासिम और अलवर पर भी पड़ रहा है।मानेसर में रियल एस्टेट बाजार को गति देने में केएमपी की बड़ी भूमिका बताई जा रही है। 1,800 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले 135 किलोमीटर के इस एक्सप्रेसवे से सटे मानेसर की प्रॉपर्टी की कीमतों में काफी तेजी आई है। मानेसर का विकास इंडस्ट्रियल मॉडल टाउनशिप (आईएमटी) के तौर पर हुआ है और इस शहर को चार चरण में विकसित करने की योजना बनाई गई थी। पहले चरण में हरियाणा स्टेट इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड ने 1,750 एकड़ जमीन को विकसित किया है। विकास हो गया है और तीसरे चरण के विकास के लिए 600 एकड़ जमीन मारुति सुजूकी को दे दी गई है। जबकि दूसरे और चौथे चरण पर भी काम चल रहा है। मानेसर में हीरो होंडा समेत कई प्रमुख कंपनियों की इकाइयां हैं और नई कंपनियां भी यहां आ रही हैं।मानेसर में रिहायशी प्रॉपर्टी की मांग भी बढ़ रही है। रियल एस्टेट के जानकारों का मानना है कि आने वाले 5 साल में इस इलाके में 5 लाख फ्लैटों की मांग पैदा होगी। पिछले 6 महीने में ही यहां प्रॉपर्टी की कीमतों में तकरीबन 15 फीसदी की तेजी आई है। प्रॉपर्टी कंसल्टेंट इन्वेस्टर्स क्लीनिक के निदेशक विवके सावनी ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया, 'पिछले साल अगस्त में मानेसर में प्रॉपर्टी की कीमत प्रति वर्ग फुट 2,200 रुपये थी जो अब बढ़कर 2,500 रुपये पर पहुंच गई है। यहां विकसित हो रही परियोजनाओं को ग्राहकों से अच्छी प्रतिक्रिया मिल रही है और बुकिंग हो रही है।'उन्होंने बताया, 'जो लोग गुडग़ांव में महंगी दर पर प्रॉपर्टी नहीं ले सकते वे मानेसर का रुख कर रहे हैं। गुडग़ांव से सिर्फ 20 किलोमीटर की दूरी होने से लोगों को बहुत ज्यादा फर्क नहीं पड़ रहा है। ग्रामीण इलाके से शहरों में आ रहे लोग भी मानेसर को प्राथमिकता दे रहे हैं।'मानेसर के विकास का लाभ दारुहेड़ा और राजस्थान के सटे इलाकों को मिल रहा है। इन इलाकों में कई नामी कंपनियां अपनी रिहायशी परियोजनाएं विकसित कर रही हैं। कोटकासिम में ग्लोबल ईको सिटी विकसित कर रही कंपनी फाल्कन रियल्टी सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड के मुख्य कार्याधिकारी भीम यादव ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया, 'एनसीआर से सटे नए प्रॉपर्टी बाजारों में 20 लाख रुपये तक की प्रॉपर्टी के लिए काफी संभावनाएं हैं। इसलिए यहां ऐसी परियोजनाओं में खरीदारों की कमी नहीं है।' उन्होंने अपनी कंपनी का उदाहरण देते हुए बताया कि हमारे यहां 13 लाख रुपये से फ्लैट की कीमत शुरू हो रही है और अच्छी बुकिंग को देखते हुए हमने अगले तीन महीने में 80 फीसदी बुकिंग का लक्ष्य रखा है। (BS Hindi)

ऑरबिटल रेल कॉरिडोर की चपेट में नहीं आएंगे गांव

आने वाले समय में कुंडली-मानेसर-पलवल और ईस्टर्न पेरीफेरल एक्सप्रेस वे के चारों ओर बिछाई जाने वाली ऑरबिटल रेल कॉरिडोर की चपेट में एक भी गांव नहीं आएगा। सोनीपत के तीन गांव इसकी हद में आ जाने से प्लॉनिंग विभाग गंभीर है। अब यह लाइन अंदर के घेरे में न होकर बाहर के घेरे में बिछाने की योजना है। मुख्यालय से मिले निर्देश के बाद इस रेलवे लाइन को लेकर दोबारा से सर्वे शुरू कर दिया है। एनसीआर प्लॉनिंग बोर्ड की ओर से एनसीआर के उद्यमी व कारोबारियों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से प्लॉन 2021 के तहत एक्सप्रेस वे बनाने की योजना बनाई। इसके तहत कुंडली-मानेसर-पलवल और ईस्टर्न पेरीफेरल बायां पलवल-छांयसा व उत्तर प्रदेश की सीमा से गुजरने वाला एक्सप्रेस वे बनाया जाना है। केएमपी एक्सप्रेस वे बनकर लगभग तैयार है तथा ईस्टर्न पेरीफेरल बनाने की कवायद चल रही है। उस समय एक्सप्रेस वे के साथ-साथ अंदर की ओर से ऑरबिटल रेल दौड़ाने की योजना बनाई गई थी। इसे लेकर ड्राइंग भी तैयार कर ली गई थीं। इसमें सोनीपत जिले के तीन गांव रेलवे लाइन की हद में आए हुए थे। पिछले दिनों प्लॉनिंग विभाग के अधिकारियों की चंडीगढ़ में एक मीटिंग हुई। इस दौरान इन गांवों को बचाने की कवायद शुरू करते हुए रेलवे लाइन को बाहरी दिशा में किए जाने का मसौदा तैयार किया गया। इसे लेकर सभी संबंधित जिलों के योजनाकारों को निर्देश दिए गएं कि वे इस रेलवे लाइन को लेकर दोबारा से सर्वे करें। इसे लेकर सभी जिलों में लाइन को लेकर सर्वे का काम शुरू हो गया है। फरीदाबाद में ईस्टर्न पेरीफेरल एक्सप्रेस वे को लेकर किए गए सर्वे में अभी तक दो गांवों के नाम सामने आ रहे हैं, जो रेलवे लाइन की दिशा बदलने उसकी चपेट में आ सकते हैं। फरीदाबाद में मोहना व छांयसा के समीप से यह लाइन गुजरेगी। डीटीपी संजीव मान का कहना है कि वे इस तरह का रास्ता तलाशने में लगे हुए हैं ताकि किसी प्रकार का कोई नुकसान न हो। किसी भी गांव में नुकसान नहीं होने दिया जाएगा।------------------------ इस रूट पर दौड़ेगी रेलकुंडली-मानेसर-पलवल एक्सप्रेस वे एनएच-1 से कुंडली के समीप मिलेगा। एनएच-10 झज्जर के समीप, एनएच-8 सोहना-मानेसर के बीच तथा एनएच-2 पलवल के समीप कुसलीपुर में जुड़ेगा। जहां ईस्टन पेरीफेरल एक्सप्रेस वे ग्रेटर नोएडा-गाजियाबाद-बागपत से होकर सोनीपत में मिलाया जाएगा। इस एक्सप्रेस वे के बनने से मेरठ, बागपत, गाजियाबाद और ग्रेटर नोएडा की दूरी काफी कम हो जाएगी। हरिद्वार समेत उत्तर प्रदेश के विभिन्न स्थानों की ओर जाने वालों को पलवल से दिल्ली जाने की जरूरत नहीं। वे सीधे ईस्टर्न पेरीफेरल एक्सप्रेस वे गाजियाबाद में प्रवेश कर सकेंगे। इन दोनों एक्सप्रेस वे के दोनों ओर यह रेल दौड़ेगी। -------------------ईस्टर्न पेरीफेरल एक्सप्रेस वे की कुछ खास बातेंकुल गांव, जिनकी जमीन अधिग्रहण की गई : 24कुल जमीन : 875 एकड़पलवल के गांव : 15फरीदाबाद के गांव : 9फरीदाबाद के गांवों की जमीन : 433 एकड़एक्सप्रेस वे की लंबाई (फरीदाबाद सीमा में) : 35 किलोमीटर----------------------------- केएमपी का ब्यौरा- लंबाई- 135 किलोमीटर- कुल लागत- 1050 करोड़- पिछली डेडलाइन : दिसंबर 2009- नई डेडलाइन : मार्च 2011- 4 रेलवे ओवरब्रिज- 38 बड़े और छोटे पुल- 9 मल्टी स्पैन अंडर पास - 7 ओवर पास जो राज्य की सड़कों से ऊपर आएंगे- 27 अंडरपास जो एक्सप्रेस वे से गांवों को जाएंगे- 33 अंडरपास- खेती के लिए काम आने वाले वाहनों के लिए- 31 अंडर पास पशु मार्ग के लिए- 61 मार्ग पैदल जाने वालों के लिए- 2 ट्रक पार्किग स्थल एक्सप्रेस वे पर बनेंगे थीम शहरएजुकेशन सिटी : कुंडली-सोनीपत आईटी सिटी : बादली-जहांगीरपुर: जैव प्रोद्योगिकी पार्क : सांपलाफैशन सिटी : गुड़गांव सोहना के निकटलॉ यूनिवर्सिटी : आईएमटी मानेसरफेयर सिटी : पलवलग्लोबल कॉरीडोर : दिल्ली-हरियाणा------------------ इन गांवों से होकर गुजरेगा ईस्टर्न एक्सप्रेस वे-यमुना के किनारे शाहजहांपुर, जहां बनाया जाएगा यमुना का पुल। इसके अलावा साहुपुरा खादर, फज्जूपुर खादर, अरूआ, मोठूका, अटाली, छांयसा, मौजाबाद, जलाहाका,डाढ़ौता, गोपीखेड़ा, कुरारा सहापुर, अलावलपुर, सुजवाड़ी, पेलक, खेड़ला, अकबरपुर, छज्जुनगर, हुसंगाबाद, अटोंहा व खुशरूपुर होता हुए कुंडली-मानेसर एक्सप्रेस वे से जोड़ा जाएगा।-यमुना पुल से गौतमबुद्ध नगर में प्रवेश (Hindustan Hindi)

केएमपी व केजीपी के साथ बिछेगी रेलवे लाइन

फरीदाबाद, जागरण संवाद केंद्र : शहर की दो बहुप्रतीक्षित योजनाएं- केएमपी (कुंडली-मानेसर-पलवल) और ईस्टर्न पेरीफेरल एक्सप्रेस-वे के साथ रेलवे लाइन भी बिछाई जाएगी। इस रेलवे कॉरीडोर के तैयार होने के बाद लोगों की यात्रा और सुगम हो जाएगी। इन दोनों एक्सप्रेस-वे के अंतर्गत आने वाले राज्यों के जिला नगर योजनाकार विभाग को आदेश दिए गए हैं कि जल्द से जल्द एक्सप्रेस-वे के साथ पड़ी जमीन का सर्वे किया जाए जिससे यह पता लग सके कि इसके अंतर्गत या आसपास कितने निर्माण आ रहे हैं। फरीदाबाद के जिला नगर योजनाकार विभाग इसका सर्वे और रिपोर्ट तैयार करने में जुट गया है। कुंडली-मानेसर-पलवल और ईस्टर्न एक्सप्रेस-वे (कुंडली-गाजियाबाद -पलवल) फरीदाबाद को सीधे नोएडा से गाजियाबाद और गुड़गांव से होते हुए मानेसर तक जोड़ेगी। ये दोनों एक्सप्रेस-वे छह लेन के बनाए जाने हैं। एनएचएआई और एचएसआईआईडीसी का प्रस्ताव है कि इन दोनों एक्सप्रेस-वे के साथ रेलवे कॉरीडोर भी तैयार किया जाए जिससे यातायात और अधिक सुगम हो सके। फिलहाल जिला नगर योजनाकार विभाग एक्सप्रेस-वे के आसपास की जमीन का सर्वे करेगा। सर्वे में यह देखा जाएगा कि यहां कितनी जमीन है और कितने निर्माण हैं। सर्वे की रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेज दी जाएगी। फिर रेलवे लाइन के लिए भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया शुरू की जाएगी। क्या है केएमपी व केजीपी केएमपी व केजीपी योजना दिल्ली एनसीआर के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। कुंडली-मानेसर-पलवल को जोड़ने वाले इस 135 किलोमीटर लंबे एक्सप्रेस-वे के आसपास साइबर सिटी, मनोरंजन सिटी, एजुकेशन सिटी, मेडिकल सिटी आदि जैसी वाणिज्यक गतिविधियां शुरू होंगी। यह एक्सप्रेस-वे सोनीपत के कुंडली से लेकर मानेसर, गुड़गांव, फरीदाबाद होता हुआ पलवल पर खत्म होगा। इसके अंतर्गत एनएच-1, एनएच-10, एनएच-8 व एनएच-57 पर चार फ्लाईओवर बनाने की योजना है। दूसरी ओर कुंडली गाजियाबाद पलवल (केजीपी) एक्सप्रेस-वे भी करीब 135 किलोमीटर लंबा एक्सप्रेस-वे है। करीब साढ़े तीन हजार करोड़ रुपये की लागत से तैयार होने वाला यह एक्सप्रेस-वे एनएच-1 कुंडली (सोनीपत) से यमुना पार करने के बाद माविकलन, शरफाबाद के पास हिंडन नदी से एनएच-58 के दुहाई से होता हुआ डासना के पास एनएच-24 पर मिलेगा। यहां से यह एक्सप्रेस-वे एनएच-59 पर बीलकबरपुर केपास से होता हुआ कासना-सिकंदराबाद रोड से यमुना के ऊपर से होता हुआ फज्जुपुर खादर, अटाली छांयसा (मौजपुर के पास) एनएच- 2 पर पलवल पहुंचेगा। इसके अलावा इस एक्सप्रेस वे पर तीन रिवर ब्रिज बनाए जाएंगे। इनमें से दो ब्रिज यमुना नदी के ऊपर और एक ब्रिज हिंडन नदी के ऊपर से होते हुए बनेंगे। (Jagran)

रिंग रेलवे ट्रैक का प्लान बदला

फरीदाबाद केएमपी (कुंडली-मानेसर-पलवल) एक्सप्रेस-वे और ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस- वे के साथ बनाई जाने वाली रेलवे लाइन के प्लान में बदलाव किया जा रहा है। पहले यह रेलवे ट्रैक इन सड़कों के अंदर की तरफ बनाया जा रहा था। सोनीपत में तीन गांव लाइन के रास्ते में आ रहे थे। इस समस्या को लेकर चंडीगढ़ में हुई मीटिंग के दौरान लाइन को रोड के बाहर की तरफ बनाने की योजना तैयार की गई है। इसके लिए प्रदेश भर में सर्वे कराया जा रहा है। फरीदाबाद में इस लाइन के लिए सर्वे का जिम्मा डीटीपी संजीव मान को सौंपा गया है। यह है योजना केएमपी और ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे बड़ी योजना है। इसमें केएमपी का काम लगभग 2 साल पहले शुरू कर दिया गया। ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे के लिए टेंडर भरने की प्रक्रिया पूरी हो गई है। जल्द ही इसका निर्माण शुरू होने की उम्मीद की जा रही है। लोगों को सहूलियत देने के लिए इसके साथ एक रेलवे लाइन बिछाने की भी योजना सरकार ने बनाई है। इस ट्रैक की लंबाई लगभग 250 किलोमीटर है। इन दोनों रोड के नक्शे में इस रेलवे ट्रैक का जिक्र किया गया है जिसके लिए रोड के दोनों तरफ लगभग 100 मीटर जमीन खाली रखी गई है। इस ट्रैक पर केवल सरक्यूलर शटल चलेंगी। ये शटल केवल इसी ट्रैक पर चलेंगी और दूसरे रूटों से इनका कोई संबंध नहीं होगा। इस योजना से लोगों की यात्रा सुगम हो जाएगी और करोड़ों लोगों को इसका लाभ मिलेगा। इस ट्रैक को व्यापारिक गतिविधियों के लिए ज्यादा यूज किया जाएगा। बदलाव पहले यह लाइन इन मुख्य सड़कों के अंदर की तरफ बिछाई जानी थी। इसके लिए सर्वे पूरा हो चुका है। सर्वे के दौरान पाया गया कि सोनीपत में तीन गांव इस ट्रैक के रास्ते में आ रहे थे जो रोड के निर्माण में बाधा बन रहे थे। इसके लिए हाल ही में संबंधित अधिकारियों की एक मीटिंग चंडीगढ़ में बुलाई गई और रेलवे ट्रैक के प्लान को चंेज किया गया। अब यह ट्रैक केएमपी और ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस वे के बाहर की तरफ बनाया जाएगा। इसके लिए प्रदेश भर में सर्वे कराया जा रहा है। फरीदाबाद में सर्वे का जिम्मा डीटीपी संजीव मान को सौंपा गया है। क्या कहते हैं डीटीपी डीटीपी संजीव मान का कहना है कि इस रेलवे ट्रैक के रास्ते में सोनीपत में बड़खालसा गांव के साथ अन्य दो गांवों का इलाका रस्ते में आ रहा था। इसलिए इसका प्लान चेंज किया गया है। अब पूरे प्रदेश में इसका सर्वे किया जा रहा है। संभावना है कि फरीदाबाद के गांव मोहना छायंसा और पलवल के गांव छज्जुनगर का इलाका इस रेलवे लाइन के काफी करीब आ सकता है। अभी इसका सर्वे पूरा करने के बाद योजना पर काम शुरू किया जाएगा। सर्वे के दौरान देखा जाएगा कि यह रेलवे ट्रैक कहीं इन दोनों एक्सप्रेस वे के ऊपर से तो नहीं गुजर रहा। ईस्टर्न एक्सपे्रस - वे सोनीपत से लेकर फरीदाबाद तक बनने वाली ईस्टर्न एक्सप्रेस - वे योजना के लिए करीब 2500 करोड़ रुपये का बजट तैयार किया गया है। इस योजना की भूमि अधिगृहण की प्रक्रिया लगभग 80 प्रतिशत पूरी हो चुकी है। एक्सप्रेस - वे एनएच -1 कुंडली ( सोनीपत ) से यमुना पार करने के बाद माविकलन , शरफाबाद के पास हिंडन नदी से एनएच -58 के दुहाई होता हुआ दासना के पास एनएच -24 पर मिलेगा। 135 किलोमीटर लंबा यह एक्सप्रेस - वे एनएच -59 पर बीलकबरपुर केपास से होता हुआ कासना - सिकंद्राबाद रोड ( सिरसा के निकट ) से यमुना क्रॉस करता हुआ फज्जुपुर खादर , अटाली छांयसा ( मौजपुर के पास ) एनएच -2 पर पलवल पहुंचेगा। इस एक्सप्रेस - वे पर 3 रिवर ब्रिज बनाए जाएंगे जिनमें से दो यमुना नदी के ऊपर और एक हिंडन नदी के ऊपर बनेगा। इनके अलावा 43 ब्रिज व 59 अंडरपास बनाए जाने की योजना है। केएमपी केएमपी को कुंडली - मानेसर - पलवल एक्सप्रेस - वे ( वेस्टर एक्सप्रेस वे ) कहा जाता है। इस एक्सप्रेस - वे की लंबाई 135 किलोमीटर है। इसकी अनुमानित लागत लगभग 2925 करोड़ रुपये है। यह एक्सप्रेस - वे सिक्स लेन बनाया जा रहा है। यह सात जिलों के पास से गुजरेगा। इनमें सोनीपत , झज्जर , रोहतक , गुड़गांव , मेवात , फरीदाबाद व पलवल शामिल हैं। इस एक्सप्रेस - वे को एचएसआईआईडीसी बना रही है। यह कुंडली के एनएच -1 से शुरू होकर पलवल में एनएच -2 पर आकर मिलेगा। इसके दोनों तरफ दो - दो किलोमीटर तक सरकार ने कंट्रोल क्षेत्र घोषित किया हुआ है। एक्सप्रेस - वे के दोनों तरफ दो - दो किलोमीटर तक बेहतर गतिविधियांे को लेकर अब अंतिम रूप दिया जा रहा है। (Blog)

केएमपी : मानेसर से पलवल अगले महीने!

पलवल बहुप्रतीक्षित कुंडली-मानेसर पलवल एक्सप्रेस-वे के तैयार होने का इंतजार कर रहे लोगों के लिए अच्छी खबर है। भले ही पूरा एक्सप्रेस-वे न सही, इसका एक हिस्सा अगले महीने से शुरू हो सकता है। एनएचएआई अधिकारियों के अनुसार पूरे प्रयास हैं कि मानेसर से पलवल के बीच वनवे ट्रैफिक अगले महीने से दौड़ने लगे। इससे न केवल गुड़गांव बल्कि फरीदाबाद में भी वाहनों के दबाव में कमी आएगी। जिन वाहनों को पलवल, मथुरा, आगरा या इससे आगे जाना है, वह सीधे मानेसर से पलवल पहुंच सकेंगे। इसके शुरू होने से एनएच-8 व एनएच-2 कनेक्ट हो जाएंगे, जिससे इन दोनों पर वाहनों का दबाव घटेगा। एनएचएआई के प्रोजेक्ट डायरेक्टर अरुण जग्गा ने बताया कि कुंडली से पलवल की दूरी 135 किलोमीटर है। मानेसर से पलवल की दूरी 53 किलोमीटर है। पलवल और मानेसर से कुछ आगे तक 55 किलोमीटर का केएमपी का हिस्सा पूरा हो चुका है। जो थोड़ा बहुत काम रह गया है, उसे तेजी से पूरा किया जा रहा है। इसे देखते हुए कोशिश की जा रही है कि अप्रैल में मानेसर से पलवल वन-वे ट्रैफिक शुरू कर दिया जाए। किन्हें होगा ज्यादा फायदा जिन लोगों को पलवल, मथुरा, आगरा या इससे आगे जाना होता है, उन्हें केएमपी के इस हिस्से के शुरू होने का फायदा मिलेगा। इन्हें अब गुड़गांव और फरीदाबाद के अंदर आने की जरूरत नहीं होगी। सीधे केएमपी के जरिए यह गाडि़यां पलवल पहुंच जाएंगी, जिससे न केवल गुड़गांव में एनएच-8 बल्कि फरीदाबाद में एनएच-2 पर गाडि़यों की संख्या कम हो जाएगी। अरुण जग्गा के अनुसार इस रूट पर मार्च में ट्रैफिक स्टार्ट किया जाना था, लेकिन निर्माण पूरा न होने के कारण इसे अप्रैल तक टाला गया। प्रॉजेक्ट एक नजर 135 किलोमीटर लंबे केएमपी एक्सप्रेस-वे का निर्माण तेजी से किया जा रहा है। कंस्ट्रक्शन कंपनी ने इसे अगस्त तक कंप्लीट करने का टारगेट रखा है। कुंडली से मानेसर तक लगभग 82 किलोमीटर की दूरी में 30 फ्लाईओवर और 100 छोटी पुलिया बनाई गई हैं, जिनमें 4 रेलवे ओवरब्रिज शामिल हैं। मानेसर से पलवल के बीच 15 फ्लाईओवर और 75 छोटी पुलिया हंै। अधिकारियों के अनुसार फिलहाल इस एक्सप्रेस-वे को चार लेन का बनाया जा रहा है। एक्सप्रेस-वे के दोनों साइड इतनी जगह छोड़ी जा रही है कि भविष्य में 6 लेन की जरूरत हो तो आराम से इसे 6 लेन का किया जा सके। (Navbharat Times)

रोटरी से बढ़ी लागत

सोनीपतकुंडली मानेसर पलवल एक्सप्रेस वे पर अब २० साल की बजाय 23 से 25 साल तक टोल टैक्स देना पड़ेगा। जीरो किलोमीटर पर बनाई गई रोटरी से निर्माण कंपनी की लागत बढ़ गई है। कंपनी लागत सरकार से मांग कर रही है। ऐसे में सरकार के पास टोल अवधि बढ़ाने के अलावा कोई चारा ही नहीं होगा। इसके लिए डीएस कंपनी कंस्ट्रक्शन कंपनी पांच साल अतिरिक्त टोल अवधि की मांग कर रही है।दिल्ली से मानेसर होते हुए पलवल जाने वाले १३५ किलोमीटर लंबे कुंडली मानेसर पलवल (केएमपी) का निर्माण कार्य पिछले पांच वर्ष से चल रहा है, लेकिन अभी तक काम पूरा नहीं हो सका है। केएमपी का निर्माण कर रही डीएस कंस्ट्रक्शन केएमपी बनाने की बजाय निर्माण लागत बढऩे का रोना रो रही है। जीरो किलोमीटर पर बनाई जा रही रोटरी को लेकर निर्माण कंपनी पशोपेश में है। कंपनी अधिकारियों का कहना है कि इस पर सौ करोड़ से भी अधिक की लागत आएगी। साथ ही अभी तक इसकी ड्राइंग भी फाइनल नहीं है। यह लागत और भी बढ़ सकती है। साथ ही अन्य निर्माण भी हुए हैं, जो कांट्रेक्ट समय प्रस्तावित नहीं थे। निर्माण कंपनी ने सरकार से मांग की है कि उन्हें बढ़ी कीमत दी जाए या फिर पांच वर्ष की अवधि के लिए टोल अधिक वसूलने की इजाजत दी जाए। (Dainik Bhaskar)