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26 मार्च 2025

सीमा शुल्क अधिसूचना के बाद नेपाल से खाद्य तेल आयात में कमी आने का अनुमान - एसईए

नई दिल्ली। उद्योग को उम्मीद है कि सीमा शुल्क विभाग द्वारा 18 मार्च को जारी अधिसूचना, जिसमें निर्यातकों/आयातकों को रियायती शुल्क के तहत आयातित वस्तुओं के लिए "मूल प्रमाण पत्र" के बजाय "मूल प्रमाण" प्रदान करने के लिए कहा गया है, इससे  नेपाल के साथ ही अन्य सार्क देशों से खाद्य तेल के बढ़ते आयात को कम करने में मदद मिलेगी।


सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एसईए) के अध्यक्ष संजीव अस्थाना ने एसईए सदस्यों को लिखे अपने मासिक पत्र में कहा है कि नेपाल से भारत में रिफाइंड सोया तेल और पाम तेल की भारी आवक, उत्पत्ति के नियमों का उल्लंघन करते हुए, घरेलू रिफाइनर और तिलहन किसानों को गंभीर रूप से प्रभावित कर रही है, जिससे सरकार को राजस्व का बड़ा नुकसान हो रहा है। नेपाल से साफ्टा (दक्षिण एशियाई मुक्त व्यापार क्षेत्र) समझौते के तहत शून्य शुल्क पर खाद्य तेल का आयात न केवल उत्तरी और पूर्वी भारत में तबाही मचा रहा है, बल्कि अब दक्षिण और मध्य भारत में भी फैल रहा है।

उन्होंने लिखा है कि जो कुछ पहले ये आंशिक रूप से शुरू हुआ था, लेकिन अब खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। इससे इन क्षेत्रों में खाद्वय तेल रिफाइनरी उद्योग के अस्तित्व को खतरा पैदा हो रहा है साथ ही बाजार भी प्रभावित हो रहा है। इसके साथ ही खाद्य तेलों पर उच्च आयात शुल्क का उद्देश्य भी नहीं रह गया है।

उन्होंने लिखा है कि एसईए ने प्रधानमंत्री और अन्य प्रमुख मंत्रियों से नेपाल और अन्य सार्क देशों से खाद्य तेलों के आयात को विनियमित करने के लिए हस्तक्षेप करने और आवश्यक कार्रवाई करने का आग्रह किया है। जिस पर केंद्रीय वाणिज्य मंत्रालय ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है और कार्रवाई का आश्वासन दिया है।

सीमा शुल्क विभाग ने 18 मार्च 2025 को अधिसूचना संख्या 14/2025-सीमा शुल्क जारी की है, जिसके तहत निर्यातकों/आयातकों को रियायती शुल्क के तहत आयातित वस्तुओं के लिए 'मूल प्रमाण पत्र' के बजाय 'मूल प्रमाण' प्रदान करने की आवश्यकता है। इस कदम से निर्यातकों/आयातकों पर सटीक जानकारी प्रदान करने का दबाव पड़ने की उम्मीद है, जिससे साफ्टा के तहत नेपाल और अन्य सार्क देशों से खाद्य तेलों का प्रवाह कम हो जाएगा।


नेपाल से भारत में रिफाइंड सोयाबीन तेल और पाम तेल की भारी आमद, उत्पत्ति के नियमों का उल्लंघन करते हुए, घरेलू रिफाइनर और तिलहन किसानों को गंभीर रूप से प्रभावित कर रही है, जिससे सरकार को राजस्व का बड़ा नुकसान हो रहा है। नेपाल से SAFTA समझौते के तहत शून्य शुल्क पर खाद्य तेल का आयात न केवल उत्तरी और पूर्वी भारत में तबाही मचा रहा है, बल्कि अब दक्षिण और मध्य भारत में भी फैल रहा है।

अस्थाना ने कहा कि तिलहन आयात पर भारत की निर्भरता कम करने में सरसों महत्वपूर्ण फसल हैं। खाद्य तेलों में आत्मनिर्भरता हासिल करने और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा बताए गए ‘आत्मनिर्भर भारत’ के विजन को साकार करने के लिए विस्तार सेवाओं को मजबूत करना और सर्वोत्तम खेती प्रथाओं पर किसानों को जागरूक करना आवश्यक है।

उपज बढ़ाने के लिए एसईए के सतत सरसों मॉडल फार्म (एमएमएफ) का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि 2020-21 में शुरू की गई यह पहल किसानों को उन्नत कृषि पद्धतियों से लैस करने में सहायक रही है, जिससे उत्पादकता और लचीलापन बढ़ा है।

भारत का सरसों उत्पादन 2020-21 में 86 लाख टन से बढ़कर 2023-24 में 116 लाख का हो गया है। खेती का रकबा भी सालाना बढ़ा है, जो 2020-21 में 67 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 2023-24 में लगभग 94 लाख हेक्टेयर हो गया।

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