नई दिल्ली। एल नीनो के प्रभाव और एक साथ कई मौसम प्रणालियों (वेदर सिस्टम) के सक्रिय न होने से मानसून की रफ्तार शुरुआत में ही धीमी पड़ गई है और यह कई राज्यों में अटका हुआ है। इसका असर चालू फसल सीजन में गन्ने की फसल पर पड़ने की आशंका है, जिससे चीनी उत्पादन में कमी आने का डर है।
भारतीय मौसम विभाग, आईएमडी के अनुसार देश में दक्षिण-पश्चिमी मानसून की शुरुआत कमजोर रही है, जिसके कारण जून में अब तक देशभर में सामान्य से करीब 35 से 40 फीसदी तक बारिश की कमी दर्ज की गई है। अत: जून महीने में मानसून की धीमी प्रगति और सामान्य से कम बारिश देश के चीनी उद्योग के लिए चिंता का कारण बन सकती है। जानकारों के अनुसार आने वाले दिनों में मानसून की स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो देश के चीनी उत्पादन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्यों महाराष्ट्र और कर्नाटक ऐसे राज्य हैं जो कमजोर मानसून और एल नीनो जैसी परिस्थितियों में सबसे अधिक प्रभावित होने का डर है, क्योंकि इन राज्यों में गन्ने की खेती काफी हद तक मानसूनी बारिश पर निर्भर करती है। हालांकि उत्तर भारत के प्रमुख चीनी उत्पादक राज्य उत्तर प्रदेश में नहर सिंचाई व्यवस्था के कारण अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति में है, लेकिन लगातार कम बारिश होने का कुछ असर यहां भी देखने को मिल सकता है। गन्ने की फसल के लिए मानसून के चार प्रमुख महीनों जून, जुलाई, अगस्त और सितंबर में पर्याप्त पानी उपलब्ध होना बेहद जरूरी है, खासकर के महाराष्ट्र और कर्नाटक में अच्छी बारिश गन्ना उत्पादन के लिए अहम भूमिका निभाती है।
स्काईमेट वेदर सर्विसेज के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मानसून ने पश्चिमी तट पर शुरुआती बढ़त के बाद 8 जून से लगभग ठहराव की स्थिति बना ली है। इससे प्रमुख कृषि क्षेत्रों में बारिश को लेकर चिंता बढ़ गई है। देशभर में वर्षा की कमी का स्तर पहले ही 32 फीसदी तक पहुंच चुका है और यदि मौसम की स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो अगले सप्ताह यह घाटा 40 फीसदी तक बढ़ सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश, राजस्थान, बिहार और झारखंड उन राज्यों में शामिल है जहां कम बारिश का जोखिम सबसे अधिक है। हालांकि, जुलाई और अगस्त के महीनों में मानसून की सक्रियता बढ़ने की उम्मीद है, जिससे स्थिति में सुधार संभव है।
कृषि मंत्रालय के अनुसार 12 जून तक देशभर में गन्ने की बुआई 54.08 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 54.29 लाख हेक्टेयर की तुलना में कम है।
गन्ना पेराई सीजन (अक्टूबर-25 से सितंबर-26) में अप्रैल अंत तक देशभर के राज्यों में चीनी का उत्पादन 275.28 लाख टन का हुआ था, जबकि पिछले पेराई सीजन की समान अवधि में इसका उत्पादन 256.49 लाख टन का हुआ था।

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