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18 जून 2026

विश्व बाजार में दाम तेज होने से गुजरात के साथ ही उत्तर भारत में कॉटन महंगी

नई दिल्ली। विश्व बाजार में कॉटन की कीमतों में आई तेजी से घरेलू बाजार में स्पिनिंग मिलों की मांग बढ़ गई है जिससे बुधवार को गुजरात के साथ ही उत्तर भारत के राज्यों में कॉटन की कीमतों में लगातार दूसरे दिन तेजी दर्ज की गई।


आईसीई कॉटन वायदा मंगलवार को तेज होकर बंद हुआ था, क्योंकि अमेरिका के कपास उत्पादक क्षेत्रों में खराब मौसम ने नई खरीदारी को बढ़ावा दिया। अमेरिकी डॉलर के नरम होने से भी सेंटीमेंट को सपोर्ट मिला।

गुजरात के अहमदाबाद में 29 शंकर-6 किस्म की कॉटन के भाव 750 रुपये तेज होकर 62,200 से 62,600 रुपये प्रति कैंडी, एक कैंडी-356 किलो हो गए।

पंजाब में रुई हाजिर डिलीवरी के भाव तेज होकर 6,170 से 6,325 रुपये प्रति मन बोले गए।हरियाणा में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के भाव तेज होकर 5,970 से 6,000 रुपये प्रति मन बोले गए। ऊपरी राजस्थान में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के दाम बढ़कर 6,000 से 6,325 रुपये प्रति मन बोले गए। लोअर राजस्थान में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के दाम 57,000 से 58,000 रुपये कैंडी बोले गए।

घरेलू वायदा कारोबार में कॉटन की कीमतों में तेजी का रुख रहा। एनसीडीईएक्स पर अप्रैल 27 महीने के वायदा अनुबंध में कपास के दाम 4 रुपये तेज होकर 1,739 रुपये प्रति 20 किलो हो गए। इस दौरान आईसीई के इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग में कॉटन की कीमतों में तेजी का रुख रहा।

सीसीआई ने बुधवार को भी ई-ऑक्शन के तहत कॉटन की बिक्री कीमत स्थिर रखी तथा इस दौरान निगम 1,85,300 गांठ की बिक्री की। सीसीआई से स्पिनिंग मिलों ने 55,000 गांठ एवं ट्रेडर्स ने 1,30,300 गांठ कॉटन की खरीद की।

प्रमुख उत्पादक राज्यों में कपास की कीमत स्थिर से तेज हो गई। जानकारों के अनुसार उत्पादक मंडियों में कपास की आवक सीमित मात्रा में ही हो रही है।

विश्व बाजार में कॉटन के दाम तेज होने से इसके आयात पड़ते महंगे हुए हैं, इसलिए स्पिनिंग मिलों की मांग बढ़ने से गुजरात के साथ ही उत्तर भारत के राज्यों में कॉटन के दाम लगातार दूसरे दिन तेज हुए। व्यापारियों के अनुसार प्रमुख कपास उत्पादक राज्यों में मध्य जून तक बारिश सामान्य की तुलना में काफी कम हुई है, जिसका असर इसकी बुआई पर पड़ने की आशंका है। अत: स्पिनिंग मिलों के साथ ही ट्रेडर्स की खरीद सीसीआई से पहले की तुलना में बढ़ गई है। वैसे भी प्राइवेट जिनिंग मिलों के पास अच्छी क्वालिटी की कॉटन का बकाया स्टॉक कम है। अत: अच्छी क्वालिटी कपास की खरीद के लिए मिलों को सीसीआई एवं एमएनसी कंपनियों से करनी पड़ रही है। नई फसल आने में अभी कई महीने का समय है तथा एल नीनो के कारण चालू सीजन में मानसूनी बारिश सामान्य से काफी कम होने की आशंका है।

हालांकि केंद्र सरकार ने घरेलू टेक्सटाइल उद्योग के लिए कच्चे माल की उपलब्धता को बेहतर बनाने के लिए 1 जून, 2026 से आगामी पांच महीनों के लिए कॉटन आयात पर से सभी कस्टम ड्यूटी समाप्त की हुई है, जिस कारण इसके आयात में बढ़ोतरी होने का अनुमान है। घरेलू बाजार में  सीसीआई के पास अभी बकाया स्टॉक अभी भी अच्छी मात्रा में बचा हुआ है। इसलिए हाजिर बाजार में कॉटन की कीमतों में तेजी, मंदी सीसीआई के बिक्री दाम पर भी निर्भर करेगी।

आईएमडी के अनुसार 1-16 जून तक बारिश सामान्य की तुलना में 35 फीसदी कम हुई है। एक से 16 जून तक सबसे ज्यादा कम बारिश वाले राज्यों गुजरात में बारिश सामान्य की तुलना में 82 फीसदी कम और महाराष्ट्र में 75 फीसदी कम हुई है।

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