नई दिल्ली। महाराष्ट्र सरकार ने वर्ष 2025-26 के गन्ना पेराई चीनी सीजन के दौरान किसानों के बकाया उचित एवं लाभकारी मूल्य (एफआरपी) भुगतान को लेकर 81 चीनी मिलों को नोटिस जारी किए हैं। वहीं 232.79 करोड़ रुपये के बकाया भुगतान की वसूली के लिए सात चीनी मिलों के खिलाफ राजस्व वसूली प्रमाणपत्र (आरआरसी) के तहत कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
महाराष्ट्र विधान परिषद में सहकार मंत्री बाबासाहेब पाटिल ने सदस्य अरुण लाड द्वारा पूछे गए प्रश्न के उत्तर में यह जानकारी दी। प्रश्न में राज्य के चीनी उद्योग की वित्तीय स्थिति और सरकार द्वारा किए जा रहे उपायों की जानकारी मांगी गई थी।
सहकार मंत्री ने बताया कि जिन चीनी मिलों ने गन्ना किसानों को समय पर भुगतान नहीं किया है उनके खिलाफ कार्रवाई की गई है। राज्य की 81 चीनी मिलों को नोटिस जारी किए गए हैं, जबकि सात इकाइयों के खिलाफ बकाया राशि की वसूली के लिए आरआरसी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। हालांकि सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य में कुल एफआरपी भुगतान की स्थिति संतोषजनक है।
मंत्री के अनुसार चालू पेराई चीनी सीजन के लिए 98.33 फीसदी एफआरपी राशि का भुगतान किसानों को किया जा चुका है। विधान परिषद में हुई चर्चा के दौरान महाराष्ट्र के चीनी उद्योग पर बढ़ते वित्तीय दबाव का मुद्दा भी सामने आया। सहकारी चीनी मिलों ने उद्योग में नकदी संकट और संचालन संबंधी चुनौतियों से निपटने के लिए राज्य सरकार से सहायता की मांग की है।
सरकार के अनुसार चीनी मिलों ने प्रति टन 500 रुपये की वित्तीय सहायता देने की मांग की है, ताकि उद्योग पर बढ़ रहे आर्थिक दबाव को कम किया जा सके। उद्योग की दीर्घकालिक स्थिरता को लेकर उठी चिंताओं के जवाब में सहकार मंत्री पाटिल ने बताया कि राज्य सरकार ने यह मामला केंद्र सरकार के समक्ष भी उठाया है। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में नई दिल्ली में केंद्रीय गृह एवं सहकार मंत्री के साथ बैठक आयोजित की गई थी, जिसमें सहकारी चीनी मिलों के समक्ष मौजूद समस्याओं को विस्तार से रखा गया।
महाराष्ट्र सरकार ने केंद्र से चीनी के न्यूनतम बिक्री मूल्य (एमएसपी) में वृद्धि, बकाया एफआरपी भुगतान के लिए सॉफ्ट लोन योजना शुरू करने तथा चीनी मिलों के लिए एथेनॉल की कीमत और कोटा बढ़ाने जैसे कदमों पर विचार करने का आग्रह किया है।
राज्य सरकार के अनुसार किसानों के हितों की रक्षा और चीनी उद्योग की वित्तीय स्थिति को मजबूत बनाने के लिए केंद्र के साथ लगातार चर्चा जारी है। राज्य सरकार का उद्देश्य किसानों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के साथ-साथ उद्योग को दीर्घकालिक रूप से मजबूत और टिकाऊ बनाना है। यह घटनाक्रम दर्शाता है कि महाराष्ट्र में चीनी मिलों द्वारा एफआरपी भुगतान अनुपालन पर सरकार की निगरानी और सख्ती बढ़ रही है, वहीं उद्योग को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए व्यापक स्तर पर प्रयास भी किए जा रहे हैं।

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