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26 जून 2026

सीसीआई चालू सीजन की खरीदी हुई 74 फीसदी से कॉटन की कर चुकी है बिक्री

नई दिल्ली। कॉटन कारपोरेशन आफ इंडिया, सीसीआई ने चालू फसल सीजन 2025-26 की खरीदी हुई लगभग 78,61,800 कॉटन गांठ, एक गांठ 170 किलो की बिक्री अभी तक की हैं तथा निगम के पास के अब 26.85 लाख गांठ बची हुई है। अत: निगम कुल खरीदी हुई 74.5 फीसदी कॉटन की बिक्री कर चुकी है। अभी तक हुई कुल बिक्री में से स्पिनिंग मिलों ने जहां 32,71,500 गांठ की खरीद की वहीं ट्रेडर्स ने इस दौरान 45,89,800 गांठ की खरीद की।


अभी तक हुई बिक्री में सबसे ज्यादा महाराष्ट्र में 26,67,900 गांठ के अलावा गुजरात में 13,66,700 गांठ तथा तेलंगाना में 16,68,700 गांठ तथा मध्य प्रदेश में 5,48,700 गांठ की बिक्री की है। इसके अलावा राजस्थान में निगम 3,20,200 गांठ, हरियाणा में कर्नाटक में 6,25,600 गांठ के अलावा ओडिशा में 2,64,500 गांठ तथा 1,69,400 गांठ कॉटन बेच चुकी है। इस दौरान सीसीआई ने आंध्र प्रदेश में 1,80,500 गांठ तथा पंजाब में 44 हजार गांठ की बिक्री की है।

सूत्रों के अनुसार बचे कुल स्टॉक में सबसे ज्यादा तेलंगाना में 14,78,800 गांठ तथा गुजरात में 6,18,100 गांठ के अलावा आंध्र प्रदेश में 2,18,500 गांठ का स्टॉक बचा हुआ है।

चालू सप्ताह में 15 से 19 अप्रैल के दौरान सीसीआई ने घरेलू बाजार में 7,78,500 गांठ, एक गांठ 170 किलो कॉटन की बिक्री की। निगम ने कॉटन के बिक्री भाव चालू सप्ताह में 800 रुपये प्रति कैंडी तक बढ़ाए। सीसीआई ने जून महीने में कुल 8,29,300 गांठ कॉटन की बिक्री की।

गुजरात के अहमदाबाद में 29 शंकर-6 किस्म की कॉटन के भाव शनिवार को 100 रुपये तेज होकर 63,400 से 63,700 रुपये प्रति कैंडी, एक कैंडी-356 किलो हो गए।

पंजाब में रुई हाजिर डिलीवरी के भाव 6,250 से 6,400 रुपये प्रति मन बोले गए। हरियाणा में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के भाव 6,070 से 6,100 रुपये प्रति मन बोले गए। ऊपरी राजस्थान में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के दाम 6,100 से 6,400 रुपये प्रति मन बोले गए। लोअर राजस्थान में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के दाम 58,000 से 59,000 रुपये कैंडी बोले गए।

प्रमुख उत्पादक राज्यों में कपास की कीमत स्थिर से तेज हो गई। जानकारों के अनुसार उत्पादक मंडियों में कपास की आवक सीमित मात्रा में ही हो रही है।

स्पिनिंग मिलों की मांग बढ़ने से गुजरात में कॉटन के दाम लगातार तेज हुए, जबकि उत्तर भारत के राज्यों में स्थिर हो गए। व्यापारियों के अनुसार प्रमुख कपास उत्पादक राज्यों में मध्य जून तक बारिश सामान्य की तुलना में काफी कम हुई है, जिसका असर इसकी बुआई पर पड़ने की आशंका है। अत: स्पिनिंग मिलों के साथ ही ट्रेडर्स की खरीद सीसीआई से पहले की तुलना में बढ़ गई है। वैसे भी प्राइवेट जिनिंग मिलों के पास अच्छी क्वालिटी की कॉटन का बकाया स्टॉक कम है। अत: अच्छी क्वालिटी कपास की खरीद के लिए मिलों को सीसीआई एवं एमएनसी कंपनियों से करनी पड़ रही है। नई फसल आने में अभी कई महीने का समय है तथा एल नीनो के कारण चालू सीजन में मानसूनी बारिश सामान्य से काफी कम होने की आशंका है।

हालांकि केंद्र सरकार ने घरेलू टेक्सटाइल उद्योग के लिए कच्चे माल की उपलब्धता को बेहतर बनाने के लिए 1 जून, 2026 से आगामी पांच महीनों के लिए कॉटन आयात पर से सभी कस्टम ड्यूटी समाप्त की हुई है, जिस कारण इसके आयात में बढ़ोतरी होने का अनुमान है। घरेलू बाजार में  सीसीआई के पास अभी बकाया स्टॉक अभी भी अच्छी मात्रा में बचा हुआ है। इसलिए हाजिर बाजार में कॉटन की कीमतों में तेजी, मंदी सीसीआई के बिक्री दाम पर भी निर्भर करेगी।

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