नई दिल्ली। फरवरी में देश से कैस्टर तेल का निर्यात 23.48 फीसदी घटकर 44,448 टन का ही हुआ है, जबकि पिछले साल फरवरी में इसका निर्यात 58,092 टन का हुआ था।
सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया, एसईए के अनुसार मूल्य के हिसाब से फरवरी में कैस्टर तेल का निर्यात 606.80 करोड़ रुपये का ही हुआ है, जो कि पिछले साल फरवरी के 790.01 करोड़ रुपये की तुलना में कम है।
एसईए के अनुसार चालू वर्ष 2026 के पहले दो महीनों जनवरी से फरवरी के दौरान कैस्टर तेल का निर्यात 87,686 टन का ही हुआ है, जबकि पिछले वर्ष 2025 की समान अवधि के दौरान इसका निर्यात 111,018 टन का हुआ था। मूल्य के हिसाब से चालू वर्ष 2026 के जनवरी से फरवरी के दौरान कैस्टर तेल का निर्यात 1,212,45 करोड़ रुपये का ही हुआ है जबकि वर्ष 2025 की समान अवधि के दौरान मूल्य के हिसाब से कैस्टर तेल का निर्यात 1,504.2 करोड़ रुपये का हुआ था।
गुजरात के राजकोट में शनिवार को कैस्टर सीड के भाव 6,300 से 6,500 रुपये प्रति क्विंटल हो गए। उत्पादक मंडियों में कैस्टर सीड की दैनिक आवक 1 से 1.10 लाख बोरी, एक बोरी 75 किलो की हो रही है। हजार बोरियों, एक बोरी 75 किलो की हुई। राजकोट में कैस्टर तेल एफएसजी के दाम 1,345 रुपये प्रति 10 किलो पर स्थिर हो गए।
व्यापारियों के अनुसार मार्च क्लोजिंग के कारण व्यापार कर कम हो रहा है। अगले महीने उत्पादक मंडियों में कैस्टर सीड की दैनिक आवकों में बढ़ोतरी होगी, जिससे मौजूदा कीमतों में 100 से 200 रुपये प्रति क्विंटल की गिरावट आ सकती है।
कृषि मंत्रालय के आरंभिक अनुमान के अनुसार फसल सीजन 2025-26 के दौरान कैस्टर सीड का उत्पादन 16.96 लाख टन का ही होने का अनुमान है, जबकि इसके पिछले फसल सीजन के दौरान 17.86 लाख टन का उत्पादन हुआ था।

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