नई दिल्ली। पहली अक्टूबर 2025 से शुरू हुए चालू पेराई सीजन (अक्टूबर-25 से सितंबर-26) के दौरान 15 मार्च तक देशभर में चीनी का उत्पादन 10 फीसदी बढ़कर 261.75 लाख टन का हो चुका है। पिछले साल की समान अवधि में इसका उत्पादन 237.15 लाख टन का हुआ था।
नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज लिमिटेड (एनएफसीएसएफ) के अनुसार गन्ने की अधिक उपलब्धता और बेहतर दक्षता के कारण चालू पेराई सीजन में चीनी का कुल उत्पादन और इसकी रिकवरी दर में भी सुधार हुआ है। हालांकि कई प्रमुख चीनी उत्पादक राज्यों में पेराई का कार्य अब समाप्ति की ओर है।
एनएफसीएसएफ के अनुसार पेराई सीजन 2025-26 के दौरान कुल 540 चीनी मिलें संचालित हुईं, जबकि 2024-25 में यह संख्या 533 थी। हालांकि मध्य मार्च तक केवल 173 चीनी मिलें ही चल रही हैं, जो कि पिछले साल इसी समय चल रही 200 चीनी मिलों की तुलना में काफी कम है।
प्रमुख उत्पादक राज्य महाराष्ट्र में मध्य मार्च तक चीनी उत्पादन बढ़कर 98.50 लाख टन का हो गया है, जबकि पेराई सीजन 2024-25 की समान अवधि में इसका उत्पादन केवल 78.60 लाख टन का ही हुआ था। राज्य में औसत रिकवरी की दर 9.50 फीसदी की दर्ज की गई है, जो कि पिछले सीजन के 9.45 फीसदी से थोड़ी अधिक है।
उत्तर प्रदेश में चालू पेराई सीजन में चीनी के उत्पादन में मामूली वृद्धि हुई है और यह 81.50 लाख टन तक पहुंच गया है, जबकि पिछले सीजन की समान अवधि में इसका उत्पादन 80.95 लाख टन का हुआ था। बेहतर रिकवरी के कारण चीनी के कुल उत्पादन में बढ़ोतरी हुई है। राज्य में औसत चीनी की रिकवरी 10.15 फीसदी की आई है, जो पिछले साल के 9.60 फीसदी से अधिक है।
कर्नाटक में चालू पेराई सीजन में मध्य मार्च तक चीनी का उत्पादन बढ़कर 45.80 लाख टन का हो गया है, जबकि 2024-25 पेराई सीजन की समान अवधि में इसका उत्पादन 39.10 लाख टन का ही हुआ था। यहां औसत रिकवरी की दर 8.65 फीसदी की दर्ज की गई है, जो कि पिछले साल के 8.50 फीसदी से अधिक है।
एनएफसीएसएफ की रिपोर्ट के अनुसार गन्ने का पेराई सत्र अब धीरे-धीरे समाप्ति की ओर बढ़ रहा है, खासकर पश्चिमी और दक्षिणी राज्यों में। हालांकि उत्तरी राज्यों में अभी भी पेराई कुछ समय तक जारी रहने की संभावना है।

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