कुल पेज दृश्य

21 मार्च 2026

महाराष्ट्र में 85 फीसदी चीनी मिलों में पेराई बंद, केवल 28 मिलें ही चल रही हैं

नई दिल्ली। पहली अक्टूबर 2025 से शुरू हुए चालू पेराई सीजन (अक्टूबर-25 से सितंबर-26) के दौरान 18 मार्च महाराष्ट्र की 85 फीसदी से अधिक मिलों ने गन्ने की कमी के कारण पेराई कार्य बंद कर दिया है तथा अब केवल 28 मिलों में ही पेराई चल रही है।


महाराष्ट्र के चीनी आयुक्त की रिपोर्ट के अनुसार बेमौसम बारिश से गन्ने की खेती पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है, जिससे चालू सीजन में गन्ने का उत्पादन और मिलों को आपूर्ति प्रभावित हुई है। 18 मार्च तक राज्य की मिलों ने केवल 837.31 लाख टन गन्ने की पेराई की, जबकि पिछले साल की समान अवधि में यह 1,029.98 लाख टन थी। इसी तरह से चालू पेराई सीजन में चीनी की रिकवरी दर भी घटकर 9.45 फीसदी की बैठी है, जो पिछले साल के 10.16 फीसदी से कम है।

चालू सीजन में कुल 202 चीनी मिलों में से 85 फीसदी से अधिक चीनी मिलों ने गन्ने की कमी के कारण पेराई कार्य बंद कर दिया है। इस समय केवल 28 मिलों में ही पेराई जारी है। राज्य की लगभग 172 चीनी मिलों ने गन्ने की पेराई पूरी कर ली है। इनमें सोलापुर की 45, कोल्हापुर की 40, पुणे की 24, नांदेड़ की 24, छत्रपति संभाजीनगर की 18, अहिल्यानगर की 20 और अमरावती क्षेत्र की 1 मिल शामिल है। पिछले सीजन में की समान अवधि में केवल 103 चीनी मिलों ने पेराई समाप्त की थी।

इस सीजन में गन्ने की कमी के कारण समय से पहले पेराई बंद होने और आने वाले खरीफ मौसम में सूखे जैसी स्थिति की आशंका के चलते महाराष्ट्र के चीनी उद्योग की समस्याएं और बढ़ सकती हैं। जानकारों के अनुसार यदि एल नीनो के कारण महाराष्ट्र में सूखा पड़ता है, तो फिर सरकार को गन्ने की खेती को हतोत्साहित करने का निर्णय लेना पड़ सकता है, क्योंकि यह अत्यधिक पानी की खपत वाली फसल है। इसके बजाय कृषि अनुसंधान विश्वविद्यालयों की मदद से किसानों को फसल विविधीकरण अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। सूखे की स्थिति में कम पानी वाली फसलें जैसे मोटे अनाज (मिलेट्स) और दालों पर जोर दिया जाएगा।

कोई टिप्पणी नहीं: