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06 जून 2020

कपास का निर्यात बढ़कर 47 लाख गांठ होने का अनुमान, उत्पादन में उद्योग ने की कटौती

आर एस राणा
नई दिल्ली। विश्व बाजार सबसे सस्ती कपास होने के कारण पहली अक्टूबर 2019 से शुरू हुए चालू सीजन में कपास का निर्यात आरंभिक अनुमान से पांच लाख गांठ बढ़कर 47 लाख गांठ (एक गांठ 170 किलोग्राम) होने का अनुमान है। उद्योग ने कपास के उत्पादन अनुमान में 21.50 लाख गांठ की कटौती कर 330 लाख गांठ के उत्पादन का अनुमान लगाया है।
कोरोना वायरस के कारण विश्वभर में आर्थिक गतिविधियां चरमराई हुई हैं, ऐसे समय में भारतीय कपास सबसे सस्ती होने के कारण निर्यात में बढ़ोतरी की उम्मीद है। कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीएआई) के अध्यक्ष अतुल गणत्रा के अनुसान डॉलर के मुकाबले रुपये में 8 से 10 फीसदी की कमजोर आई है, जिस कारण विश्व बाजार में भारतीय कपास सबसे सस्ती है। इसलिए चालू सीजन में कुल निर्यात बढ़कर 47 गांठ होने का अनुमान है जबकि पहले 42 लाख गांठ के निर्यात का अनुमान लगाया था। उन्होंने बताया कि पहली अक्टूबर 2019 से शुरू हुए चालू सीजन में अभी तक 32.50 लाख गांठ की शिपमेंट हो चुकी है जबकि मई और जून में भी क्रमश: पांच-पांच लाख गांठ का निर्यात होने का अनुमान है।
बंगलादेश, चीन और वियतनाम की आयात मांग अच्छी
सीएआई के अनुसार इस समय भारतीय कपास का बांग्लादेश सबसे बड़ा खरीदार है, उसके बाद चीन और वियतनाम है। मई में बांग्लादेश ने करीब दो लाख गांठ और चीन और वियतनाम ने क्रमश: एक-एक लाख गांठ कपास खरीदी है। सीएआई के अनुसार, चालू सीजन में कपास का उत्पादन 330 लाख गांठ का होने का अनुमान है जबकि पहले 354.50 लाख गांठ के उत्पादन का अनुमान लगाया गया था। उत्पादक मंडियों में 30 अप्रैल 2020 तक 285.09 लाख गांठ की आवक हो चुकी है।
कपास का आयात घटकर 15 लाख गांठ ही होने का अनुमान
सीएआई के अनुसार प्रमुख उत्पादक राज्य गुजरात में 85 लाख गांठ, महाराष्ट्र में 76.50 लाख गांठ, मध्य प्रदेश में 16 लाख गांठ, तेलंगाना में 51 लाख गांठ, आंध्रप्रदेश में 14 लाख गांठ, कर्नाटक में 18.50 लाख गांठ, तमिलनाडु में पांच और ओडिशा में चार लाख गांठ के उत्पादन का अनुमान है। उत्तर भारत के राज्यों पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में 59 लाख गांठ कपास के उत्पादन का अनुमान है। कपास का आयात चालू सीजन में 15 लाख गांठ होने का अनुमान है जोकि पिछले साल के 32 लाख गांठ से कम है।
विश्व बाजार में भारतीय कपास सबसे सस्ती
नार्थ इंडिया कॉटन एसोसिएशन आफ इंडिया के पूर्व अध्यक्ष राकेश राठी ने बताया कि अहमदाबाद में शंकर-6 किस्म की कपास का भाव 36,000 से 36,500 रुपये प्रति कैंडी (एक कैंडी 356 किलोग्राम) है जबकि विश्व बाजार में कीमतें उपर है। उन्होंने बताया कि रुपये के मुकाबले डॉलर की मजबूती से निर्यात पड़ते लग रहे है। हालांकि उन्होंने बताया कि घरेलू यार्न मिलों की मांग कमजोर है, जबकि उत्पादक राज्यों में कपास का बकाया स्टॉक ज्यादा है। इसलिए घरेलू बाजार में कपास की कीमतों में अभी ज्यादा तेजी की संभावना नहीं है। .... आर एस राणा

उड़द आयात की समय सीमा केंद्र सरकार ने घटाई, 31 अगस्त 2020 तक होगा करना आयात

आर एस राणा
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने चालू वित्त वर्ष 2020-21 के उड़द आयात की तय समय सीमा को छह महीने घटाकर 31 अगस्त 2020 कर दिया है। इस अवधि के दौरान चार लाख टन उड़द का आयात करना होगा, साथ ही पिछले वित्त वर्ष की 2.5 लाख टन उड़द भी बची हुई है, इसीलिए म्यांमार में आयातित उड़द की कीमतों में हल्की तेजी दर्ज की गई।
शुक्रवार को रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) के गवर्नर शक्तिकांता दास के दाल की बढ़ती कीमतों पर चिंता जताए जाने के तुरंत बाद केंद्र सरकार एक्शन में आ गई। उसी दिन दोपहर बाद केंद्रीय वाणिज्य मंत्रालय ने एक अहम फैसले के तहत चालू वित्त वर्ष के लिए जारी 4 लाख टन उड़द आयात कोटे की समय सीमा में कटौती कर दी। केंद्र सरकार ने चालू वित्त वर्ष के लिए जारी 4 लाख टन उड़द आयात के कोटे की डेडलाइन को 6 महीने घटा दिया है। वाणिज्य मंत्रालय की ओर से जारी अधिसचूना के अनुसार अब इस कोटे की उड़द का आयात हर हाल में 31 अगस्त 2020 तक या इससे पहले हो जाना चाहिए।
इस साल 17 मार्च को केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2020-21 के लिए 4 लाख टन उड़द आयात का कोटा जारी किया था। इस उड़द को 31 मार्च 2021 तक आयात करने की डेडलाइन दी गई थी। लेकिन सरकार ने अपने पुराने फैसले में संशोधन करते हुए इस कोटे की मियाद 6 महीने के लिए घटा दी है। इस समय पिछले वित्त वर्ष के लिए जारी अतिरिक्त कोटे की 2.5 लाख टन उड़द का आयात भी अभी तक पूरा नहीं हो पाया है। मिलों की मांग पर सरकार इसकी मियाद को 31 मई तक बढ़ा चुकी है।........ आर एस राणा

धान का समर्थन मूल्य 53 रुपये और अरहर का 200 रुपये बढ़ाने की सिफारिश

आर एस राणा
नई दिल्ली। खरीफ विपणन सीजन 2020-21 के लिए कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (सीएसीपी) ने धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 53 रुपये और खरीफ दलहन की प्रमुख फसल अरहर का 200 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ाने की सिफारिश की है। केंद्र सरकार आमतौर पर सीएसीपी की सिफारिशों पर ही मोहर लगा देती है।
कृषि मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार सीएसीपी ने खरीफ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में 2.1 से 12.7 फीसदी तक की बढ़ोतरी की सिफारिश की है। खरीफ की प्रमुख फसल धान का एमएसपी केवल 53 रुपये प्रति क्विंटल यानि 2.9 फीसदी बढ़ाकर कोमन वेरायटी का 1,868 रुपये और ग्रेड ए वेरायटी का 1,888 रुपये प्रति क्विंटल तय करने की सिफारिश की है। पिछले साल खरीफ में धान के एमएसपी में 3.7 फीसदी यानि 65 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी कर भाव कोमन वेरायटी का 1,815 रुपये और ग्रेड ए वेरायटी का 1,835 रुपये प्रति क्विंटल तय किया था।
उड़द के एमएसपी में 300 रुपये और मूंग में 146 रुपये की बढ़त संभव
खरीफ दलहन की प्रमुख फसल अरहर के एमएसपी में सीएसीपी ने 200 रुपये यानि 3.7 फीसदी की बढ़ोतरी कर भाव 6,000 रुपये, मूंग के एमएसपी में 146 रुपये, 2.1 फीसदी की बढ़ोतरी कर भाव 7,196 रुपये और उड़द के एमएसपी में 300 रुपये यानि 5.3 फीसदी की बढ़ोतरी कर भाव 6,000 रुपये प्रति क्विंटल तय करने की सिफारिश की है।
सोयाबीन और मूंगफली के एमएसपी में क्रमश: 170 और 185 रुपये की बढ़ोतरी संभव
खरीफ तिलहन की प्रमुख फसल सोयाबीन के एमएसपी में 170 रुपये की बढ़ोतरी कर भाव 3,880 रुपये और मूंगफली के एमएसपी में 185 रुपये की बढ़ोतरी कर भाव 5,275 रुपये, सनफ्लॉवर सीड के एमएसपी में 235 रुपये की बढ़ोतरी कर भाव 5,885 रुपये और शीशम सीड के समर्थन मूल्य में 370 रुपये की बढ़ोतरी कर भाव 6,855 रुपये तथा नाइजर सीड के समर्थन मूल्य में सबसे ज्यादा 755 रुपये की बढ़ोतरी कर भाव 6,695 रुपये प्रति क्विंटल तय करने की सिफारिश की है।
बाजरा मे समर्थन मूल्य में 150 रुपये और मक्का में 90 रुपये बढ़ाने की सिफारिश
मोटे अनाजों में बाजरा के समर्थन मूल्य में 150 रुपये की बढ़ोतरी कर 2,150 रुपये, मक्का के एमएसपी में 90 रुपये की बढ़ोतरी कर भाव 1,850 रुपये और रागी के समर्थन मूल्य में 145 रुपये की बढ़ोतरी कर भाव 3,295 रुपये तथा ज्वार के समर्थन मूल्य में 70 रुपये की बढ़ोतरी कर हाईब्रिड का एमएसपी 2,620 रुपये और मालदंडी ज्वार का 2,640 रुपये प्रति क्विंटल तय करने की सिफारिश की है।
कपास के एमएसपी में 260 से 275 रुपये बढ़ाने की सिफारिश
इसके अलावा मीडियम स्टेपल कपास के समर्थन मूल्य में 260 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी कर भाव 5,515 रुपये और लोंग स्टेपल कपास के एमएसपी में 275 रुपये की बढ़ोतरी कर भाव 5,825 रुपये प्रति क्विंटल तय करने की सिफारिश की है। पिछले साल कपास के समर्थन मूल्य में 105 और 100 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी कर भाव मीडियम स्टेपल का भाव 5,255 रुपये और लोंग स्टेपल का 5,550 रुपये प्रति क्विंटल तय किया था। यह अलग बात है कि इस समय कपास के भाव उत्पादक मंडियों में समर्थन मूल्य से नीचे बने हुए हैं।.... आर एस राणा

गेहूं की सरकारी खरीद 313 लाख टन के पार, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में खरीद की गति अभी भी धीमी

आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू रबी विपणन सीजन 2020-21 में 19 मई तक गेहूं की खरीद 313.27 लाख टन पर पहुंच गई है, जोकि तय लक्ष्य 407 लाख टन का 76.98 फीसदी है। पंजाब, मध्य प्रदेश और हरियाणा में खरीद जोरों पर है लेकिन सबसे बड़े उत्पादक राज्य उत्तर प्रदेश और राजस्थान में खरीद शुरू हुए महीनेभर से ज्यादा बीतने के बाद भी तेजी नहीं पकड़ पाई है।
केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री राम विलास पासवान ने बुधवार को एक ट्वीट के जरिए बताया कि रबी सीजन 2020-21 के लिए तय खरीद लक्ष्य के तहत किसानों से गेहूं और चावल की खरीद का काम जारी है। उन्होंने कहा कि भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) ने 19 मई तक 313.27 लाख टन गेहूं और 49.44 लाख टन चावल की खरीद कर ली है। सभी खरीद केंद्रों पर कोविड-19 संक्रमण से सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जा रहा है।
भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के अनुसार पंजाब और मध्य प्रदेश में गेहूं की खरीद तय लक्ष्य के करीब पहुंचने वाली है, जबकि हरियाणा में भी खरीद तय लक्ष्य के 72 फीसदी से ज्यादा हो चुकी है। उत्तर प्रदेश से गेहूं की खरीद 15 अप्रैल से शुरू हुई थी, जबकि 19 मई तक राज्य की मंडियों से समर्थन मूल्य पर तय लक्ष्य का 30.93 फीसदी गेहूं ही खरीदा गया है। राजस्थान से भी अभी तक गेहूं की खरीद तय लक्ष्य के 50 फीसदी तक भी नहीं पहुंची है।
उत्तर प्रदेश से राजस्थान से खरीद काफी कम
उत्तर प्रदेश के खाद्य एवं रसद विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार राज्य की मंडियों से अभी तक समर्थन मूल्य पर 17.01 लाख टन गेहूं की खरीद हो चुकी है। उन्होंने बताया कि राज्य के 3,39,519 किसानों से गेहूं खरीदा जा चुका है। राज्य से चालू रबी विपणन सीजन में गेहूं की खरीद का लक्ष्य 55 लाख टन का तय किया गया है जबकि पिछले रबी में 37 लाख टन गेहूं की खरीद ही हो पाई थी। चालू रबी में राज्य में 363 लाख टन गेहूं के उत्पादन का अनुमान है। एफसीआई के अनुसार राजस्थान से गेहूं की खरीद 8.38 लाख टन की ही हो पाई है जबकि खरीद का लक्ष्य 17 लाख टन का तय किया गया है।
कुल खरीद सबसे ज्यादा हिस्सेदारी पंजाब, मध्य प्रदेश और हरियाणा की
एफसीआई के अनुसार अभी तक हुई खरीद में पंजाब से सबसे ज्यादा 124.31 लाख टन, मध्य प्रदेश में करीब 94.54 लाख टन और हरियाणा में 68.42 लाख टन गेहूं की सरकारी खरीद हुई है। अन्य राज्यों में उत्तराखंड से 28,000 टन, चंडीगढ़ से 11,000 टन, गुजरात में 15,000 टन, हिमाचल प्रदेश में 3,000 टन और बिहार से भी 3,000 टन गेहूं की खरीद हुई है।
गेहूं की खरीद का लक्ष्य 407 लाख टन, रिकार्ड 10.71 करोड़ टन उत्पादन का अनुमान
केंद्र सरकार ने चालू रबी विपणन सीजन 2020-21 में न्यूनतम समर्थन मूल्य पर 407 लाख टन गेहूं की खरीद करने का लक्ष्य रखा है, जोकि पिछले साल के मुकाबले करीब 66 लाख टन अधिक है। पिछले साल समर्थन मूल्य पर 341.32 लाख टन गेहूं खरीदा गया था। पंजाब से इस साल 135 लाख टन, हरियाणा में 95 लाख टन, मध्य प्रदेश में 100 लाख टन, उत्तर प्रदेश में 55 लाख टन और राजस्थान में 17 लाख टन गेहूं की सरकारी खरीद का लक्ष्य रखा गया है। कृषि मंत्रालय के तीसरे आरंभिक अनुमान के अनुसार चालू रबी में गेहूं का रिकार्ड 10.71 करोड़ टन उत्पादन का अनुमान है जोकि पिछले साल के 10.36 करोड़ टन से अधिक है। चालू रबी में गेहूं का समर्थन मूल्य 1,925 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है, जबकि पिछले रबी सीजन में 1,840 रुपये प्रति क्विंटल की दर से गेहूं की खरीद हुई थी।............. आर एस राणा

अप्रैल में डीओसी के निर्यात में 60 फीसदी की भारी गिरावट आई

आर एस राणा
नई दिल्ली। विश्व बाजार में कीमतें कम होने के कारण अप्रैल में डीओसी के निर्यात में 60 फीसदी की भारी गिरावट आकर कुल निर्यात 1,02,001 टन का ही हुआ है जबकि पिछले साल अप्रैल में इनका निर्यात 2,54,585 टन का हुआ था।
साल्वेंट एक्सट्रेक्टर्स एसोसियेसन आफ इंडिया (एसईए) के अनुसार अप्रैल में सोया डीओसी के साथ ही सरसों और केस्टर डीओसी के निर्यात में पिछले साल की समान अवधि की तुलना में कमी आई है जबकि राइसब्रान डीओसी का निर्यात बढ़ा है। सोया डीओसी का निर्यात चालू वित्त वर्ष 2020-21 के अप्रैल में घटकर 25,940 टन का ही हुआ है जबकि पिछले साल अप्रैल में इसका निर्यात 40,829 टन का हुआ था। इसी तरह से सरसों डीओसी का निर्यात अप्रैल 2019 के 1,20,630 टन की तुलना में घटकर चालू वित्त वर्ष के अप्रैल में केवल 21,493 टन का ही हुआ है। केस्टर डीओसी का निर्यात अप्रैल में घटकर 15,387 टन का ही हुआ है जबकि पिछले साल अप्रैल में इसका निर्यात 66,285 टन का हुआ था। राइसब्रान डीओसी का निर्यात जरुर अप्रैल 2019 के 26,750 टन से बढ़कर चालू वित्त वर्ष के अप्रैल में 39,181 टन का हुआ है।
जनवरी के मुकाबले अप्रैल में सोया और सरसों डीओसी की कीमतों में आई गिरावट
एसईए के अनुसार विश्व बाजार में सोया और सरसों डीओसी की कीमतें नीचे बनी हुई हैं जबकि घरेलू बाजार में दाम उंचे हैं जिसका असर निर्यात पर पड़ा है। हालांकि जनवरी के मुकबाले अप्रैल में इनकी कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है। भारतीय बंदगाह पर सोया डीओसी का भाव अप्रैल 2020 में औसतन 441 डॉलर प्रति टन और सरसों डीओसी का 222 डॉलर प्रति टन रहा जबकि जनवरी 2020 में इनका भाव क्रमश: 485 और 234 डॉलर प्रति टन था। सोयाबीन के भाव इंदौर मंडी में 3,850 रुपये, सरसों के राजस्थान की मंडियों में 4,350 रुपये और केस्टर सीड के भाव गुजरात की मंडियों में 3,600 रुपये प्रति क्विंटल हैं।............  आर एस राणा

गेहूं खरीद 301 लाख टन के पार, उत्तर प्रदेश और राजस्थान की हिस्सेदारी 8 फीसदी से भी कम

आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू रबी विपणन सीजन 2020-21 में 17 मई तक गेहूं की खरीद 301.95 लाख टन पर पहुंच गई है, जोकि तय लक्ष्य 407 लाख टन का 74 फीसदी है। पंजाब, मध्य प्रदेश और हरियाणा को मिलाकर जहां 92.14 फीसदी गेहूं खरीदा गया है, वहीं सबसे बड़े उत्पादक राज्य उत्तर प्रदेश, राजस्थान तथा अन्य राज्यों की खरीद में हिस्सेदारी केवल 7.86 फीसदी की ही है।
भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के अनुसार अभी तक हुई गेहूं की कुल खरीद में पंजाब की हिस्सेदारी 40.75 फीसदी, मध्य प्रदेश की 29.38 फीसदी और हरियाणा की 22.03 फीसदी है जबकि उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी केवल 5.31 फीसदी और राजस्थान की 2.36 फीसदी ही है।
17 मई तक 301.95 लाख टन गेहूं और 44.85 लाख टन चावल हो चुकी है खरीद
केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री राम विलास पासवान ने सोमवार को एक ट्वीट के जरिए बताया कि रबी सीजन 2020-21 के लिए तय खरीद लक्ष्य के तहत किसानों से गेहूं और चावल की खरीद का काम जारी है। उन्होंने कहा कि भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) ने 17 मई तक 301.95 लाख टन गेहूं और 44.85 लाख टन चावल की खरीद कर ली है। सभी खरीद केंद्रों पर कोविड-19 संक्रमण से सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जा रहा है। पंजाब, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और राजस्थान से गेहूं की खरीद 15 अप्रैल से शुरू हुई थी जबकि हरियाणा से 20 अप्रैल से।
अभी तक हुई कुल खरीद, पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले कम
कोरोना वायरस संक्रमण को लेकर 25 मार्च से देश भर में संपूर्ण लॉकडाउन हो जाने से इस साल गेहूं की खरीद एक अप्रैल से आरंभ नहीं हो पाई थी। एफसीआई के अनुसार चालू रबी में अभी तक समर्थन मूल्य पर 301.95 लाख टन गेहूं खरीदा गया है जबकि पिछले रबी सीजन की समान अवधि में 314.19 लाख टन की खरीद हो चुकी थी। एफसीआई के अनुसार अभी तक हुई खरीद में पंजाब से सबसे ज्यादा 123.02 लाख टन, मध्यप्रदेश में करीब 88.70 लाख टन और हरियाणा में 66.49 लाख टन गेहूं की सरकारी खरीद हुई है जबकि उत्तर प्रदेश में 16.03 लाख टन और राजस्थान में 7.12 लाख टन गेहूं ही समर्थन मूल्य पर खरीदा गया है। अन्य राज्यों में उत्तराखंड से 26,409 टन, चंडीगढ़ से 10,955 टन, दिल्ली से 28 टन, गुजरात में 15,527 टन, हिमाचल प्रदेश में 2,614 टन और जम्मू-कश्मीर से 11 टन गेहूं की खरीद हुई है।
गेहूं की खरीद का लक्ष्य 407 लाख टन, रिकार्ड 10.71 करोड़ टन उत्पादन का अनुमान
केंद्र सरकार ने चालू रबी विपणन सीजन 2020-21 में न्यूनतम समर्थन मूल्य पर 407 लाख टन गेहूं की खरीद करने का लक्ष्य रखा है, जोकि पिछले साल के मुकाबले करीब 66 लाख टन अधिक है। पिछले साल समर्थन मूल्य पर 341.32 लाख टन गेहूं खरीदा गया था। पंजाब में इस साल 135 लाख टन, हरियाणा में 95 लाख टन, मध्य प्रदेश में 100 लाख टन, उत्तर प्रदेश में 55 लाख टन और राजस्थान में 17 लाख टन गेहूं की सरकारी खरीद का लक्ष्य रखा गया है। कृषि मंत्रालय के तीसरे आरंभिक अनुमान के अनुसार चालू रबी में गेहूं का रिकार्ड 10.71 करोड़ टन उत्पादन का अनुमान है जोकि पिछले साल के 10.36 करोड़ टन से अधिक है। चालू रबी में गेहूं का समर्थन मूल्य 1,925 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है, जबकि पिछले रबी सीजन में 1,840 रुपये प्रति क्विंटल की दर से गेहूं की खरीद हुई थी।.........  आर एस राणा

मई मध्य तक चीनी का उत्पादन 18.86 फीसदी घटा, यूपी की मिलों पर किसानों का बकाया 14,400 करोड़ के पार

आर एस राणा
नई दिल्ली। पहली अक्टूबर 2019 से शुरू हुए चालू पेराई सीजन 2019-20 के पहले साढ़े सात महीनों में चीनी के उत्पादन में 18.86 फीसदी की कमी आकर कुल 264.65 लाख टन का ही उत्पादन हुआ है। इस दौरान उत्तर प्रदेश की चीनी मिलों पर गन्ना किसानों का बकाया बढ़कर करीब 14,400 करोड़ रुपये को पार कर गया है।
इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (इस्मा) के अनुसार चालू पेराई सीजन में 63 चीनी मिलों में पेराई अभी भी चल रही है जबकि पिछले साल इस समय तक केवल 38 मिलों में ही पेराई चल रही थी। चालू पेराई सीजन में 15 मई तक चीनी का उत्पादन घटकर 264.65 लाख टन का ही हुआ है जबकि पिछले पेराई सीजन में 326.19 लाख टन का उत्पादन हो चुका था। उद्योग के अनुसार चालू पेराई सीजन में अभी तक करीब 42 लाख टन चीनी के निर्यात सौदे हुए हैं, जिनमें से 36 लाख टन की शिपमेंट भी हो चुकी है।
उत्तर प्रदेश में चीनी का उत्पादन ज्यादा, महाराष्ट्र में कम
इस्मा के अनुसार उत्तर प्रदेश में चालू पेराई सीजन में 15 मई तक चीनी का उत्पादन बढ़कर 122.88 लाख टन का हो चुका है जबकि पिछले पेराई सीजन की समान अवधि में राज्य में केवल 116.80 लाख टन चीनी का ही उत्पादन हुआ था। राज्य की 119 चीनी मिलों में से 73 में पेराई बंद हो चुकी है तथा इस समय 46 में ही पेराई चल रही है। महाराष्ट्र में चालू पेराई सीजन में अभी तक केवल 60.87 लाख टन चीनी का ही उत्पादन हुआ है जोकि पिछले पेराई सीजन की तुलना में 46.3 कम है। पिछले पेराई सीजन में इस समय तक 107.15 लाख टन चीनी का उत्पादन हो चुका था।
कर्नाटक, तमिलनाडु और गुजरात में भी घटा उत्पादन
कर्नाटक में चालू पेराई सीजन में 15 मई तक चीनी का उत्पादन घटकर 33.82 लाख टन का ही हुआ है जबकि पिछले पेराई सीजन की समान अवधि में राज्य में 43.25 लाख टन चीनी का उत्पादन हो चुका था। तमिलनाडु में चीनी का उत्पादन चालू पेराई सीजन में 5.65 लाख टन का ही हुआ है जोकि पिछले साल के 7.16 लाख टन से कम है। गुजरात में पिछले साल इस समय तक 11.21 लाख टन चीनी का उत्पादन हो चुका था, जबकि चालू पेराई सीजन में केवल 9.28 लाख टन का ही उत्पादन हुआ है।
अन्य राज्यों में चीनी का उत्पादन 32.75 लाख टन
अन्य राज्यों में आंध्रप्रदेश, तेलंगाना, बिहार, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और ओडिशा तथा राजस्थान को मिलाकर 15 मई तक 32.75 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ है। हरियाणा में इस समय पांच चीनी मिलों में और उत्तराखंड में एक मिल में पेराई जारी है। इस्मा के अनुसार विश्व बाजार में चीनी की कीमतों में आई नरमी से निर्यात सौदे प्रभावित हुए हैं, हालांकि रुपये के मुकाबले डॉलर की मजबूती से निर्यातकों को राहत मिली है। चालू पेराई सीजन में अभी तक करीब 42 लाख टन चीनी के निर्यात सौदे और 36 लाख टन की शिपमेंट हो चुकी है।.....   आर एस राणा